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एहसास अंतर्मन के

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15 Jun 2010
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निर्बन्ध प्रयास...

#########दे दियाजाता हैनामजबएहसासकोएकरिश्ते काझुठलाजाता हैअस्तित्वभीप्रेम केफ़रिश्ते का ...हो जाते हैंदफ़नजिए थेसाथजो क्षण ,करते हुएएक दूजे काअन्वेषण ..रह जाता हैशेष बसरिश्तों मेंबंधाएकतुलनात्मकविश्लेषण ...घुट जाता हैदमउसपृथकव्यक्तित्व कादेखा
Jun 15 2010 09:06 PM
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छद्म प्रभुता ...

############ प्रभुता स्वयं की सिद्ध करने कोहीन कहादूजे को तूनेगिरा किसी कोसोचा ,पहुंचूं ,आस्मां कोलगूं मैं छूनेपर उत्थानस्वयंका होताजब शक्तिहोतीनिज मन मेंउपक्रम होआगे बढ़ने कासजगदृष्टि सेइसजीवन में
Jun 14 2010 11:29 AM
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सितम है

जीवन साँसों के उठने गिरने का क्रम हैयही है ज़िंदगी , दिल को क्यूँ यह भ्रम हैना झूमती शाखें हैं, ना महकते फूलऐसा जीना क्या उजड़ी बहार से कम है!जश्न है गुलशन में खिलती हुई कली काबिखरा मुरझा के गुल ,नहीं उसका गम है अश्क दिखते नहीं बहते मेरी निगाहों सेछुआ जब
Jun 12 2010 06:53 PM
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मुख़्तसर लम्हा

बहुत शुरुआती दौर की रचना है..भावों को शब्दों में बंधना सीख रही थी.. कच्ची कच्ची सी रचना को आज थोड़ी सी आंच दे कर पकाने की कोशिश की है... जो भी कमी हो इंगित अवश्य करियेगा ...###############################देख रही हूँअनजान राहोंसे गुज़रतालम्हों काकारवाँकुछ
Jun 12 2010 12:14 AM
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आनंद इस पल का ...

मंजिल कोपाने कीलिप्सा में मत भूलतूमनमोहकरास्ताहरक्षण कादेगीआनंदतुझकोमन की सजगताऔरग्राह्यता अज्ञात कीफ़िक्र मेंक्यूँकरताउपेक्षाइस क्षणकीउत्सवआनंद हैहर पल मेंपहचानआँखेंखोलमन की .....
Jun 11 2010 09:24 AM
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कहूँ कैसे

 ############मेरी चुप को ना गर समझेज़ुबां से मैं कहूँ कैसेघुटा जाता है दम अब ,बिन कहे भी मैं रहूँ कैसेइश्क उनका ये मुझसे,हो सही उनकी इबादत भीतगाफुल  ,उस परस्तिश काजो की मैंने , सहूँ कैसे............................................... मायने
Jun 09 2010 05:04 PM
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जीवन क्रम ...

मानवता से प्रेम बड़ा हैमन के ऊपर मानवता ,मन के भेद- अभेद खुले जबदिखे छुपी निज दानवता हैं परिभाषाएं गढ़ी हुई जोलगती हैं सारी निस्सार थोथा जीवन जीते  हैं हम जान ना पाते इसका सार चार  तरह के मनुज धरा पर करते जीवन क्रम निर्धारितकैसा जीवन पाए मानव
Jun 08 2010 09:56 AM
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अमृत्व

#####क्षणों का मिलन अपनाकम नहीं जन्मों  के सहचर्य से  ....अमृत्व प्राप्ति को नहीं चाहिएघटभर अमृत ....
Jun 06 2010 10:01 PM
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नाम तू लिख दे

#########उदासी दिल पे छाई है ,कोई पैगाम तू लिख देछुपाना नाम गर चाहे ,यूँही बेनाम तू लिख देसफर मेरा कटे तनहा ,अगरचे है यही किस्मत रहे न संग उम्र भर का , फक़त एक शाम तू लिख देसज़ा के मुस्तहिक हैं हम, चलो तेरी निगाहों मेंनहीं  ईनाम की हसरत ,कोई इलज़ाम तू
Jun 06 2010 09:56 PM
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वह अगण्य पल.....

