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पब्लिक तो बच्चा है जी!

आप उत्तर भारतीय हैं तो फ़क़त इसबात पर ख़ुश हो सकते हैं कि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी उनकी हिमायत में आ गए हैं। मराठी बनाम उत्तर भारतीयों के खूनी खेल में अबतक तमाशबीन बनी कांग्रेस ने चुप्पी तब टूटी जब शिवसेना के कागजी शेरों ने गांधी परिवार पर
 
संजीव
टैग: विचार
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'बंदर' बन गए 'क्रिकेट के खुदा'

आधिकारिक तौर पर दुनिया की नंबर एक टेस्ट टीम को साउथ अफ्रीकी क्रिकेट टीम ने उसकी सही जगह बता दी। भारत को पारी और 6 रन से बहुत ही करारी मात मिली है। मैं बड़े दिल से इस बात की उम्मीद कर रहा हूं कि कम से कम अब तो हमारे ये कागजी शेर जागेंगे। उन्हें इतनी अक्ल
 
राजेश कालरा
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बडा तरस आ रहा है पुलिसवालों पर।

बडा तरस आ रहा है पुलिसवालों पर। बीते गुरूवार मुंबई पुलिस के 59 वर्षीय कमिश्नर डी. शिवानंदन को राहुल गांधी के पीछे भागते देखा। उनके साथ ज्वाईंट कमिश्नर से लेकर कांस्टेबल तक कई पुलिसकर्मी इस प्रयास में जुटे थे कि शिवसैनिक राहुल के कार्यक्रम में अडचन डालने
 
Jitendra Dixit. Senior Editor, Star News.
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डैनी का गाया पहला गीत

डैनी डेनजोगप्पा को आपने फिल्मो में चरित्र भूमिकाओं में देखा होगा, शायद बहुत कम लोग जानते होगे कि डैनी गायक है खासकर पहाडी संगीत 1972 के आस-पास रिलीज हुई थी फिल्म - ये गुलिस्ताँ हमाराइसी फिल्म से डैनी ने बतौर गायक फिल्मो में प्रवेश किया था। आशा भोसले के
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भक्ति शक्ति युक्ति आगार...

कौनो घनघोर मजबूरी में घटाटोप भुच्च अनहरिया रात में सुनसान सड़क पर एकदम अकेले कहीं चलल जाय रहे हों,सन्नाटे का साँय साँय कान सुन्न कर रहा हो, झींगुर और टिटही अपना तान राग छेडले स्पेसल इफ्फेक्ट दे रहा हो और ऐसे में अचानक से सामने एक ऐसा जीव परकट हो जाय ,जो न
टैग: dharm
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अंबेडकर पार्क निर्माण पर रोक बरकरार रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने अंबेडकर पार्क मामले पर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी को इसके निर्माण पर रोक बरकरार रखने का फैसला सुनाया। हालांकि, कोर्ट ने पार्को में देख-रेख के काम की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने नोएडा पार्क मामले की सुनवाई को छोड़कर बाकी सभी मामले
 
लोकेश Lokesh
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चीनी कम

अमिताभ बच्चन और तब्बू की फिल्म थी 'चीनी कम'। मैने देखी नहीं। फिल्म देखने का शौक नहीं है सो नहीं देखी। उसकी कहानी भी पता नहीं। किंतु देश में चल रही सरकारी फिल्म 'चीनी कम' से जरूर दो चार हो रहा हूं। लगता है यह फिल्म ज्यादा लम्बी है। खत्म होने का नाम नहीं
 
अमिताभ श्रीवास्तव
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वैदिक गणितः चुटकियों में बड़ी-बड़ी गणनाएँ

भारत में कम ही लोग जानते हैं, पर विदेशों में लोग मानने लगे हैं कि वैदिक विधि से गणित के हिसाब लगाने में न केवल मजा आता है, उससे आत्मविश्वास मिलता है और स्मरणशक्ति भी बढ़ती है। जर्मनी में सबसे कम समय का एक नियमित टेलीविजन कार्यक्रम है विसन फोर अख्त। हिंदी
 
Satyajeetprakash
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कभी तन्हाईयों में यूं हमारी याद आएगी....मुबारक बेगम की दर्द भरी सदा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 340/2010/40 फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर की कमचर्चित पार्श्वगायिकाओं को सलाम करते हुए आज हम आ पहुँचे हैं इस ख़ास शृंखला की अंतिम कड़ी पर। अब तक हमने इस शृंखला में क्रम से सुलोचना कदम, उमा देवी, मीना कपूर, सुधा मल्होत्रा, जगजीत कौर,
 
