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05 Jun 2010
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राजनीति

फिल्म समीक्षाविराट और भव्य ‘राजनीति‘धीरेन्द्र अस्थाना प्रकाश झा की नयी फिल्म ‘राजनीति‘ सब लोगों को देखनी चाहिए। उन्हें भी जो कहते हैं कि हमें राजनीति से कोई लेना देना नहीं। हम जो गेहूं का दाना घर में लाते हैं, वह भी राजनीति से अछूता नहीं है फिर कोई
 
dhirendra asthana
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काइट्स

फिल्म समीक्षाजटिल प्रेम की ‘काइट्स‘धीरेन्द्र अस्थानाबहुत लंबे समय से इंतजार हो रहा था ‘काइट्स‘ के उड़ने और आसमान पर छा जाने का। पहले दिन इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की भीड़ भी उमड़ पड़ी। लेकिन हाॅल से निकलते समय दर्शकों के चेहरे कुछ-कुछ मायूस थे। किसी
 
dhirendra asthana
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बम बम बोले

फिल्म समीक्षागरीबी का ग्लोबल आख्यान ‘बम बम बोले‘धीरेन्द्र अस्थाना जब भारत के महान फिल्मकार सत्यजित रे विश्व के स्तर पर सराहे जाते थे तो बाॅलीवुड का एक वर्ग चिल्लाता था, ‘रे साहब भारत की गरीबी बेच रहे हैं।‘ लेकिन ये अपने प्रियदर्शन बाबू तो शुद्ध रूप से
 
dhirendra asthana
टैग: 15 मई 2010
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बदमाश कंपनी

फिल्म समीक्षादेखी जा सकती है ‘बदमाश कंपनी‘ धीरेन्द्र अस्थानाकहानी, संवाद, पटकथा, निर्देशन सब कुछ एक अच्छे एक्टर परमीत सेठी का है। निर्माता हैं यशराज बैनर यानी यश चोपड़ा-आदित्य चोपड़ा। फिल्म है ‘बदमाश कंपनी‘ जिसे सन् 1994 के समय में फिल्माया गया है। चार
 
dhirendra asthana
May 08 2010 03:55 PM
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हाउसफुल

फिल्म समीक्षाहाउसफुल कॉमेडी से फुलधीरेन्द्र अस्थाना निर्देशक साजिद खान ने कुछ दिन पहले कहा था - ‘मैं इस बात को नहीं मानता कि सिनेमा समाज को बदल सकता है। हां मैं यह जरूर मानता हूं कि सिनेमा समाज को खुश रखने का काम कर सकता है।‘ सार्थक, या अर्थपूर्ण या
 
dhirendra asthana
टैग: 1 मई
May 03 2010 04:42 PM
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अपार्टमेंट

फिल्म समीक्षाइस ‘अपार्टमेंट‘ में क्यों रहना?धीरेन्द्र अस्थानानिर्देशक जगमोहन मूंदड़ा की फिल्म थी इसलिए बड़े चाव से देखने पहुंचे थे। लेकिन ‘अपार्टमेंट‘ तो पूरी तरह खाली निकला। कोई इस ‘अपार्टमेंट‘ में क्यों रहना चाहेगा? एक अदद सशक्त कहानी तक नहीं बुनी जा
 
dhirendra asthana
टैग: 24-4-2010
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दूसरा विवाह

कम दगाबाज नहीं साहित्यकार भीधीरेन्द्र अस्थाना‘यह क्या/मैंने घर बसाया/और बेघर हो गया/घर में क्यों नहीं रह पाता प्रेम?‘ इन पंक्तियों के भीतर घर बसाने, घर बिखर जाने और फिर से घर बसाने की मुख्य चाहत छिपी है। जिंदगी बिताने के लिए एक मनपसंद जीवन साथी खोजना एक
 
dhirendra asthana
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पाठशाला

फिल्म समीक्षा पाठशाला के पाखंड का पाठधीरेन्द्र अस्थानाबच्चे देखें या न देखें मगर बच्चों के मां-बाप फिल्म ‘पाठशाला‘ जरूर देखे लें। उन्हें पता चलेगा कि शिक्षा के नाम पर कायम मुनाफाखोर प्राइवेट दुकानें उनके बच्चों के जीवन के साथ कैसा बर्बर खिलवाड़ कर रही
 
dhirendra asthana
Apr 17 2010 04:34 PM
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जाने कहां से आयी है

