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अलका सैनी की कविताएँ एवं कहानियाँ

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07 Jun 2010
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असली पूँजी

असली पूँजीजिज्ञासा ने जैसे ही अपनी बेटी यक्षिता के साथ अपने पुराने कालेज के गेट मे प्रवेश किया,उसे लगने लगा मानो यह कल ही की बात हो जब उसने हायर स्कैनडरी की परीक्षा पास करके उस कालेज मे दाखिला लिया था, भले ही इस बात को बीते हुए बीस साल से ज्यादा का समय
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वजूद

अगली सुबह वह अपनी बच्ची के उठने से पहले ही नहा धोकर तैयार हो गई और सब छोटे- मोटे काम निबटा लिए ,फिर उसने बड़े चाव से अपनी बेटी को भी तैयार कर लिया और बेसब्री से अपने भाई के आने का इन्तजार करने लगी . हर रोज की तरह आज भी उसकी सास बिना कुछ कहे उसके पास दूध
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कसक

गरिमा का विवाह हुए दस वर्ष बीत चुके थे । इस बार उसके मन की इच्छा थी कि सभी घरवाले आनेवाली दीवाली उसके नए घर में एक साथ मनाएँ । नए घर में उनकी यह पहली दीवाली थी । वह उसे यादगार बनाना चाहती थी । उसके मन में दीवाली की तैयारियों को लेकर इस बार कुछ ख़ास नई
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मंजिल

प्रतीक्षा के कॉलेज का पहला दिन था, वह अपने पिताजी के साथ डी. ए. वी कॉलेज की ओर बस में जा रही थी.वह मन- ही-मन बहुत खुश थी,बस की खिडकियों से बाहर झाँककर प्रकृति की स्वछंद छटा का आनंद उठा रही थी .वह सोच रही थी कि आज के बाद उसे कभी भी स्कूल में होने वाली
Feb 07 2010 06:04 AM
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मरीचिका

अपराजिता के जीवन का यह पहला अवसर था ,जब वह किसी बड़े नेता से मिलने आई थी .उनके ऑफिस में प्रवेश करते समय वह पूर्णतया सहमी हुई थी .मगर बचपन से ही उसमें आत्म-विश्वास कूट-कूटकर भरा था .ऑफिस के बाहर खड़े दरबान ने कहा ," मैडम, विधायक साहब से मिलना चाहती हो ?
Jan 22 2010 09:56 PM