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बदन से सरकते कपड़े--------------------[मिथिलेश दुबे]

बदन से सरकते कपड़े , जी हाँ आजके वर्तमान परिवेश में आपको आसानी से दिख जायेगा । अब ये आपको हर गली नुक्कड़ , बाजार हो या शोपिग माल छोटे कपड़ो मे लड़कियां आपको आसानी से दिख जायेंगी । कल तक छोटे कपड़े रैंप पर कैटवाक करती मॉडल्स अपने डिजाइनर्स के कलेक्शन को
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एमएफ़ हुसैन की “रेप ऑफ़ इंडिया” पेंटिंग… मानसिक विकृति के साथ देशद्रोह भी…… MF Hussain, Rape of India Painting, Secularism

भारत से भगोड़े और तथाकथित सेकुलर कलाकार एमएफ़ हुसैन द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के बने चित्रों पर बात करने से सभी पक्षों का दिल दुखता है (हिन्दूवादियों का भी और खासकर सेकुलरों का)। अतः हुसैन की देश की समस्याओं पर बनी पेण्टिंग पर बात की जाये, यहाँ सन्दर्भ है
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भारत में स्त्री की औकात

लीजिए बहनो और भाइयो, यदि आप किसी भ्रम में जी रहे थे तो तुरन्त उससे बाहर निकल आइए। यदि आप भारतीय नारी को महान मानने वालों का लिखा पढ़ते यह सोच रहे थे कि शायद आपका ही घर परिवार एक अपवाद है अन्यथा शेष भारत में तो जो वह कहे वही होता है, उसकी आज्ञा सबको
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वापस कीजिये प्लीज मेरी टिप्पणियाँ !

अब वे टिप्पणियाँ कैसे लौटेंगी जो उन डीलीटेड पोस्ट्स के साथ दफ़न हो गईं ? मैंने और आप सब ने भी  अगर ये दुनिया है तो कैसी दुनिया है-काव्य मंजूषा और स्प्लिट सेक्स चिकेन -स्वप्न दर्शी पर कल   टिप्पणियाँ की थीं मगर आज ये दोनों पोस्ट ब्लॉग मालिकों
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इडियट बॉक्स........और हम गुलाम------------मिथिलेश दुबे

अगर ये कहा जाए कि विगत वर्षो में सबसे ज्यादा प्रगति विज्ञान क्षेत्र ने किया तो गलत ना होगा । पिछले पच्चीस वर्षों मे तो इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में हुए आविष्कार के कारण सूचनातंत्र का पूरा जंजाल घर-घर में पहुँच गया है । पूरे विश्व ने उन्नीसवीं शताब्दी
 
Mithilesh dubey
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तो फ़िर हो जाने दो ब्लोग्गिंग को उन्मुक्त और निरंकुश ...

पिछ्ले कुछ दिनों बहुत से मुद्दों और तथाकथित विमर्शों पर जिस तरह की खींचतान , परोक्ष प्रत्यक्ष आरोप प्रत्यारोप , आक्रोश, खिन्नता , और भी जितने विशेषण होते होंगे सभी एक साथ देखने पढने को मिले । और जैसा कि अपेक्षित ही था कि एक बार फ़िर से धुरियां बनी या शायद
 
अजय कुमार झा
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हम महिला विषयों पर न लिखें ? - सतीश सक्सेना

डॉ अरविन्द मिश्रा का एक चुभता हुआ कमेंट्स मेरा ध्यान उनकी ओर खींच ले गया है  " चलिए आप उदासीन और तटस्थ रहकर इसी तरह बीच बीच में आकर अपनी घोर चिंता व्यक्त करते रहा करिए -ब्लागजगत का जो होना है वह तो हो ही जाएगा "   और मुझे लगा कि जैसे
 
सतीश सक्सेना
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आपकी मुस्कान का सम्मान...खुशदीप

आज की ये पोस्ट इरफ़ान भाई को समर्पित है...देश के अग्रणी कार्टूनिस्ट इरफ़ान को हिंदी अकादमी ने वर्ष 208-09 के लिए काका हाथरसी सम्मान देने की घोषणा की है...43 साल के इरफ़ान भाई का सम्मान पूरे ब्लॉगवुड का सम्मान है...अपने ब्लाग इतनी सी बात से इरफ़ान भाई
 
खुशदीप सहगल
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ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है

सठियाने की भी एक सीमा होती है पर ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है। कब्र में पाँव लटकाये बैठा है पर ब्लोगिंग का शौक नहीं गया। है तो पिद्दी जैसा पर अपने आपको बहुत बड़ा ब्लोगर बताता है। अकल तो ऐसी है इसकी कि कहे खेत की और सुने खलिहान की पर कमली
 
जी.के. अवधिया
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हे भगवान ! हमें मोटी होने का हक दो !

