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लखनऊ ब्लॉगर एसोसिएशन

http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/
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18 Jun 2010
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क्या तुम औरत हो ?

क्या तुम औरत हो ? यदि हाँ तो तुम बहुत गन्दी औरत हो !!!!अनगिनत सवालों ने मुझे कभी परेशान नहीं किया हर सवाल का उत्तर मै खोज लेती और अपने आप को उन सवालों के घेरे से बाहर निकाल लेती पर यह प्रश्न मेरे अंतःकरण में अनगिनत सवालों के मायाजाल में ऐसे मुझे ऐसे फंसा
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लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009- अंतिम भाग

भाग इसी प्रकार वर्ष-2009 में मेरी दृष्टि कई अजीबो-गरीब पोस्ट पर गई । मसलन -एक हिंदुस्तानी की डायरी में 10 फरवरी को प्रकाशित पोस्ट -हिंदी में साहित्यकार बनते नहीं, बनाए जाते हैं। प्रत्यक्षा पर 26 मार्च को प्रकाशित पोस्ट -तैमूर तुम्हारा घोड़ा किधर है? विनय
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लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-7

..आज जिसप्रकार हिन्दी के चिट्ठाकार अपने लघु प्रयास से व्यापक प्रभामंडल बनाने में सफल हो रहे हैं, वह भी साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद , कम संतोष की बात नही है । हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्वरुप देने में हर उस ब्लोगर की महत्वपूर्ण भुमिका है जो बेहतर
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लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-6

आईये शुरुआत करते हैं व्यंग्य से , क्योंकि व्यंग्य ही वह माध्यम है जिससे सामने वाला आहत नहीं होता और कहने वाला अपना काम कर जाता है । ऐसा ही एक ब्लॉग पोस्ट है जिसपर सबसे पहले मेरी नज़र जाकर ठहरती है ....१५ अप्रैल को सुदर्शन पर प्रकाशित इस ब्लॉग पोस्ट का
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नारीत्व का अभिशाप झेलती नारी

नारीत्व का अभिशाप झेलती नारीनारी की गौरवगाथा आकाश को चूमे या पतन से आकाश काँपे पर सत्य यही है की नारी के लिए ना सावन सूखे ना भादों हरे ! वो कल जैसी थी आज भी वैसी ही है! उसे बस त्याग , संयम तथा आत्मदान की आग में अपना व्यक्तित्व को बस जलते ही समाज देखना
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लो क सं घ र्ष !: हिंदी ब्लॉगिंग की दृष्टि से सार्थक रहा वर्ष-2009, भाग-5

आईये आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं सामाजिक , सांस्कृतिक और एतिहासिक महत्व से संवंधित विविध विषयों पर केंद्रित कुछ महत्वपूर्ण पोस्ट से । " ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति का माध्यम है। पर सार्वजनिक रूप से अपने को अभिव्यक्त करना आप पर जिम्मेदारी भी डालता है। लिहाजा,
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हम तो हैँ कफनचोर राजा ! जनता से कह दो - प्रणाम करें ।

हम तो हैँ कफनचोर राजा ! जनता से कह दो - प्रणाम करें ।गैस काण्ड होते हैंहोने दो ।पीड़ित जन रोते हैंरोने दो ।मरने दो । त्राहि त्राहिकरने दो ।..........................................आगे की बात http://kaviarunesh.blogspot.com/2010/06/blog-post_11.html के साथ
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मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब ने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।

मौलाना वहीदुददीन ख़ान साहब से सवाल किया गया कि मुहब्बत ए इलाही क्या है ?जवाब में उन्होंने कहा कि मोमिन सबसे ज़्यादा मुहब्बत अल्लाह से करता है।Greatest concern of Islam is Allah खुद को जांचिये कि क्या आपका सुप्रीम कन्सर्न अल्लाह है ?मौलाना ने यह भी बताया
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जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि कुरआन समझकर पढ़ा जाये।

मौलाना से प्रश्न पूछा गया कि कुरआन की आयतों को समझें कि उसे हिफ़्ज़ यानि कंठस्थ करें।जवाब- कुरआन को विचार करके पढ़ो। जिसे रमज़ान में तरावीह पढ़ानी हो वह हिफ़्ज़ करे।मौलाना के कहने का तात्पर्य यह था कि जीवन को दिशा तभी मिलेगी जबकि उसे समझकर पढ़ा जाये। कुरआन एक
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हाय कैसी विडंबना आज भी नारीत्व का अभिशाप झेल रही है महिला

MANU SHUKLAAWADH REGAL TIMESएक और महिला दहेज़ की भेट चढ़ ११/०६/२०१० बलराम पुर हॉस्पिटल में मौत की गोद में सो गई श्रीमती शकुन्तला के ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर उसके पति ने ज़िंदा जला दिया यह वारदात दिनांक ०५/०६/२०१० को दिन शनिवार ११:३० बजे की है! उसके पति ने
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हरिभूमि" में व्यंग्य : "चूहा तो महज़ प्राणी है"

