मर्द,सैक्स और कैमरा
लव,सेक्स और धोखा। पूरी फिल्म में कैमरा वैसे ही देखता है जैसे हमारे समाज में मर्दों की नज़र मौका देखकर लड़कियों को देखती है। इस नज़र को बनाने में कई तरह की परिस्थितियां सहायक होती हैं। कैमरा अलग-अलग एंगल से अपनी नायिकाओं को तंग नज़रों की ऐसी गहराई में
Mar 21 2010 01:28 PM



भावों और विचारों का क्या है? वक्त बेवक्त किसी भी रुप में चले आते हैं. कभी दर्ज कर लिया, कभी छूट गये. दर्ज कर लिया तो एक दस्तावेज के रुप में सहेजने का दिल हो आता है. कुछ छोटी छोटी पंक्तियाँ अपनी ही तस्वीरों पर दर्ज कर के कभी ऑर्कुट पर, कभी फेस बुक पर
आज सुबह दरवाजे की घंटी बजी। द्वार खोल कर देखा तो पांच से दस साल की चार-पांच बच्चियां लाल रंग के कपड़े पहने खड़ी थीं। छूटते ही उनमें सबसे बड़ी लड़की ने सपाट आवाज में सवाल दागा, 'अंकल, कन्या खिलाओगे'?मुझे कुछ सूझा नहीं, अप्रत्याशित सा था यह सब। अष्टमी के दिन
ठंड रखिए, धीरज धरिए. आपको अभी बताते हैं. पर, क्या आप पचा पाएंगे? जब टॉप / शीर्ष के अच्छे ब्लॉगों के बारे में बताया जाता है तो तब इतना भयंकर जूतम पैजार, हो हल्ला मचता है हिन्दी ब्लॉग जगत में, ऐसे में हिन्दी के टॉप #10 सड़ियल ब्लॉगों की सूची यदि हम
क्या आत्महत्या ही सारी समस्याओं का हल है?ये सवाल मेरे अकेले का नही है और ये अचानक़ ही मेरे दिल-दिमाग में उथल-पुथल नही मचा रहा है।पिछले कुछ दिनों से इस सवाल ने मुझे बैचैन कर दिया है।आखिर आत्महत्या से सारी समस्यायें खत्म कैसे हो सकती है?मेरे हिसाब से तो
सामाजिक दूल्हे तक तो ठीक था, मगर जब राजनीति के दुल्हे दुलहिनों को जब करारे कुरकुरे नए 1000 के करेंसी नोटों की मालाएँ पहनाए जाने की खबरें मिलीं तो रिजर्व बैंक चौकन्ना हुआ. रिजर्व बैंक ने #10 नए गाइड लाइन तैयार किए हैं नोटों, ख़ासकर नए, कुरकुरे
आज 21 मार्च है , गणित ज्योतिष में इस दिन का बडा महत्व है , क्यूंकि आज पृथ्वी पर 12 घंटे का दिन और बारह घंटे की रात होती है। इससे पूर्व भारतवर्ष में दिन छोटे और रात बडी हो रही थी , आज के बाद यहां दिन बडे और रातें छोटी होने लगेंगी। वैसे इस खास दिन का
मेरा मुंह तिक्त है। अन्दर कुछ बुखार है। बैठे बैठे झपकी भी आ जा रही है। और मुझे कभी कभी नजर आता है बबूल। कोई भौतिक आधार नहीं है बबूल याद आने का। बबूल और नागफनी मैने उदयपुर प्रवास के समय देखे थे। उसके बाद नहीं। कौटिल्य की सोचूं तो याद आता है बबूल का कांटा
तीस की उम्र में पचास की लगती हैं पहाड़ की औरतें उदास सी लगती हैं काली हथेलियाँ, पैर बिवाइयां पत्थर हाथ, पहाड़ जिम्मेदारियां चांदनी में अमावस की रात लगती हैं कड़ी मेहनत सूखी रोटियाँ किस माटी की हैं ये बहू, बेटियाँ नियति का किया मज़ाक लगती हैं दिन बोझिल, रात
कल मैनपुरी से ब्लॉगर भाई शिवम मिश्रा का फोन आया...उन्होंने बड़ी फ़िक्र जताई कि न तो ये स्टार ब्लॉगर महोदय फोन उठा रहे हैं, न ही इनका कोई अता-पता चल रहा है...मैंने भी कहा, भैया मुझसे आखिरी बार पांच छह दिन पहले जनाब ने बात की थी...आखिरी बार ये मिस्टर
नमस्कार ,मै पंकज मिश्रा आप सबका स्वागत करता हु अपने इस चर्चा ब्लॉग पर ..चर्चा में समय कम दे पा रहा हु क्युकी नौकरी पर समय ज्यादे दे रहा हु . खैर कोई बात नहीं दोनों की जरुरत के हिसाब से समयानुकूल मैनेज किया जाएगा !चलिए चर्चा की तरफ चलते है .आज ललित शर्मा
मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं । सीता जी को माता और श्री रामचन्द्र जी को मर्यादा पुरूषोत्तम मानता हूं । मैं तो इस बात की भी परवाह नहीं करता कि लोग उन्हें काल्पनिक और मिथकीय पात्र मानते हैं ।श्रीमान डॉ अनवर जमाल मतलब ये की श्रीमान अनवर
भाई कभी कभी पहेली पुछने का हमारा दिल भी करता है, तो पुछ ही लेते है.... जबाब तो आप ने ही देना है, देखे किस का जबाब सही आता है माडरेशन चालू है जी, ओर २३, या २४ तारीख को विजेता घोषित किया जायेगा.... बस ध्यान से इस चित्र को देखे ओर फ़िर बताये कि यह किस देश मै
जन्मदिन में केक काटना क्या जरूरी है? क्या हमारी यही प्रथा रही है?ये प्रश्न मेरे मन में इसलिये उठे क्योंकि आज मेरे प्रिय मित्र ललित शर्मा जी का जन्मदिन है। मोबाइल लगाकर बधाई देने के बाद मैंने उनसे कहा कि मैं आ रहा हूँ अभनपुर आपके जन्मदिन के जश्न में शामिल
बाटला हाऊस एनकाऊंटर मैं मारे गये दो आतंकवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से हमारा 6M मीडिया खूब चिल्ल पौं मचाये हुए हे कि और जिसका आधार उन्होने बनाया है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मैं ये लिखा हुआ हे कि उन शबों पर ब्लंट औब्जैक्ट से चोट के निशान भी
ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं होगा जो कभी किसी से जला न हो। वह मुझसे आगे बढ़ गया, बस हो गई जलन शुरू। मैं जिस वस्तु की चाह रखता हूँ वह किसी और को प्राप्त हो गई और मेरा उससे जलना शुरू हो गया। कई बार तो लोग दूसरों से सिर्फ इसीलिये जलते हैं वे अधिक सुखी क्यों हैं।
पहला भागदूसरा भागतीसरा भाग लौटते हुए सोचता हूँ - सढ़ुआन का यह रिश्ता अभी एक पीढ़ी पहले तक गौण सा रिश्ता माना जाता था। बहनापा बना रहता था लेकिन साढ़ुओं में कहीं भाइचारे का ईर्ष्यालु पक्ष ही प्रबल रहता था। बढ़ते शहरीकरण ने परिवारों को केन्द्रिक बनाया है तो
कई दिनों से लगातार एक टीवी चैनल के एक विज्ञापन पर नजरें पड़ती हैं। शिव शक्ति कवच। हर मर्ज की दवा है यह शिव शक्ति कवच। इस कवच को लेने वालों को दिखाया जाता है कि कैसे उनको इस कवच को धारण करने के बाद परेशानियों से मुक्ति मिली है। यह बात तो तय है कि अपने देश
'जल ही जीवन है' के मायने अगर हम आज नहीं समझे तो भावी पीढ़ी बूंद-बूंद को तरसेगी। भू-गर्भ जल वैज्ञानिकों की माने तो मौजूदा व भावी जल संकट से निजात पाने के लिए भू-गर्भ जल का सिर्फ दोहन हीं नहीं इसे रीचार्ज भी करना होगा। दुखद स्थिति यह है कि 'वाटर
क्या किसी व्यक्ति विशेष की नितांत निजी आकांक्षा पार्टी की आकांक्षा या राष्ट्र की आकांक्षा बन सकती है? कदापि नहीं। अगर ऐसा होने लगे तब राजदलों और देश में घोर अराजक स्थिति पैदा हो जाएगी। न अनुशासन रहेगा, न राष्ट्र विकास के प्रति कोई गंभीरता। ये समझ से परे
मयखाना आते रहें हैं तो उत्तराखंड स्थित लांसडाउन के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा आपने । अरसा हुआ वहाँ गए । तब भी सुना था कि उससे करीब ४० किलो मीटर आगे ताडकेश्वर धाम नामक एक सुरम्य स्थल है , मग़र वहाँ जा नहीं सका था मैं। हाल में कुछ मित्र होकर आये , तारीफ भी की
सुनो सुनो सुनो.....ब्लागवुड के सभी ख़ास-ओ-आम को इतल्ला दी जाती है....गर्ल फ्रेंड नंबर ३०१ मिल गई है....महफूज़ मियाँ को उनके साथ देखा गया है....हमारे खोजी कैमरे ने वो चेहरा भी कैद कर लिया है.....देख लीजिये आप भी...........थोड़ा और .....