#####न जाने कितने पलों को गिनने के बाद मिलता है सुकूँ उस घडी जब होते हैं हम साथ गूँज उठती हैं दिशाएं झूम उठती है बहारें करते हैं दुनिया जहान  की बातें जो हो के भी नहीं होती दरमियाँ हमारेघुलते मिलते हैं अंतस हमारे उन दुनियावी बातों के ज़रिये आ जाते
Jun 04 2010 06:58 PM
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कृष्ण: ---- एक सम्पूर्ण उपासना

#############कृष्ण:----एक सम्पूर्ण उपासना( क + ऋ+ ष + ण+ अ + : )नहीं है कृष्णनाम ही केवलहर अक्षर में निहितअर्थ है'क' सूचक है कमलकांत का लक्ष्मीपति काजो प्रतीक है 'ऋ' ध्वनि होतीरकार की ,राम नामको साधेसाधक'ष' सूचकषष्ट काहोता है,ऐश्वर्यपतिविष्णु कावाचक
Jun 03 2010 02:55 PM
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तेरी हस्ती का ख़ुमार

करती हैं ,हिज्र की रातें,तप तप के बेक़रार सुकूँ दे जाते हैं ,दिल को, तसव्वुर के आबशार कभी होते हैं हम साथ ,वादी-ए -कश्मीर में गुज़रती हैं चांदनी रातें कभी ,रेगिस्तान-ए-थार बहक जाती हूँ ,महक पा के तेरी साँसों कीखयालों में ,यूँ समां हो जाता है गुलज़ार साथ
May 29 2010 06:12 PM
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चौदहवीं का चाँद

#######'कल चौदहवीं की रात थी "दिखा होगा न चाँद तो शहर में तुम्हारे भी..यही गज़ल गुनगुनाते थे तुम भर कर मेरा चेहरा अपनी हथेलियों में 'हम हंस दिएहम चुप रहे मंज़ूर था पर्दा तेरा 'और मैं इठला के पूछ बैठी थी चौदहवीं का ही क्यूँ पूनम का क्यूँ नहीं..और कहा था
May 27 2010 11:54 AM
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टूटी कली...

####तोड़ कर कली को खिलने से पहले सजा लिया गुलदस्ते में बैठक की अपने ...प्रतीक्षारतथी  कली फूलबनने केउसनेदेखे थेसपने ...नहीं मिलाप्राकृतिकअनुकूलनअंतस के सत् को पहचानने के लिए .. जो होता प्रसारित जहाँ में बन कर महक, करता कितने हृदयों को
May 26 2010 01:16 PM
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जुदाई

#####क्यूँ छलका आँखों से पानी !आवाज़ दी जो सुनाई तेरी....खुश थीइसी गुमाँ में अब तक,नहीं करती विह्वल मुझे जुदाई तेरी .......   
May 21 2010 08:28 PM
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सफर-ए -मोहब्बत

#####सफर-ए -मोहब्बत में गरबचानाचाहते होखुद कोफिसलने सेतोए हमदम...!!सूखेआंसुओं सेभीगीबेगानियत कीपगडण्डी पररखनाकदमसंभलके हरदम .....!!
May 21 2010 08:26 PM
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संदेसा पवन का...

########ले के आई पवन संदेसा पिया तेरे जब आवन काजेठ की तपती धरती को ज्यूँ हुआ भान हो सावन का ....महक उठा मन तन उपवन साखिले मोगरा और जूही चहक उठी हर डाल पे चिडियाँसंगीत बना मेरा तूहीरोम रोम हर्षित मेरा हैदरस होगा मनभावन का जेठ की तपती धरती को ज्यूँ हुआ भान
May 19 2010 11:41 AM
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मरहम...

