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08 Mar 2010
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अतिथि तुम कब जाओगे

फिल्म समीक्षाअतिथि, तुम तो आते रहनाधीरेन्द्र अस्थानाफिल्म का नाम भले ही ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ रखा गया है लेकिन इसका संदेश यही है कि अतिथि तुम आते रहना। हिंदी के प्रख्यात व्यंग्यकार स्वर्गीय शरद जोशी की व्यंग्य रचना ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ का न सिर्फ शीर्षक
 
dhirendra asthana
Mar 06 2010 03:57 PM
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तीन पत्ती

फिल्म समीक्षा जटिल है ‘तीन पत्ती‘ का समीकरणधीरेन्द्र अस्थाना लीना यादव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तीन पत्ती‘ से ढेर सारी खबरें जुड़ी हुई हैं। इस फिल्म से दो विराट अभिनेता जुड़े हैं। हॉलीवुड के सर बेन किंग्सले, जिन्होंने रिचर्ड एटेनबरो की विश्वविख्यात फिल्म
 
dhirendra asthana
टैग: 27-02-2010
Feb 27 2010 04:21 PM
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तो बात पक्की

फिल्म समीक्षाकच्ची रह गयी ‘तो बात पक्की‘धीरेन्द्र अस्थानादुनिया जानती है कि तब्बू एक सशक्त और संवेदनशील अभिनेत्री हैं। उनके नाम के साथ अपने अपने समय की कुछ श्रेष्ठ, मर्मस्पर्शी और महत्वपूर्ण फिल्में जुड़ी हैं। वह दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भी रह
 
dhirendra asthana
Feb 20 2010 04:58 PM
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माई नेम इज खान

फिल्म समीक्षा अद्भुत और अनूठी माई नेम इज खानधीरेन्द्र अस्थानाजैसे अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पा‘ का महत्व उसे देख कर ही समझा जा सकता है ठीक उसी तरह ‘माई नेम इज खान‘ का महत्व समझने के लिए उसे देखना जरूरी है। आम मुंबईकरों ने इस फिल्म को पुलिस के पहरे में टूट
 
dhirendra asthana
Feb 13 2010 03:51 PM
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सिनेमा में भी एक प्रेम रहता है

सिनेमा में भी एक प्रेम ‘रहता‘ हैधीरेन्द्र अस्थानावैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की के साथ जिंदगी में दबे पांव दाखिल हुए ग्लोबलाइजेशन ने लाइफ स्टाइल के अलावा विचार और संवेदना को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। व्यापक जन समुदाय तक पहुंच रखने वाला विराट माध्यम
 
dhirendra asthana
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रण

फिल्म समीक्षा मीडिया के भीतर का ‘रण‘धीरेन्द्र अस्थानारामगोपाल वर्मा धंधा करने के लिए आमतौर पर फिल्में नहीं बनाते। कुछ अपवादों को छोड़ दें जैसे ‘सत्या‘, ‘भूत‘, ‘कंपनी‘, ‘सरकार‘ तो उनकी फिल्में बड़ा धंधा करती भी नहीं हैं। बाॅलीवुड में रामू का अपना एक अलग
 
dhirendra asthana
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वीर

फिल्म समीक्षासाम्राज्य के विरुद्ध वीरधीरेन्द्र अस्थानापहले दो-तीन बातें संक्षेप में। ‘वीर‘ एक पीरियड फिल्म है जिसकी कहानी फिल्म के हीरो सलमान खान ने लिखी है। प्रचारित किया गया है कि इस कहानी के साथ सलमान खान पिछले बीस साल से रह रहे थे। यह सलमान खान का एक
 
dhirendra asthana
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चांस पे डांस

फिल्म समीक्षा हीरो बनने के चांस पे डांसधीरेन्द्र अस्थानाएक युवक दिल्ली, कोलकाता, पटना, भोपाल, आगरा, कानपुर लखनऊ, इंदौर या अमृतसर से हीरो बनने के लिए मुंबई आता है। मुंबई जैसे विराट, तेज रफ्तार और अजनबी महानगर में रहने, खाने, जीने और कुछ बन जाने का दम तोड़
 
dhirendra asthana
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प्यार इंपासिबल

फिल्म समीक्षा संभव हो सकता है ‘प्यार इंपासिबल‘धीरेन्द्र अस्थानायह तो नये साल का सबसे बड़ा कमाल हो गया! फिल्म विश्लेषकों, निर्माताओं और पत्रकारों ने जिसे आज तक गंभीरता से बतौर एक्टर स्वीकार नहीं किया, उसने मर्मस्पर्शी, जीवंत और सहज अभिनय की एक चमकती और नयी
 
dhirendra asthana
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रात गयी बात गयी

