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मेरा एक दिन...
राजेन्द्र कुशवाह यह सच है कि लिखने के लिए कई विषय वस्तु हो सकते थे, लेकिन सोचा क्यों न अपने पूरे एक दिन की कहानी को अपने पाठकों तक पहुँचाया जाए... तो इसकी शुरुआत दिन की सुबह से करता हूँ... अल सुबह रोज की भाँति मेरे मोबाइल का अलार्म बजा मैंने नींद ...
डराना नहीं चाहता ये बात सही है कि 2008 बुरी खबरों, दर्दनाक हादसों से भरा रहा । हर रोज़ कहीं से कोई बुरा समाचार सुनाई दे ही देता... पर एक बात जो साल 2008 में खास रही वो ये कि 2008 पत्रकार और पत्रकारिता करने वालों के लिये बेहतर साल था ... राज्यों के चु
shan
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हमारे मोहल्ले का मेडिकल सेंटर, लगा है वहां एक बोर्ड, लिखा है जिस पर, यहाँ नहीं होता, गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण, नीचे कोने में लिखा है, कंडीशंस एप्लाई. लोग उसे पागल कहते हैं, कल उसका भाई पकड़ा गया, अपहरण और बलात्कार के अपराध में, वह गई जेल में उस स
Suresh Chandra Gupta
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इस लेख का शीर्षक पढ़कर पाठक कुछ आश्चर्य में पड़ सकते हैं, क्योंकि पत्र-पत्रिकाओं से लेकर टेलीविजन तक में जनसामान्य के लिए यही मशवरा दिया जाता है कि किसी को अपना डॉक्टर ख़ुद बनने का जोख़िम नहीं उठाना चाहिए। लोग बग़ैर किसी डॉक्टरी सलाह के अपनी छोटी-मोटी तकल
मित्रों,ब्लाग का नाम संवादघर रखते समय मन में यही विचार था कि विभिन्न मुद्वों पर घरेलू माहौल में एक सार्थक संवाद चलाया जाए जिसमें बिना किसी भेदभाव के हर कोई हिस्सेदारी कर सके। कई संवेदनशील विषयों में से एक नारी-मुक्ति भी था जिसपर बात करते हुए मैं, एक
sanjaygrover
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मेरे पास सिर्फ आज ही का दिन था अल्मोड़ा घूमने के लिये सो हमने बाजार वाली सड़क पकड़ी क्योंकि आधे से ज्यादा अल्मोड़ा तो इस बाजार में ही मिल जाता है जैसे - थाना बाजार, लाला बाजार, जौहरी बाजार.....। सबसे पहले हम थाना बाजार पहुंचे। दशहरा होने के कारण बाजार मे
विनीता यशस्वी
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पंजाब मे जन्मे राज कुमार कै़स बहुत अच्छे शायर हैं. इनका एक ग़ज़ल संग्रह "सहरा-सहरा" प्रकाशित हो चुका है. इनकी ग़ज़लों मे खास बात ये है कि ग़जलों मे एक दिलकश रवानगी है.इनका यही अंदाज़ इन्हें औरों से जुदा करता है. पेश है उनकी दो ग़ज़लें. ग़ज़ल: देख तेरे
बम्बई की आतंकवादी घटना के बाद से लगातार पाकिस्तान अभी तक मुकरता ही आ रहा था. अब जबकि सारे सबूत पेश कर दिये गये हैं (न केवल पाकिस्तान को, बल्कि उन तमाम देशों को भी, जिनसे भारत कार्यवाही में दबाब बनाने की अपेक्षा करता है ), पाकिस्तान के रुख पर निगाहें
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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८-१०-१९९२ इन शहरों में आकर हम ,दिल से कितने रीते हैं। याद आ रहे वो दिन हमको जो गाँवों में बीते हैं।।१।। कुदक फुदकती उड़न चिरैया,गदराए आमों की डाली शाखा पर बैठे तोता मैना अौ अमराई की हरियाली यहाँ बाहर से सब मधुर-मधुर है,भीतर से सब तीते हैं।याद।२। घलर
राम प्रकाश द्विवेदी
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चौं रे चम्पू! फसल कटाई-छंटाई के अबसर पै गाम में दस-पंद्रै कबीन कूं लै कै एक अखिल भारतीय कविसम्मेलन करायं तौ कित्ते पइसा लगिंगे? —चचा, भूल जाओ अखिल भारतीय। लाख-दो-लाख से कम में नहीं होते आजकल कविसम्मेलन। —अच्छा! इत्ते रुपइया! इत्ते की तो फसल ऊ न होयगी
इस समय सारी दुनिया का ध्यान गाजापट्टी पर केन्द्रित है जहां इजरायली सेना हमास के खिलाफ जमीनी और हवाई कार्रवाई में जुटी हुई है. लेकिन आश्चर्यजनक है कि गाजापट्टी से कई गुना अधिक अमानवीय कृत्य कर रही श्रीलंकाई सेना के खिलाफ भारत के तथाकथित मानवाधिकारवादी
दोस्तों , मेरी कविता " शहीद हूँ मैं " ...एक poem cum painting exhibition के लिए चुनी गई है . ये exhibition पूना में हो रही है . इसका शीर्षक है " शब्दयुद्ध --आतंक के विरुद्ध " . इस exhibition में; 26/11 के आतंकी हमले के विरुद्ध ; देश विदेश से प्रसिद्ध