सजीव सारथी
टैग: mubarak begum
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भाषा

भाषा जीवन के किसी भी मोड़ पर जब भी तुम रोये हो ऐसे बहुतों ने पोछे हैं तुम्हारे आंसू जिनकी भाषा को तुमने हमेशा ही समझा है बहुत झोटा करके, बिताई होंगी कितनी रातें उन्हीं छोटी भाषा वाले लोगों ने छटपटाते हुए सिर्फ देखने के लिए एक टुकड़ा सुख तुम्हारी
 
करण समस्तीपुरी
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kunwarji's

नुक्सान ठा  रहया सूँ मै तेरे तै ना कहवण का!फेर बेरया ना यो बखत रहवण का ना रहवण का!बोल कै बता दिया तो ख़तम कहाणी हो ज्यागी,इब तो तू अपणी सै फेर  चीज बीराणी हो ज्यागी, तू
 
kunwarji's
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कोलकाता को देखते हुए, बिकास भट्टाचार्य के काम को देखना एक अलग ही तरह का अनुभव रहा

कोलकाता पहुंचा तो जरूरी कामों की फेहरिस्त में बिकास भट्टाचार्य का काम देखना भी दर्ज था, जिसे मैं किसी भी हालत में पूरा कर लेना चाहता था | बिकास भट्टाचार्य का काम यूं तो मैंने दिल्ली में कई बार देखा है, लेकिन एक बार किसी ने कहा था कि कोलकाता में घूमते /
 
MUKESH MISHRA
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'दैनिक छत्तीसगढ' में 'प्रवक्‍ता डॉट कॉम'

9 फरवरी, 2010 को दैनिक छत्तीसगढ समाचार-पत्र के संपादकीय पृष्‍ठ पर 'प्रवक्‍ता डॉट काम' से साभार लेख प्रकाशित
 
संजीव कुमार सिन्हा
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सागर किनारे

सागर किनारे मैं जब भी आई हर लहर में दिखी तेरी ही छवि समायी लहरों के स्पर्श से तेरी ही याद आई हर जगह देता है तेरा ही अक्स दिखाई सीली सी रेत पर तेरे नक़्शे- पा दिखते हैं उन पर चल मेरे कदम तुझ तक पहुंचते हैं ख़्वाबों की दुनियाबड़ी हंसीं लगती है ख्याल जैसे मेरे
 
sangeeta swarup
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बयानबाजी बनी ताकत

मनोज राठौरझूठ किसी सही काम के लिए बोला जाए तो उसे माफी मिल जाती है। मगर भारत की बिड़वना है कि राजनीतिक दल अपने हित के लिए झूठ बोलते हैं। उन्हें न जनता से मतलब और न ही देश से। बयान से लोगों का दिल जीतने वाले नेता हमेशा छल करते हैं। धर्म, समाज, भाईचारा,
 
crimnal
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थोड़ी सी हल्दी थोडा सी मिर्चा....हमने कर दी चिट्टा चर्चा ...(यशवंत मेहता)...

ललित जी को लगी घर में फटकारले ली छुट्टी ब्लॉग्गिंग से उन्होंने इस बारअनुराधा जी ने किया ब्लॉगजगत में एक वर्ष पूरापहले दिजीये बधाई फिर पढिये चर्चा को पुराअवधिया जी गाना सुना रहे हैंऔर प्रेमिका-पैसे का सम्बन्ध बता रहे हैंकुलवंत हैप्पी जी का लाये किसे इस
 
यशवन्त मेहता "सन्नी"
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“हमने ली ब्लागिंग से छुट्टी!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-59 चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" आइए  आज कछ नये ढंग से "चर्चा मंच" को सजाते हैं। सबसे पहले चर्चा करते है कुछ अद्यतन ब्लॉग्स की पोस्टों की- मेरी कही सबकी सुनी अब अपनी कही कम चीनी खाओ राष्ट्रवादी
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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लो क सं घ र्ष !: सब ख़ता वालिद की है, बेटे को पैदा क्यों किया

ऑस्ट्रेलिया में नस्लवादयुवा वेश तो विदेशी आचार-विचार स्टाइल फैशन का क्रेजी होता ही है, हमारे बुजुर्ग जो कभी अंग्रेजी माहौल में पले बढ़े थे अब भी उसी पाश्चात्य संस्कृति के दीवाने नजर आते है, लेकिन हम आखिर कब तक उस खोखली संस्कृति के गुन गाते रहेंगे, हमारे
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लो क सं घ र्ष !: सब ख़ता वालिद की है, बेटे को पैदा क्यों किया

