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08 Mar 2010
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अपर्णा की तलाश

ये दो नज्में इमरोज़ जी ने भेजी है...........एक अपर्णा की है, और दूसरी नज़्म अपर्णा की नज़्म के जवाब में इमरोज़ की है .अपर्णा का पता उनसे खो गया और वे यह नज़्म उसे भेज नहीं सके......यह उनका प्रयास है मेरे द्वारा उन्हें ढूँढने का......मुझे विश्वास है- यह
 
रश्मि प्रभा...
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मेरी फितरत

विपरीत लहरों पर तैरना मेरी फितरत रहीहादसों में ख़ुशी तलाशना मेरी फितरत रहीआंसुओं के मध्य आबेहयात मिलनामेरी फितरत रही तभी-ज़िन्दगी मेरे साथ है
 
रश्मि प्रभा...
Mar 04 2010 01:19 PM
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होली की शुभकामनायें

रंग प्यार का रंग आशीष कारंग हमारी भाषा कारंग हमारे देश कारंग हमारे कर्मठ जवानों का रंग हमारी आन-बान-शान का रंग हमारे संस्कारों का ....आओ हम अपनी नफरत का दहन करेंऔर इन रंगों से अपना आज रंग लें..............होली की शुभकामनायें
 
रश्मि प्रभा...
Feb 25 2010 08:47 PM
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.....!

मैं अकेली कहाँऔर कब?नज्में मेरे पास सांसें लेती हैं
 
रश्मि प्रभा...
Feb 23 2010 01:59 PM
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खाकर देखो तो

गोल-गोल रोटियों पर आज एक नज़्म लिखा हैदाल में ख़्वाबों का तड़का लगासब्जी में ख्वाहिशों का नमक मिलाया हैखाकर देखो तोज़िन्दगी क्या कहती है
 
रश्मि प्रभा...
Feb 20 2010 02:34 PM
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सुकून

ना किसी डाकिये की ज़रूरत हैना कबूतर की मेरे पंख हैं ना !उड़कर आना अपनी चोंच में दबे शब्दतुम्हारी मेज पर रखनासुकून देता हैऔर अगली लम्बी उड़ान कीप्रबल इच्छा होती है
 
रश्मि प्रभा...
Feb 18 2010 01:33 PM
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दिल का हिस्सा

मैं दिल का वह हिस्सा हूँजिससे तुम कहो ना कहोवह सुनता हैधड़कता है.....कई बार आँखें नम होती हैंपलकों पे ठहरी बूंद तुम्हारी परछाईं बन जाती है
 
रश्मि प्रभा...
Feb 14 2010 10:10 PM
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कुछ कह दो

कुछ भी पुराना नहीं कुछ भी अनजाना नहीं कुछ भी अनकहा नहींकुछ भी अनसुना नहीं फिर भी क्यूँ हैं हम अजनबी सेक्यूँ ओढ़ ली है हमनेख़ामोशी की चादरेंक्यूँ हमने अपनी-अपनी सरहदें बना ली हैंप्यार की बातें भी तो हमने ही की थीं एहसास की बातें हमने ही की थीं तो फिर
 
रश्मि प्रभा...
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ख्वाब पूरे होंगे

कहता है वोख्वाब होते ही हैं सच होने के लिएयूँ ही ख्वाब आँखों में नहीं उतरतेसुनते ही एक अदृश्य डोरमेरी पाजेब बन जाती हैरुनझुन की मिठास बनउसके आँगन मेंपूजा के दीप जलाती हैकहता है जो वह सचतो ये ख्वाब भी पूरे होंगे !
 
रश्मि प्रभा...
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इमरोज़ की कलम से इमरोज़

नज्मों की दोस्ती लम्हा-दर-लम्हा बढ़ीकुछ तुमने कहाकुछ हमने कहापलों की गतिविधियाँ बढीं ...................इन्हीं गतिविधियों के अंतर्गत इमरोज़ की कलम से इमरोज़
 
रश्मि प्रभा...
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'अनुभूतियाँ' दीपक चौरसिया 'मशाल' का काव्य-संग्रह

'अनुभूतियाँ' दीपक चौरसिया 'मशाल' का काव्य-संग्रह - अनुभूतियों के दस्तावेज़ हैं. एक-एक एहसास कदम-दर-कदम हमें बहुत कुछ सोचने पर विवश करता है - कवि का परिवेशीय व्यक्तित्व उसकी कलम की आत्मा है. जीवन के हर रंग रचनाओं में दृष्टिगत हैं ......दीपक जी की पहली
 
रश्मि प्रभा...
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मुश्किल है !