समाचार पत्र "हरिभूमि" के आज के संस्करण में मेरा व्यंग्य - "चूहा तो महज़ प्राणी है"सुबह आँख खुली और हमने टीवी का बटन ऑन कर दिया। सामने एक खबरिया चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज़ आ रही थी कि ‘मुख्यमंत्री जी को चूहें ने काटा’। देखिये कैसा कलयुग आ गया है, अब तक तो
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तलाक लेना होगा आस

तलाक लेना होगा आसन ११\५\२०१० के अमर उजाला के पहले प्रष्टपर पर यह समाचार छपा हे ,बतायागाया हे कि हिन्दू कोड बिल में संशोधन को सरकार ने हरी झंडी देदी हे ,इस संशोधन के बाद ऐसी स्थिति में जब पति पत्नी का जीवन बोझ बन जाये तो तलाक ली और दी जा सकती हे ,इस
Jun 12 2010 07:18 AM
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उन्होंने तो पशु खाया आप ने क्या किया ??

उन्होंने तो पशु खाया आप ने क्या किया ??आज  दिल ने कहा की एक और सच बात आप सब  से सांझी की जाए |मेरा  शहर उत्तरप्रदेश सीमा से लगता है यहाँ से पशुओं को ले जाया जाता है अर्थार्त पशु तस्करी का बोर्डर ,मेरे  सीमावर्ती जिले में में एक
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पत्रकारिता के लिए अपने परिवार को दावं पर लगा दिया

पत्रकारिता वास्तव में समाज सेवा है, यदि एक पत्रकार यह ठान ले तो समाज की बुराइयों को काफी हद तक दूर कर सकता है किन्तु एक पत्रकार पत्रकारिता के लिए अपने परिवार को दावं पर लगा सकता है शायद हाँ और यही कर दिखाया पत्रकार संजीव शर्मा ने, उनके संघर्ष की कहानी
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मेरी बिटिया से अच्छी कुतिया

मैं मीडिया मंच .कॉम पढ़ रहा था उसी दौरान मेरी निगाह इस फोटो पर पड़ी. मैं यह देखकर आश्चर्य चकित रह गया रह गया की आज के आधुनिक युग में लोग अपने बच्चो को गोद में लेकर बाहर निकलने में भले ही परहेज करे किन्तु कुत्तो को लेकर निकलने गर्व की अनुभूति करते हैं. जरा
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जगन्नाथ प्रसाद भगवानदेई गर्ल्स डिग्री कॉलेज

जगन्नाथ प्रसाद भगवानदेई गर्ल्स डिग्री कॉलेज, लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। मैं इस कॉलेज की लोकेशन जानना चाहता हूँ। मैंने इन्टरनेट पर बहुत ढूँढा परन्तु कॉलेज के एक ईमेल के अलावा कुछ नहीं हाथ लगा। यदि किसी के पास इस कॉलेज का पता या फ़ोन नंबर हो तो
 
घनश्याम मौर्य
Jun 11 2010 09:44 AM
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गुज़रते एक एक पल का मज़ा लो यारों.

गुज़रते एक-एक पल का मज़ा लो यारों।मौत का खौफ अपने दिल से निकालो यारो।एक चिंगारी बुझाने से फायदा क्या है,बुझाना है तो पानी आग पर डालो यारो।यूँ ही अनजान सफ़र पर निकलने से पहले,अपनी मंजिल के निशां दिल में बसा लो यारो।अब चिरागों से ये अँधियारा नहीं जाएगा,अपने
 
घनश्याम मौर्य
Jun 10 2010 08:26 PM
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डेल्ही ब्लोग्गेर्स की इस छोटी सी ब्लागर मीट ने यह साबित कर दिया कि अगर दिल में खुलूस और सच्चाई हो तो नफ़रतों को दम तोड़ने में देर नहीं लगती।

मौलाना वहीदुददीन खान साहब से किसी ने उनके लेक्चर के बाद सवाल किया कि मुसलमान मजहब के नाम पर इतनी नफरत क्यों करता है तो उन्होंने जवाब दिया कि आज आम मुसलमान कौमी तहजीब पर है इस्लाम पर नहीं। आप किसी से पूछिये कि क्या तुमने कभी खुदा से हिदायत की दुआ करके
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भारतीय स्त्री की दशा

ख़ुद धर्मराज के हाथ यहाँ द्रोपदी लुटाई जाती है,मर्यादा पति कि रखने सीता वन भिजवाई जाती है।जो इस संसार कि जननी है उसका ही जीना मुश्किल है,जो बेटी बन कर आती है वो बहु जलाई जाती है।
 
