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देख कबीरा

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02 Jun 2010
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ऐ भाई... आगे भी, पीछे भी

जब केंद्र सरकार महंगाई सहित तमाम आर्थिक मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों और जनता के निशाने पर हों, वैसे में सरकार के लिए 3-जी स्पेक्ट्रम की नीलामी इस भयावह गर्मी में कुछ राहत लेकर आई। हालांकि इसमें पैसे के साथ एक बड़ी सीख भी मिली है, जिसे भविष्य में याद रखने
 
सुभाष चन्द्र
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पांच महिलाओं का मेरे जीवन में दखल

हमेशा यह कर्त दिया जाता है कि हर सफल पुरूष के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ होता है। सही है। लेकिन शायद मैं अपने आपको भाग्यवान समझता हूं कि मुझे एक नहीं पांच महिलाओं का साथ है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं सफल हूं। सफलता के कई परिभाषाएं हैं। लेकिन मैं
 
सुभाष चन्द्र
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May 30 2010 11:12 AM
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उमा-जसवंत को लेकर सौदेबाजी

संगठन संबंधी कामकाज का बोझ भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए चुनौती बन रहा है। लिहाजा विदेश दौरे से लौटते ही गडकरी को संगठन से जुड़े कई अहम फैसले करना हैं।पहला फैसला राज्यसभा और विधान परिषद सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन का है। दूसरा काम राष्ट्रीय
 
सुभाष चन्द्र
May 29 2010 09:58 AM
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कालू राम की दिल्ली

कौन है कालू राम : एक ऐसा इनसान जो जीवन के तमाम अनुभवों का देख चुका है। तमाम सिद्घांतों और नैतिकता पर 'जुगाड़ तंत्रÓ किस कसद हावी होता है, उसका प्रत्यक्ष गवाह है। देश के नौकरशाही-राजनेताओं की गठजोड़ में किस कदर आगे बढऩे के लिए 'यस सर...Ó जरूरी है, इसको भी
 
सुभाष चन्द्र
May 21 2010 12:37 PM
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समाधि से भोग का मार्ग

भारतीय संस्कृति त्याग की संस्कृति रही है। ईशावास्य उपनिषद् का सूत्र वाक्य ही है - तेन त्यक्तेन भुज्जीथा मा गृध: कस्यस्विद् धनम। त्रेता, द्वापर में यह संस्कृति बरकरार रही। कलियुग में रजनीश ओशो आते हैं और एक किताब लिखते हैं संभोग से समाधि की ओर...। किताब
 
सुभाष चन्द्र
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सीएम खड़ा बाजार में

लोकतंत्र में जब बहुमत किसी भी दल को नहीं मिलता है और गठबंधन की राजनीति में स्वार्थ टकराता है तो स्थिति कैसी विचित्र हो सकती है, उसका नायाब नमूमा झारखंड से बेहतर मुश्किल है। पिछले एक पखवाड़ें से भी अधिक समय से कभी समर्थन तो कभी समर्थन वापसी को लेकर जिस
 
सुभाष चन्द्र
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जाति पूछो हर इंसान की

सदियों से कहा जाता रहा है, 'जाति न पूछो साधु कीÓ लेकिन आज के राजनेता हर आम-ओ-खास का जाति पूछने की जिद पर अड़े हैं और सरकार यह कार्य कर रही है। लोकसभा में जाति आधारित जनगणना पर अधिकांश दलों को एकमत देखकर केंद्र सरकार इसके लिए तैयार हो गई है। भारत सरकार ने
 
सुभाष चन्द्र
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बेगाने होंगे ऑस्ट्रेलियाई

अगले 15 वर्ष में ऑस्ट्रेलियाई मूल के लोग अपने ही देश में बेगाने अल्पसंख्यक हो जाएंगे। खास बात यह कि भारतीयों की भूमिका पहले से कहीं दमदार होगी। विश्व के मानचित्र पर छोटा सा देश है ऑस्ट्रेलिया, जो पिछले कुछ समय से भारतीयों के खिलाफ आने से चर्चा में रहा।
 
सुभाष चन्द्र
May 14 2010 03:53 PM
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नींद की रहस्यमयी दुनिया

दिन में हम जागते हैं और रात होते ही नींद आने लगती है. रात में कुछ देर तक तो हम जागते हैं लेकिन फिर नींद हम पर भारी होने लगती है और अंतत: हम सो जाते हैं. एकदम निष्क्रीय. हम हमारी जिंदगी का एक तिहाई हिस्सा तो सोने में ही बिता देते हैं. तो क्या हमारा इतना
 
सुभाष चन्द्र
टैग: नींद
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कम कपड़े पहने, तो खैर नहीं!