टूटते तारे ने कहा'मांगो मुझसेजो चाह लो, मिलेगा 'मैंने कहा -'तुम फिर से अपनी जगह पर आ जाओ'धरती में समाहित ताराबोला- मुश्किल है !( कहने का तात्पर्य यह कि बड़ी-बड़ी इच्छाओं को पूरी करनेवाला भी खुद के लिए असमर्थ होता है )
 
रश्मि प्रभा...
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चिठ्ठी आई है

यादों के गाँव से चिठ्ठी आई हैयाद किया है अमरुद के पेड़ ने नन्हे पैरों की चहलकदमी कोजो उसकी पतली शाखाओं पर भी मचलते थेयाद किया है गोलम्बर नेजिसके किनारे रजनीगन्धा की खुशबू हुआ करती थीअब उसके किनारे दरक चले हैंकहीं कोई खुशबू नहींयाद किया है आँगन ने जहाँ
 
रश्मि प्रभा...
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प्रत्यंचा

मन की धाराएँतटों से टकराकरजब गुमसुम सी लौटती हैं तो दिशा बदलक्षितिज के विस्तार में बढ़ने लगती हैं और धरती से आकाश तकअपनी प्रत्यंचा खींच देती हैं
 
रश्मि प्रभा...
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अकेलापन क्यूँ?

अरसा............जाने कितना अरसा हुआकोई चिठ्ठी लेकर डाकिया नहीं आयालेटर बौक्स में पड़े रहे-बिजली बिल, मोबाइल बिलया कुछ प्रचार पत्र......जानती हूँ,सबकी अपनी दुनिया हैअपनी खुशियाँ, अपने दायरेअपने गिने-चुने सम्बन्ध-तो फिर ये अकेलापन क्यूँ?
 
रश्मि प्रभा...
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एक अलग पगडंडी

तराजू के पलड़े की तरह दो पगडंडियाँ हैं मेरे साथ एक पगडंडी मेरे जन्मजात संस्कारों की एक परिस्थितिजन्य ! मैंने तो दुआओं के दीपक जलाये थे प्यार के बीज डाले थे पर कुटिल , विषैली हवाओं ने निर्विकार,संवेदनाहीन पगडंडी के निर्माण के लिए विवश किया ...........
 
रश्मि प्रभा...
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नज़्म और रूह !

कभी फुर्सत हो तो आना करनी हैं कुछ बातें जानना है कैसी होती है नज्मों की रातें..... कैसे कोई नज़्म रूह बन जाती है और पूरे दिन,रात की सलवटों में कैद हो जाती है ! पूरा दिन ना सही एक पल ही काफी है प्यार को पढ़ने के लिए नज़्म से रूह रूह से नज़्म में बदलने
 
रश्मि प्रभा...
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प्राण-संचार

तुम्हारे चेहरे की धूप तुम्हारी आँखों की नमी तुम्हारी पुकार की शीतलता मुझमें प्राण- संचार करते गए ........ दुःख के घने बादलों का अँधेरा मूसलाधार बारिश सारे रंग बदरंग थे ! पर तुमने अपनी मुठ्ठी में मेरे लिए सारे रंग समेट रखे थे मैं रंगविहीन हुई ही नहीं
 
रश्मि प्रभा...
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ज़िन्दगी

ज़िन्दगी कभी समतल ज़मीं पर नहीं चलती उस के मायने खो जाते हैं तूफानों की तोड़फोड़ ज़िन्दगी की दिशा बनती है रिश्तों के गुमनाम अनजाने पलों से आत्मविश्वास की लौ निकलती है
 
रश्मि प्रभा...
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मैं साथ रहूंगी

मैं खुद एक शब्द हूँ चाहो तो नज़्म बना लो बना लो अपनी ग़ज़ल कोई गीत कोई आह्लादित सोच कोई दुखद कहानी.... यकीन रखो मैं साथ रहूंगी
 
रश्मि प्रभा...
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बस मैं हूँ !

