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18 Mar 2010
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खरी बात

क्या कभी मेरी जाती का मुख्यमंत्री बनेगा हर इंसान यही सोच पाल रहा है . सभी चाहते है इस बार उसी की ज़ात का सी  एम् हो लेकिन भारत में जातिया सेकड़ो है हर प्रांत में . एक राज्य में सकडो मुख्यमंत्री तो बन नही सकते .भारतीय नागरिको की मानसिकता किस
 
vikas mehta
Mar 18 2010 05:01 PM
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मायावती की सस्ती लोकप्रियता पाने की चाहत

कल महारैली में बाबाओं प़र हमला कर मायावती मीडिया में छाई रही . वैसे भारत में जो मुद्दा मीडिया को खुराक देता है वही मायावती जी जैसे राजनितिज्ञो को भी . मायावती भली भाँती जानती है अगर अपनी छवि को चमकाना है तो खबरों में छाना होगा . लेकिन नोटों की माला और
 
vikas mehta
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सहिष्णु हिन्दू यही तो कमजोरी है

बहुत से हिन्दू  अपनी सहनशीलता को अपना आभूषण  बताते है लेकिन वास्तव में यह सहनशीलता आभूषण नही एक फ़ासी की तरह बनती जा रही है . हम जितने ज्यादा सहनशील होते है उतने ही ज्यादा  अत्याचार बढ़ते जाते है हुसैन का मामला हो या और कोई भी
 
vikas mehta
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भगवा का जादू

भारतीय साधुओ का सव्र्निम इतिहास रहा है दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले भारतीय साधुओ के पूरी दुनिया में करोड़ो अनुयाई है . बाबा रामदेव हो या आसाराम , श्री श्री रविशंकर , मुरारी बापू सभी सनातम का प्रचार कर रहे है वैसे तो यह भारत के हित में ही है लेकिन
 
vikas mehta
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जब टुकडो में बटे रहेंगे तो एसे ही पिटते रहेंगे हिन्दू.

नारी संगठन , युवा संगठन , ब्राह्मण ,, जाट , पंजाबी , मराठी , राजपूत , दलित चेतना यह कुछ झलकिया है हिन्दू समाज की जो अपने अपने हक़ के लिये लड़ रहे है अपनी जाती समाज के लिये . क्षेत्र के लिये अपने आप को उंचा साबित करने के लिये अच्छा है विदेशियों को तो इन
 
vikas mehta
Mar 07 2010 11:36 AM
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संघठित होना जरूरी है भारतीय होना जरुरी है

भगत सिंग पंजाबी है थे मेरी जाती क्षेत्र के थे , वीर शिवा जी हमारे मराठी थे वह तो मेरी जाती के थे , नेता जी बोस तो हमारे थे बंगाली थे वे ,झाँसी की रानी ब्राह्मण थी . वाह क्या खूब है बाट दिया शहीदों को भी वाह मेरी जात के लोग बहुत महान है अरे नही मेरी जात
 
vikas mehta
Mar 06 2010 01:00 PM
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जब चारो तरफ खतरा भरा

चल कही चले जहा हो शांति जहा न हो लड़ाई झगड़े हो तो बस मै और शांति लेकिन कहा कोन सी जगह कश्मीर की वादियों में अरे नही , ना बाबा ना चल चले फिर अयोध्या राम के चरणों में अरे नही समझाकर यार चले महाराष्ट्र ,  देखे महाराष्ट्रा अरे नही वो बम - वोम्ब चले
 
vikas mehta
Mar 06 2010 12:02 PM
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आज फिर से एक भक्ति आन्दोलन की जरुरत है

आज फिर से एक भक्ति आन्दोलन की जरुरत है आज स्थिति बेहद नाज़ुक मोड़ प़र है . हिन्दुओ में भी कही न कही अंग्रेजियत बढ़ रही है भारतीयता को मजबूती प्रदान करने के लिये हर एक साधू संत को साथ आना होगा हजारो जुर्म सहकर भी जो सभ्यता संजोकर रखी है उसे आज फिर एक
 
vikas mehta
Mar 06 2010 11:18 AM
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ढोंगी बाबा का बढ़ता दायरा हिन्दुओ के लिये बदनामी

