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वक्त सही है ,वक्त यही है , हर लात का जवाब तुझे लात से ही देंगे

नियत कर देंगे तेरी साफ जब मारेंगे हम तुझको लात हमने चलाई समझोता एक्स्परैस बदले में तुने मारी लात हमने तेरे खिलाडियों को खिलाया पैसो में तुने दिया हमें ताज ,ओबेराय जैसा घातसांप को दूध पिलाया हमने ,फिर भी अश्रु बहाए   हमने बहुत हुई अब तेरी
 
vikas mehta
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कविता : पान ने बनाया सबसे बड़ा "डान"

पान ने बनाया सबसे बड़ा " डान " एक था पान का पत्तादिखने में लगता जैसे लत्तासब इसको खाते कलकत्ते में, अधिक दबाते इसको मुंह में।पान सबका मुंह करता लाल, तब तक मेरे फोन में आई काल। हमने उठाया और बोला कौन ?,उसने बोला मै हूँ मुंबई का " डान"।फिर मैंने बोला अरे
 
BAL SAJAG
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डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट में 'तिश्निगी' तथा 'इंडियन सिटिज़न'

9 फरवरी 2010 को डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग राग' में तिश्निगी तथा इंडियन सिटिज़न की पोस्ट्स
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खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (191) : आयोजक उडनतश्तरी

बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि अब से इस खेल के दिन मंगलवार और शुक्रवार निर्धारित कर दिये गये हैं. समय शाम 4:44 PM. रहेगा. आईये अब खेल शुरु करते हैं.नीचे का
 
ताऊ रामपुरिया
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सिनेमा में भी एक प्रेम रहता है

सिनेमा में भी एक प्रेम ‘रहता‘ हैधीरेन्द्र अस्थानावैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की के साथ जिंदगी में दबे पांव दाखिल हुए ग्लोबलाइजेशन ने लाइफ स्टाइल के अलावा विचार और संवेदना को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। व्यापक जन समुदाय तक पहुंच रखने वाला विराट माध्यम
 
dhirendra asthana
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लोकसंघर्ष को सीधा उत्तर

अगर एक भी ब्यक्ति का खून न बहाने बाले बाला साहब ठाकरे को आदमखोर कहेंगे तो फिर सिंगूर में निर्दोश किसानों,मजदूरों,महिलाओं ,बच्चों का खून बहाने बालों को क्या कहेंगे । और उन लोगों को जिन्होंने माओबाद,नक्सलबाद के नाम पर अपनी राजनिती चमकाने के लिए लाखों
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...तो भारत और तालिबान में क्या अंतर

समाज में एक तरफ सभी रिश्तों में कटूता का साम्राज्य बढ़ता जा रहा है। इससे प्रेम जैसा पवित्र रिश्ता भी अछूता नहीं रह गया है। वहीं किसी भी सभ्यता या संस्कृति का पर्व प्रेम करना सिखाये और उस पर समाज तथा धर्म के ठेकेदार विरोध कराने सड़क पर उतरे तो यह बताने के
 
EDHAR HAI
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अकेले नौकरशाह ज़िम्मेदार नहीं

मध्यप्रदेश में आईएएस दंपति के लॉकर सोने- चाँदी और हीरे जवाहरात उगल रहे हैं । उनके बंगले से मिली पाँच सौ और हज़ार के नोटों की गड्डियों को गिनने के लिये आयकर विभाग के अमले को पसीने आ गये । आलम ये रहा कि नोट गिनने वाली मशीन को भी अपना काम अंजाम देने में
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दिव्य प्रेम का अलग संसार है

प्रेम में हम सिर्फ अपने प्रियतम के बारे में सोचते हैं। इस अवस्था का वर्णन करते हुए कई लोग कहते हैं कि उन्हें भूख नहीं लगती, नींद नहीं आती। हर जगह उन्हें अपने प्रियतम का ही चेहरा दिखाई देता है। हर वस्तु उन्हें अपने प्रियतम की याद दिलाती है। अगर उन्हें वह
 
सुभाष चन्द्र
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बदल रही है फिजा

बंगलूरू में रहने वाली बयालीस साल की अमूधा की सकि्यता को देखकर कहीं से एेसा नहीं लगता कि वो पिछले नौ साल से एचआईवी पाजीटिव हैं। दस साल पहले पति के एचवाईवी पाजीटिव होने का पता चलने पर इन्होंने अपना टेस्ट कराया तो अमूधा को खुद के एचआईवी पाजीटिव होने का पता
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कुछ कह दो