फिल्म समीक्षायह बात है एक नशीली रात कीधीरेन्द्र अस्थानाएक जमाने के विख्यात अंग्रेजी पत्रकार-संपादक प्रीतिश नंदी के बैनर तले बनी फिल्म है ‘रात गयी बात गयी‘। ‘भेजा फ्राई‘ जैसी छोटे बजट की कामयाब टीम फिल्म से जुड़ी है। तो यह कैसे मान लेते कि फिल्म खराब होगी।
 
dhirendra asthana
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जश्न

फिल्म समीक्षा प्रतिभा की जीत का ‘जश्न‘ धीरेन्द्र अस्थाना महेश भट्ट कैंप की फिल्म ‘जश्न‘ इस बात का नायाब उदाहरण है कि अगर आपके पास एक साफ-सुथरी, भावनात्मक कहानी है और आपको कहानी कहने का अंदाज आता है तो एक बेहतरीन फिल्म आकार ले सकती है। अच्छी फिल्म के
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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शॉर्टकट

फिल्म समीक्षा कॉमेडी का ट्रेजिक ‘शॉर्टकट‘ धीरेन्द्र अस्थाना कॉमेडी कह कर प्रचारित की गयी अनिल कपूर प्रोडक्शन की फिल्म ‘शॉर्टकट‘ के साथ ढेर सारी ट्रेजेडी जुड़ी हुई हैं। सबसे पहली यह कि इस फिल्म के हीरो अक्षय खन्ना हैं जो बॉलीवुड में संजीदा और अर्थपूर्ण
 
dhirendra asthana
टैग: 2009
Dec 29 2009 12:57 PM
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कंबख्त इश्क

फिल्म समीक्षा कंबख्त इश्क से कहानी नदारद धीरेन्द्र अस्थाना बड़े बजट, बड़े सितारों और बड़े दावों से भरी ‘कंबख्त इश्क‘ में निर्माता-निर्देशक एक अदद छोटी कहानी भी डाल देते तो शायद इस फिल्म का मुकद्दर कुछ और हो जाता। अक्षय कुमार, करीना कपूर, सिल्वेस्टर स्टे
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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‘न्यूयॉर्क‘

फिल्म समीक्षा जिंदादिल और अर्थपूर्ण ‘न्यूयॉर्क‘ धीरेन्द्र अस्थाना यशराज बैनर से बड़े दिनों के बाद कोई इतनी जिंदादिल, तर्कपूर्ण तथा अर्थपूर्ण फिल्म आई है जिसे कम से कम दो बार देखा जा सकता है। कमर्शियल सिनेमा को किस रचनात्मक अंदाज में एक विचार में बदला
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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फिल्म समीक्षा - 99

पड़ सकते हैं ‘99’ के फेर में धीरेन्द्र अस्थाना बहुत दिनों बाद मल्टीप्लेक्स थिएटरों में सिनेप्रेमियों का जमावड़ा दिखाई पड़ा। हालांकि फिल्म निर्माताओं व थिएटर मालिकों का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। लगता है कि लड़ाई से छिटककर ‘निन्यानबे’ के निर्माताओं ने अप
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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फिल्म समीक्षा देव डी

देवदास की नयी व्याख्या है ‘देव डी‘ धीरेन्द्र अस्थाना जब बहुत पहले खबर आयी थी कि शरत बाबू के अमर चरित्र देवदास पर युवा फिल्मकार अनुराग कश्यप भी फिल्म बना रहे हैं, तभी अनुमान हो गया था कि कुछ धारा के विरुद्ध होने वाला है। लीक से अलग हट कर चलने वाले प्र
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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किसान

फिल्म समीक्षा अच्छी नीयत से बनायी गयी ‘किसान‘ धीरेन्द्र अस्थाना अचानक ऐसा लगा जैसे हम सातवें-आठवें दशक के समय में बैठ कर ‘मेरा गांव मेरा देश‘ या ‘उपकार‘ जैसी कोई फिल्म देख रहे हैं। ‘कमीने‘, ‘देव डी‘, ‘न्यूयार्क‘ जैसी प्रयोगधर्मी और यथार्थवादी फिल्मों
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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सिकंदर