वर्तमान में कई ढोंगी लोग बाबा बन रहे सही मायनों में वह बाबा नही सनातम धर्म प़र ही एक कलंक है . वे लोग पैसो के लिये हजारो सालो पुरानी सभ्यता को बदनाम कर रहे है . वैसे मेरी नजर में तो सही और सच में साधू वह होता है जो सब कुछ त्याग देता है मोह , माया , घर
 
vikas mehta
Mar 03 2010 05:08 PM
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इन सवालों के जवाब मै नही ढूंढ़ पा रहा हूँ कृपया मदद करे

हर इन्सान के अंदर के आत्मा होती है चाहे वह जिस भी मजहब का हो . लेकिन कुछ लोग इस बात को समझ लेते है और कुछ नही . हम मात्र एक कटपुतली ही है जो भगवान् का खिलोना है लेकिन फिर भी हम लोगो में एक मै होती है चाहे हिन्दू , मुस्लिम कोई भी हो . मनुष्य कभी किसी देश
 
vikas mehta
Mar 02 2010 03:17 PM
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जहा हुई सर्वधर्म की जयजयकार ' toshaam '

भले ही मोलवी लोग कैसे भी फतवे निकाले लेकिन सनातम में सभी की भलाई और मोक्ष निश्चित है . क्यों की सनातम ही सत्य है कोई मेरा मुस्लिम दोस्त या भाई इसे गलत न समझे सनातम का मतलब सभी धर्मो के प्रति श्रधा और आदर है . हम हिन्दू नही है अगर है तो सभी भारतीय ही
 
vikas mehta
Feb 27 2010 12:56 PM
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होली के पीछे छुपे हैं कई वैज्ञानिक तथ्य

भारतीय  त्योहारों प़र अन्धविश्वास जैसे आरोप लगते रहते है . कुम्भ प़र गंगा स्नान  प़र तो कभी भगवान राम के अस्तित्व प़र . अब कुछ दिनों बाद होली है जाहिर है कुछ लोग इसे ' होली खेलने वालो को पागल भी कह सकते है  लेकिन हम लोगो को उनकी
 
vikas mehta
Feb 20 2010 11:16 AM
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क्या वास्तव में भारतीय कमजोर है

क्या वास्तव में भारतीय कमजोर है बहुत से लोग हां कहेंगे और बहुत से नही . वैसे ये मिली जुली प्रक्रिया भी सही है कुछ मायनो में . अगर इतिहास को देखा जाए तो हम लोग बहुत  समय तक गुलाम रहे कभी मुगलों तो कभी अंग्रेजो के अत्याचार सहते रहे .विश्व की सबसे
 
vikas mehta
Feb 18 2010 03:09 PM
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माई नेम इज काश्मीरी ब्राह्मण

दोस्तों ' एक फिल्म बनी माई नेम इज खान उसमे दिखाया गया सभी मुसलमान आतंकी नही होते . वैसे बात भी ठीक है सभी आतंकी होते भी नही है . वैसे चक दे इंडिया ने भी कुछ एसा ही साबित किया था एसी फिल्मे बनती ही रहती है लेकिन कभी कश्मीरी ब्राह्मणों प़र फिल्म क्यों नही
 
vikas mehta
Feb 17 2010 03:08 PM
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. अगर कुछ पैसा देश की गरीबी कम करने में लगाया जाये तो देश में रोज - रोज के लड़ाई झगड़े लुट - पाट न हो .

शादियों का मोसम है डीजे की धुन प़र लोग थिरक रहे है नाच रहे है . अछे बड़े - बड़े रिसोर्ट्स , धर्मशालाओं की बुकिंग चल रही है . लाखो रुपया शादियों प़र खर्च हो रहा है कार्डो प़र , गाडियों प़र , साज - सज्जा प़र , और खाने प़र लोग जीवन को फूल एन्जॉय कर रहे
 
vikas mehta
Feb 16 2010 03:14 PM
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big isuue theese days in indiya

आज हर रोज टीवी चैनलों प़र माथा पच्ची हो रही है बहस हो रही है गंगा में डुबकी लगाना अंधविश्वास बताया जा रहा है . लेकिन सवाल यह उठता है की देश में अब यही एक मुद्दा रह गया है या जो समाज सडको प़र न उतरे उसे बदनाम करना आसान हो गया है या इन लोगो को एसा लगता है
 
vikas mehta
Feb 15 2010 11:32 AM
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गंगा में डूबकी लगाना कोई मुद्दा है ?

