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नित्यानन्द स्वामी के बहाने नरेन्द्र मोदी पर हमला :- NDTV की चालबाजियाँ और

दक्षिण भारत में फ़िलहाल एक हंगामा मचा हुआ है, नित्यानन्द स्वामी को चेन्नई पुलिस ने एक सीडी और शिकायत के आधार पर गिरफ़्तार किया है। ऐसा आरोप हैं कि नित्यानन्द स्वामी के कई महिलाओं से सम्बन्ध रहे हैं और एक तमिल अभिनेत्री के साथ उनकी अश्लील सीडी उन्हीं के
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बरेली दंगों का सच

होली के दिन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मुसलमानों के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दंगों को लेकर देशभर में काफी आरोप प्रत्यारोप हुए। कई प्रकार की बातें कही गईं। लेकिन इन दंगों की सत्यता क्या थी, इस बारे में देशभर की मीडिया लगभग मौन सी ही रही है। इन
 
पवन कुमार अरविन्द
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क्योंकि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं होता

1. हिन्दू शब्द कितना पुराना है? इसकी जवाब जरूरी नहीं क्योंकि हिन्दू शब्द दूसरों द्वारा दिया गया है. हिन्दूओं को क्योंकि बदलाव से परहेज नहीं, इसलिये अब वह उनकी पहचान है. वैसे तो अल्लाह शब्द भी दूसरों का दिया हुआ है. मुहम्मद ने मूर्तिपूजक अरबों के कई
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भारत में स्त्री की औकात

लीजिए बहनो और भाइयो, यदि आप किसी भ्रम में जी रहे थे तो तुरन्त उससे बाहर निकल आइए। यदि आप भारतीय नारी को महान मानने वालों का लिखा पढ़ते यह सोच रहे थे कि शायद आपका ही घर परिवार एक अपवाद है अन्यथा शेष भारत में तो जो वह कहे वही होता है, उसकी आज्ञा सबको
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उमर अब्दुल्ला, कश्मीर के “पत्थर-फ़ेंकू” गिरोह को सरकारी नौकरी और राहत पैकेज देंगे…… Umar Abdullah, Kashmir Stone Pelters, Subsidy

जम्मू कश्मीर सरकार जल्दी ही एक शासकीय नीति के तहत भारतीय सुरक्षा बलों, नागरिकों और दंगों के समय “पत्थर” फ़ेंकने वाले “गुमराह लड़कों”(??) के पुनर्वास के लिये नीति बना रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि जल्दी ही इस सम्बन्ध में विधानसभा में
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ब्लोगवाणी के द्वारा दुर्भाव का जहर उगलने वाले ब्लोग्स की सदस्यता बनाये रखने का क्या औचित्य है?

हिन्दी ब्लोग संकलकों में ब्लोगवाणी सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह प्रायः समस्त हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट्स को एक ही स्थान पर दिखाता है और अधिकांश हिन्दी ब्लोगर्स नये पोस्ट की जानकारी के लिये ब्लोगवाणी का ही सहारा लेते हैं। हिन्दी ब्लोग जगत के लिये ब्लोगवाणी का
 
जी.के. अवधिया
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दूसरे का तो ये बुर्के पर बनाया कार्टून भी नहीं बर्दाश्त कर पाते और ...

किसी और के धर्म पर कीचड उछालने, अश्लील बाते लिखने, छद्म नामो से लिखने और टिपण्णी करने में इन्हें ज़रा भी परहेज नहीं । यहाँ देखे , यही नहीं कि इनका एक बुद्धिजीवी ही कीचड उछाल रहा हो, यहाँ हिन्दी ब्लॉगजगत में मौजूद इनके अधिकाँश बुद्धिजीवियों के यही हाल है ।
 
पी.सी.गोदियाल
टैग: tirchinazar
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बुदबुदाहट

कल सुबह आफिस आते हुए उन्हें देखा. वे सामने से चली आ रही थीं. जब उनपर नज़र पड़ी उस समय वे एक बैंक के एटीएम के ठीक सामने से गुज़र रही थीं. मैंने देखा कि अचानक वे शरमा गईं. मुझे लगा कहीं एटीएम मशीन देखकर तो नहीं शरमा गईं? लेकिन फिर सोचा कि एटीएम मशीन किसी के
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कीड़े-मकोड़ों (भारत की जनता) को विदेशी परमाणु संयंत्र सप्लायरों के भरोसे छोड़ने की बेशर्म तैयारी… Nuclear Liability Bill, Atomic Energy Companies

