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शिवकुमार मिश्र और ज्ञानदत्त पाण्डेय का ब्लॉग

http://shiv-gyan.blogspot.com/
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16 Jun 2010
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ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स

मैं सरकार से नाराज हूँ. आप कह सकते हैं इसमें नया क्या है? मेरा काम ही है सरकार से नाराज होना. मैं सरकार से नाराज हूँ, यह भी कोई न्यूज है? न्यूज तो तब बनेगी जब मैं कहूँ कि ; "मैं सरकार से खुश हूँ." वैसे आपको बता दूँ कि मैं सरकार से कभी-कभी खुश भी हो लेता
Jun 16 2010 11:45 AM
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"एंडरशन को भगाने की जांच का काम हुआ पूरा, उसे भगाने के पीछे रतन नूरा."

उधर वारेन एंडरशन अपने घर के सामने बैठे बागवानी और घर के भीतर बैठे फ़ुटबाल वर्ल्डकप के मज़े ले रहा है और इधर हम उसके बारे में बतिया रहे हैं. कयास लगा रहे हैं कि किस माई के लाल ने उसे भोपाल से दिल्ली और दिल्ली से अमेरिका जाने दिया? जैसे वनोत्सव में पेड़
टैग: bhopal-genocide
Jun 15 2010 11:39 AM
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बेल अप्लिकेशन - एपिसोड २

गतांक से आगे...जै माता दी की चिंघाड़ सुनकर लोग भौचक्के हो एक-दूसरे को देखने लगे. अचानक लोगों ने देखा कि हाथ में माइक और सिर पर बाल रखे हुए हिमेश रेशम्मैया जी खड़े हैं. लोगों को समझते देर नहीं लगी कि जै माता दी नामक नारा उन्होंने ही लगाया है. वे अनु मलिक
Jun 09 2010 12:23 PM
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बेल अप्लिकेशन

राठौर साहब की बेल अप्लिकेशन रिजेक्ट हो गई. क्या कहा आपने? अंग्रेजी के शब्द इस्तेमाल करने के लिए मेरे ब्लॉग के सामने धरना दे देंगे? अच्छा चलिए सुधार कर लेता हूँ. कल राठौर साहब की जमानत की अर्जी नामंज़ूर हो गई. अब ठीक है? थैंक यू. ठीक है, ठीक है बाबा..अरे
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राष्ट्रीय ब्लॉगर दल?

"हें हें ..तो मानते हैं न कि कोई न कोई योजना है?"; प्रभु चावला जी ने हलकान भाई से अपने चिर-परिचित अंदाज़ में पूछा.हलकान भाई ने शायद सीधी बात का अक्षय कुमार एपिसोड देख रखा था. उन्होंने अक्षय कुमार ईस्टाइल में दांत चियारते हुए कहा; " हे हे ..नहीं-नहीं, ऐसी
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"टू कंडेम्न इज ह्यूमन एंड टू स्ट्रांगली कंडेम्न इज डिवाइन"

शायद मंत्री जी ने सचिव जी से कहा होगा; "बहुत हो गया अब. अब तो नक्सलियों की घोर निंदा कर ही दो."सचिव जी ने शाम को पत्रकारों के बीच दंतेवाड़ा नरसंहार की निंदा कर डाली. बोले; "वी स्ट्रांगली कंडेम्न द इंसीडेंस."इतना कहकर वे पत्रकारों की तरफ देखने लगे. चेहरा
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सत्ता की नीति कहती शर्म छोड़ मुँह मोड़ो...

बहुत दिनों बाद तुकबंदी इकठ्ठा करने बैठा तो करीब पचास ग्राम मिलावटी तुकबंदी इकठ्ठा हो गई. मिलावटी इसलिए कि हिंदी में अंग्रेजी के शब्द मढ़ दिए गए हैं. अब इसके लिए कोई हिंदी-द्रोही कह कर चैन से न बैठे तो कोई बात नहीं. मैं हिंदी की आधी सेवा करता
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ईमानदारी की बाढ़