आज  हर रोज टीवी चैनलों प़र माथा पच्ची हो रही है बहस हो रही है गंगा में डुबकी लगाना अंधविश्वास बताया जा रहा है . लेकिन सवाल यह उठता है की देश में अब यही एक मुद्दा रह गया है या जो समाज सडको प़र न उतरे उसे बदनाम करना आसान हो गया है या इन लोगो को एसा
 
vikas mehta
Feb 15 2010 09:02 AM
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अमन की आशा '''''''' fuuuuuuuuuusssssssssssss '

२६ - ११ के बाद एक बार फिर से भारत प़र बड़ा हमला हुआ है इस बार निशाने प़र सिर्फ और सिर्फ भारत ही था  . कई न्यूज़ चैनल कहते है यहूदियों का पूजा सथल निशाना था लेकिन पूजा सथल किसी और देश में नही भारत में ही तो था . कुछ विदेशियों को आतंकियों का निशाना
 
vikas mehta
Feb 14 2010 12:05 PM
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मै भारत हूँ कभी का गुलाम हूँ

मै भारत हूँ कभी का गुलाम हूँ मेरे ही बेटो ने मुझे गुलाम बनाया आजाद भी उन्ही  में से किसी ने  करवाया ख़ुद को कुर्बान किया मेरी आन की खातिर लेकिन फिर से मुझे गुलाम बनाया मै कदम कदम समय समय प़र गुलाम होता रहा हूँ समय समय प़र आजाद होता
 
vikas mehta
Feb 13 2010 03:32 PM
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हिंदी को बर्बादी के रास्ते मत ले जाओ

हिंदी एक पहचान हुआ करती भारतीय  होने की लेकिन अब एक चाल के दोरान इसे भारतीयों से धीरे धीरे काटा जा रहा है  . अपे ही देश में जो अंग्रेजी सिख गया वह हिंदी को बोलने , सुनने को राजी नही . चार किताब पढ़ते ही
 
vikas mehta
Feb 13 2010 01:45 PM
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गरीबी मिटाई जा सकती है लेकिन मिडिया को उसका प्रचार बेहतर ढंग से करना होगा

आजादी के तरेसठ साल बाद भी ७० करोड़ लोग बीस रूपए से कम प़र गुजारा  कर रहे है . दूसरी तरफ केवल एक फिल्म को चलाने के लिए १ दिन के लाखो रूपए खर्च किये जा रहे है . और मीडिया भी दिन - भर शिव सेना - राज ठाकरे मसाला लोगो की कवरेज में लगा रहता है . मीडिया को
 
vikas mehta
Feb 12 2010 02:38 PM
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मिडिया केवल ८ या १० राज्यों को ही कवरेज कर रहा है

भारत में मेरे ख्याल से २८ राज्य है . जहा तक पढने में आया है लेकिन आजकल केवल ८ या १० राज्य ही  खबरों में आते है . कभी देहली में लूटपाट की खबर कभी विस्फोट की तो कभी हरियाणा में गोत्र विवाद की . कुछ एसा ही बाकि राज्यों के बारे में दलित शोषण तो कभी
 
vikas mehta
Feb 12 2010 12:11 PM
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टीवी वालो में होड़ है 'कविता '

टीवी वालो में होड़ है , राज एक चोर है मसाला खबर जोर है , मचा कैसा शोर है उसका नाम खान है , जनता अब बेजोर है फिल्म एक मूद्दा  है , महंगाई खामखा का शोर है पिसे भला आदमी आम , कवरेज मिलेगी शाहरुखानरोज रोज की लड़ाई , मिडिया में संजीवनी लाई
 
vikas mehta
Feb 11 2010 04:46 PM
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अतिथि देवो भवः