ईरान में कम कपड़े पहनकर घूमने वाली महिलाओं को अब गिरफ्तार किया जाएगा। यह फरमान एक बड़े ईरानी विद्वान अपील के बाद तेहरान की पुलिस ने जारी किया गया है। एक ईरानी विद्वान ने कहा था कि महिलओं के 'अभद्र' पहनावे की वजह से नौजवान विचलित हो जाते हैं और इससे भूकंप
 
सुभाष चन्द्र
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समझौता

"तुम लोगों को देखते हो -- वे दुखी हैं क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है, और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है। वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे लेकिन वे कायर सिद्ध हुए। अपनी नजरों में ही वे गिर गए, उनका आत्म सम्मान खो
 
सुभाष चन्द्र
टैग: ओशो
Apr 23 2010 12:14 PM
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भूखों की संख्या कितनी

केन्द्र सरकार ने 2010-11 में, भूख से मुकाबला करने के लिए 1.18 लाख करोड़ रूपए खर्च करने का वादा किया है। अगर यूपीए सरकार गरीबी रेखा के नीचे के हर भारतीय परिवार को रियायती तौर से 35 किलो खाद्यान्न दिये जाने पर विचार करती है तो उसे अपने बिल में अतिरिक्त
 
सुभाष चन्द्र
टैग: भूखों
Apr 21 2010 04:12 PM
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अरे बाप, लड़कियां इतनी पकाऊ

सुनते आ रहे हैं कि लड़के लड़कियों को पटाने के लिए उसे पकाते रहते हैं। यानी, बातों में उलझाए रहते हैं। एक बंद नहीं कि दूसरा शुरू। लेकिन दिल्ली का हाल ही अजूबा है। यहां तो लड़कियां फोन कर-करके लड़कों को पकाती है। न दिन देखती है न रात। बस, बात करेंगी? आप
 
सुभाष चन्द्र
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प्रेम के लिए प्रकृतस्थ होना जरूरी

बिना प्रकृति का सान्निध्य लिए प्रेम संभव नहीं है। यदि आपको प्रेम करना है तो प्रकृति के बीच जाकर और प्रकृति के रंग में ढ़लकर ही संभव है। यह कहने का यह मतलब यह भी नहीं है कि मैंने कोई शोध किया है अथवा दार्शनिक हो गया हूं। दरअसल, बैठे-बैठे यह विचार आया। एक
 
सुभाष चन्द्र
टैग: प्रेम
Apr 08 2010 04:42 PM
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किम की मौत का रहस्य

जब इंसान सार्वजनिक जीवन में आ जाता है तो उसे बहुत सारे कायदे-कानून और लोकलाज का ख्याल रखना पड़ता है। लेकिन कुछ लोग अपने मन के मालिक होते हैं। जो मन में आया, किया। न तो लोकलाज और न ही कोई पछतावा। ऐसे ही बिरले लोगों की श्रेणी में उत्तर कोरिया के
 
सुभाष चन्द्र
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1947 टू एके-47

देश के स्वभामिमान पर जब स्वहित हावी हो जाता है तो पूर्व स्थापित मान्यताएं छीजते चले जाते हैं। एक-एक कर पुराने गौरवशाली इतिहास पर वर्तमान कालिख पोतता चला जाता है। नतीजन, राष्टï्र व समाज संक्रमण काल से गुजरता है। उन परिस्थितियों में भविष्य का स्पष्टï चित्र
 
सुभाष चन्द्र
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पत्रकारिता के लिए डिग्री नहीं है जरूरी

इलेक्ट्रॉनिक चैनलों की भीड़ ने पत्रकारिता कॉलेज और इंस्टीच्यूटों की बल्ले-बल्ले कर दी है। जिसे देखिए, ग्लैमर और रूतबा के लिए इन संस्थानों में जा घुसता है और येन-केन प्रकारेण कुछ दिनों बाद एक डिग्री हाथ में लेकर बाजार में निकल जाता है। अपने लिए नौकरी
 
सुभाष चन्द्र
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क्यों घसीटते हो राधा-कृष्ण को

पिछले कुछ वर्षों से 'सहजीवनÓ जिसे लिव इन रिलेशनशिप भी कह लीजिए को लेकर काफी बावेला काटा जा रहा है। कभी सामाजिक ठेकेदारों द्वारा तो अभी कोर्ट द्वारा। कोर्ट ने यह कहकर इस मुद्दे को फिर तूल दे दी कि भारतीय पुरातन परंपरा में राधा-कृष्ण भी तो इसी तरह रहते थे।
 
सुभाष चन्द्र
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बेहतरी के लिए अँधेरा ही सही ...