प्रार्थना - हे भगवान हमें मोटी होने का हक दो ! हमें अपनी छाती और बाहों पर बाल उगाने का हक और हिम्मत दो ! हमें देह को सजाने और न भी सजाने का फैसला लेने की बुद्धि दो ! हमें हिम्मत दो कि हमसे आइना जब सवाल करे हम उसे उलट दें ! हमें हिम्मत दो कि हम छाती को
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सृजन का संतुलन...खुशदीप

ऊपर वाला ब्रह्मांड को बनाने की प्रक्रिया में था...साथ ही अपने मातहतों को सृष्टि का सार बताता भी जा रहा था...देखो, सृजन के लिए सबसे ज़रूरी है, संतुलन...मसलन हर दस हिरण के पीछे एक शेर होना चाहिए...इसी तरह मेरे देवदूतों, दुनिया में  अमेरिका नाम का देश
 
खुशदीप सहगल
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रिन से भी ज़्यादा सफ़ेद-हबीबगंज-भोपाल एक्सप्रेस

आपमें से कई लोगों ने हबीबगंज एक्सप्रेस में सफ़र किया होगा। निज़ामुद्दीन से चलकर भोपाल और हबीबगंज जाने वाली ट्रेन। इसकी सफाई मुझे हमेशा से आकर्षित करती रही है। गज़ब का अनुशासन दिखता है इस ट्रेन। रेल यात्रा का जितना अनुभव रहा है उसके आधार पर कह सकता हूं कि
 
ravish kumar
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इकतारे की धुन...

टू ऊ ऊं ऊं ऊं..टू ऊ ऊं ऊं ऊं.. मन डोले मेरा तन डोले... दिल का गया करार रे.. ये कौन बजाये बांसुरिया इकतारे पर यह धुन बजाता जब वो घर के सामने से निकलता..तो वाकई मन डोल जाता. मिट्टी के दिये का बना वो इकतारा...बचपन से उसकी घुन लुभाती आई. जब भी वो गुजरता,
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एक सवाल का जवाब दीजिए...खुशदीप

वाकई माहौल बड़ा गरम है...कुछ भी कहना ख़तरे से खाली नहीं है...कौन बुरा मान जाए...कौन लाठी बल्लम निकाल ले...कुछ पता नहीं ...जो नारी ममता की बरसात करती है...प्रेम और वात्सल्य का पर्याय मानी जाती है...पुरुषों के सब मुद्दों को सुलझाने के लिए कंधे से कंधा
 
खुशदीप सहगल
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मीठा मीठा गप्प, कड़वा कड़वा थू।................घुघूती बासूती

वाह, आरक्षण के पक्षधर अचानक उसके विरोधी हो गए! जब आरक्षण खुद को नौकरी में मिलना था तब तक उसके लिए युद्ध में डटे हुए थे। तब उसके विरोधी सामाजिक न्याय के विरोधी दिख रहे थे, अकेले मलाई खाना चाहने वाले लगते थे। तब आरक्षण समर्थक चाहते थे कि अगड़ी जाति वाले
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अयोध्या के हिन्दू धर्माचार्य क्यों अपना रहे हैं इसलामी ‘शरीअत का उसूल ? best rule of shariah

मठ मन्दिरों में अकेले न भेजें महिलाओं को वक्त साबित कर रहा है कि मस्जिद हो या मंदिर सिस्टम सिर्फ़ इसलाम का ही कामयाब है । इसलाम का यह नियम है कि औरत जब घर से बाहर जाये तो वह घर के किसी महरम रिश्तेदार पिता भाई पति आदि को ज़रूर साथ ले ले । इस तरह बहुत से
 
DR. ANWER JAMAL
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जिसका बदन जितना अधिक दिखेगा उसे लोग उतना ही सुंदर व सेक्सी कहेंगे!!! (मिथिलेश दुबे तुस्सी ग्रेट हो!!!)