जैसा कि सभी जानते हैं, भारत के नेताओं-अफ़सरों-उद्योगपतियों की “कुटिल त्रिमूर्ति” भारत की जनता को हमेशा से कीड़ा-मकोड़ा समझती आई है, आज़ादी के पहले से ही इन्होंने कभी भी आम जनता को रेंगने वाले गंदे प्राणियों से अधिक कुछ समझा नहीं है। अब एक बार फ़िर से भोपाल
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एमएफ़ हुसैन की “रेप ऑफ़ इंडिया” पेंटिंग… मानसिक विकृति के साथ देशद्रोह भी…… MF Hussain, Rape of India Painting, Secularism

भारत से भगोड़े और तथाकथित सेकुलर कलाकार एमएफ़ हुसैन द्वारा हिन्दू देवी-देवताओं के बने चित्रों पर बात करने से सभी पक्षों का दिल दुखता है (हिन्दूवादियों का भी और खासकर सेकुलरों का)। अतः हुसैन की देश की समस्याओं पर बनी पेण्टिंग पर बात की जाये, यहाँ सन्दर्भ है
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इसे पढ़ कर आपका ख़ून भी खौलने लगेगा...खुशदीप

मातृभूमि की सेवा करने वाले सैनिक क्या अलग मिट्टी के बने होते हैं...क्या वो आपके-हमारी तरह इंसान नहीं होते...सरहद पर दुश्मन से मोर्चा लेते हुए शहीद होने वाले रणबांकुरों की रगों में क्या कुछ अलग तरह का लहू दौड़ता है...आज एक पिता की नज़र से बताता हूं आपको
 
खुशदीप सहगल
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शब्दचित्र कलाकृति हैं..

कहते हैं शब्दचित्र कलाकृति हैं, हृदय में उठते भावों के रंग से कलम की कूचि से कागज पर चित्रित. कवि, शब्दों को चुनता है, सजाता है, संवारता है और उन्हें एक अनुशासन देता है कि शब्द अपने वही मायने संप्रषित करें जिनकी उनसे अपेक्षा है. हर शब्द नपा तुला, रचना को
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सो कॉल्ड एलीट ग्रुप

सो कॉल्ड एलीट ग्रुप- तथाकथित अभिजात्य वर्ग. आम लोगों की पहुँच से बाहर. आम जन के मानस पर हर वक्त यह छाया रहता है कि जाने कैसी दुनिया होगी उनकी. एलीट वर्ग में कोई यूँ ही तो नहीं आ जाता-जरुर व्यस्त रहते होंगे. आम जन के बीच बैठ समय बिताने लगें तो फिर काहे के
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अपने ब्लॉग को सजाना अब और आसान - ब्लॉगर ने की टेम्पलेट डिजाइनर की घोषणा

गूगल ने कल ब्लॉग को मनचाहा रूप और आकार देने की प्रकृया को और आसान बनाने के लिए इंटरफेस टेम्पलेट डिजाइनर की सुविधा प्रदान की है. गूगल की घोषणा के अनुसार वह अपने ब्लॉगर उपयोगकर्ताओं को अपने ब्लॉग को सरलतम तरीके से अधिक विशिष्ट बनाने के लिए, एक अतिरिक्त
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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इकतारे की धुन...

टू ऊ ऊं ऊं ऊं..टू ऊ ऊं ऊं ऊं.. मन डोले मेरा तन डोले... दिल का गया करार रे.. ये कौन बजाये बांसुरिया इकतारे पर यह धुन बजाता जब वो घर के सामने से निकलता..तो वाकई मन डोल जाता. मिट्टी के दिये का बना वो इकतारा...बचपन से उसकी घुन लुभाती आई. जब भी वो गुजरता,
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हे भगवान ! हमें मोटी होने का हक दो !

प्रार्थना - हे भगवान हमें मोटी होने का हक दो ! हमें अपनी छाती और बाहों पर बाल उगाने का हक और हिम्मत दो ! हमें देह को सजाने और न भी सजाने का फैसला लेने की बुद्धि दो ! हमें हिम्मत दो कि हमसे आइना जब सवाल करे हम उसे उलट दें ! हमें हिम्मत दो कि हम छाती को
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सृजन का संतुलन...खुशदीप

ऊपर वाला ब्रह्मांड को बनाने की प्रक्रिया में था...साथ ही अपने मातहतों को सृष्टि का सार बताता भी जा रहा था...देखो, सृजन के लिए सबसे ज़रूरी है, संतुलन...मसलन हर दस हिरण के पीछे एक शेर होना चाहिए...इसी तरह मेरे देवदूतों, दुनिया में  अमेरिका नाम का देश
 
खुशदीप सहगल
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क्या मुस्लिम औरतों को इसी तरह बेइज्ज़त होते रहना होगा...?