अंधेरे में रहना भला किसे अच्छा लगता है, लेकिन यह अंधेरा धरती की बेहतरी के लिए हो तो यह कदम सचमुच ही तारीफ़ के काबिल है. धरती को ग्लोबल वार्मिग के खतरे से बचाने की इसी मुहिम के तहत एशिया प्रशांत, मध्य पूर्व और अमेरिका समेत दुनिया के 150 से अधिक देशों के
 
सुभाष चन्द्र
Mar 26 2010 02:07 PM
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दुश्मन नं. 1

दर्शन और कूटनीति कहता है कि यदि किसी देश व समाज को बर्बाद करना है, तो सबसे पहले उसका आर्थिक ताना-बाना नष्टï कर दें। उसकी उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। चाहकर भी वह संभल नहीं पाएगा। आर्थिक उदारीकरण के बाद साम्राज्यवादी विचारधारा से ओत-प्रोत कुछ देश दूसरों को
 
सुभाष चन्द्र
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कैसे भला होगा हिंदी का

सरकार का राजभाषा विभाग और उसके माध्यम से अधिकांश सरकारी विभागों-निकायों यहां तक कि बैंकों में भी सूचना पट्टï टंगे दिखाई पड़ते हैं कि यदि आप हिंदी में कार्य करेंगे तो हमें प्रसन्नता होगी। हिंदी में काम करने और करवाने के लिए प्रेरणा। शब्दों और शब्द
 
सुभाष चन्द्र
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आओ मनाएं नया साल

- विनोद बंसल पाश्चात्य देशों के अंधानुकरण व अंग्रेजियत के बढते प्रभाव के बावजूद भी आज चाहे बच्चे के गर्भाधान की बात हो या जन्म कीे, नामकरण की बात हो या शादी की, गृह प्रवेश की हो या व्यापार प्रारम्भ करने कीे, सभी में हम एक कुशल पंडित के पास जाकर शुभ लग्न
 
सुभाष चन्द्र
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आईपीएल का मतलब

आईपीएल यानी क्रिकेट का वह फार्मेट जिसमें खेल और बाजार पूरी तरह एक-दूृसरे से गु्रंथा हुआ है। जैसे एक के बिना दूसरा अपंग। आईपीएल रनों की बरसात के कारण जहां दर्शकों को आकर्षित करती है, वहीं प्रायोजक भी करोड़ों रुपये लुटाने को तैयार बैठे रहते हैं। बाजार का
 
सुभाष चन्द्र
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कट्टïरता के चंगुल में अफ्रीका

अपेक्षाकृत अशिक्षित और अविकसित अफ्रीकी देशों में कभी संस्कृति और परंपरा के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर कट्टरता का फैलाव हो रहा है। नतीजतन अलग-अलग कबिलाई इलाकों और अलग अलग मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोगों के बीच संघर्ष की घटनाएँ भी तेजी से बढ रही
 
सुभाष चन्द्र
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बाजार तो हद पार कर रहा

आज हमारे-आपके हर क्रिया-कलाप बाजार से संबद्घ है। हम क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, क्या करते हैं - सब बाजार तय करने लगा है। महानगरों से शहर और शहर से गांव - हर जगह यही हाल है। और बाजार है कि सुरसा की भांति अपना दायरा बढ़ाता ही जा रहा है। न कोई नैतिकता, न
 
सुभाष चन्द्र
Mar 08 2010 11:20 AM
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अनुभा का खत

अनुभा मकान के दूसरे तल्ले में अपनी सहेलियों से घिरी बैठी है। नीचे उसके विवाह की तैयारियां हो रही थीं पर वह इससे बेपरवाह खामोश बैठी सामने दीवार की ओर देख रही थी जिस पर बकरी को ले जाते हुए एक कसाई का चित्र उभर-उभर कर आता था।तब वह लगभग आठ साल की थी। एक बकरी
 
सुभाष चन्द्र
Mar 04 2010 08:45 AM
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विकास का वितंडा

राजनीतिक सत्ता सामाजिक बदलाव का एक औजार जरूर है, लेकिन क्या यह व्यक्तियों को सत्ता में बदल देने का भी औजार है? इसे हमारे देश के तमाम राजनेताओं ने साबित किया है कि सत्तातंत्र की लगाम हाथ लगते ही उनकी दिशा अपने स्वार्थों और नफे-नुकसान के हिसाब से तय होने
 