जब से हमें श्री मनमोहन सिंह के रूप में एक ईमानदार प्रधानमंत्री मिला है, तब से देश में ईमानदारी का बड़ा बोल-बाला है. आम आदमी, ख़ास आदमी, पत्रकार, कलाकार, सलाहकार, लेखक, आलोचक, समाज सेवक, उजबक से लेकर बकबक तक अपनी बात के शुरू और अंत में यह बताना नहीं भूलते
May 11 2010 12:12 PM
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फिर से अधूरा इंटरव्यू

कल दोपहर करीब एक बजे नरोत्तम जी का फ़ोन मिला. क्या कहा? कौन नारोत्तम जी? अरे अपने नारोत्तन कालसखा जी, अरे वही मानवाधिकार वाले. हमेशा की तरह हलकाए से लग रहे थे. आवाज़ सुनकर लगा जैसे कोई आदमी मैराथन दौड़ते हुए हांफ रहा हो और बात भी करना चाहता हो. मैंने
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हमरा त फ़ोन भी टैप नहीं होता....

बहुत दिन बाद कल रतिराम जी की दूकान पर जाना हुआ. करीब डेढ़ महीने के बाद. पिछले महीने आफिस से किसी को भेजकर पान मंगवा लेते थे. मैंने सोचा मार्च महीने में जाऊँगा तो रतिराम जी मन ही मन बहुत कुछ सोच लेंगे. मन में खुद से बात भी कर सकते हैं कि; "कैसा बैठा-ठाला
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मोक्ष वाया क्रिकेट

शायद किसी गहन आध्यात्मिक क्षणों में उन्होंने अपने गुरु से पूछा होगा; "गुरुदेव, पेट्रोकेमिकल और कपड़ा बेंचकर बहुत पैसा कमाया परन्तु चित्त को शांति नहीं मिलती. कोई उपाय सुझाएँ गुरुदेव, कि चित्त को शांति मिले. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मोक्ष प्राप्ति के मार्ग में
Apr 23 2010 01:22 PM
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दो पड़ोसियों के बीच एक महापड़ोसी

हलकान भाई के घर जाना पड़ा. जाते भी न कैसे? आज आफिस के लिए तैयार हो रहा था तभी उनका फ़ोन मिला. उन्होंने बताया कि अर्जेंट है इसलिए आज ही उनसे मिलूं. जब मैंने कहा कि शाम को आता हूँ तो भड़क गए. बोले; " कहते तो बड़े भाई हो और बड़े भाई के लिए जरा सा समय नहीं
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गोली मत चलाओ खून बह सकता है.

गृहमंत्री परेशान हैं. नक्सलियों ने बड़ा हड़कंप मचा रखा है. जब चाहते हैं किसी को मार देते हैं. पुलिस से वही हथियार छीन लेते हैं जो पुलिस को आत्मरक्षा और जनता की सुरक्षा के लिए मिला है. रेल लाइन उड़ा देते हैं. रेलवे स्टेशन जला देते हैं. इतना सब करने से मन
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चेयरमैन फैक्ट्री विजिट पर हैं

"अरे, ये तो फिर आ धमके" एक असिस्टेंट जनरल मैनेजर उदास होते हुए बोला."हाँ सर, अभी बीस दिन ही तो हुए थे, जब बाबू पिछली बार आए थे. फिर अचानक कैसे पधारे. कुछ प्राब्लम है क्या?" उनके पीए ने पूछा."अरे प्राब्लम-वाब्लम कुछ नहीं है. काम धंधा कोई है नहीं. घर वालों
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ईर्ष्या पर वे कहते हैं....

आज प्रवीण पाण्डेय जी ने ईर्ष्या पर एक बढ़िया पोस्ट लिखी. बढ़िया तो वे हर विषय पर लिखते हैं. ईर्ष्या की जगह मसला सत्य या असत्य का होता तो भी वे उतना ही बढ़िया लिखते. कविता का मामला होता तो भी बढ़िया ही लिखते. ईर्ष्या पर ब्लॉगर बन्धुवों ने टिप्पणी कर दी
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बुदबुदाहट

कल सुबह आफिस आते हुए उन्हें देखा. वे सामने से चली आ रही थीं. जब उनपर नज़र पड़ी उस समय वे एक बैंक के एटीएम के ठीक सामने से गुज़र रही थीं. मैंने देखा कि अचानक वे शरमा गईं. मुझे लगा कहीं एटीएम मशीन देखकर तो नहीं शरमा गईं? लेकिन फिर सोचा कि एटीएम मशीन किसी के
Mar 15 2010 05:35 PM
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और रत्नाकर का ह्रदय परिवर्तन हो गया.