ऑस्ट्रेलिया में नस्लवादयुवा वेश तो विदेशी आचार-विचार स्टाइल फैशन का क्रेजी होता ही है, हमारे बुजुर्ग जो कभी अंग्रेजी माहौल में पले बढ़े थे अब भी उसी पाश्चात्य संस्कृति के दीवाने नजर आते है, लेकिन हम आखिर कब तक उस खोखली संस्कृति के गुन गाते रहेंगे, हमारे
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लो क सं घ र्ष !: सब ख़ता वालिद की है, बेटे को पैदा क्यों किया

ऑस्ट्रेलिया में नस्लवादयुवा वेश तो विदेशी आचार-विचार स्टाइल फैशन का क्रेजी होता ही है, हमारे बुजुर्ग जो कभी अंग्रेजी माहौल में पले बढ़े थे अब भी उसी पाश्चात्य संस्कृति के दीवाने नजर आते है, लेकिन हम आखिर कब तक उस खोखली संस्कृति के गुन गाते रहेंगे, हमारे
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CONVERT SCANNED IMAGES INTO SEARCHABLE TEXT स्कैन किये गए दस्तावेजों को टेक्स्ट में बदलें

स्कैन किये गए दस्तावेजों को टेक्स्ट में बदलें आसानी से बिना किसी सॉफ्टवेर के ऑनलाइन इस वेबसाइट के फायदे 1. दस्तावेजों को टेक्स्ट में बदलकर उसमे टेक्स्ट को सर्च किया जा सकता है 2. इसे एडिट किया जा सकता है 3. PDF , JPEG,TIFF फोर्मेट को Microsoft Word
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फिर भी वो कहते है की मै लाजबाब सा हूँ ,,,,

मै मगरूरियत में डूबी हुयी युवा पीढ़ी,,,,उसपे आधुनिक फैशन का दबाब सा हूँ,,,,फिर भी वो कहते है की मै लाजबाब सा हूँ ,,,,मै अनपढ़ी इबारत हूँ कुरआन की ,,,,,बरको में बँटी अधलिखी किताब सा हूँ ,,,फिर भी वो कहते है की मै लाजबाब सा हूँ ,,,,मै माथे पर पड़ी अधेड़
 
प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी)
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राजा में ईश्वर ?

राजा में ईश्वर ?जब हम बच्चे थेढूँढ़ा करते थे चाँदी के बालऊँट के पदचिह्नों मेंकुछ लोग कहते थे सौ के नोट में होता है सोने का तारउसे निकाल लो तो नोट की कोई क़ीमत नहींफिर नोट है बेकारमैं अब भी चाहता हूँ चाँदी के बाल ढूँढ़नाफाड़कर फैंक देना चाहता हूँ सौ का
 
प्रीतीश बारहठ
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अंतर्जाल पर दूसरे की लोकप्रियता का लाभ उठाने के प्रयास-हिन्दी लेख

तीन वर्ष से जारी हमारी निजी ‘चिट्ठाचर्चा’ में पहली बार दो ऐसे शब्दों से सामना हुआ जिनके अर्थ और भाव से हम आज तक परिचित नहीं थे। वह हैं ‘साइबर स्कवैटिंग’ और ‘टाइपो स्क्वैटिंग’। मुश्किल तो यही है कि भाई लोग अंग्रेजी हिज्जे नहीं लिखते जिससे उनका शुद्ध
 
दीपक भारतदीप
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कोपेनहेगन में मनुष्य का भविष्य दांव पर लगा था - अरुण माहेश्वरी

धरती की जलवायु पर कोपेनहेगन सम्मेलन (7–18 दिसंबर ’09) खत्म होगया। सम्मेलन के अंदर और बाहर, सभी जगह बेहिसाब उत्तेजना रही। उत्तेजना के मूल में यह चिंता थी कि इस पृथ्वी ग्रह को बचाने का आखिरी मौका है। अब न चेता गया तो पृथ्वी और उसपर मनुष्य मात्र के अस्तित्व
 
jagadishwar chaturvedi
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ठेठ जीवन के उच्छलित स्त्रोतों के समीप \शिरीष कुमार मौर्य की कविता पर पंकज चतुर्वेदी