फिल्म समीक्षाप्यार खोजने जाने कहां से आयी हैधीरेन्द्र अस्थानाकुछ अलग हट कर बनीं बॉलीवुड की प्रेम कहानियों में ‘जाने कहां से आयी है‘ ने भी अपना नाम दर्ज कराने में कामयाबी पायी है। कहने को इसे रोमांटिक कॉमेडी कहा गया है लेकिन मूलतः यह एक ‘सीरियस लव स्टोरी‘
 
dhirendra asthana
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तुम मिलो तो सही

फिल्म समीक्षा ‘तुम मिलो तो सही‘: जीना यहांधीरेन्द्र अस्थानास्वर्गीय दुष्यंत कुमार का एक प्रसिद्ध शेर है - ‘जियें तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले / मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए।‘ जाहिर है कि यहां गुलमोहर एक प्रतीक है - जिंदगी का, जिंदगी के
 
dhirendra asthana
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वेलडन अब्बा

फिल्म समीक्षावेल डन अब्बा, वेल डनधीरेन्द्र अस्थानाश्याम बाबू की इस कॉमेडी फिल्म को देखना अपनी प्राथमिकता में शामिल करें। मजाक-मजाक में लोकतंत्र और उसके ढांचे पर टिकी पूरी शासन व्यवस्था को हिला कर रख दिया है श्याम बेनेगल ने। ढाई घंटे में बीसियों समस्याओं,
 
dhirendra asthana
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लव, सेक्स और धोखा

फिल्म समीक्षा सच की गली में ‘लव, सेक्स और धोखा‘धीरेन्द्र अस्थानाआम तौर पर साहित्य आम जनता के लिए नहीं होता। वह जनता के बारे में हो सकता है। लेकिन सिनेमा के लिए यह सिद्धांत आम तौर पर स्वीकृत नहीं है। माना जाता है कि सिनेमा आम दर्शक के मनोरंजन के लिए बनता
 
dhirendra asthana
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राइट या रांग

फिल्म समीक्षासच को तलाशती ‘राइट या रांग‘धीरेन्द्र अस्थानाकई प्रसिद्ध फिल्मों के लेखक नीरज पाठक की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है ‘राइट या रांग।‘ इस फिल्म की कई विशेषताएं हैं। पहली-बहुत दिनों बाद कोई फिल्म नैतिक मूल्यों से जुड़े कुछ असुविधाजनक सवालों से जूझ
 
dhirendra asthana
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अतिथि तुम कब जाओगे

फिल्म समीक्षाअतिथि, तुम तो आते रहनाधीरेन्द्र अस्थानाफिल्म का नाम भले ही ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ रखा गया है लेकिन इसका संदेश यही है कि अतिथि तुम आते रहना। हिंदी के प्रख्यात व्यंग्यकार स्वर्गीय शरद जोशी की व्यंग्य रचना ‘अतिथि तुम कब जाओगे‘ का न सिर्फ शीर्षक
 
dhirendra asthana
Mar 06 2010 02:57 PM
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तीन पत्ती

फिल्म समीक्षा जटिल है ‘तीन पत्ती‘ का समीकरणधीरेन्द्र अस्थाना लीना यादव द्वारा निर्देशित फिल्म ‘तीन पत्ती‘ से ढेर सारी खबरें जुड़ी हुई हैं। इस फिल्म से दो विराट अभिनेता जुड़े हैं। हॉलीवुड के सर बेन किंग्सले, जिन्होंने रिचर्ड एटेनबरो की विश्वविख्यात फिल्म
 
dhirendra asthana
टैग: 27-02-2010
Feb 27 2010 03:21 PM
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तो बात पक्की

फिल्म समीक्षाकच्ची रह गयी ‘तो बात पक्की‘धीरेन्द्र अस्थानादुनिया जानती है कि तब्बू एक सशक्त और संवेदनशील अभिनेत्री हैं। उनके नाम के साथ अपने अपने समय की कुछ श्रेष्ठ, मर्मस्पर्शी और महत्वपूर्ण फिल्में जुड़ी हैं। वह दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भी रह
 
dhirendra asthana
Feb 20 2010 03:58 PM
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माई नेम इज खान

