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01 Jun 2010
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अमी चरणसिंह का मुक्तिबोध की कविताओं में व्यक्त हुए भाषा के परे के बिम्बों व छवियों के चित्रांकन के लिये प्रेरित होना उत्साह भी जगाता है और आश्वस्त भी

अमी चरणसिंह तीन सीरीज़ में मुक्तिबोध की कविता 'मुझे कदम कदम पर चौराहे मिले हैं' को लेकर जो चित्र-रचना कर रहे हैं, उसके कुछेक चित्र अभी हाल ही में देखने को मिले तो मुझे बरबस ही कला-रूपों के अंतर्संबंधों पर महादेवी वर्मा की 'दीपशिखा' की भूमिका याद आ गई
 
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पारुल की चित्रकृतियों में रूपकालंकारिक छवियों को बहुत सूक्ष्मता के साथ विषयानुरूप चित्रित किया गया है

त्रिवेणी कला दीर्घा में 28 मई से शुरू हो रही पारुल आर्य के चित्रों की 'अ मैटर ऑफ फेथ' शीर्षक एकल प्रदर्शनी में व्यक्ति के विश्वास के विविधतापूर्ण रूपों की अभिव्यक्ति को देखा जा सकेगा | पारुल के चित्रों की यह चौथी एकल प्रदर्शनी है, जो करीब तीन वर्ष
 
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रवीन्द्रनाथ टैगोर के चित्रों में भौतिकता और ऐंद्रियता की विशिष्टताएं अमूर्त सौंदर्य के उन्हीं साहित्यिक सूत्रों के अधीन हैं जो स्वयं उनके काव्य को

रवीन्द्रनाथ टैगोर की आज 150 वीं वर्षगांठ शुरू हो रही है | 7 मई 1861 को जन्मे रवीन्द्रनाथ ने अस्सी वर्ष की उम्र पाई थी | 7 अगस्त 1941 को अंतिम साँस लेने से पहले एक हजार से ज्यादा कविताओं, दो हजार से ज्यादा गीतों, करीब दो दर्जन नाटकों, आठ उपन्यासों,
 
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नीनू विज के चित्र लैंडस्केप का आभास देते हुए भी दरअसल जगहों, वस्तुओं, रूपों और मानसिक गतियों का एक निचोड़ हैं

नीनू विज की गुड़गाँव के एपैरल हॉउस में स्थित एपिसेंटर कला दीर्घा में 17 अप्रैल से आयोजित होने जा रही एकल प्रदर्शनी के शीर्षक 'एण्ड सो द स्टोरी गोज ....' ने मुझे हंगरी के विख्यात कला इतिहासकार आर्नल्ड हाऊजर की वह उक्ति याद दिला दी, जिसमें उन्होंने
 
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मूर्तिभंजक चित्रकार फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा ने अपने जीवन में और अपने काम में हमेशा ही चीजों को व स्थितियों को तार्किक तरीके से समझने का प्रयास किया

धूमीमल ऑर्ट गैलरी के सौजन्य से फ्रांसिस न्यूटन सूज़ा के बहुत से काम एक साथ देखने का मौका हमें मिलने जा रहा है, तो यह सचमुच एक बड़े रोमांच की बात है | दिल्ली में धूमीमल ऑर्ट गैलरी के रवि जैन को सूज़ा के काम के एक बड़े संग्रहकर्ता के रूप में जाना-पहचाना
 
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सिद्वार्थ ने 'डेकोरेटिव काऊ' के जरिये जीवन और समाज की विविधतापूर्ण परिघटनाओं को समग्रता में तथा संवेदना के स्तर पर अभिव्यक्त किया है

रेलिगेअर आर्ट्स डॉट आई ने 'डेकोरेटिव काऊ' शीर्षक से सिद्वार्थ के चित्रों व मूर्तिशिल्पों की एक बड़ी प्रदर्शनी आयोजित की है | सिद्वार्थ भारतीय समकालीन कला के चित्रकारों में एक अलग तरह की पहचान रखते हैं | समकालीनता को परंपरा के साथ जोड़ कर देखने और
 
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परमिंदर सिंह संधू के मूर्तिशिल्पों में जीवन की लय और ताल थिरकती नज़र आती है

परमिंदर सिंह संधू के मूर्तिशिल्पों को लेकर मैं पिछले कुछ समय से लगातार एक दिलचस्प अनुभव का साक्षी और सहभागी बना हुआ हूँ | पिछले कुछ समय में, जब भी मूर्तिशिल्प कला को लेकर किसी से कोई बात हुई और या मूर्तिशिल्प कला को लेकर हो रही बातचीत का मैं हिस्सा
 
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रुचि गोयल कौरा की पेंटिंग्स जीवन के शाश्वत संदर्भों की पड़ताल का मौका देती हैं

रुचि गोयल कौरा की पेंटिंग्स विस्मित तो करती ही हैं, पेंटिंग्स में विविधतापूर्ण रचना सामग्रियों के इस्तेमाल के सवाल की तरफ भी ध्यान खींचतीं हैं | उनकी कुछेक नई पेंटिंग्स म्यूरल का-सा आभास देती हैं, तो उनकी पिछली कुछेक पेंटिंग्स को 'बुना हुआ' पाया गया था |
 