आवाज़ की टीम गर्व के साथ पेश कर रही है एक बेहद प्रताभाशाली गायिका तरन्नुम मालिक जैसा कि हमारे नियमित श्रोता जानते हैं कि आवाज़ पर नए संगीत का दूसरा सत्र बीते माह " जो शजर " गीत के साथ खत्म हो गया. इस सत्र में हमने कुल २७ गीत उतारे जिन्हें श्रोताओं का भ
नियंत्रक । Admin
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सुनने में अटपटा लगता है परन्तु एक बार दिल में बात आ जाये तो पूछे बगैर नहीं रहना चाहिये.. सो सोचा आप सब से भी पूछ ही लूं. वसीयत लिखना कोई बच्चों का खेल नहीं... हां अगर गांठ में कुछ न हो तो और बात है. यदि मकान, दुकान और बेंक बैलेंस के अतिरिक्त आप एक या
मोहिन्दर कुमार
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ईंट बिलख उठी।पथेरा उम्र भर ईंटें ही पाथता रहा है। सांचे से पाथते हुए या अलाव मे पकाते हुए कभी सोचा तक नहीं था कि एक दिन यही ईंट उसके सामने यूं रो पड़ेगी। सवेरे सवेरे ,शिवाले की परिक्रमा करके,सिंह् पौर पर माथा टिका कर, फ़र्लांग भर चलकर, गंदा नाला पार
साहित्य-शिल्पी
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अपनी नज़्म पर पाठकों की प्रतिक्रियाओं को पढ़ते नाज़िम नक़वी के घर दूसरी दफ़ा गया था...सच कहूँ, उनके यहां जाने का मन ही नहीं करता....किराये के कमरे में रहने की ऐसी आदत है कि कोई भी घर जहाँ सब कुछ करीने से रखा हो, काटने को दौड़ता है....मगर जाना हमारी मज
नियंत्रक । Admin
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तीन खतरनाक संस्थाएँ राजकिशोर हर संकट कुछ न कुछ सिखाता है। यह सीखनेवाले पर निर्भर है कि वह क्या सीखता है। एक ही घटना से अलग-अलग सबक सीखा जा सकता है। वर्तमान आर्थिक संकट से अमेरिका ने यह सीखा है कि सरकारी पैसे उड़ेल कर संकटग्रस्त संस्थाओं को बचाओ। भारत
कविता वाचक्नवी
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हवाई विचार
मानसिक अपँग पर चाहिए छरहरी कपड़े तंग आधुनिक चिंतन हवाई मंथन माँ का दुलार बहन का प्यार पत्नी का साथ सब बकवास ........ तवायफ की अदा हवा में सदा मद भरी आँखे मस्त नज़ारे लम्बाई और वजन में सामंजस्य होना चाहिए तुम्हे छोड़ सब को गुलाब जामुन खाना चाहिए
व्यंग्य छात्रों के लिए प्रश्न पत्र नोट - पहला प्रश्न अनिवार्य है । सही उत्तरों को टिक मार्क करों। 1 बताओं तुम्हें कैसी लडकी पसंद नहीं है ? (a) सुन्दर ,पढी-लि्खी ,साहसी ,हाजिर जवाबी जो ईंट (ताने) का जवाब पत्थर से दे सके । (b) ऐसी सुन्दर , सुशील व चतुर
चार दिन के गईले, सुग्गा मोर बन के अइले| भोजपुरी कहावत कोई व्यक्ति जब चार दिन शहर में रह कर वापस गाँव जाए और चाल ढाल से ख़ुद को शहरी बताये तो उसके लिए यह कहावत कही जाती है| चार दिन शहर में रहकर सुग्गा (तोता) ख़ुद को मोर समझने लगा|
शाश्‍वत शेखर
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संगठन का नाम: भारतीय ग्रामोत्थान संस्था पता: ग्रामोत्थान भवन, अपर रोड, धालवाल, पोस्ट- मुनि की रेती कैलाश गेट, ऋषिकेश, टिहरी गढ़वाल राज्य: उत्तरांचल फोन: 0135-2433658 फैक्स: अनुपलब्ध मोबाइल: अनुपलब्ध ईमेल: अनुपलब्ध वेबसाइट: अनुपलब्ध सम्पर्क व्यक्ति: श
आलोक तोमर डेटलाइन इंडिया नई दिल्ली, 7 जनवरी- सबूतों की बात चल रही है। भारत सरकार ने सबूत दे दिए हैं। पाकिस्तान को वे सबूत नाकाफी लग रहे है। आखिर भारत ने कौन कौन से सबूत पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया के सामने पेश किए हैं? आप खुद एक नजर डाल लीजिए। सबसे पह
आज दिल को बहुत सुकून मिल रहा है। ऐसे लग रहा है कि जैसे बरसो से किसी के इंतजार में बैठे कसी नाउम्मीद को उम्मीद की एक किरण मिल गई हो। पिछले दो दिन ऐसे गुजरे जैसे किसी ने सजा-ए-कालापानी की सजा दे दी हो। ऐसी अनवरत सजा जिसका की पता नहीं कब खत्म होगी। पर श
दिल का दर्द
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यह दुनिया क्‍या है ? प्रकृति का एक बहुत बडा उपहार। प्रकृति यानी कि धरती और और उस पर पाए जाने वाले पेड पौधे तथा उससे जुडे जीव जन्‍तु। लेकिन क्‍या सिर्फ इतना ही ? अगर हम पेड पौधों की ही बात करें तो हजारों तरह के पेड़ पौधे हैं जो हमारे चारों ओर पाये जाते
Zakir Ali Rajnish (TSALIIM)
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