अनवारुल हसन [AIR - FM RAINBOW 100.7 Lko]
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क्या यही न्याय है ?? - शिवम् मिश्रा

त्रासदी के 25 वर्ष बाद आया फैसला - भोपाल गैस कांड के सभी आरोपी दोषी करार भोपाल की यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी को 25 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद न्यायालय ने 23 साल की सुनवाई के बाद सोमवार को इस मामले में आठ लोगों को दोषी करार दिया और यह फैसला सुनाने
 
शिवम् मिश्रा
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बेरागी जी ,,,आदाब अर्ज़ हे ,,

बेरागी जी,, ने फिरदोस खान ,, के ब्लॉग पर एक मसला उठाया था हज़रत मुहम्मद साहब सल्लल्लहुअलेहिव्सल्लम के बारे में., उनका कहना था कि जो व्यक्ति सात साल की बच्ची से शादी करे वह धर्मगुरु केसे हो सकता हे ?, में ने वादा किया था कि इस सम्बन्ध से मै एक शोध
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ग़ज़ल

जिन ख्वाबों से नींद उड़ जाये ऐसे ख्वाब सजाये कौन \इक पल झूठी तस्कीं पा कर सारी रात गवाएं कौन \यह तन्हाई यह सन्नाटा  दिल को मगर समझाए कौन \इतनी काली रात में आखिर मिलने मिलाने  आये कौन \इक दो धोखे हों तो यारों  दिल रखने को खा भी लेंयह तो उसकी
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Jun 06 2010 04:54 PM
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'ऑपरेशन ब्लू स्टार' को हुए २६ साल

'नीला तारा' हुआ २६ साल का आज से ठीक २६ साल पहले अपने देश भारत की राजनीती के आकाश में जन्म था यह 'नीला तारा' | यह 'नीला तारा' अपने साथ इतनी उर्जा लिए था कि उस उर्जा से झुलसे लोग आज तक अपने घावों पर मरहम लगते नज़र आते है | और कुछ के घाव तो २६ सालो के बाद आज
 
शिवम् मिश्रा
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आज मैंने सचमुच का बहादुर देखा

आज २.३० को में गांव में जनगणना का कार्य कर के घर जाते वक्त यामुना आवर्धन नहर के पुल से गुजर  रहा थामेने देखा की दो लोग बहाव में बहे जा रहे है उन में एक बच्चा था और दूसरा आदमी जिस के हाथ से यह बच्चा बार बार फिसल जाता था मेरे बात समझ
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उत्तरप्रदेश में सच छापने का खामियाजा भुगत रहे पत्रकार

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती  कहती है की उत्तरप्रदेश में कानून का राज कायम है जबकि उत्तरप्रदेश में पुलिस पूरी तरह निरंकुश हो गयी है. इसका जीता जागता उदाहरण है प्रदेश के संतरविदास नगर भदोही जनपद के सुरियावां थाना क्षेत्र का जहाँ पुलिस के
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रोज़ाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ? तो 1098 (केवल भारत में ) पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है!!!!

रोज़ाना जो खाना खाते हो वो पसंद नहीं आता ? उकता गये ?  ............ ... ........... .....थोड़ा पिज्जा कैसा रहेगा ? नहीं ??? ओके ......... पास्ता ? नहीं ?? .. इसके बारे में क्या
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पर्यावरण दिवस पर डॉ श्याम गुप्त का आलेख.....

पर्यावरण प्रदूषण व नैतिकता में अन्तः सम्बन्ध ( डा.श्याम् गुप्त् ) पर्यावरण प्रदूषण व नैतिकता में क्या सम्बन्ध हो सकता है? वस्तुतः अनैतिकता स्वयम में ही एक मानसिक प्रदूषण है, और प्रदूषित मानसिकता प्रत्येक प्रकार के प्रदूषण का मूल है। प्रदूषण के जितने भी
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इंसान और दुनिया

इंसान को अपनी करनी की पूरी स्वतंत्रता ईश्वर ने दी है मगर इस करनी का अंजाम क्या हो इसकी स्वतंत्रता ईश्वर ने हमे नही दी। ये एक कठिन समस्या है जिससे इंसान इस दुनिया मे हमेशा जूझता रहा है और आगे भी रहेगा। लेकिन ईश्वर ने इंसान की रहनुमाई का पूरा इंतज़ाम किया
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श्री श्री रविशंकर की निंदा

आज समाज जिस दोराहे पर खड़ा है उसमे समझ मे नहीं आता किसे दोष दे हर आदमी एक दुसरे को शक की निगाहों से देख रहा है इसी संशय मे आदमी को अच्छे लोग भी अच्छे दिखयी नहीं पड़ते आज जब ब्लॉगजगत मे झाँका तो पता चला की श्री श्री रविशंकर को भी कुछ ब्लॉगर बुरा कह रहे है
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फूल बन कर जो चुभते रहे ऐसे काँटों को क्या नाम दें ग़ैर होते तो हम सोचते कैसे अपने को इल्ज़ाम दें