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सैयद हैदर रजा की कला वस्तुगत स्तर पर समय-काल के परे है, और शैलीगत स्तर पर पूरी तौर से आधुनिक

भारतीय अध्यात्म तथा दर्शन के अनेक गूढ़ रहस्यों के साथ-साथ जीवन की क्षणभंगुरता में आत्मिक आनंद की प्रतीति को कला का मर्म बना देने वाले सैयद हैदर रजा का आज जन्मदिन है | सैयद हैदर रजा आज अपने जीवन के अठ्ठासी वर्ष पूरे कर रहे हैं | स्थाई रूप से पेरिस स्थित
 
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नंदा गुप्ता ने केनवस पर जो किया है, उसमें हम अपनी संवेदना और समझ को बार-बार कुछ टोहता हुआ पाते हैं

नंदा गुप्ता के चित्रों की पहली एकल प्रदर्शनी 12 फरवरी से नई दिल्ली की गीता आर्ट गैलरी में शुरू हो रही है | इस प्रदर्शनी को 28 फरवरी तक देखा जा सकेगा | नंदा इससे पहले एक समूह प्रदर्शनी में अपने चित्रों को प्रदर्शित कर चुकी हैं, तथा कुछेक आर्ट गैलरीज के
 
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कोलकाता को देखते हुए, बिकास भट्टाचार्य के काम को देखना एक अलग ही तरह का अनुभव रहा

कोलकाता पहुंचा तो जरूरी कामों की फेहरिस्त में बिकास भट्टाचार्य का काम देखना भी दर्ज था, जिसे मैं किसी भी हालत में पूरा कर लेना चाहता था | बिकास भट्टाचार्य का काम यूं तो मैंने दिल्ली में कई बार देखा है, लेकिन एक बार किसी ने कहा था कि कोलकाता में घूमते /
 
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कृष्ण खन्ना के काम का सिंहावलोकन

सैफरन आर्ट द्वारा ललित कला अकादमी की कला दीर्घा में इन दिनों कृष्ण खन्ना की रेट्रोस्पेक्टिव - सिंहावलोकन प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है, जिसमें उनके पिछले पचास वर्षों में किए गये कामों में से एक सौ बीस कामों को प्रदर्शित किया गया है | प्रदर्शनी में एक
 
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अकबर पदमसी के चित्रों का भारतीय समकालीन कला के संदर्भ में एक विशेष महत्त्व है

अकबर पदमसी की नई पेंटिंग्स अगले माह मुंबई की पुंदोले आर्ट गैलरी में प्रदर्शित होंगी | इसी दौरान 'वर्क इन लेंग्वेज' शीर्षक किताब का विमोचन भी होगा, जिसमें अकबर पदमसी की कामकाज का व्यापक मूल्यांकन व विश्लेषण किया गया है | 1928 में जन्में अकबर पदमसी एक
 
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शालू जैन को 'अंतरंग अकादमी सम्मान'

अंतरंग अकादमी ने चित्रकला के लिये वर्ष 2009 के 'अंतरंग अकादमी सम्मान' के लिये शालू जैन का चयन किया है | यह घोषणा करते हुए अकादमी की प्रबंध कार्यकारिणी के अध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मीमल्ल व्यास ने बताया कि सम्मान के लिये योग्य युवा प्रतिभा का चयन करने खातिर
 
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पिकासो की वर्षों पहले कही गई बात कि 'चित्र अपनी अनुश्रुति पर ही जीवित रहेगा, किसी और चीज पर नहीं' को मैंने अपने सामने सच होते हुए पाया

अपनी अपनी नौकरियों का एक और दिन पूरा करके घर लौट रहे लोगों से खचाखच भरे ट्रेन के डिब्बे में अपने दोस्तों को जब मैंने बातों ही बातों में यूं ही बताया कि आज मैंने पिकासो के चित्रों की प्रदर्शनी देखने का काम किया है, तो मैंने महसूस किया की मेरे दोस्तों ने
 
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अक्षय आमेरिया का रचना-संसार एक नैतिक अन्वेषण है

अक्षय आमेरिया की कुछेक कलाकृतियों को महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका 'बहुवचन' के पृष्टों पर छपा देखा तो मुझे वर्षों पहले नई दिल्ली की त्रिवेणी कला दीर्घा में आयोजित हुई उनके चित्रों की एकल प्रदर्शनी की
 
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नंद कत्याल ने अपने नए चित्रों में जैसे अपनी स्मृतियों को जाँचा परखा है

नंद कत्याल ने आर्ट हैरिटेज कला दीर्घा में 'फ़ोर्म्स दैट लास्ट थ्रू टाइम' शीर्षक से प्रदर्शित अपने नए चित्रों में गुजरे समय की स्मृतियों को जिस तरह उकेरा है, उन्हें देखते हुए 'उत्तर - उत्तर आधुनिकता' पर व्यक्त किये गए उनके विचार मुझे सहज ही याद आये,
 