शिरीष कुमार मौर्य ने बहुत धीरज, गम्भीरता, संयम और निष्ठा से ऐसी कविता सम्भव की है, जिसमें जीवन-द्रव्य की सान्द्रता है और आत्मतत्व की उदात्तता। यह इस बदौलत कि एक ओर उसमें इस दुनिया से गहरा और निबिड़ प्यार है, दूसरी ओर साधारण इंसान के दुखों से प्रतिबद्ध
 
Ek ziddi dhun
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वक्त सही है ,वक्त यही है , हर लात का जवाब तुझे लात से ही देंगे

नियत कर देंगे तेरी साफ जब मारेंगे हम तुझको लात हमने चलाई समझोता एक्स्परैस बदले में तुने मारी लात हमने तेरे खिलाडियों को खिलाया पैसो में तुने दिया हमें ताज ,ओबेराय जैसा घातसांप को दूध पिलाया हमने ,फिर भी अश्रु बहाए   हमने बहुत हुई अब तेरी
 
vikas mehta
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कविता : पान ने बनाया सबसे बड़ा "डान"

पान ने बनाया सबसे बड़ा " डान " एक था पान का पत्तादिखने में लगता जैसे लत्तासब इसको खाते कलकत्ते में, अधिक दबाते इसको मुंह में।पान सबका मुंह करता लाल, तब तक मेरे फोन में आई काल। हमने उठाया और बोला कौन ?,उसने बोला मै हूँ मुंबई का " डान"।फिर मैंने बोला अरे
 
BAL SAJAG
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खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (191) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि अब से इस खेल के दिन मंगलवार और शुक्रवार निर्धारित कर दिये गये हैं. समय शाम 4:44 PM. रहेगा. आईये अब खेल शुरु करते हैं.नीचे का
 
ताऊ रामपुरिया
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सिनेमा में भी एक प्रेम रहता है

सिनेमा में भी एक प्रेम ‘रहता‘ हैधीरेन्द्र अस्थानावैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की के साथ जिंदगी में दबे पांव दाखिल हुए ग्लोबलाइजेशन ने लाइफ स्टाइल के अलावा विचार और संवेदना को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। व्यापक जन समुदाय तक पहुंच रखने वाला विराट माध्यम
 
dhirendra asthana
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...तो भारत और तालिबान में क्या अंतर

समाज में एक तरफ सभी रिश्तों में कटूता का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। इससे प्रेम जैसा पवित्र रिश्ता भी अछूता नहीं रह गया है। वहीं किसी भी सभ्यता या संस्कृति का पर्व प्रेम करना सिखाये और उस पर समाज तथा धर्म के ठेकेदार विरोध कराने सड़क पर उतरे तो यह बताने के
 
EDHAR HAI
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अकेले नौकरशाह ज़िम्मेदार नहीं

मध्यप्रदेश में आईएएस दंपति के लॉकर सोने- चाँदी और हीरे जवाहरात उगल रहे हैं । उनके बंगले से मिली पाँच सौ और हज़ार के नोटों की गड्डियों को गिनने के लिये आयकर विभाग के अमले को पसीने आ गये । आलम ये रहा कि नोट गिनने वाली मशीन को भी अपना काम अंजाम देने में
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दिव्य प्रेम का अलग संसार है

प्रेम में हम सिर्फ अपने प्रियतम के बारे में सोचते हैं। इस अवस्था का वर्णन करते हुए कई लोग कहते हैं कि उन्हें भूख नहीं लगती, नींद नहीं आती। हर जगह उन्हें अपने प्रियतम का ही चेहरा दिखाई देता है। हर वस्तु उन्हें अपने प्रियतम की याद दिलाती है। अगर उन्हें वह
 
सुभाष चन्द्र
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बदल रही है फिजा

बंगलूरू में रहने वाली बयालीस साल की अमूधा की सकि्यता को देखकर कहीं से एेसा नहीं लगता कि वो पिछले नौ साल से एचआईवी पाजीटिव हैं। दस साल पहले पति के एचवाईवी पाजीटिव होने का पता चलने पर इन्होंने अपना टेस्ट कराया तो अमूधा को खुद के एचआईवी पाजीटिव होने का पता
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कुछ कह दो

कुछ भी पुराना नहीं कुछ भी अनजाना नहीं कुछ भी अनकहा नहींकुछ भी अनसुना नहीं फिर भी क्यूँ हैं हम अजनबी सेक्यूँ ओढ़ ली है हमनेख़ामोशी की चादरेंक्यूँ हमने अपनी-अपनी सरहदें बना ली हैंप्यार की बातें भी तो हमने ही की थीं एहसास की बातें हमने ही की थीं तो फिर
 
रश्मि प्रभा...