आज देश के एक वरिष्ठ पत्रकार से बात हुई... बात दुआ सलाम के बाद महिला आरक्षण और फिर शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद के शर्मनाक बयान पर आकर रुक गई... वरिष्ठ पत्रकार महोदय ने हमारी प्रतिक्रिया जाननी चाही...हमने कहा- कौम के लिए इससे ज़्यादा डूब मरने की बात क्या
 
फ़िरदौस ख़ान
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तुम्हारी बहन बहन दुसरों की बहन माल

सोच सकते हैं कितना घटिया मानसिकता है यैसे लोगों का कितने गिरे लोग हैं ये जो यैसा सोचते हैं कि सिर्फ उनके ही बहू-बेटीयों का इज्जत होता है दुसरों का नही कल मेंरे पास किसी मित्र का एक ई-मेल जिसमें एम.एफ.हूसैन को उसी के अन्दाज में तमाचा मारा गया था देख कर
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लो चुटकियों में कश्मीर मुद्दे का हल...खुशदीप

भारत भलमनसाहत दिखाते हुए जब भी पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, पाकिस्तान किसी न किसी बहाने कश्मीर को बीच में ले आता है...63 साल से यही कहानी चली आ रही है...दोनों देशों के बीच 176 बार बातचीत हो चुकी है...लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात...लेकिन
 
खुशदीप सहगल
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वरमाला कोई भी पहना दे, किन्तु मायामय हो वह वरमाला!...............घुघूती बासूती

एक नवयुवक है। इसी साल पढ़ाई खत्म होगी। कैम्पस साक्षात्कार में उसे बढ़िया नौकरी भी मिल गई है। कई जगह से रिश्ते आने शुरू हो गए हैं। अभी कुछ ही दिन पहले तक केवल एक विशेष कार, एक बड़ा टी वी, फ्रिज़, (बड़ा कठिन है इस सूची को बनाना! कुछ छूट गया तो? एक बेसिक सूची
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बडे बडे फन्ने खाँ ब्लागर यहाँ एक कौडी में तीन के भाव बिक रहे हैं-- (आह्वान)

प्रभो! आओ, आओ.....हम इस समय तुम्हे बडे दीन होकर पुकार रहे हैं। तुम तो दीनों की बहुत सुनते थे। सुनते क्या थे, तुम तो दीनों के लिए थे ही। क्या हमारी न सुनोगे! देखो जरा इस ब्लागजगत को एक नजर देखो तो सही। पारस्परिक ईर्ष्या द्वेष नें यहाँ का सत्यानाश कर के रख
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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उदास मत हो ब्लॉगिंग

प्रिय ब्लॉगिंग,आशा है तुम मज़े में होगी । मैं भी मजे में हूँ । अब यह न पूछना कि मैं तुमसे दूर रहकर भी मजे में कैसे रह रहा हूँ जबकि तुम तो मेरे बिना अधूरी अधूरी सी फील करती हो । वैसे अगर तुम ऐसा पूछ भी लो तो भी मेरे ऊपर कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि मुझे
 
विवेक सिंह
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बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना : ताऊ रामपुरिया

माननीय ब्लागर बंधुओं, आप सभी को गुडी पडवा (नव वर्ष) की हार्दिक शुभकामनाएं. नववर्ष के शुभारंभ के पावन अवसर पर हास्य व्यंग के लिये आज ताऊ डाट इन की तरफ़ से बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना की घोषणा करते हुये हमें बहुत ही सुखद अनुभूति हो रही हैं.इस
 
ताऊ रामपुरिया
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आना लंगूर के हाथ में हूर का ... बाद में पछताना लंगूर का

आप जितने भी जोड़े देखते होंगे उनमें से पंचान्बे प्रतिशत बेमेल ही मिलेंगे। पता नहीं क्या जादू है कि हमेशा हूर लंगूर के हाथों ही आ फँसती है। हमारे हाथ में भी आखिरकार एक हूर लग ही गई थी आज से चौंतीस साल पहले।जब शादी नहीं हुई थी हमारी तो बड़े मजे में थे हम।
 
जी.के. अवधिया
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टॉप ब्लौगर बन भी जाओगे तो क्या उखाड़ लोगे? - टेस्ट पोस्ट

ख़ुशी है कि यहाँ की असलियत आपको जल्दी समझ आ गयी. यहाँ गुटबाजी ही चलती है. इस समय यहाँ कई गुट बने हुए हैं. कमाल तो ये है कि वही गुटबाजी का विरोध भी करते हैं. अदा एंड खुशदीप ड्रामा कंपनी ताऊ एंड समीर मदारी पार्टी फुरसतिया खड़ूस मंच तस्लीम तमाशा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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अगर जल्दी में हैं तो इसे न पढ़ें...खुशदीप