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सैफ़रन आर्ट की वेबसाईट में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के चित्रकार अर्पित बिलोरिया के चित्रों की सहजता में गहरे भाव - बोध का आभास होता है

अहमदाबाद के अर्पित बिलोरिया के काम को व्यापक जाँच परख से गुजरने के बाद अंततः सैफ़रन आर्ट की सूची में शामिल होने की स्वीकृति मिल गई है | सैफ़रन आर्ट की वेबसाईट पर आने के कारण अर्पित बिलोरिया का काम अब अंतर्राष्ट्रीय कला प्रेक्षकों तथा कला प्रेमियों के लिए
 
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प्रेमेन्द्र सिंह गौड़ ने अपने चित्रों में वस्तुओं को अपने अंतर्मन की किन्हीं सजीव भाव-सत्ताओं की छायाओं की तरह पकड़ा है

इंदौर के प्रेमेन्द्र सिंह गौड़ के अभी हाल में नई दिल्ली की त्रिवेणी कला दीर्घा में प्रदर्शित चित्रों को देखकर जो पहला अनुभव होता है वह यह कि आकृतिमूलक चित्रकार न होते हुए भी प्रेमेन्द्र अमूर्तन के चित्रकार नहीं हैं | यह अनुभव प्रेमेन्द्र की चित्र-रचना की
 
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जल सोचता है, अनुभव करता है और अभिव्यक्त भी करता है

गोवा-मुंबई की हाल की यात्रा में समुद्रों में जल का जो इंद्रधनुषी रूप देखने को मिला, उससे एकबार फिर यह समझ में आया कि जल को क्यों ऋषियों ने 'आपो ज्योति रसोsमृतम्' यानि ज्योति, रस और अमृत कहा था; और जल क्यों स्वभाव की निर्मलता और पारदर्शिता के उपमान के
 
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सुनियता की कला की आध्यात्मिकता

नई दिल्ली की आईफैक्स कलादीर्घा में हाल ही में प्रदर्शित सुनियता खन्ना की पेंटिंग्स ने कला और आध्यात्म के संबंध को खासे सृजनात्मक रूप में प्रस्तुत ही नहीं किया है, बल्कि एक नई मिथक-चेतना से हमें परिचित भी कराया है | आध्यात्मिक मिथकों का मौलिक व नए-नए
 
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बच्चों की चित्रकला

देवी प्रसाद की लिखी एक अनोखी पुस्तक 'शिक्षा का वाहन कला' मुझे अभी हाल ही में अचानक हाथ लगी | शिक्षाविद व कलाविद के रूप में ख्याति प्राप्त देवी प्रसाद, रवीन्द्रनाथ ठाकुर के स्कूल शान्तिनिकेतन के स्नातक थे | सेवाग्राम की आनंद-निकेतन शाला में कला विशेषज्ञ
 
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अपने आर्ट टीचर रहे जगन सिंह सैनी के चित्रों की प्रदर्शनी को भारती शर्मा का देखने आना उर्फ़ स्मृतियों में लौटना

आईफैक्स कला दीर्घा आज उस समय एक अनोखी घटना की गवाह बनी, जब भारती शर्मा करीब अड़तीस-उन्तालिस वर्ष पूर्व कानपुर के राजकीय आर्डनेंस फैक्ट्री इंटर कालेज में अपने आर्ट टीचर रहे जगन सिंह सैनी के चित्रों की प्रदर्शनी देखने पंचकुला से सीधे यहाँ पहुँची |1971 में
 
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रेनुका सोंधी का काम बुर्लेंड गैलरीज के माध्यम से पहली बार अंतर्राष्ट्रीय कला प्रेक्षकों के सामने होगा

रेनुका सोंधी की तीन पेंटिंग्स को बुर्लेंड गैलरीज ने 16 से 18 सितंबर के बीच लंदन में आयोजित हो रही अपनी एक प्रमुख प्रदर्शनी के लिये चुना है | एक चित्रकार के रूप में रेनुका सोंधी के लिये इस वर्ष की यह दूसरी प्रमुख उपलब्धि है | इसी वर्ष के शुरू में ऑल
 
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आनंद नारायण अपनी छठी एकल प्रदर्शनी देखने के लिए बुला रहे हैं

आनंद नारायण के लैंडस्केप की प्रदर्शनी नई दिल्ली की त्रिवेणी कला दीर्घा में 9 सितम्बर से शुरू हो रही है | इस प्रदर्शिनी में प्रस्तुत चित्रों को 18 सितम्बर तक देखा जा सकेगा | आनंद नारायण के चित्रों की यह छठी एकल प्रदर्शनी है | ऐसे समय में जबकी लैंडस्केप
 
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Finesse Art presents a group art exhibition "New Beginnings"

गुड़गाँव की ऐपिसेंटर कला दीर्घा में अर्चना भसीन, अनूप श्रीवास्तव, भावना रस्तोगी, कीर्ति सरकार, ललित जैन, मनीषा खन्ना, मीनू मेहरोत्रा, नंदिनी वर्मा, निधि अग्रवाल, पारुल एरन, प्रशांत सरकार, संगीता मल्होत्रा, सायरा एच, सारंग सिंगला, सीमा जिंदल, शालिनी
 
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