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नया ठौर

http://nayathaur.blogspot.com/
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नयी प्रविष्टी लिखी
09 Jun 2010
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नीतीश कुमार दोबारा सत्ता में आएंगे?

बिहार की नीतीश कुमार की सरकार क्या दोबारा सत्ता में आ पाएगी ? यह एक दिलचस्प सवाल है। नीतीश कुमार एंड कंपनी, बिहार विधानसभा चुनाव में अपने काम के भरोसे दोबारा सत्ता में आने का मंसूबा देख रही है। नीतीश कुमार बिहार के अलग- अलग हिस्सों में चल रही विश्वास
 
संजीव
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तीरथ के तारणहार

तीर्थ पुरोहितों या पंडों के बारे में -तहलका- की यह रिपोर्ट पढ़िये, मजा आ जाएगा- संजीवपंडों का नाम भले ही कड़वे अनुभवों का पर्याय बन चुका हो मगर बदरी-केदार के पंडे अपनी विशेषताओं के कारण आज भी अपने यजमानों के दिलों में बसे हैं. मनोज रावत की रिपोर्टबात उन
 
संजीव
Jun 01 2010 03:59 PM
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...टीवी की ख़बरों ने मुझे बीमार बनाया

आजकल मैं दहशत में हूं। मैं पिछले कई दिनों से पूरे मन के साथ भोजन नहीं कर पा रहा हूं। घी मुझे बेहद पसंद थी...ख़ासतौर पर घी में बने परांठे भला किसे पसंद नहीं? लेकिन अब घी सामने रखते ही उबकाई -सी आने लगती है। आईसक्रीम इतना पसंद था कि सप्ताह में तीन- चार दिन
 
संजीव
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हिंदुस्तानी ईस्ट इंडिया कंपनी

हिंदुस्तान में ईस्ट इंडिया कंपनी का स्याह इतिहास हर किसी को मालूम है। अब यह कंपनी नया इतिहास लिखने जा रही है। पढ़िये `तहलका' के ताजा अंक में।कभी देश पर राज करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी अब एक भारतीय की होकर भारतीय बन चुकी है, बता रहे हैं अतुल चौरसियालम्हों
 
संजीव
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जज्बे को सलाम!

हिंदी पत्रिका तहलका में `सलीब पर साहस' नाम से एक कॉलम प्रकाशित किया जा रहा है। जिसमें बिहार के बक्सर के एक किसान की ज़िद और जज्बे के बारे में पढ़ा। आप भी पढ़ें अच्छा लगेगाः संजीव बिहार के बक्सर जिले में स्थित सरिन्जा गांव के शिवप्रकाश को कई साल तक यही
 
संजीव
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बंदूक की नई फ़सल

टीवी पत्रकार अमृत उपाध्याय की ये कविता उनके ब्लॉग - कशमकश- से साभार ली गई हैः संजीवघर के पिछुआड़े,बोई थी कुछ बन्दूकेंकुछ दाने और कारतूस,इस बार घर गया तो खोजा, बन्दूक की फसल बर्बाद हो गई शायद,पता नहीं क्यों,नहीं ऊगे बंदूकऔर ना दाने कारतूस बन पाएक्यों न
 
संजीव
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...मुसीबतों के सात दिन

मुआफ करें। पिछले दिनों मैं एक संस्मरणनुमा –मौत- के नाम से लिखना शुरू किया था। तीन किस्तें लिखने के बाद कुछ ख़ास वजह से उसे जारी नहीं रख पाया। आपने पुराना पढ़ा या नहीं, लेकिन इन सबको संक्षेप में लिखते हुए एक ही किस्त में पूरा कर रहा हूंः संजीवनाम चाहे कुछ
 
संजीव
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...आपके लिये

टीवी पत्रकार राकेश पाठक ने आपके लिए दो कविताएं लिखी हैं। जिसे उनके ब्लॉग -इस मोड़ पर- से लिया गया हैः संजीव1.चिंगारियां पानी से नहीं बुझतींन कभी थकती हैं...चिंगारियां मन में दबी हों...तो मन भी नहीं थकता चिंगारियां गुंजाइश रखती हैंहर दौर में खुद के आजमाइश
 