महत्वाकांक्षाओं के पंख लिए मैं ही धरती बनी बनी आकाश हुई क्षितिज झरने का पानी गंगा का उदगम सितारों की टिमटिमाती कहानी चाँद सा चेहरा पर्वतों की अडिगता नन्ही लडकी के घेरेवाली फ्रॉक - सी घाटी चिड़ियों की चहचहाहट सूर्योदय का गान तितलियों के बिखरे रंग उमड़
 
रश्मि प्रभा...
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मोक्ष

वो तुम्हारे अपने नहीं थे जिन्हें साथ लेकर तुमने सपने सजाये सूरज मिलते सब अपनी रौशनी के आगे एक रेखा खींच ही देते हैं ! शिकायत का क्या मूल्य या इन उदासियों का ? 'आह' कौन सुनता है ? वक्त ही नहीं ! गर्व करो- तुम आज अकेले हो ! साथ है वह सत्य जिसे कटु मान
 
रश्मि प्रभा...
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आकाश को मुठ्ठी में भर लो ..

तुम्हें देखा तो वह लडकी याद आई जो फूलोंवाली फ्रॉक पहन बसंत का संदेशा देती थी आम्र मंजरों में कोयल की कूक बन मुखरित होती थी जेठ की दोपहरी में आसाढ़ के गीत गुनगुनाती रिमझिम बारिश में कलकल नदी की रुनझुन धार - सी किसानों के घर की सोंधी खुशबू में ढल जाती
 
रश्मि प्रभा...
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चाँद रोया !!!

उन्हें मालूम था कुछ सीढियां लगाकर मैं चाँद से बातें कर लूँगी.... बड़ी संजीदगी से कहा- 'सीढियां रखना उचित नहीं चोर-उचक्कों का ख़तरा होगा' ........ फिर उनकी नज़र मेरी सोच के वितान पर पड़ी इधर-उधर देखते हुए उन्होंने प्रश्न-चर्चा शुरू की.... अजीबोगरीब प्
 
रश्मि प्रभा...
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एक व्यक्तित्व

एक व्यक्तित्व , एक शक्स .... मैं मिली, और मुझे लगा कि अगर मैंने इसे अपनी कलम में पनाह नहीं दी तो मेरे लेखन के साथ न्याय नहीं होगा ! नाम ? नाम पहचान का पहला अवलम्ब होता है, पर मैं उसे सिर्फ शब्दों का स्नेह, शब्दों का मान देना चाहती हूँ, ........... आप
 
रश्मि प्रभा...
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!!!

मेरे शब्दों की चोरी हो गयी कोई दस्तक कोई नज़्म कोई ख्वाब कोई बादल कोई नाव कोई रूह बन हवाओं में तैर रहे हैं ................. कोई रपट नहीं लिखवाई है अब तक अपने हैं शाम होते लौट आयेंगे मेरे बगैर उन्हें भी नींद नहीं आती कोई सपने नहीं बनते !!!
 
रश्मि प्रभा...
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कंजूसी कैसी??????????

आपने 'गोलमाल' फिल्म देखी है? उत्तपल दत्त का इरीटेशन याद है? नहीं?- तो फिर देखिये ........हाँ,हाँ जिसके नायक अमोल पालेकर थे. फिल्म बहुत अच्छी है,आपका भरपूर मनोरंजन करेगी,लेकिन इस लेख के द्बारा मैं इस फिल्म को प्रमोट नहीं कर रही हूँ, बल्कि उत्तपल दत्त
 
रश्मि प्रभा...
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भावनाओं के राग !

शब्द- एक देश से दूसरे देश एक शहर से दूसरे शहर एक दिल से दूसरे दिल तक जाते-जाते या तो अपने अर्थ अपनी गरिमा खो देते हैं या फिर निखर जाते हैं ......... भावनाओं को देखना-समझना आसान नहीं होता ! जिस पात्र को हम धरोहर समझते हैं कई जगहों पर उसका कोई मूल्य नह
 
रश्मि प्रभा...
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मेरी नज़्म............

मेरी नज्मों ने तुम्हें आवाज़ दी है ओस की तरह तुम आओ सुबह की पहली किरण में तुम्हें देखूं आंखों में काजल बनाकर दिन गुजार लूँ फिर शरद चांदनी में तुम्हारी राह देखूं..........! मेरी नज्मों ने तुम्हें आवाज़ दी है पर्वतों पर बादल बन उतर आओ छू जाओ मुझे मैं भ
 
रश्मि प्रभा...
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सफाई अभियान और लक्ष्मी का स्नेह,प्रकोप !

तमाम सुधिजनों को दीपावली की शुभकामनाओं के साथ एक सत्य की सौगात ) साप्ताहिक योजना में घर की सफाई हो रही है हर कोने की गन्दगी हटाई जा रही है छोटी-बड़ी हर दुकानें सज गई हैं एक साल की धूल हटाकर लक्ष्मी की प्रतीक्षा है सबको ! .............................
 