रत्नाकर बहुत परेशान थे. साथ ही टेंशन में भी थे. एक साल से ज्यादा बीत गए थे लेकिन सारी कोशिशों के बावजूद अभी तक उनका ह्रदय परिवर्तन नहीं हुआ था. ह्रदय परिवर्तन की आस में वे अब तक कुल बहत्तर डकैती, चालीस मर्डर और अस्सी राहजनी की वारदात परफार्म कर चुके थे.
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'लाफ्टीबॉय' उर्फ़ नान्हूमल बुद्धिराज साहू

बहुत दिनों से कोशिश कर रहे थे कि उनका इंटरव्यू ले लें. बहुत दिनों की कोशिश के बाद आज वे मिले हैं. ट्वीट करने से फुर्सत ही नहीं मिलती उन्हें. वे हमेशा ट्वीट करते रहते हैं और अबतक कुल एक लाख चालीस हज़ार पांच सौ बावन...सॉरी मेरे बावन लिखते-लिखते उन्होंने तीन
Feb 24 2010 11:42 AM
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पहले ही उपन्यास लिखवा लेते?

मेलबॉक्स खोला तो चिट्ठाजगत से, हमसब के प्यारे चिट्ठाजगत से एक मेल पढ़ने को मिला. लिखा था; आदरणीय एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं। क्या से क्या हो गया, और क्यों, आपका क्या सोचना है? भाग लीजिए चिट्ठाजगत.इन
Feb 20 2010 08:57 AM
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वसन्त, विद्यापति, नायिका और परसाई

ये झोंपड़ी झंझावात में न उड़े, इस लिये मैं नायिका ला रहा हूं - वाया वसन्त, विद्यापति और परसाई जी के।सारा मसाला परसाई जी के लेखन का है और भुवनेश शर्मा जी की पोस्ट  और विकीसोर्स से कबाड़ा है।कल बसन्तोत्सव था। कवि बसन्त के आगमन की सूचना पा रहा
Feb 12 2010 07:44 PM
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......आप जल्द ही बोरियत गति को प्राप्त हों.

बड़ा बवाल मचा हुआ है. पूरे भारत में दस-पंद्रह शब्द गूँज रहे हैं. शाहरुख़ खान, बाल ठाकरे, आई पी एल, माफी, महाराष्ट्र, उत्तर भारतीय, टैक्सी ड्राइवर, कराची, मन्नत, माई नेम इज खान, राहुल गाँधी, जूता, लोकल ट्रेन, ए टी एम, शरद पवार, इज्जत, धूल, पाकिस्तानी
Feb 11 2010 11:13 AM
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इन्ही के लिए सब इतना हलकान है???

शाहिद आफरीदी हैं न. अरे वो पाकिस्तान वाले. अरे वही जो यंग हैं. अरे यार, वही विश्व के नंबर एक खिलाड़ी.... अरे गजब हो.... नंबर एक क्या केवल तेंदुलकर ही हो सकते हैं? अरे वही यार, जिनको आई पी एल में नहीं लेने पर झमेला हो गया. हाँ वही-वही. दो दिन पहले
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दुर्योधन की डायरी - पेज १४०८

पुरस्कार अगर विवादास्पद न हों तो उनका महत्व घट जाता है. जिन पुरस्कारों पर विवाद न हो, ऐसे पुरस्कारों को लेने से लोग कतराने लगे हैं. कोई संस्था अगर पुरस्कार देना चाहे तो उसे पहले यह स्योर करना पड़ेगा कि पुरस्कार की वजह से विवाद पैदा होंगे ही. अगर पुरस्कार
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पकिस्तान प्रीमियर लीग

आई पी एल में खिलाड़ी बिकने के लिए तैयार थे. कुछ खरीद लिए गए तो कुछ को किसी ने पूछा ही नहीं. नहीं पूछा माने बिलकुल नहीं पूछा. जिन्हें नहीं पूछा गया ऐसे लोगों के लिए खरीदार मोल-भाव करने के लिए भी राजी नहीं हुए. वैसा भी नहीं हुआ जैसा बाज़ार ख़त्म होने के समय
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कोहरा-प्रधान जीवन