मिथिलेश ने उस लौ को और ज़्यादा प्रज्जवलित कर दिया है जिसे मैं पिछले एक साल से ब्लॉग जगत में रौशन करने की जद्दोजहद कर रहा हूँ, मिथिलेश और मुझे और ज़्यादा संबल मिला जो अरविन्द मिश्रा जी जैसे सम्मानित ब्लॉगर ने इसमें अपना अमूल्य समर्थन कर इस लौ को
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मैं गर न टूटूं ....

तुम्हारी चोट सेमेरा दरकना लाज़मी तो नहीं,मगरकुछ बातें मेरे इख्तियार में भी नहींमुझे बार-बार तोड़ना, फिर जोड़नाप्रिय शगल है तुम्हारास्वामित्व का बोध कराता हैतुम सिर्फ मेरी होपुख्ता  अहसास दिलाता है  मैं तुम्हें खुश होने देती हूँइस लिए नहीं कि मैं
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भगवान् राम और माँ सीता के विवाह से सम्बंधित कुछ भ्रांतियां

हाल ही में नेट पर देखा की कुछ विशिष्ट जन को भगवान राम और माँ सीता के विवाह के सन्दर्भ में कुछ भ्रान्ति है. कुछ तर्क वाल्मीकि रामायण से लेकर ये निष्कर्ष निकला जा रहा है की विवाह के वक़्त माँ सीता की उम्र महज छ साल की थी, जो कतई सही नहीं है.जैसा की हम सब
टैग: धर्म
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या तो वो है ही नहीं और अगर है तो दुष्ट है... क्या अब भी विश्वास करोगे आप ?

...मेरे सज्जन मित्रों,सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और
 
प्रवीण शाह
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वेदों में कहाँ आया है कि इन्द्र ने कृष्ण की गर्भवती स्त्रियों की हत्या की ? cruel murders in vedic era and after that

अर्थात इंद्र ने ऋजिश्वा राजा के साथ मिलकर कृष्ण नाम के असुर की गर्भवती स्त्रियों को मारा था । { ऋगवेद 1/101/1 }यो वर्चिनःशतमिंद्रः सहस्रमपावपद्अर्थात इंद्र ने वर्ची के सौ हज़ार पुत्रों को भूमि पर सुला दिया अर्थात मार दिया । { ऋगवेद 2/14/6 }इसलाम का अर्थ
 
DR. ANWER JAMAL
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कहाँ लिखा है कि विवाह के समय सीता जी केवल 6 वर्ष की थीं ? an ideal hindu marriage

‘ आदमी एक जिज्ञासु प्राणी है । सैक्स और और विवाद उसे स्वभावतः आकर्षित करते हैं। प्रस्तुत पोस्ट के माध्यम से आदरणीय चिपलूनकर जी ने इसलाम के प्रति ब्लाग जगत के इसी स्वाभाविक कौतूहल को जगा दिया है । आदमी नेगेटिव चीज़ की तरफ़ जल्दी भागता है । मजमा तो उन्होंने
 
DR. ANWER JAMAL
टैग: bal vivah
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यक़ीं कीजे, ये मैं ही हूँ, जरा फोटो पुरानी है

छुट्टियाँ कब बीत जाती हैं, पता भी नहीं चलता। ड्युटी पर आये हुये ये चौथा दिन और फिर से वही अहसास कि जैसे यहीं हूँ सदियों से। सतरह सालों बाद इस बार उपस्थित हो पाया था होली पर अपने गाँव में और क्या खूब होली जमी। अबके इधर कश्मीर में खूब-खूब बर्फ गिरी
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बधाई दीजीए ....ये इस ब्लोग की पांच सौंवी पोस्ट है ....मगर वाह नहीं कहिएगा

ये इस ब्लोग की पांच सौवीं पोस्ट है , या शायद उससे एक ज्यादा ...है न बधाई देने की बात ....मगर नहीं वाह मत कहिएगा ......आज मन वाह नहीं आह कहने को कर रहा है .............आह ....!!!!!!!!!!!मैं भीष्म नहीं ,मैं अजर नहीं ,मारो , मर जाऊंगा ,मैं कभी भी अमर नहीं
 
अजय कुमार झा
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बिन पेंदे का लोटा--ना किसी के काम का------------ललित शर्मा