सुभाष चन्द्र
Mar 03 2010 09:28 AM
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एफ.एम. का मिर्ची बम

देश को बजट मिल गया। सत्ता में बैठे नेताजी सब खुश हैं, उनके दोनों मंत्रियोंं ने एकदम धांसू बजट पेश किया है, तो विपक्षी नेताओं की परेशानी यह है कि बजट का पोस्टमार्टम कर वह जनता को जो उसका सड़ा-गला पार्ट दिखा रहे हैं, उसको देखकर जनता को हार्ट अटैक नहीं हो
 
सुभाष चन्द्र
टैग: बजट
Mar 02 2010 11:38 AM
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मनमोहन का इस्तीफा, सोनिया ने संभाली गद्दी

बहुत हुआ। अब नहीं चलेगा। पांच साल से अधिक का मौका दिया। दोबारा भी कुर्सी थमाई। फिर भी न देश सुधरा और न परिवार। एक ही तो बेटा था, जिसकी शादी भी नहीं करा पाए। तो भला क्यों बनाए 'रखवारÓ। ऐसे थोड़े ही होता है। लोग तो यही कहते हैं न कि सरकार का रिमोट जब हाथ
 
सुभाष चन्द्र
Feb 27 2010 02:36 PM
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विलासिता के लिए मातृत्व का सौदा

औरतों को लक्षित करके किसी मशहरोमारुफशायर ने कहा है कि- मैं कभी हारी गई, पत्थर बनी, गई बनवास भी, क्या मिला द्रोपदी, अहिल्या,जानकी बनकर मुझे। इस पंक्ति को आधुनिकता के चादर में लपेट कर आज की नारी तमाम वर्जनाओं को तोडऩा चाहती और उन्मुक्त आकाश में विचरण करना
 
सुभाष चन्द्र
Feb 25 2010 02:39 PM
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उ का है गोरी...

कभी-कभार ऐसा होता है कि मन नहीं लगता। अब नहीं लगता तो नहीं लगता। ऐसे में हम त दोइए काम करते हैं। एक कहीं घूमने भाग जाते नहि त इंटरनेट पर बैठिए। न कोनो चिक-चिक, झिक-झिक। कल अइसन ही हुआ। कुछेक दोस्तों के संग हंसी ठिठोली शुरू हो गई।अब, आप लोगन के त दिमाग
 
सुभाष चन्द्र
Feb 24 2010 11:43 AM
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तालिबान को नहीं चाहिए शांति

अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ चल रही लड़ाई के बीच तालिबान ने एक बार फिर करजई के शांति समझौते की पेशकश को ठुकरा दिया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने तालिबान के साथ शांति समझौते की बात कही थी। इससे पहले भी तालिबान ने पाकिस्तान के संग भी शांति
 
सुभाष चन्द्र
Feb 23 2010 08:53 AM
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बड़े कैनवास पर आने की कोशिश

भाजपा में नई पीढ़ी को कमान देने के प्रयास में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी जादू की डिबिया से जिस अल्पज्ञात राजनेता को लोगों के सामने पेश किया है वे नितिन गडकरी आज देश की नंबर दो पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सिंहासन पर आरूढ़
 
सुभाष चन्द्र
टैग: भाजपा
Feb 20 2010 09:41 AM
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पानी का मतलब

पानी का मतलबदुनिया को मतलब देना हैऔर आदमी को बचाना हैमतलबी होने सेपानी का मतलबएक-तिहाई भू-भाग हैलेकिन घॅंूट भर की प्यास कोसूखने नहीं देना उससे भी बड़ी चुनौती हैपानी का मतलबकविता में तैनात मतलब को छुटटी देना हैपानी का मतलब'ठंडा मतलब कोका कोलाÓ नहींप्यास
 
सुभाष चन्द्र
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Feb 19 2010 11:31 AM
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सपना बेचिए, करोड़ों कमाइए

अपने अस्तित्व काल से ही झारखंड आर्थिक विकास के लिए केंद्र के लिए मुंह ताकता रहा है। विकास की धारा यहां नहीं बहती। हर चुनाव में स्थानीय विकास मुद्दा बनता है, और चुनाव बाद सरकार गठन के बाद गौण हेा जाता है। लेकिन, इसका अर्थ यह नहीं कि यहां किसी का भी विकास
 
सुभाष चन्द्र
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कैसा वेलेंटाइन हो आपका, तय करें

प्रेम प्रदर्शन का नहीं दर्शन का विषय है...
 
सुभाष चन्द्र
Feb 13 2010 09:02 AM