#########इच्छा नाहो गरस्वयम के ज़ख्मों कोभरने की॥व्यर्थ हैंकोशिशेंबाहरीसंवेदनाओं केमरहम कीसभी...हो ना मनअनुकूल ,ग्राह्य ,मरहम केप्रतिअगर ,बनादेती हैज़ख़्म कोनासूरविपरीतप्रतिक्रियाभी कभी .....
May 17 2010 10:07 AM
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वह नन्ही सी बच्ची...

####मचलउठती हूँमैंसाथहोने कोतुम्हारे ..औरबुजुर्गानाअंदाजमें तुमकरा देते होएहसासमेरेबचपने का..समेट लेती हूँसबआकांक्षाएंऔरशरारतें..ओढादेती हूँचादर भीउन्हेंपरिपक्वता की ..किन्तु !!...मेरे भीतरबसीवहनन्ही सीबच्चीजोबचपन कीमासूमियतकैशौर्य कीअल्हड़ताऔरयौवन
May 15 2010 01:08 PM
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चरैवेति ! चरैवेति ! चरैवेति !........

#######चलना छोड़ाव्यर्थ ही दौड़ानिकलूं आगेइस होड़ मेंभुला दिया निजरहूँ मैं ना द्विजफँस गया कैसीजोड़-तोड़ मेंदौड दौड करदम भी फूलालक्ष्य है क्यातू यह भी भूलाचलना था जिन्हेंले कर साथगिरा उन्हें ,बढ़ा,छोड़ के हाथस्वार्थ छोड़ करआगे बढ़नातब जानेगादिल को पढनाचलना
May 13 2010 11:45 PM
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विरह तेरा प्रिय...

विरह तेरा प्रिय... ######घिर आयी बदरी,चमकी बिजुरी,बरसी बरखा फुहार..विरह तेरा प्रिय,चीर गया हिय,जैसे कोई कटार..भीगी पवन कीशीतलता भीना छू पाएतन को...कुसुमित पुष्पों कीसुवास भीना बहकाएमन को ...साथ तेरा हो,तब खिलती है,मेरे हृदय बहार...विरह तेरा प्रिय,चीर गया
May 08 2010 10:16 AM
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मत जा मंदिर-(भावानुवाद टैगोर की रचना का )

============================गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर की एक रचना का भावानुवाद करने की कोशिश करी है.. आप सब की प्रतिक्रियाएं बतायेंगी कितनी सफलता मिली...गुरुदेव की रचना साथ ही पोस्ट कर रही हूँ....मत जा मंदिर##################मत जा मंदिर,पुष्प चढ़ानेचरणों
May 08 2010 10:15 AM
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दिल की सदा...

####क्यूँअचानकचौंक पड़ती हूँ मैं!!!!सुनी हैकानों नेना कोईआहटना आवाज़परये दिल ..कह रहा हैउठ ,देख ,आये हैंवो दर पर ..पागल हैनादाँ है...बहलानेइस जिद्दी कोउठ जाती हूँऔरदेखती हूँदरवाज़ाखोल करकिखड़े हो तुममहकतेरजनीगंधाके साथदरवाज़े परदस्तकदेने को उठेहाथ लिए..हतप्रभ
May 07 2010 07:48 PM
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दस्तक

एक पुरानी रचना कुछ संशोधनों के साथ पेश कर रही हूँसुनी है बिन आहट, उस दस्तक पर ऐतबार हैअहद-ए-वस्ल हुआ नहीं ,फिर भी इंतज़ार हैगुज़रा यूँ हर लम्हा ,तस्सवुर में तेरे जानांबेकरारी के पहलू में ज्यूँ मिल गया करार हैएहसास मेरे महके ,ज्यूँ तेरे कलामों मेंसाँसों से
May 06 2010 09:48 AM
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दया - धरम

#####जन्म लेतीतितलीथी संघर्षरतझिल्ली सेबाहर आने को..कोशिशों केदौर मेंथम गयीकुछ क्षणसुस्ताने कोएक दयालुदेख रहा था,सोच,मददकर दूंतितली की ...काटीनश्तर सेदीवारेंउसनेझिल्ली कीगिरी तितलीभूमि परजा कर..नहीं पंखथे उसकेताक़तवरसंघर्ष मिलानातन कोउसके..जोरक्त
May 04 2010 04:43 PM