लोटा एक साधारण सा शब्द है लेकिन इसकी महिमा निराली है.........मनुष्य के जीवन से जुड़ा हुआ है...... इसके बिना काम चलना बहुत ही कठिन है........लोटे के लुढ़कने से लोटना शब्द का भी निर्माण हुआ होगा...........मनुष्य जब पी कर मदमस्त हो जाता है तो कहीं पर भी लोट
 
ललित शर्मा
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~~मुझे नहीं होना बड़ा~~------->>>>दीपक 'मशाल'

~~मुझे नहीं होना बड़ा~~आज फिर सुबह-सुबह से शर्मा जी के घर से आता शोर सुनाई दे रहा था. मालूम पड़ा किसी बात को लेकर उनकी अपने छोटे भाई से फिर कलह हो गयी.. बातों ही बातों में बात बहुत बढ़ने लगी और जब हाथापाई की नौबत आ पहुँची तो मुझसे रहा नहीं गया. हालांकि
 
दीपक 'मशाल'
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एक शुभकामना ऐसी भी ...!!!

  कल ९ मार्च मेरी दिल अज़ीज़ और सबकी चहेती वाणी गीत और ज्ञान प्रकाश जी की वैवाहिक वर्षगाँठ थी...आज एक बार फिर हृदय से उन दोनों को बधाई...आप सब भी इसमें शामिल हुए थे...युगल जोड़े को अपनी शुभकामनायें, प्यार और आशीर्वाद देने के लिए...आज की पोस्ट इसी शुभ
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भारत में बस भारतीय ही नहीं...खुशदीप

एक अमेरिकी नागरिक भारत घूमने आया और फिर वापस अपने देश गया...वहां वो अपने एक भारतीय दोस्त से मिला...दोस्त ने बड़ी उत्सुकता के साथ पूछा कि अमेरिकी को भारत कैसा लगा...अमेरिकी ने जवाब दिया...भारत एक महान देश है...इसका स्वर्णिम प्राचीन इतिहास है...प्राकृतिक
 
खुशदीप सहगल
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मोहम्मद साहब के इस आपत्तिजनक चित्रण का पुरज़ोर विरोध करें… (अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के पक्षधर भी अपनी राय रखें)... Oppose Denigration of Mohammed,

हाल ही में एमएफ़ हुसैन द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के नग्न चित्र वाले मामले में “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता”(?) के पक्षधर और “कलाकार की कला” के बारे में बहुत (कु)चर्चा हुई (कुचर्चा इसलिये क्योंकि उन चर्चाकारों की निगाह में डेनमार्क के कार्टूनिस्ट द्वारा
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क्या अब अमेरिका में भी सच्चर और रंगनाथ मिश्र आयोग की जरूरत है??? Sachchar Rangnath Mishra Commission, Muslims in USA

भारत अथवा विश्व के किसी भी देश में जब भी कोई सामाजिक स्थिति सम्बन्धी अध्ययन किये जाते हैं, तब इस बात पर मुख्य जोर दिया जाता है कि विभिन्न धर्मों और जातियों में देश के विकास और अर्थव्यवस्था से होने वाले फ़ायदे बराबर पहुँच रहे हैं या नहीं। सामान्यतः यह माना
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भाँग, भैया, भाटिन, भाभियाँ, गाजर घास ... तीन जोड़ी लबालब आँखें - 2

पिछले भाग से जारी ...राजमार्ग से होते हुए हम क़स्बे और फिर खेतों के बीच रेंगती पक्की सड़कों पर दौड़ रहे हैं । हवा से सुर मिलाते सर र र ... आवाजें आ रही हैं । लंठ युवा होलिका दहन की तैयारियों में लगे हैं और मैं अम्माँ के चूल्हे पर चढ़े तवे की आँच का अनुभव
 
गिरिजेश राव
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मिस. समीरा टेढी द्वारा "ब्लागर्स कार्यशाला - 2010" का उदघाटन

मैं रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" उर्फ़ ताऊ का गधा आपका स्वागत करता हूं और ब्लागर्स कार्यशाला - 2010 का आंखो देखा हाल आपको सुनाता हूं.ब्लागर्स कार्यशाला मे आशा के विपरीत जबरदस्त भीड जुटी. जिन ब्लागर्स ने अपना पूर्व मे रजिस्ट्रेशन करवा लिया था उनके लिये प्रथम
 
ताऊ रामपुरिया
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मेरे ब्‍लॉग पर पाठकों की संख्‍या 50,000 पहुंची .. मेरे ब्‍लॉगर प्रोफाइल को भी 20,000 लोगों ने विजिट किया !!