फिल्म समीक्षा अद्भुत और अनूठी माई नेम इज खानधीरेन्द्र अस्थानाजैसे अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘पा‘ का महत्व उसे देख कर ही समझा जा सकता है ठीक उसी तरह ‘माई नेम इज खान‘ का महत्व समझने के लिए उसे देखना जरूरी है। आम मुंबईकरों ने इस फिल्म को पुलिस के पहरे में टूट
 
dhirendra asthana
Feb 13 2010 02:51 PM
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सिनेमा में भी एक प्रेम रहता है

सिनेमा में भी एक प्रेम ‘रहता‘ हैधीरेन्द्र अस्थानावैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की के साथ जिंदगी में दबे पांव दाखिल हुए ग्लोबलाइजेशन ने लाइफ स्टाइल के अलावा विचार और संवेदना को भी गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। व्यापक जन समुदाय तक पहुंच रखने वाला विराट माध्यम
 
dhirendra asthana
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रण

फिल्म समीक्षा मीडिया के भीतर का ‘रण‘धीरेन्द्र अस्थानारामगोपाल वर्मा धंधा करने के लिए आमतौर पर फिल्में नहीं बनाते। कुछ अपवादों को छोड़ दें जैसे ‘सत्या‘, ‘भूत‘, ‘कंपनी‘, ‘सरकार‘ तो उनकी फिल्में बड़ा धंधा करती भी नहीं हैं। बाॅलीवुड में रामू का अपना एक अलग
 
dhirendra asthana
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वीर

फिल्म समीक्षासाम्राज्य के विरुद्ध वीरधीरेन्द्र अस्थानापहले दो-तीन बातें संक्षेप में। ‘वीर‘ एक पीरियड फिल्म है जिसकी कहानी फिल्म के हीरो सलमान खान ने लिखी है। प्रचारित किया गया है कि इस कहानी के साथ सलमान खान पिछले बीस साल से रह रहे थे। यह सलमान खान का एक
 
dhirendra asthana
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चांस पे डांस

फिल्म समीक्षा हीरो बनने के चांस पे डांसधीरेन्द्र अस्थानाएक युवक दिल्ली, कोलकाता, पटना, भोपाल, आगरा, कानपुर लखनऊ, इंदौर या अमृतसर से हीरो बनने के लिए मुंबई आता है। मुंबई जैसे विराट, तेज रफ्तार और अजनबी महानगर में रहने, खाने, जीने और कुछ बन जाने का दम तोड़
 
dhirendra asthana
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प्यार इंपासिबल

फिल्म समीक्षा संभव हो सकता है ‘प्यार इंपासिबल‘धीरेन्द्र अस्थानायह तो नये साल का सबसे बड़ा कमाल हो गया! फिल्म विश्लेषकों, निर्माताओं और पत्रकारों ने जिसे आज तक गंभीरता से बतौर एक्टर स्वीकार नहीं किया, उसने मर्मस्पर्शी, जीवंत और सहज अभिनय की एक चमकती और नयी
 
dhirendra asthana
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रात गयी बात गयी

फिल्म समीक्षायह बात है एक नशीली रात कीधीरेन्द्र अस्थानाएक जमाने के विख्यात अंग्रेजी पत्रकार-संपादक प्रीतिश नंदी के बैनर तले बनी फिल्म है ‘रात गयी बात गयी‘। ‘भेजा फ्राई‘ जैसी छोटे बजट की कामयाब टीम फिल्म से जुड़ी है। तो यह कैसे मान लेते कि फिल्म खराब होगी।
 
dhirendra asthana
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जश्न

फिल्म समीक्षा प्रतिभा की जीत का ‘जश्न‘ धीरेन्द्र अस्थाना महेश भट्ट कैंप की फिल्म ‘जश्न‘ इस बात का नायाब उदाहरण है कि अगर आपके पास एक साफ-सुथरी, भावनात्मक कहानी है और आपको कहानी कहने का अंदाज आता है तो एक बेहतरीन फिल्म आकार ले सकती है। अच्छी फिल्म के
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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शॉर्टकट