फिल्म समीक्षा सिकंदर: बचपन की आंख से आतंक धीरेन्द्र अस्थाना लीक से हटकर, अर्थपूर्ण सिनेमा बनाने वालों की जमात में आतंक एक प्रिय विषय है। निर्देशक पीयूष झा ने अपनी फिल्म ‘सिकंदर‘ में आतंकवाद की इबादत को बचपन की आंख से रेखांकित करने की कोशिश की है। बस
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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अज्ञात

फिल्म समीक्षा क्या लिखें इस ‘अज्ञात‘ पर? धीरेन्द्र अस्थाना अगर राम गोपाल वर्मा ने ‘कोहरा‘, ‘बीस साल बाद‘, ‘वह कौन थी‘ या ‘गुमनाम‘ जैसी किसी पुरानी फिल्म का रिमेक बना दिया होता तो भी दर्शकों को ज्यादा रोमांच दे सकते थे। फिल्म ‘भूत‘ के बाद उनका डर का क
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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लव आज कल

फिल्म समीक्षा कल हो या आज मोहब्बत जिंदाबाद धीरेन्द्र अस्थाना निर्देशक इम्तियाज अली ने फिर साबित किया कि वह एक कल्पनाशील और बेहतर फिल्मकार हैं। ‘जब वी मेट‘ उनकी पहली हिट निर्देशित फिल्म थी जिसमें दो युवाओं के प्यार को उन्होंने बेहद दिलचस्प तथा जीवंत अ
 
dhirendra asthana
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Dec 29 2009 12:57 PM
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लक

फिल्म समीक्षा यह ‘लक‘ है लार्जर दैन लाइफ धीरेन्द्र अस्थाना पहले ही स्पष्ट कर दें कि यह फिल्म एक बहुत बड़ा रियलिटी शो है। जैसा अक्षय कुमार का टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी‘ था या जैसा इन दिनों दिखाया जा रहा ‘इस जंगल से मुझे बचाओ‘ है। टीवी के रियलिटी शोज और
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 12:57 PM
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थ्री ईडियट्स

फिल्म समीक्षा मर्जी के मानचित्र पर थ्री ईडियट्स धीरेन्द्र अस्थाना सिनेमा को सपना, सृजन और संभावना बनाने के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के शिखर पर भी खड़ा कर देने की विस्मयकारी कला का नाम है आमिर खान। हंसते गाते हुए एक मर्मस्पर्शी संदेश छोड़ जाना, मनोरंजन
 
dhirendra asthana
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रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर

फिल्म समीक्षा कहानी के घर में ‘रॉकेट सिंह‘ धीरेन्द्र अस्थाना वैसे तो यशराज, बैनर की नयी फिल्म ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर‘ को कॉमेडी फिल्म कह कर प्रचारित किया गया है लेकिन हकीकत में यह कॉमेडी से थोड़ा आगे की फिल्म है। यह उन फिल्मों की अगली कतार में
 
dhirendra asthana
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पा

फिल्म समीक्षा नये से अनुभवों की मर्मस्पर्शी ‘पा‘ धीरेन्द्र अस्थाना एक बार फिर निर्देशक आर. बालकी ने साबित किया कि वह एक बेहतर तथा मंजे हुए फिल्मकार हैं। वह कहानी को खूबसूरत और सधे हुए ढंग से पर्दे पर उतारना जानते हैं। ‘चीनी कम‘ में जहां उन्होंने बुजु
 
dhirendra asthana
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दे दना दन

फिल्म समीक्षा हंसने की चाह में 'दे दना दन' धीरेन्द्र अस्थाना हास्य सम्राट निर्देशक प्रियदर्शन का जादू देखने सिनेमा हॉल पहुंचने वाले दर्शक निराश हो सकते हैं। जैसी कि आमतौर पर कॉमेडी फिल्में होती हैं ’दे दना दन’ भी एक अतार्किक और शुद्ध हास्य फिल्म है।
 
dhirendra asthana
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कुर्बान

फिल्म समीक्षा प्रेम से परास्त होता आतंक: कुर्बान धीरेन्द्र अस्थाना एकबारगी ऐसा लगा था कि सैफ अली खान का चरित्र आतंकवाद के अक्स में जाकर घुलने ही वाला है। उस वक्त चिंता हुई थी कि ‘बुराई पर अच्छाई की विजय‘ के विरूद्ध जाकर करण जौहर यह कैसा नाकारात्मक पा
 
dhirendra asthana
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तुम मिले

फिल्म समीक्षा अर्थपूर्ण और तार्किक ‘तुम मिले‘ धीरेन्द्र अस्थाना महेश भट्ट कैंप से निकली फिल्म के बारे में इतना तो तय रहता है कि वह अर्थहीन और बेहूदी नहीं होगी। भट्ट कैंप का फंडा है छोटा बजट, छोटी स्टार कास्ट लेकिन एक प्रभावित करने वाली हृदयस्पर्शी कह
 
dhirendra asthana
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अजब प्रेम की गजब कहानी