संजीव
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Mar 04 2010 12:57 PM
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मित्रों, मदद करें! मेरी सांस एक घंटे से नहीं चल रही

दोस्तों, सबसे पहले आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं। होली की ख़बर बनाते समय कल मथुरा से आए विजुअल्स देख रहा था। मथुरा के यमुना घाट पर चतुर्वेदी समाज के लोग अभी भी होली के दिन भांग घोंटते हैं। उनके बीच मान्यता है कि श्रीकृष्ण और बलराम ने यमुना घाट पर
 
संजीव
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Mar 01 2010 08:28 AM
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इस मक़बूलियत पर भारत नहीं है फ़िदा

अंग्रेजी अख़बार `द हिंदू' के पहले पेज पर जब पढ़ा कि कतर के शाही परिवार ने मक़बूल फिदा हुसैन को वहां की नागरिकता देने की पेशकश की है, तो लगा कि मकबूल इस पेशकश को नहीं मानेंगे। लेकिन मैं या फिर इस तरह की उम्मीद करने वाले तमाम हिंदुस्तानियों को मक़बूल ने
 
संजीव
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सांप- नेताः किसको किससे ख़तरा

बीजेपी का इंदौर में राष्ट्रीय अधिवेशन हो रहा है। अधिवेशन स्थल पर नाना प्रकार के सांप पाए जाने की ख़बर से नेता परेशान हैं। नेताओं पर सांपों का ख़तरा है। नेता बेचारे वातानुकूलित तंबुओं में सांपों के साए में किसी तरह रात बिता रहे हैं। लेकिन सांपों से नेता
 
संजीव
Feb 18 2010 09:52 AM
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राहुल कथायाम् प्रथमोध्याय:

राकेश पाठक, न्यूज़ चैनल में एंकर हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर जो कुछ लिखा है, आप भी पढ़ें, दिलचस्प है। उनके ब्लॉग- ...इस मोड़ पर- से साभार लिया गया है -संजीवराहुल गांधी…कौन राहुल गांधी? अरे इस देश में एक ही तो राहुल गांधी है। युवा राहुल गांधी। कांग्रेस
 
संजीव
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Feb 12 2010 06:19 PM
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उत्तमा जी ! मैं आपसे बिल्कुल असहमत हूं

डॉ. उत्तमा के ब्लॉग कलाजगत (http://www.kalajagat.blogspot.com/) पर रुचिका मामले के मुख्य अभियुक्त राठौर पर हमले को लेकर लिखी गई पोस्ट पढ़ने के बाद ख़्याल आया कि उनके ब्लॉग पर जाकर टिप्पणी करूं। इस वज़ह से ख़्याल को ख़ारिज कर दिया कि ब्लॉग की टिप्पणियां
 
संजीव
टैग: विरोध
Feb 10 2010 06:00 PM
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पब्लिक तो बच्चा है जी!

आप उत्तर भारतीय हैं तो फ़क़त इसबात पर ख़ुश हो सकते हैं कि कांग्रेस के युवा नेता राहुल गांधी उनकी हिमायत में आ गए हैं। मराठी बनाम उत्तर भारतीयों के खूनी खेल में अबतक तमाशबीन बनी कांग्रेस ने चुप्पी तब टूटी जब शिवसेना के कागजी शेरों ने गांधी परिवार पर
 
संजीव
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घर में ही पराजित होती हिंदी

हिंदी को राष्ट्रभाषा मानने वालों का मुगालता पिछले दिनों टूट गया। गुजरात हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान हिंदी की संवैधानिक स्थिति भी स्पष्ट की। चीफ जस्टिस एस.जे. मुखोपाध्याय की बेंच ने डिब्बाबंद सामान पर हिंदी में ब्यौरा लिखे जाने को लेकर दायर
 
संजीव
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चप्पल से निकला चुर्र-र