फिल्म समीक्षा कॉमेडी का ट्रेजिक ‘शॉर्टकट‘ धीरेन्द्र अस्थाना कॉमेडी कह कर प्रचारित की गयी अनिल कपूर प्रोडक्शन की फिल्म ‘शॉर्टकट‘ के साथ ढेर सारी ट्रेजेडी जुड़ी हुई हैं। सबसे पहली यह कि इस फिल्म के हीरो अक्षय खन्ना हैं जो बॉलीवुड में संजीदा और अर्थपूर्ण
 
dhirendra asthana
टैग: 2009
Dec 29 2009 11:57 AM
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कंबख्त इश्क

फिल्म समीक्षा कंबख्त इश्क से कहानी नदारद धीरेन्द्र अस्थाना बड़े बजट, बड़े सितारों और बड़े दावों से भरी ‘कंबख्त इश्क‘ में निर्माता-निर्देशक एक अदद छोटी कहानी भी डाल देते तो शायद इस फिल्म का मुकद्दर कुछ और हो जाता। अक्षय कुमार, करीना कपूर, सिल्वेस्टर स्टे
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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‘न्यूयॉर्क‘

फिल्म समीक्षा जिंदादिल और अर्थपूर्ण ‘न्यूयॉर्क‘ धीरेन्द्र अस्थाना यशराज बैनर से बड़े दिनों के बाद कोई इतनी जिंदादिल, तर्कपूर्ण तथा अर्थपूर्ण फिल्म आई है जिसे कम से कम दो बार देखा जा सकता है। कमर्शियल सिनेमा को किस रचनात्मक अंदाज में एक विचार में बदला
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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फिल्म समीक्षा - 99

पड़ सकते हैं ‘99’ के फेर में धीरेन्द्र अस्थाना बहुत दिनों बाद मल्टीप्लेक्स थिएटरों में सिनेप्रेमियों का जमावड़ा दिखाई पड़ा। हालांकि फिल्म निर्माताओं व थिएटर मालिकों का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। लगता है कि लड़ाई से छिटककर ‘निन्यानबे’ के निर्माताओं ने अप
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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फिल्म समीक्षा देव डी

देवदास की नयी व्याख्या है ‘देव डी‘ धीरेन्द्र अस्थाना जब बहुत पहले खबर आयी थी कि शरत बाबू के अमर चरित्र देवदास पर युवा फिल्मकार अनुराग कश्यप भी फिल्म बना रहे हैं, तभी अनुमान हो गया था कि कुछ धारा के विरुद्ध होने वाला है। लीक से अलग हट कर चलने वाले प्र
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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किसान

फिल्म समीक्षा अच्छी नीयत से बनायी गयी ‘किसान‘ धीरेन्द्र अस्थाना अचानक ऐसा लगा जैसे हम सातवें-आठवें दशक के समय में बैठ कर ‘मेरा गांव मेरा देश‘ या ‘उपकार‘ जैसी कोई फिल्म देख रहे हैं। ‘कमीने‘, ‘देव डी‘, ‘न्यूयार्क‘ जैसी प्रयोगधर्मी और यथार्थवादी फिल्मों
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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सिकंदर

फिल्म समीक्षा सिकंदर: बचपन की आंख से आतंक धीरेन्द्र अस्थाना लीक से हटकर, अर्थपूर्ण सिनेमा बनाने वालों की जमात में आतंक एक प्रिय विषय है। निर्देशक पीयूष झा ने अपनी फिल्म ‘सिकंदर‘ में आतंकवाद की इबादत को बचपन की आंख से रेखांकित करने की कोशिश की है। बस
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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अज्ञात

फिल्म समीक्षा क्या लिखें इस ‘अज्ञात‘ पर? धीरेन्द्र अस्थाना अगर राम गोपाल वर्मा ने ‘कोहरा‘, ‘बीस साल बाद‘, ‘वह कौन थी‘ या ‘गुमनाम‘ जैसी किसी पुरानी फिल्म का रिमेक बना दिया होता तो भी दर्शकों को ज्यादा रोमांच दे सकते थे। फिल्म ‘भूत‘ के बाद उनका डर का क
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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लव आज कल