अतिथि देवो भवः से ही पता लगता है कितनी महान संकृति के लोग है भारतीय . लेकिन जिन लोगो के लिए ये प्रचार किया जा रहा है वह कैसे है माना वे हमे मोटी कमाई देते है भारत में घूमकर . और भारत को beautiful भी कहते है इससे हमारा भी सीना गर्व से फुला नही समाता .
 
vikas mehta
Feb 11 2010 03:29 PM
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वक्त सही है ,वक्त यही है , हर लात का जवाब तुझे लात से ही देंगे

नियत कर देंगे तेरी साफ जब मारेंगे हम तुझको लात हमने चलाई समझोता एक्स्परैस बदले में तुने मारी लात हमने तेरे खिलाडियों को खिलाया पैसो में तुने दिया हमें ताज ,ओबेराय जैसा घातसांप को दूध पिलाया हमने ,फिर भी अश्रु बहाए   हमने बहुत हुई अब तेरी
 
vikas mehta
Feb 09 2010 04:14 PM
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पाकिस्तान को किसी भी तरह की मदद बंद कर देनी चाहिए

आज तक देश प़र जितने भी हमले हुए सभी  पाकिस्तान ने किये . फिर भी उसे हर तरह की मदद हम देते रहे है . वह उस मदद का कोई एहसान नही मानता . बल्कि वो इस मदद को एक डर  समझता है हमारी कमजोरी समजता है . फिर भी हम उस सांप को पानी पिलाते है . अनाज
 
vikas mehta
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बुद्धदेव भट्टाचार्य ने मुस्लिम प्रेम बढाया

रंगनाथ मिश्र आयोग  की सिफ़ारिशो के मद्देनज़र पश्चिम बंगाल की वाममोर्चा सरकार ने सोमवार को राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यको के लिए सरकारी नोक्रियो में १० पर्तिशत आरक्षण की घोषणा कर दी .राज्य अल्पसंख्यक योग सहित विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने सरकार
 
vikas mehta
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भारत भाग्या विधाता

भारत कभी भी गरीब नही रहा और न ही आज गरीब है . राजा महाराजो के जमाने से भारत सोने की चिड़िया रहा है . लेकिन गुलामी काल में इसे लुटा गया फिर भी इसे लुट नही सके जालिम .यह आज भी सोने की चिड़िया ही है भारत .किसी भी नजरिये से देख लीजिये तभी तो सभी विदेशी
 
vikas mehta
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गाय अथवा सूअर की ख़ाल इन्हें गलाकर बनाई जाती है आइस्करीम

भाइयो और बहनों क्या आप जानते है आकर्षक मोह लेने वाली रंगीन आइस्करीम और चोकलेट आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है . हम में से हर एक आइस्करीम और चोकलेट को पसंद करता है .मूल स्त्रोत पशु सामग्री - आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे यह जानकार इनका मूल स्त्रोत विशेशतैह
 
vikas mehta
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आइस्करीम और चोकलेट आपकी सेहत के लिए खतरनाक

भाइयो और बहनों क्या आप जानते है आकर्षक मोह लेने वाली रंगीन आइस्करीम और चोकलेट आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है . हम में से हर एक आइस्करीम और चोकलेट को पसंद करता है .मूल स्त्रोत पशु सामग्री - आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे यह जानकार इनका मूल स्त्रोत विशेशतैह
 
vikas mehta
Feb 07 2010 02:31 PM
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आरक्षण या किसी भी अन्य सुविधा का लाभ उसे मिले जिसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो

स्वर्ण को कोई भी फॉर्म भरना है ड्राफ्ट लगाना होगा . ५० रूपए अथवा ५०० रूपए . अगर वही फॉर्म किसी एस सी बी सी को भरना है तो शुन्य रूपए . अथवा जो फॉर्म स्वर्ण ५०० का भरते है वही फॉर्म जिसमे स्वर्ण ५०० का ड्राफ्ट लगाते है जो अनुसूचित जाती में आते है उन्हें
 
vikas mehta
Feb 07 2010 10:30 AM
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सभी ब्लोग्गर संगठित होकर एक यूनियन बनाते है