अगस्‍त 2007 में मुझे जब हिंदी में ब्‍लागिंग करने के बारे में जानकारी मिली थी , तो मैने इस दिशा में कदम बढा ही दिया था। जीमेल में मेरा अकाउंट नहीं था , इंटरनेट के बारे में आधी अधूरी जानकारी थी , फिर भी वर्डप्रेस पर नियमित रूप से लिखना तो शुरू कर दिया था ,
 
संगीता पुरी
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"बुढऊ ब्लागर्स एशोसियेशन" की स्थापना

बडे ही दुखित मन से पंडितजी (महेंद्र मिश्र) ने एक पोस्ट फ़ेंक के मारी गुस्से में. और लोगों ने हाथों हाथ लपक ली. उनको मलाल था कि उनके पूज्य दादा जी ने उनको बुढऊ की पदवी से नवाज दिया. पंडितजी ने गुस्से गस्से में पोस्ट दे मारी.अब देखिये...बडे बुजुर्गों के
 
ताऊ रामपुरिया
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इस षड्यंत्र से मुसलमान हो जाएं होशियार

महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पास होने के बाद पूरे देश में तालियां पीटी जा रही हैं। वाजिब भी है, भारत जैसे देश में महिलाओं को यह हक गए-गुजरे देश बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी बाद में मिला है। लेकिन इस सारे शोर में यह बात दबकर रह गई है कि इस बिल के
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बख्श दो हमें बड़े गुरूजी----जीने खाने दो------------ललित शर्मा

जब बचपन में हमारे दादा जी हमें स्कुल में भरती करवाने गए तो हमने देखा कि वहां एक बुढा खूसट सा धोती कुरता पहने टेबल कुर्सी लगाये बैठा है. दादा जी को देखते ही बोला " आइये महाराज! कैसे आना हुआ?" दादा जी ने कहा कि ललित को स्कुल में भरती करना है. ५ साल का तो
 
ललित शर्मा
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वो बलाएं तेरी मुट्ठी में मेरी समा गईं

वो होंठ तेरे कानों पर धरे कुछ सुना गए को गीत तेरे, मेरे अधर गुनगुना गए  वो  खुशबू तेरी रगों में मेरी लोट गई वो जुल्फ तेरी मेरी पेशानी उलझा गई वो सांसें मेरी दर्द से  तारी हो गईं  वो बलाएं तेरी मुट्ठी में
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विश्व गुर्दा दिवस पर जानिए , किडनी फेलियर के बारे में ---

अख़बारों की सुर्ख़ियों में किडनी कांड के बाऱे में तो आपने सुना ही होगा। कभी कभी गलत तरीके से किया गया सही काम भी एक काण्ड बन जाता है। आज विश्व गुदा दिवस ( वर्ल्ड किडनी डे ) है।आइये जाने , कैसे रोका जा सकता है , किडनी फेल होने को ताकि फिर कोई नकली डॉक्टर
 
डॉ टी एस दराल
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....अथ फ़ुरसत कथा,इति फ़ुरसत कथा

ये बगल वाली फोटो अभिषेक ओझा की है! इनकी पोस्ट के चलते ही हमको सब काम-धाम छोड़कर चर्चा को प्राथमिकता में ऊपर लाना पड़ा। अभिषेक ओझा की पोस्टें सहज-सरल और शरीफ़ टाइप की होती हैं। हड़बड़ लेखन से अलग। गणित की बातों को सुगम और रोचक अंदाज में पेश करके अभिषेक ने यह
 
अनूप शुक्ल
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तो क्या फिर हार गया मुसलमान नेतृत्व

सबसे पहले तो महिला आरक्षण विधेयक के राज्य सभा में पास होने पर बधाई। पहली बार हिन्दुस्तान में जाति आधारित राजनीति की हार हुई है। जाति आधारित राजनीति बेचारी नज़र आई है। आरक्षण का मैं समर्थक रहा हूं। मानता हूं कि दुनिया में इससे बेहतर और कारगर कोई सामाजिक
 
ravish kumar