फिल्म समीक्षा कल हो या आज मोहब्बत जिंदाबाद धीरेन्द्र अस्थाना निर्देशक इम्तियाज अली ने फिर साबित किया कि वह एक कल्पनाशील और बेहतर फिल्मकार हैं। ‘जब वी मेट‘ उनकी पहली हिट निर्देशित फिल्म थी जिसमें दो युवाओं के प्यार को उन्होंने बेहद दिलचस्प तथा जीवंत अ
 
dhirendra asthana
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Dec 29 2009 11:57 AM
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लक

फिल्म समीक्षा यह ‘लक‘ है लार्जर दैन लाइफ धीरेन्द्र अस्थाना पहले ही स्पष्ट कर दें कि यह फिल्म एक बहुत बड़ा रियलिटी शो है। जैसा अक्षय कुमार का टीवी शो ‘खतरों के खिलाड़ी‘ था या जैसा इन दिनों दिखाया जा रहा ‘इस जंगल से मुझे बचाओ‘ है। टीवी के रियलिटी शोज और
 
dhirendra asthana
Dec 29 2009 11:57 AM
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थ्री ईडियट्स

फिल्म समीक्षा मर्जी के मानचित्र पर थ्री ईडियट्स धीरेन्द्र अस्थाना सिनेमा को सपना, सृजन और संभावना बनाने के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के शिखर पर भी खड़ा कर देने की विस्मयकारी कला का नाम है आमिर खान। हंसते गाते हुए एक मर्मस्पर्शी संदेश छोड़ जाना, मनोरंजन
 
dhirendra asthana
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रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर

फिल्म समीक्षा कहानी के घर में ‘रॉकेट सिंह‘ धीरेन्द्र अस्थाना वैसे तो यशराज, बैनर की नयी फिल्म ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर‘ को कॉमेडी फिल्म कह कर प्रचारित किया गया है लेकिन हकीकत में यह कॉमेडी से थोड़ा आगे की फिल्म है। यह उन फिल्मों की अगली कतार में
 
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पा

फिल्म समीक्षा नये से अनुभवों की मर्मस्पर्शी ‘पा‘ धीरेन्द्र अस्थाना एक बार फिर निर्देशक आर. बालकी ने साबित किया कि वह एक बेहतर तथा मंजे हुए फिल्मकार हैं। वह कहानी को खूबसूरत और सधे हुए ढंग से पर्दे पर उतारना जानते हैं। ‘चीनी कम‘ में जहां उन्होंने बुजु
 
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दे दना दन

फिल्म समीक्षा हंसने की चाह में 'दे दना दन' धीरेन्द्र अस्थाना हास्य सम्राट निर्देशक प्रियदर्शन का जादू देखने सिनेमा हॉल पहुंचने वाले दर्शक निराश हो सकते हैं। जैसी कि आमतौर पर कॉमेडी फिल्में होती हैं ’दे दना दन’ भी एक अतार्किक और शुद्ध हास्य फिल्म है।
 
dhirendra asthana
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कुर्बान

फिल्म समीक्षा प्रेम से परास्त होता आतंक: कुर्बान धीरेन्द्र अस्थाना एकबारगी ऐसा लगा था कि सैफ अली खान का चरित्र आतंकवाद के अक्स में जाकर घुलने ही वाला है। उस वक्त चिंता हुई थी कि ‘बुराई पर अच्छाई की विजय‘ के विरूद्ध जाकर करण जौहर यह कैसा नाकारात्मक पा
 
dhirendra asthana
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तुम मिले

फिल्म समीक्षा अर्थपूर्ण और तार्किक ‘तुम मिले‘ धीरेन्द्र अस्थाना महेश भट्ट कैंप से निकली फिल्म के बारे में इतना तो तय रहता है कि वह अर्थहीन और बेहूदी नहीं होगी। भट्ट कैंप का फंडा है छोटा बजट, छोटी स्टार कास्ट लेकिन एक प्रभावित करने वाली हृदयस्पर्शी कह
 
dhirendra asthana