मैं जब भागते- भगाते देर शाम अपने मित्र शर्माजी के घर पहुंचा तो सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी। देखा, शर्मा की धर्मपत्नी खलबला रही थीं और अपने ड्राइंग रूम में बैठे शर्माजी भिन-भिना रहे थे। उनके टीवी सेट पर एंकर्स चिचिया रहे थे। मंत्री ने राहुल भैय्या की
 
संजीव
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देश को भी मुसर्रतों की जरूरत

अभी टेक्सास से मुसर्रत भाई का जवाबी ईमेल आया। आप नहीं जानते मुसर्रत भाई को... मैं भी नहीं जानता था। लेकिन पिछले दिनों जान गया कि जिन अंधेरी गलियों से सूरज भी कुछ परहेज के साथ कन्नी काट लेता है, वहां भी कई बार मेधा की रौशनी जरूर निकलकर आती है। मुसर्रत अली
 
संजीव
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हो- हो- हो

कार्टूनिस्ट पवन ने पिछले दिनों टीवी शो -राज पिछले जन्म का- और नये साल के मौक़े पर कुछ कार्टून बनाए थे। देखिये और मजा लीजिये। हां, कार्टून पर क्लिक करके उसे बड़ा कर लें, जिससे कि आपको पढ़ने और देखने में सुविधा होः संजीव
 
संजीव
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मैं फलां जी हूं...तू कौन है?

मेरे साथ एक नये सहयोगी आए हैं। नाम है विंध्यवासिनी। मेरा परिचय इस रूप में नहीं हुआ कि ये फलां साहब हैं... या इन साहब का नाम ही विंध्यवासिनी है। सो, मैं इस भ्रम में था कि कोई नई लड़की आई है जिसका नाम विंध्यवासिनी है। भगवती दुर्गा का एक नाम विंध्यवासिनी भी
 
संजीव
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आजा हंस लें...

बिहार में मकर संक्रांति पर दही- चूरा (धान से तैयार हुआ) खाने की परंपरा है। उसी पर पवन ने कुछ हास्य के क्षण खोजे हैं। उनके कार्टून प्रकाशित करने वाले ब्लॉग नश्तर से इसे लिया गया है। चाहें तो यहां देखें या वहां... हंसी जरूर छूटेगी। हां, कार्टून देखने के
 
संजीव
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...रात ठाकरे सपने में आए, हिंदी बोल गए फरा-रा-रा-रा

क्या बताऊं। पिछली रात ख़्वाब में राज ठाकरे आए। जैसा कि किसी पुरानी सीन को दिखलाना हो तो ब्लैक एंड व्हाइट ज्यादा प्रभावी दिखती है...उसी तरह नफ़रत की आग उगलते राज ठाकरे...। फिर बाला साहब ठाकरे का सिंहनाद- कांग्रेस में अकेली मर्द हैं शीला दीक्षित, जिन्होंने
 
संजीव
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९० पार के नौजवान

अगर आप आंध्र प्रदेश के पूर्व राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बारे में जानकर सनाके में हैं तो जानी- मानी पत्रिका तहलका में एक बुजुर्गवार लेखक खुशवंत सिंह के नज़रिये के बारे में भी पढ़ें। कुछ पहले का है, लेकिन दिलचस्प है।
 
संजीव
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नक़ाब पोशियां भायी जिन्हें वो बुत तो नहीं

नक़ाबपोशी को लेकर जानी -मानी पत्रिका तहलका में एक नये नज़रिये पर नज़र पड़ी। आप भी पढ़ें, शायद आपको भी पसंद आए- संजीवअक्सर मध्यकालीन बर्बरता के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है हिजाब। पर निशा सूजन को अचरज है कि लोग उनसे भी क्यों नहीं पूछते जिन्होंने खुद ही
 
संजीव
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सरकार, नाराज़ हो रहे हैं

पिछले दिनों संसद में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी साहब हत्थे से उखड़ गए। महंगाई के सवाल पर उखड़े थे। उससे दो दिनों पहले मुंबई आतंकी हमले में प्रभावित परिवारों को मुआवजे को लेकर लालकृष्ण आडवाणी की बात पर प्रणब दा उखड़ गए।... प्रणब दा का कहना था कि मुंबई
 