कुछ भी पुराना नहीं कुछ भी अनजाना नहीं कुछ भी अनकहा नहींकुछ भी अनसुना नहीं फिर भी क्यूँ हैं हम अजनबी सेक्यूँ ओढ़ ली है हमनेख़ामोशी की चादरेंक्यूँ हमने अपनी-अपनी सरहदें बना ली हैंप्यार की बातें भी तो हमने ही की थीं एहसास की बातें हमने ही की थीं तो फिर
 
रश्मि प्रभा...
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पुरानी, बहुत पुरानी, मेरी स्मृति से पुरानी नहीं पर

ठीक-ठीक याद नहीं है कि यह तस्वीर किस वर्ष की है, शायद 98 या 99; पर इस मुलाक़ात की यादें हैं. मुंबई में कवि अनूप सेठी का घर है, कुमार वीरेंद्र, संजय भिसे और गुरुदत्त पांडेय की कविताएं हैं, राकेश शर्मा जी की छेड़छाड़ है, रमन‍ मिश्र-शैलेश के ठहाके हैं, अनूप
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हाथी बन गया साथी

हाथी बन गया साथीजंगल मे रहता इक हाथीनही बनता वो किसी का साथी अकेले ही जंगल मे घूमताबाकी सबको को छोटा कहतामुझ सा जंगल मे न कोईसोच के सब मर्यादा खोईमैं तो सबसे बड़ा यहां परकर सकता हूँ राज जहाँ परजो कोई भी मुझसे टकराएवो तो बस मुँह की ही खाएक्यो मैं इनको
 
सीमा सचदेव
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हिंदी वेब पते और उनके लिंक Hindi Sites and Links

आज पेश कर रहे हैं हिंदी के कुछ वेब पते और उनके लिंक। समाचार गूगल हिंदी समाचार बी बी सी हिंदी वेब दुनिया नवभारत टाइम्स जागरण याहू  प्रभासाक्षी भास्कर दैनिक हिंदुस्तान सिफी हिंदी राजस्थान पत्रिका नई दुनिया प्रभात खबर राष्ट्रीय  सहारा हरि भूमी अमर
 
Jagdish Bhatia
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आप टीप के निकल जाते हैं, हम उसे यहां टिकाते हैं

  भाई खुशदीप के देशनामा पर Udan Tashtari said... मेहमान-ए-खुसुसी :) राज जी और कविता जी की उपस्थिति ने आयोजन को अन्तर्राष्ट्रीय बना दिया जी. एक ही साल में यह असर खुशदीप ब्लॉगिंग का की यंगनेस जाती रही..अब समझ में आ रहा है मुझे अपने लिए कि चार साल में
 
अजय कुमार झा
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ग़ालिब,जेस्सिका और मैं भी

यहाँ,भावनाओं की रेश ड्राइविंग में ,'सीट बेल्ट' पहना हुआ,शॉक रेजिसटेंस दिल ,उछल के ...बाहर नहीं निकलता.आंसू भी ,'एटीकेट' के 'नेपकिन' में......सूख जाते हैं.ये जिंदा सड़कों के नीचे,मरे हुए कोलतारों की दिल्ली है.यहाँ हर रिश्ते का एक बारकोड हैहर प्रेम का एक
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मिथकों का मानव के अवचेतन पर प्रभाव - ५ (अंतिम भाग)

पिछली पोस्ट से आगे..आज हम जुंग के आदिमकालीन सादृश्य/प्रतिरूप/अंशरूप (archetype)के विषय में थोड़ी चर्चा करेंगे. जुंग ने इसे कुछ ऐसे परिभाषित किया है - अंशरूप(archetype) एक ऐसी अवधारणा अथवा परिकल्पना है जिनका प्रादुर्भाव मनुष्य की चेतना में सभ्यता के विकास
 
लवली कुमारी / Lovely kumari
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आपकी सहेली ~ मेरी पहेली ~ 3

एक छोटी सी पहेली आप सभी साथियों के लिए ~नेहा और स्नेहा दोनों में लड़ाई हुई और एक दूसरे को पीटने लगी उनकी मम्मी ने आकर देखा तो बहुत नाराज़ हुई | लड़ाई से थक हार कर परेशान होकर उनकी मम्मी ने दोनों को सजा देने की सोची और दोनों को एक ही न्यूज़ पेपर के एक ही
 
आकांक्षा गर्ग
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लोकतंत्र के असली लुटेरे