बाद मुद्दत के हम\-तुम मिले मुड़ के देखा तो हैं फ़ासले चलते\-चलते ठोकर लगी यादें वादे आवाज़ देते न काश \-२ कि: बाद मुद्दत के हम\-तुम मिले मुड़ के देखा तो हैं फ़ासले चलते\-चलते ठोकर लगी यादें वादे आवाज़ देते न काश फूल बन कर जो चुभते रहे ऐसे काँटों को क्या
 
कैरियर्स वर्ल्ड
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गीतों भरी शाम..डॉ श्याम गुप्त के दो गीत ...

(१) मेरे गीत सुरीले क्यों हैं...मेरे गीतों में आकर के तुम क्या बसे,गीत का स्वर मधुर माधुरी होगया। अक्षर अक्षर सरस आम्रमंजरि हुआ,शब्द मधु की भरी गागरी होगया। तुम जो ख्यालों में आकर समाने लगे,गीत मेरे कमल दल से खिलने लगे। मन के भावों में तुमने जो नर्तन
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लो क सं घ र्ष !: ब्लॉग उत्सव 2010

सम्मानीय चिट्ठाकार बन्धुओं,सादर प्रणाम,आज दिनांक 31.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत बीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक - ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अमर है ? http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_31.html सुमन सिन्हा की
Jun 01 2010 08:31 AM
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हनुमत प्रार्थना --बड़ा मंगल ....डा श्याम गुप्त ...

हनुमान जी – प्रार्थना (१.)(मनहरण कवित्त-३१ वर्ण,१६-१५ ,अन्त गुरु )दुर्गम जगत के हों कारज सुगम सभी , बस हनुमत गुण- गान नित करिये । सिन्धु पारि करि,सिय सुधि लाये लन्क जारि, ऐसे बजरन्ग बली का ही,ध्यान धरिए ।करें परमार्थ सत कारज निकाम भाव , । ,ऐसे उपकारी
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डॉ श्याम गुप्त का गीत ...कुछ पलों को और ....

कुछ पलों को और....कुछ पलों को और रुक जाओ सजनि तुम ,मैं प्रणय की याचना वंदन तो करलूं |रूप की रस गंध प्राणों में बसालूँ,प्रीति के मधु पल ह्रदय में बंद करलूं |ये तेरे पिक बैन पिकबयनी प्रिया,गीत के बोलों में ढालूँ, बंद भरलूँ । सुछवि आँखों में बसालूँ हे
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लो क सं घ र्ष !: बुलबुल-ए-बे-बाल व पर -2

(पंखहीन बुलबुल)जैसा कि ऊपर बताया गया ज़फ़र को मुल्क व दौलते-बादशाही बस नाम को ही मिली थी, वे सूरत ए हाल से बखूबी वाकिफ़ थे लेकिन उनके पास करने को कुछ नहीं था क्योंकि उस अहद में ज़माने ने ख़ासतौर पर हिन्दुस्तान के लिए और आमतौर पर आलमे मशरिक़ के लिए कुछ ऐसी
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तम्बाकू निषेध दिवस!

                                    आज तम्बाकू निषेध दिवस - हर वर्ष आता है और
 
रेखा श्रीवास्तव
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आपने इस्लाम और मुसलमानों की बात की तो यह समझने में देर नहीं लगी होगी कि जिन को इस्लाम ओर मुसलमानों से खुदा वास्ते का बेर हे वह तिलमिला उठे ,बिंदास को

आपने इस्लाम और मुसलमानों की बात की तो यह समझने में देर नहीं लगी होगी कि जिन को इस्लाम ओर मुसलमानों से खुदा वास्ते का बेर हे वह तिलमिला उठे ,बिंदास को बुरा लगा ,शिवम् परेशान होगएTitle:ComposeEdit Htmlफिरदोस जीआपने इस्लाम और मुसलमानों की बात की तो यह समझने
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मुक्तिका: .....डरे रहे. --संजीव 'सलिल'

मुक्तिका.....डरे रहे.संजीव 'सलिल'**हम डरे-डरे रहे.तुम डरे-डरे रहे.दूरियों को दूर कर निडर हुए, खरे रहे.हौसलों के वृक्ष पालगन-जल हरे रहे.रिक्त हुए जोड़कर बाँटकर भरे रहे.नष्ट हुए व्यर्थ वे जो महज धरे रहे.निज हितों में लीन जो समझिये मरे रहे.सार्थक हैं वे
 
आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
टैग: muktika
May 30 2010 01:38 PM