पिछले कई दिनों से जीवन कोहरा-प्रधान हो गया है. सब तरफ कोहरा ही कोहरा है. इधर कोहरा, उधर कोहरा. आसमान में कोहरा जमीन पर कोहरा. सड़क पर कोहरा. पगडंडी में कोहरा. मैदान में कोहरा पेड़ पर कोहरा. कुल मिलाकर जीवन में कोहरे का महत्व बढ़ गया है. जिनके इलाके में
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मिनिस्टर नहीं हमें ज्योतिषी दो प्रभु

अपने देश में ढेर सारी चीजों की प्रधानता बढ़ती जा रही है. कह सकते हैं प्रधानता की कसौटी पर भारत का विकास बहुत चौचक हो रहा है. अब वो ज़माना नहीं रहा जब "भारत एक कृषि प्रधान देश" हुआ करता था. अब तो भारत में तमाम और चीजों की प्रधानता बढ़ गई है. अब भारत एक
Jan 19 2010 04:21 PM
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ब्लॉगर हलकान 'विद्रोही' का राष्ट्रकवि 'दिनकर' के नाम पत्र

अब तक यह जग-जाहिर हो गया है कि मेरी ब्लागिंग में मौलिक कुछ भी नहीं. जो कुछ भी मौलिकता है वह दूसरों की है. इंटरव्यू, डायरी, न्यूजपेपर की रपट वगैरह-वगैरह, मैं कहीं से उड़ाकर, कहीं से चोरी कर लाता हूँ और छाप देता हूँ. आप लोगों में से कुछ लोगों को भी आदत पड़
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दुआ करें कि हलकान भाई के ब्लॉग पर जल्द ही कोई लाइबेरिया से पधारे.

कल हलकान भाई के घर जाना हुआ. सोचा नए साल के शुभ अवसर पर मिल आऊँ. आजकल वैसे भी नए साल, फ्रेंडशिप डे वगैरह जितने शुभ होते हैं उतना होली-दिवाली वगैरह नहीं होते. हलकान भाई के घर पहुंचे तो देखा कि अपनी ब्लागिंग टेबल पर बैठे थे. बायें हाथ में दो पन्नों वाला एक
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रतिराम भिसेज यू हैपी न्यू इयर

ई नया बरस का आता है पान-छ दिन के लिए पूरा सिस्टमे बिगाड़ देता है. ऊपर से केवल नया बरस ही नहीं आता, पुराना चल भी जाता है. ई तीन-चार दिन में अईसा-अईसा सीन सब मिलता है देखने को कि बस पूछिए ही मत. पूरा साल मुंह में पान दबाकर रखने वाला पब्लिक सब चार दिन पहिले
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.... और महाभारत का युद्ध ही नहीं हुआ.

कदाचित यह कहना उचित नहीं रहेगा वत्स. युवराज दुर्योधन, अपने तातश्री के वचन याद रखना, तुम्हारा अटल रहना सम्पूर्ण हस्तिनापुर के लिए शुभ संकेत नहीं है वत्स. शुभ संकेत नहीं है"; भीष्म पितामह दुर्योधन को समझा रहे थे. "मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ पितामह.
Dec 30 2009 01:05 PM
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"इसे अगर फांसी नहीं होगी तो बचेगा कैसे?"

बड़ा धोखा हो गया. मैंने कसाब को कव्वाल समझा और वो निकला एक्टर. क्या ज़माना आ गया है, किसी को कुछ समझिये और वो निकलता कुछ और है. बता रहा है कि मुंबई हीरो बनने आया था. स्ट्रगल करता उससे पहले ही पुलिस वालों ने पकड़ लिया और हीरो बनने के लिए कमर कस चुके नौज
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सरकार के चिंता कार्यक्रम का लेखा-जोखा

जैसा कि आप जानते हैं, सरकार का काम करने का अपना तरीका है. इस तरीके में सबसे ऊपर है चिंता व्यक्त करना. जब भी सरकार को यह साबित करना रहता है कि वो कुछ कर रही है, उसके मंत्री वगैरह किसी मुद्दे पर चिंतित हो लेते हैं. सरकार ने चिंता को बढ़ावा देने के लिए
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एक मुलाकात कृषि मंत्री के साथ