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तीन आईएएस अफसरों सहित कई अन्य सरकारी मुलाज़िमों के ठिकानों पर इन्कम टैक्स के छापों में अब तक करीब 500 करोड़ की बेनामी संपत्ति का पता चला है। इसमें 7.7 करोड़ की नकदी और ज़ेवरात भी शामिल है। कुबेर का खज़ाना साबित हो रहीं इन अफ़सरों
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सुभाष गाताडे का खुला पत्र विभूति नारायण राय के नाम

श्री विभूति नारायण राय, कुलपति महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के नाम एक पत्रादिल्ली 9 फरवरी २०१० प्रिय विभूतिजी अभिवादन ! उम्मीद है, स्वस्थ होंगे ।लम्बे समय से इस उधेड़बुन में था कि चन्द बातें आप तक किस तरह सम्प्रेषित करूं ? व्यक्तिगत मुलाकात
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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गंगोत्री ग्लेशिअर प्रति वर्ष पीछे खिसक रहा है- यादवेंद्र

आज कल पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन की बात खूब जोर शोर से उठाई जा रही है...ये ऐसा विषय है जिस पर राजनीति तो सर चढ़ के बोल रही है,पर राजनीतिक लोग भी जिस आधार को ले कर शोर मचा रहे हैं वो है वैज्ञानिकों द्वारा दुनिया के अलग अलग हिस्सों में किये गए दीर्घ
 
Pankaj Parashar
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सांस्कृतिक चक्काजाम की धुरी है अमेरिका

आधुनिक मीडिया ने असल में ” सांस्कृतिक चक्काजाम” लगा दिया है। रेडियो, फिल्म, टीवी और इंटरनेट सांस्कृतिक जाम के सबसे बड़े मीडियम हैं। ”सांस्कृतिक चक्काजाम” की परंपरा उन सांस्कृतिक जुलूसों की तरह है जो हमारे शहरों में किसी न किसी रूप
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कह रहीं बालियाँ गेहूँ की : डॉ॰ नागेश पांडेय संजय का एक बालगीत

कह रहीं बालियाँ गेहूँ की मधुर कान में काली कोयल गाए मस्त मल्हार!बाँट रहे हैं फूल सभी को ख़ुशबू का उपहार!पेड़ों ने पहनी है कोमल-नई-मनोहर वर्दी!भीनी-भीनी धूप निकलने लगी कम हुई सर्दी! लदे बौर से पेड़ आम के मस्त हवा संग झूमें!सुध-बुध छोड़ तितलियाँ सरसों पर
 
रावेंद्रकुमार रवि
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मुन्ना भाई दिल्ली सम्मेलन से बैरंग लौट के आगयेला है!

सबसे पहले तो मैं सर्किट आप सबसे माफ़ी मंग रयेला है…आप लोग पूछेगा…सर्किट भाई…तुम माफ़ी काये कू मंग रयेला है?  तो अपुन आपको बता रयेला है कि अपुन दो वजह से माफ़ी मंग रयेला है…   पहले तो अपुन भौत दिन से आप लोगों से मिलने नही आसका और दूसरे अपुन दिल्ली
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वेतन हाथी छाप खूब जेबों में खनका

नेताओं पर जब पड़ी महंगाई की मारहमदर्दी का कर दिया माया ने इजहारमाया ने इजहार फिरा सरकारी मनकावेतन हाथी छाप खूब जेबों में खनकादिव्यदृष्टि गर लेने 'भत्तों' के चटखारेयूपी में एमएलए बन जा फौरन प्यारे
 
दिव्यदृष्टि
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दिल्‍ली ब्‍लॉगर मिलन या मोबाइल मिलन हो रहा है : मजा न आये तो पैसे वापिस (अविनाश वाचस्‍पति)

आपने बतलाना है हाथ किसके हैंजिनमें मोबाइल है5वें चित्र मेंचुटकी में किसेमसलने का प्रयास किया जा रहा है। कान में किसकेचिपका है मोबाइल।यह तो मैं बतला रहा हूंकि चित्र में अजय कुमार झा जी हैंपर यह नहीं बतलाऊंगा किबात कर रहे हैं किससेऐसे बहुत ही हैंदिल्‍ली
 
अविनाश वाचस्पति
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काफ़्का का ’द कासल’ - दसवां हिस्सा

(पिछलीऒ किस्त से जारी) इस के तुरन्त बाद काउन्टर के पीछे घटने वाला सम्भोग दृश्य और ब्रिज इन में एक और दूसरा ऐसा ही दृश्य ही मात्र दो इरोटिक अनुभव हैं जिनका काफ़्का ने कभी भी वर्णन किया. क्लाम अपने कमरे में सोया हुआ है; नौकर अस्तबल में ठुंसे हुए हैं; के. और
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शरद पवार की हाथापाई और ज्योतिष व महँगाई