पिछली पोस्ट में बताया ही था कि कैसे और क्यों एक आम भारतीय को न्याय पाने के लिए सिर्फ़ 320 साल ही प्रतीक्षा करनी है । आज इन आंकडों पर नज़र डालिए , ये आंकडे फ़िर साबित कर रहे हैं कि हमारी सरकार न्याय व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त करने के लिए सचमुच ही कितनी गंभीर
ओह बहुते अफ़सोस की बात है जी आजकल सब लोग टिप्पी करना कम कर दिए हैं जी ...और दूसरों का क्या कहें जब हम ही खुद बहुते एबसेंटी चल रहे हैं । जो रहे सहे बचे हुए हैं ..ऊ सब दे धनाधन ...इश्वर लडा रहे हैं ....सारा ताकत तो उसी में खर्च हुआ जा रहा है ....तो का होगा
इन तस्वीरों को देखकर बताईये कि यहां क्या हो रहा है? ये चित्र मेरे एक मित्र ने उपलब्ध कराये हैं.
विनीत कुमार की यह पोस्ट उनकी अनुमति से चवन्नी छाप रहा है। आप भी अगर कुछ सिनेमा पर लिख रहे हैं तो यहां साझा कर सकते हैं। पता है chavannichap@gmail.comजाहिर है जब सिनेमा के शीर्षक में ही सेक्स शब्द जुड़ा हुआ हो तो उसके भीतर की कहानी आध्यात्म की नहीं
सन् 1994 मे नेटस्केप नामक मल्टीमीडिया कंपनी द्वारा वर्ल्ड वाइड वेब शुरू करने के साथ ही पोर्न ने विश्वव्यापी उद्योग की शक्ल लेली। कुछ तथ्य हैं जिनको ध्यान में रखा जाना चाहिए। कम्प्यूटर तकनीक खरीदने वाले
मैं जिस विद्यालय में कार्यरत हूँ वहाँ का एक पेड़ हवा के एक झोके से टूट गया पर हार नहीं माना. जमीन पर पड़े पड़े अपने वजूद से खुद को जोड़े रखा और फिर से अपनी हरीतिमा को वापस पा लिया और हवा को शुद्ध करने का कार्य अनवरत जारी रखे हुए है. इस जीजीविषा को नमन. आप भी
रोमन का रोमांस श्री असगर वजाहत के इस आह्वान को स्वीकार करते हुए मुझे प्रसन्नता है कि 'आज समय का तकाजा है कि हम हिन्दी भाषा की लिपि पर विचार करें और इस संबंध में जनमत बनाने पर विचार करें।' मेरा खयाल है, विचार करने पर कोई नई बात सामने आती है, तभी जनमत
अगर कोई गलत खबर न्यूज चैनल पर चल जाए तो क्या हो सकता है? शायद आपका जवाब हो कि, गलत खबर चलने पर न्यूज चैनल पर मानहानि का केस किया जा सकता है। लेकिन कोई व्यक्ति गरीब हो, असहाय हो, और उसके बाद न्यूज चैनल पर गलत खबर चलने के बाद आसपास के लोग उसे ‘बलात्कारी और
फासिज्म चाहे आज सर्वमान्य राजनीतिक सिद्धांत न हो मगर इसका प्रेत अभी भी विभिन्न अतिवादी, चरमपंथी और उग्र विचारधाराओं में नज़र आता है। राजनीतिक शब्द के रूप में इसे स्थापित करने का श्रेय इटली के तानाशाह बैनिटो मुसोलिनी को जाता है। फा सिज्म शब्द
गूगल बज़ (Google Buzz) एक समाजिक उपकरण है, जिसकी तुलना ट्विटर या फ़ेसबुक से की जा सकती है। गूगल ब़ज़ की सहायता से आप हर उस वस्तु या लेख की चर्चा कर सकते हैं जो आपको रोचक और मनोरंजक लगती है। आप इसके बारे में गूगल ब्लॉग पर इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त
विरह के रंग (काव्य संग्रह) ISBN: 978-81-909734-1-0 सीमा गुप्ता मूल्य : 250 रुपये प्रथम संस्करण : 2010 प्रकाशक : शिवना प्रकाशन पी.सी. लैब, सम्राट कॉम्प्लैक्स बेसमेंट बस स्टैंड, सीहोर -466001(म.प्र.) दूरभाष 09977855399 पुस्तक समीक्षा द्वारा श्री रमेश
21 मार्च का दिन भी खास है-इस तारीख को दिन और रात दोनो बराबर होते हैं--खगोल शास्त्र तथा ज्योतिष की गणना के परिप्रेक्ष्य में यह तारीख महत्वपुर्ण है----जिस तरह हमे सुबह होने की सूचना सूर्य से मिलती है उसी तरह ब्लाग जगत में जन्मदिन की सूचनाएं बीएस
संस्कृत में ईश्वर को कहा जाता है 'हरम्'. मुसलमानों का मरकज़ है 'मस्जिद अल हराम' या 'अल्लाह की मस्जिद' ,अल्ला मूल रूप से हिन्दू देवी शक्ति (शिव का नारी युग्म) संस्कृत में ईश्वर को कहा जाता है 'हरम्'. मुसलमानों का मरकज़ है 'मस्जिद अल हराम' या 'अल्लाह की
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