इस वर्ष मानसून की कमी हो गई है. अपना देश ही ऐसा है. यहाँ भ्रष्टाचार को छोड़कर आये दिन किसी न किसी चीज की कमी होती रहती है. इस कमी वाली वर्तमान संस्कृति में शायद कमी के लिए और कुछ नहीं बचा था इसीलिए इस बार मानसून की कमी हो गई. दाल की कमी, चीनी की कमी,
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एक और अधूरा इंटरव्यू

कल एक पत्रकार ने गृहमंत्री का एक इंटरव्यू लिया था. मैं छाप रहा हूँ. कृपया मत पूछियेगा कि मुझे कैसे मिला. पद और गोपनीयता...क्या कहा? समझ गए? गुड. इंटरव्यू बांचिये. ........................................................................ पत्रकार: नमस्क
Dec 11 2009 11:07 AM
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चंद फुटकर ब्लॉग-कवितायें

पेश है चंद फुटकर ब्लॉग-कवितायें. इन्हें लिखने की तथाकथित प्रेरणा हाल ही में मिली. हाल ही में मिली? नहीं-नहीं, ब्लॉग पर मिली. टिप्पणियां करने के लिए रखे जाने वाले नामों से. अब तो आप मानेंगे न कि जिसे कविता लिखना होता है उसे प्रेरणा के लिए भटकना नहीं प
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जस्टिस तुलाधर कमीशन की रिपोर्ट

दस दिन तो लग गए जस्टिस तुलाधर कमीशन की रिपोर्ट उलटने-पलटने में. कुल ९८ वाल्यूम की रिपोर्ट. लगभग दो वाल्यूम प्रति साल का हिसाब पड़ता है. क्या कहा आपने? मैंने यह समीकरण कैसे बैठाया? अरे भैया, सन १९६४ में कमीशन बनाया गया था. हर वाल्यूम २१६ पेज का. रिपोर
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जस्टिस तुलाधर कमीशन

जस्टिस लिब्रहान ने अपनी सत्रह साला तहकीकात के बाद रिपोर्ट तो पहले ही दे दी थी लेकिन वही रिपोर्ट अब जाकर लीक हुई है. रिपोर्ट लीक के मामले में लीक करने वाले इसबार चूक से गए लगे. ये लीक भी कोई लीक है? असली लीक तो वह होती कि जस्टिस लिब्रहान अपनी गाड़ी मे
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जस्टिस तुलाधर की रिपोर्ट लीक

जस्टिस तुलाधर की रिपोर्ट लीक हो गयी है। इस बार विवरण इण्डियन एक्स्प्रेस में नहीं, इस ब्लॉग पर प्रस्तुत करेंगे पण्डित शिवकुमार मिश्र। आप कल तक धीरज रखें। हो सके तो टिप्पणी दे कर पण्डित शिवकुमार मिश्र को प्रेरित करें जल्दी पोस्ट करने को। टिप्पणी में उन
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आखिर ब्लॉगर हैं..हर स्थिति में अपना झंडा गडेगा ही.

इलाहबाद में ब्लॉगर संगोष्ठी हो गई. जब संगोष्ठी का पता चला तो एक बार मन में आया कि; 'अगर मुझे निमंत्रण न मिला तो एक 'सॉलिड पोस्ट' लिखने का बड़ा सॉलिड बहाना हाथ लगेगा.' यह कहते हुए 'सॉलिड पोस्ट' लिख डालूँगा कि; 'जिन्हें निमंत्रण भेजा गया उनके चुनाव का
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ओलंपिक और एथेलेटिक्स अमरत्व

सुरेश कलमाडी को हम सब जानते हैं. न जाने कितने वर्षों से वे भारतीय एथेलेटिक्स और भारतीय ओलंपिक संघ की गाड़ी हांक रहे हैं. भारत में एथेलेटिक्स और ओलंपिक की बात होती है तो एक ही चेहरा आँख के सामने घूम जाता है और वो है सुरेश कलमाडी जी का. ठीक वैसे ही जैसे
Oct 21 2009 01:07 PM