हिंदी की सेवा करने का कोई भी मोका गवाना नही चाहिए लेकिन एक आम ब्लोग्गर हिंदी के लिए क्या कर सकता है . .........बहुत कुछ . लेकिन संगठित रहकर . ब्लोगवाणी एक एसा माध्यम है जहा आम और खास को एक ही तवज्जो मिलती है और हम सम्पूर्ण भारत तक अपनी बात पंहुचा सकते है
 
vikas mehta
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६३ साल आजादी के या गुलामी के

हमे आजाद हुए ६३ साल हो गये लेकिन हम अब फिर से गुलाम हो गये . अगर सही मायनो में देखा जाये तो हम ६३ साल पहले आजाद थे . हम अपने धर्म को जानते थे हमें सनातम का मतलब पता था . लेकिन जैसे ही अंग्रेज गये वो तो चले गये लेकिन हमें ख़ुद की आदतों को हम प़र थोप गये .
 
vikas mehta
Feb 06 2010 12:09 PM
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कहलायेगा तभी तू , कोई इस देश का भक्त महान

इन्सान नही है परिस्थियों का गुलाम पशु नही इन्सान , हो किसी भी स्थिति का गुलाम कर्म के लिए जन्मा इस धरती प़र, बन कर तू इन्सान डरना पशुओ की हरकते है, जो नही डरे वही है इन्सान प्राणों की चिंता कर , जमी जो छोड़ दे इन्सान वह पशु ही है नही है वह इन्सानदेश बटता
 
vikas mehta
Feb 05 2010 04:40 PM
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ब्लोगवाणी प़र पैसा कमाइए

बहुत से लोगो को शिकायत रहती है उन्हें लिखने का कुछ मेहनताना नही मिलता . ब्लोगवाणी के माध्यम से हमें एसी खबरे , जानकारी, देश के हालात , कविता और भी बहुत कुछ पढने को मिलता है . सभी अच्छा ही लिखते है जिसे एक बार ब्लोगवाणी का चस्का पड़ जाता है वह न्यूज़ चैनल
 
vikas mehta
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अगर मै भारत का प्रधानमन्त्री होता तो ..................

एक ऐसा कानून  बनाता जिसमे गोत्र और उपनाम की जगह भारतीय शब्द का इस्तेमाल होता . फिर कोई आशीष श्रीवास्तव नही होता ,जार्ज फर्नाडिस ,नही होता और न ही कोई अहमद अली होता . तब आशीष भारतीय ,अहमद भारतीय ,और जार्ज भारतीय, होते . फार्मों पर छपने वाले जाती का
 
vikas mehta
Feb 05 2010 03:22 PM
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इन्सान नही है परिस्थियों का गुलाम

इन्सान नही है परिस्थियों का गुलाम पशु नही,  हो किसी भी स्थिति का गुलाम कर्म के लिए जन्मा इस धरती प़र, बन कर तू इन्सान डरना पशुओ की हरकते है, जो नही डरे वही है इन्सान प्राणों की चिंता कर , जमी  जो छोड़ दे इन्सान वह पशु ही है नही है वह
 
vikas mehta
Feb 05 2010 01:10 PM
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कलर्स चैनल के कुछ धारावाहिक सच्चाई से दूर

भाइयो कलर्स का कोई भी धारावाहिक हो पहले कुछ लिखा आता है ' हम इन बुराइयों के खिलाफ है ' हमारा किसी जाती विशेष ' से इस धारावाहिक का कोई सम्बन्ध नही . लेकिन जो लोग इन धारावाहिकों को देखते है वे भली भांति जानते है किस तरह की छवि प्रस्तुत की जा रही है . अब
 
vikas mehta
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राज ने माँगा नया देश

जी हा राज अब मुख्यमंत्री के सपनो को छोड़ कर प्रधानमन्त्री के सपनो में खो गये है . जिन महाराष्ट्र के लोगो ने हमेशा ख़ुद को भारतीय समझा और भारत के लिए आजादी में भी भाग लिया उनके दिलो दिमाघ में अलग देश के बीज बोए जा रहे है . भाइयो मैंने भी और ब्लागरो की तरह
 
vikas mehta