लोग भी बड़े अज़ीब हैं । अपनी नाक का रेंट तो पोंछा नहीं जाता और पीछे पड़ने लगे बेचारे शरद पवार के । सत्तर साल की उम्र, आवाज़ लड़खड़ाती और सारे देश की खाद्यान्न समस्या का भार सिर पर । भविष्य भी किसी को मालूम होता है क्या ? भविष्य तो भगवान राम और कृष्ण को भी
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“रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का उत्तर” (अमर भारती)

रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का सही उत्तर है- मानीला देवी मंदिर, अल्मोडा (उत्तराखण्ड) पहेली के विजेता हैं श्री ताऊ रामपुरिया जी रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का सही उत्तर देने वाले नं०-2 हैं- श्री समीर लाल जी Udan Tashtari रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-19 का
 
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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एक यूरोपियन साधु से मुलाकात

विनय बिहारी सिंह मैं योगदा सत्संग सोसाइटी आफ इंडिया के दक्षिणेश्वर (कोलकाता) स्थित आश्रम में खड़ा था। तभी एकदम लाल रंग की लुंगी और कुर्ता पहने एक यूरोपियन साधु को देखा। इच्छा हुई बातचीत करनी चाहिए। उनके ललाट पर लाल रंग का टीका था। आंखें नीली, त्वचा
 
vinay bihari singh
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बेरहम और निहायत खतरनाक, वही बर्फ

प्रकृति का अपना नियम-कानून। उसकी हर छटा। हर अदा। तस्वीर सी। समंदर से लेकर पहाड़ तक। लेकिन जो सुंदर है। स्निग्ध, सौम्य और शांत। वही हो सकता है जानलेवा। बेरहम और निहायत खतरनाक। वही बर्फ। सफेद चादर सी। रुई के फाहों सी हल्की। इंतजार करते हैं सब। कि खेल सकें।
 
मधुकर
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मीडिया का ये 'जी-फैक्टर '

मीडिया का ये 'जी-फैक्टर ' 'ज्ञानोदय' के मीडिया विशेषांक में पत्रकारिता की दुनिया के 'बड़े लोगोंÓ अनुभवों और संस्मरणों के रास्ते कहीं न कहीं मीडिया के चाल-चरित्र में हाल के वर्षों में आए बदलाव की झलक देखने को मिली। विनोद दुआ ने अपने आलेख में पत्रकारिता की
 
kaustubh
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फ़िज़ा शिकन-ब-जबीं है वहाँ न जाइयेगा

फ़िज़ा शिकन-ब-जबीं है वहाँ न जाइयेगा। वहाँ ख़ुलूस नहीं है वहाँ न जाइयेगा ॥ बिछाए बैठे हैं बारूद लोग राहों में, फ़साद ज़ेरे-ज़मीं है वहाँ न जाइयेगा॥ फ़सुर्दगी के बदन पर है बूए-गुल की नक़ाब, फ़रेब तख़्त-नशीं है वहाँ न जाइयेगा॥ हरेक सम्त मिलेगा सुलगती राख
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आस्था के साथ खिलवाड ठीक नहीं!

आस्था के साथ खिलवाड ठीक नहीं!रोकना होगा साई बाबा के नाम का व्यवसायीकण (लिमटी खरे) भारत धर्मभीरू देश है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। हिन्दुस्तान में हर धर्म, हर भाषा, हर संप्रादाय, हर पन्थ के लोगों को आजादी के साथ रहने का हक है। भारत
 
LIMTY KHARE लिमटी खरे
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पत्थर की देवी

विश्वास.........,आस्था..........,श्रद्धा.............,कितने झूठे शब्द,पैदा किये हैं तुमने.पाखंडियों के हाथों सेरिश्वत खाकर,कितने गुनाहगारों को,माफ़ किये हैं तुमने.कितने निरपराधों की,बलि दी है तुमने.कितनी अभागिनों नेसिर पटका है,तुम्हारे चरणों पर.कितने
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कवि कह गया है - 4

मस्तिष्क में जब अम्लीय प्रतिक्रिया हो रही होऔर सरोकार तक की परिधि मेंमहज़ हाइड्रोज़न बम कापरीक्षण भर नहीं हुआ होएक पैर को बांध कर सरहद परकंटीले बाड़ों के बीच घसीटा जा रहा हो...उन कांटो से सृजनशील और समाजवादी मन केचीथड़े होते जा रहे हों...सदियाँ,जैसेकिसी