रश्मि प्रभा...
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हम....यानि मैं और तुम !

हम साथ चले..... एक धरती तुम्हें मिली एक मुझे ! एक आकाश तुम्हे मिला एक मुझे ! .....मैंने अपनी पूरी धरती को स्नेहिल कामनाओं से सींचा प्यार के खाद से उसे उर्वरक बनाया....... अपनी पसंद से अधिक तुम्हारी पसंद का ख्याल किया ! फसल हुई तो बराबर का हिस्सा किया
 
रश्मि प्रभा...
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पगडण्डी

समय कहता रहा, हम सुनते रहे कब शब्द उगे हमारे मन में जाना नहीं सुबह जब अपने नाम के पीछे पड़े हुए निशानों को देखा तो जाना- एक पगडण्डी हमने भी बना ली !
 
रश्मि प्रभा...
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तूफ़ान और मंद हवाएँ............

सोच के तूफानों ने कहा -क्या जीकर करना ! चलो, इन तूफानों में ही दम तोड़ लें .... मैं अवाक ! मेरी कलम- मेरी ऊर्जा,मेरी जिजीविषा बन साथ है.... सुनते ही, तूफानों ने रुख मोड़ लिया मंद हवाएँ बहने लगीं !
 
रश्मि प्रभा...
Oct 14 2009 08:34 PM
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सिर्फ ख्याल

ख्याल ही ... हमारा संचित धन है , उसी से ख़ुशी मिलती है, आंसू मिलते हैं, भूख मिटती है.... ख्यालों में सबकुछ कभी अपना, कभी जुदा होता है ! ज़िन्दगी तो अक्सर रेत की तरह फिसलती रहती है, ख्यालों का दामन ना पकड़ें तो फिर गूंगे , बहरे हो जाएँगे ख्याल अपने हो
 
रश्मि प्रभा...
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एक खेल !

आओ खेलें.... तुम एहसास, वह दर्द, वह कागज़, मैं कलम............. - दर्द का एहसास लिख तो दिया है पर सुनाऊं किसे?..... दर्द को सुनाना आसान नहीं कौन समझेगा और क्यूँ समझेगा? हर किसी के पन्ने पर दर्द के धुले अक्षर हैं उसको पढने,समझने की नाकाम कोशिश ही बड़ी
 
रश्मि प्रभा...
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आइये हम उनके लिए दुआ करें.........

मेजर गौतम (http://gautamrajrishi.blogspot.com/) , वह शक्स - जिसकी हाथ में कलम भी, तलवार भी,जिसकी रगों में करुणा भी,दुश्मनों के दाँत खट्टे करने का हौसला भी.......दुश्मन ने उन्हें घायल करके हमारी बददुआ ली है........आइये हम उनके लिए दुआ करें.........
 
रश्मि प्रभा...
Sep 24 2009 08:38 PM
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अकेलापन........

अकेलापन..........घंटों मुझसे बातें करता हैभावनाओं को तराशता हैजीने के लिएमुठ्ठियों में चंद शब्द थमा जाता है...........
 
रश्मि प्रभा...
Sep 22 2009 10:48 AM
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प्यार का सार !

दस्तकें यादों कीसोने नहीं देतींदरवाज़े का पल्लाशोर करता हैखट खट खट खट.......सांकल ही नहींतो हवाएँ नम सी यादों की सिहरन बनअन्दर आ जाती हैंपत्तों की खड़- खड़मायूस कर जाती हैं !कुछ पन्ने मुड़े-तुड़े लेकरअरमानों की आँखें खुली हैंएक ख़त लिख दूँ.....संभव है
 
रश्मि प्रभा...
Sep 15 2009 05:02 PM
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एक प्याली ख्वाब !

एक प्याली ख्वाबथोडी मीठीथोडी नमकीनजब भी पीती हूँअन्दर में सप्तसुरों के राग बजते हैंढोलक की थाप परघुंघरू मचलते हैंख़्वाबों की सुनहरी धरती पर ख़्वाबों का परिधान पहनेमहावर रचे पांव थिरकते हैं एक प्याली ख्वाब....सौ ख़्वाबों की रंगीनियत दे जाती है !
 
रश्मि प्रभा...
Sep 09 2009 08:15 PM
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इमरोज़

सपनों में दबे पांव कोई आता हैमेरी खिड़की पर एक नज़्म रखचला जाता हैआँख खुलते नज़्म इमरोज़ बन जाती है
 
रश्मि प्रभा...
Aug 31 2009 02:56 PM