संजीव
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मुफ़लिसी में हंसी

पवन के कार्टून का मुरीद रहा हूं... रेखाचित्रों से ज्यादा उनके कार्टून का सब्जेक्ट जोरदार रहा है। कार्टून पर जाकर क्लिक कीजिये और आप भी मजा लीजियेः संजीव
 
संजीव
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एक दिलचस्प टिप्पणी

वरिष्ठ टीवी पत्रकार श्री अंशुमान त्रिपाठी जी को मैने व्यंग्य- लुटेरों के लिए भी आचार संहिता बने- मेल किया था। जिसे पढ़ने के बाद उनकी दिलचस्पी टिप्पणी आईः संजीव संजीव भाई, लुटेरों के लिए ही आचार सहिता होती हैं। शर्माजी हमारे आपके जैसे इंसान हैं। नाईयो
 
संजीव
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लुटेरों की भी आचार संहिता बने

ग़ाज़ियाबाद में मेरे पड़ोसी एकदिन लुट- लुटाकर घर आए... पिटना रह गया था सो ये नहीं लिख रहा हूं कि लुट- पिटकर वापस आए। मित्रों, शर्मा जी भले आदमी हैं और मेरे जैसे दुष्ट के पड़ोसी हैं इसलिये इस भरोसे के साथ उनके लुटने की दास्तां लिख रहा हूं कि वे नाराज़
 
संजीव
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...बगल की बेड पर मरीज़ गुजर गया

बीच में कुछ दिनों तक बीमार पड़ने की वजह से आपको -मृत्यु- नाम से लिखी जा रही श्रृंखला की अगली किस्त तुरंत नहीं पढ़ा पाया। खेद है। आगे पढ़िये। - संजीव ...किसी अनहोनी की आशंका में हैरान- परेशान हमदोनों अस्पताल में दाख़िल हुए... मेरे ससुर जी ( मरीज़) बिस
 
संजीव
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आस्था के चटख रंग

बंगाल में विजयदशमी के दिन शादीशुदा महिलाएं सिंदूर खेला में हिस्सा लेती हैं... बंगाल की ये परंपरा आस्था के रंगों में पगी होती है।
 
संजीव
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...काली बिल्ली ने आख़िरकार हमारा रास्ता काट दिया

शाम लगभग सात बज चुके थे... मैं अपने एक और रिश्तेदार के साथ वापस दिल्ली जाना चाहता था लेकिन डॉक्टर ने कहा कि डायलिसिस होगा...अभी, इसी वक़्त। उन्हें स्ट्रेचर पर ले गया। वहां 120 रुपये की पर्ची कटाने के बाद तत्काल डायलिसिस कर दी गई। लगभग एक घंटे बाद मरी
 
संजीव
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...मेहरबानी करके पत्रकार साथी न पढ़ें

(अगर आप पेशे से पत्रकार हैं या फिर डॉक्टर हैं तो इस पोस्ट को कतई न पढ़ें। सबसे पहले पत्रकार। मुझे अहसास हुआ है कि हम सब एक ऐसी सुविधाजनक दुनिया में जी रहे हैं जहां यूटोपिया जैसी स्थिति है... वहां कोई बीमार नहीं पड़ता, कोई नहीं मरता, वहां कोई दुखी नहीं
 
संजीव
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नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की

शाम हो चुकी थी जब हम ताजमहल को देखने के बाद मथुरा की ओर चले... रास्ते में एक जगह आगरा का मशहूर पेठा लिया...एक चौराहे पर बड़ी –सी दुकान में। फिर बारिश शुरू हुई तो मथुरा तक अनवरत बरसती रही। दिल्ली- मथुरा रोड पर अंदेरे में जुगनुओं की तरह दिखने लगा तो अंदाजा
 
संजीव
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एक अश्रु मोती... समय के गाल पर