फिल्म समीक्षा हल्की फुल्की अजब प्रेम की गजब कहानी धीरेन्द्र अस्थाना कॉमेडी का दौर है इसलिए राजकुमार संतोषी ने भी हाथ आजमा लिया। कुछ हद तक वह सफल भी हुए हैं। ‘अजब प्रेम की गजब कहानी‘ एक रोमांटिक कॉमेडी है जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि है रणबीर कपूर और कैटरीन
 
dhirendra asthana
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लंडन ड्रीम्स

फिल्म समीक्षा लंदन जो एक ड्रीम है। धीरेन्द्र अस्थाना विषय पुराना हो तो भी उसे नये तथा आकर्षक अंदाज में कैसे बयान किया जाए, यह कला निर्देशक विपुल शाह को बखूबी आती है। अपनी नयी फिल्म ‘लंडन ड्रीम्स‘ में उन्होंने अपनी इस कला का बेहतरीन नमूना पेश किया है।
 
dhirendra asthana
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एसिड फैक्ट्री

फिल्म समीक्षा भव्य लेकिन निस्तेज ‘एसिड फैक्ट्री‘ धीरेन्द्र अस्थाना निर्माता संजय गुप्ता की लंबे समय से मीडिया में छायी हुई फिल्म ‘एसिड फैक्ट्री‘ दर्शक जुटाने में कामयाब नहीं हो सकी। संजय गुप्ता की फिल्में बहुत खर्चीली, भव्य, चकाचैंध में डूबी और तेज ग
 
dhirendra asthana
Oct 14 2009 08:57 PM
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डू नॉट डिस्टर्ब

फिल्म समीक्षा डेविड धवन ने कुनबा जोड़ा धीरेन्द्र अस्थाना बड़ी पुरानी कहावत है - कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा। वशु भगनानी जैसे बड़े निर्माता की महंगी फिल्म ‘डू नॉट डिस्टर्ब‘ में निर्देशक डेविड धवन ने भी यही किया है। मुख्य धारा सिनेमा क
 
dhirendra asthana
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व्हाट्स योर राशि

फिल्म समीक्षा बारह कहानियों की एक राशिधीरेन्द्र अस्थानाआशुतोष गोवारीकर आम तौर पर लंबी फिल्में ही बनाते हैं लेकिन 'व्हाट्स योर राशि' बना कर तो उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दो घंटे का सिनेमा वाले आज के समय में पौने चार घंटे की फिल्म ... 'मेरा नाम
 
dhirendra asthana
Sep 26 2009 11:19 PM
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वांटेड

फिल्म समीक्षासलमान का नया अवतार: वांटेडधीरेन्द्र अस्थानाबहुत दिनों के बाद सिनेमाघरों में दर्शकों का जुनून और भागीदारी देखने को मिली। सहारा वन मोशन पिक्चर्स और बोनी कपूर की संयुक्त फिल्म ‘वांटेड‘ आने वाले दिनों में और ज्यादा भीड़ बटोरेगी। खतरनाक खून खराबे
 
dhirendra asthana
टैग: 2009
Sep 19 2009 05:33 PM
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बाबर

फिल्म समीक्षाअंडरवर्ल्ड का नया अध्याय: बाबरधीरेन्द्र अस्थानारामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या‘ के बाद अंडरवर्ल्ड की सरजमीन पर फिल्में तो कई आयीं लेकिन वह कोई नया सिनेमाई अहसास नहीं दे पायीं। लंबे समय के बाद अपराध फिल्मों के नक्शे पर ‘बाबर‘ के रूप में एक नया
 
dhirendra asthana
Sep 12 2009 05:08 PM
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थ्री

फिल्म समीक्षासफल नहीं हुआ ‘थ्री‘ का फंडाधीरेन्द्र अस्थानाइतनी खराब फिल्म भी नहीं है कि एक बार भी न देखी जा सके। दर्शक बटोरने के लिए विक्रम भट्ट ने ‘थ्री‘ का न्यूमरोलॉजिकल फंडा भी अपनाया था लेकिन टिकट खिड़की पर यह फंडा सफल नहीं हुआ। तीन पात्रों वाली फिल्म
 
dhirendra asthana
Sep 05 2009 05:04 PM