हम ताजमहल की झलक पाते उससे पहले ही दर्शकों की लंबी लाइन दिखी… काले घने बादल। शाम चार बज चुके थे और छह बजे ताजमहल का द्वार दर्शकों के लिए बंद हो जाता है। लाइन लंबी थी इसलिये हम उम्मीद छोड़ चुके थे कि हम ताजमहल को देख सकेंगे। ख़ैर जैसे- तैसे टिकट कटाकर हम
 
संजीव
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Sep 09 2009 12:40 PM
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...मेरे महबूब कहीं और मिलाकर मुझसे उर्फ ताज़

वृंदावन से हमलोग मथुरा की तरफ जाने लगे। रास्ते में ड्राईवर ने हमें पूछा कि मथुरा चलें या फिर आगरा ?... हालांकि उसने बताया कि पहले आगरा ही चलें क्योंकि वहां ताजमहल में साढ़े छह बजे तक ही प्रवेश मिल पाएगा... और लौटती समय में मथुरा में शाम की आरती तक यहां
 
संजीव
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Aug 27 2009 08:20 PM
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तिमिर मिटाता एक दीप

तहलका में रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता दीप जोशी के बारे में जानें -संजीवदेश की तस्वीर बदलने का सपना देखने और इस दिशा में जुनून के साथ काम करने वाले दीप जोशी को रेमन मैगसेसे पुरस्कार मिला है. अपनी धुन के पक्के इस मुसाफिर के सफर के बारे में बता रही हैं
 
संजीव
Aug 27 2009 01:54 PM
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बेहतर भविष्य के इंतज़ार में

भुवन के ब्लॉग -लूज़ शंटिंग - पर दीप्ति का ताजा पोस्ट पढ़ें... । इसके जरिये अपने आसपास... और समाज को महसूस करें - संजीवनाम- इंतज़ारउम्र- 15 साल (लगभग)स्थानीय निवासी- उत्तर प्रदेशफिलहाल बसेरा- पुरानी दिल्ली का एक रैन बसेराजब हम उससे और उसके साथियों से
 
संजीव
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Aug 24 2009 09:21 PM
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...बोलो वृंदावन बिहारी लाल की

मेरी मां और पिताजी बहुत दिनों के बाद हमारे यहां कुछ दिनों के लिए आए। उसके बारे में बाद में बताऊंगा। अभी जन्माष्टमी से ठीक एक दिन के बाद मां-पिताजी को उनकी काफी उत्सुकता और इच्छा को देखते हुए उन्हें लेकर वृंदावन, मथुरा और आगरा गया था। लाख मना करने के
 
संजीव
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जिन्ना के बहाने जसवंत का जलजला

बीजेपी ने अपने पार्टी नेता जसवंत सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये बहुत अप्रत्याशित नहीं है। लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी के भीतर सत्ता को लेकर जिस तरह की छटपटाहट देखी जा रही थी, ये उसी की परिणति है। पार्टी के बड़े नेता अपने ही दल के नेताओं के
 
संजीव
Aug 19 2009 08:35 PM
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शीला जी! ऐसा विकास आपको ही मुबारक़

दिल्ली की मुख्यमंत्री को मैं इसलिये जानता हूं क्योंकि वे रह-रहकर दिल्ली में नागरिक सुविधाओं में कमी के लिए बाहरी लोगों के बहाने पूर्वी यूपी और बिहार के मजदूरों, रिक्सा चालकों और ग़रीबों को जिम्मेदार मानती रही हैं। शीला दीक्षित को इसलिये जानता हूं क्योंकि
 
संजीव
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मासूम मुहब्बत और दुविधाएं- लव आजकल

समीक्षा पढ़कर किसी फ़िल्म या क़िताब के बारे में मैं कोई राय नहीं बनाता था... लेकिन तहलका पर नई फिल्म -लव आजकल- की समीक्षा अच्छी लगी। फिल्मों में आपकी दिलचस्पी हो तो पढ़ें और वक़्त मिले तो देखने का मशविरा भी दूंगाः संजीवफिल्म समीक्षाफिल्म लव आजकलनिर्देशक
 
संजीव