बर्थ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारे जन्म का...डेथ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारी मौत का...फोटो सबूत हैं हमारे ज़िंदा रहने का...अब आप एक ठंडी सांस लीजिए...और पूरे सकून के साथ इसे धीरे-धीरे पढ़िए...मैं मानता हूं...कि दो लोग आपस में तर्क करते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि
 
खुशदीप सहगल
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क्या ब्लाग जगत में भी मठाधीशों का राज है

हमें भी अब ऐसा लगने लगा है कि शायद ब्लाग जगत में मठाधीशों का राज है जो किसी नए ब्लागर को तेजी से आगे बढ़ता देखना पसंद नहीं करते हैं। यह बात हमने एक बार नहीं कई बार महसूस की है। हमने जब इसके पहले दो बार चिट्ठा जगत पर सवालिया निशाना लगाया तो हमें मित्रों
 
राजकुमार ग्वालानी
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क्या अब अमेरिका में भी सच्चर और रंगनाथ मिश्र आयोग की जरूरत है??? Sachchar Rangnath Mishra Commission, Muslims in USA

भारत अथवा विश्व के किसी भी देश में जब भी कोई सामाजिक स्थिति सम्बन्धी अध्ययन किये जाते हैं, तब इस बात पर मुख्य जोर दिया जाता है कि विभिन्न धर्मों और जातियों में देश के विकास और अर्थव्यवस्था से होने वाले फ़ायदे बराबर पहुँच रहे हैं या नहीं। सामान्यतः यह माना
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रिन से भी ज़्यादा सफ़ेद-हबीबगंज-भोपाल एक्सप्रेस

आपमें से कई लोगों ने हबीबगंज एक्सप्रेस में सफ़र किया होगा। निज़ामुद्दीन से चलकर भोपाल और हबीबगंज जाने वाली ट्रेन। इसकी सफाई मुझे हमेशा से आकर्षित करती रही है। गज़ब का अनुशासन दिखता है इस ट्रेन। रेल यात्रा का जितना अनुभव रहा है उसके आधार पर कह सकता हूं कि
 
ravish kumar
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आपकी मुस्कान का सम्मान...खुशदीप

आज की ये पोस्ट इरफ़ान भाई को समर्पित है...देश के अग्रणी कार्टूनिस्ट इरफ़ान को हिंदी अकादमी ने वर्ष 208-09 के लिए काका हाथरसी सम्मान देने की घोषणा की है...43 साल के इरफ़ान भाई का सम्मान पूरे ब्लॉगवुड का सम्मान है...अपने ब्लाग इतनी सी बात से इरफ़ान भाई
 
खुशदीप सहगल
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ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है

सठियाने की भी एक सीमा होती है पर ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है। कब्र में पाँव लटकाये बैठा है पर ब्लोगिंग का शौक नहीं गया। है तो पिद्दी जैसा पर अपने आपको बहुत बड़ा ब्लोगर बताता है। अकल तो ऐसी है इसकी कि कहे खेत की और सुने खलिहान की पर कमली
 
जी.के. अवधिया
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मैं गर न टूटूं ....

तुम्हारी चोट सेमेरा दरकना लाज़मी तो नहीं,मगरकुछ बातें मेरे इख्तियार में भी नहींमुझे बार-बार तोड़ना, फिर जोड़नाप्रिय शगल है तुम्हारास्वामित्व का बोध कराता हैतुम सिर्फ मेरी होपुख्ता  अहसास दिलाता है  मैं तुम्हें खुश होने देती हूँइस लिए नहीं कि मैं
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समेटना बिखरे भावों का- भाग १

भावों और विचारों का क्या है? वक्त बेवक्त किसी भी रुप में चले आते हैं. कभी दर्ज कर लिया, कभी छूट गये. दर्ज कर लिया तो एक दस्तावेज के रुप में सहेजने का दिल हो आता है. कुछ छोटी छोटी पंक्तियाँ अपनी ही तस्वीरों पर दर्ज कर के कभी ऑर्कुट पर, कभी फेस बुक पर
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मर्द,सैक्स और कैमरा

लव,सेक्स और धोखा। पूरी फिल्म में कैमरा वैसे ही देखता है जैसे हमारे समाज में मर्दों की नज़र मौका देखकर लड़कियों को देखती है। इस नज़र को बनाने में कई तरह की परिस्थितियां सहायक होती हैं। कैमरा अलग-अलग एंगल से अपनी नायिकाओं को तंग नज़रों की ऐसी गहराई में
 
ravish kumar
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मदमस्त मिलन इक ऐसा हो जाये....चाह न मिलने की कोई रह जाए

 मदमस्त मिलन इक ऐसा हो जाये , शुक्राणु कोष आजीवन मिल जाए  ,  चाह न मिलने की कोई रह जाए .....न न यह कोई कविता नहीं बल्कि एक हकीकत है कितनी ही चीटियों, मधुमक्खियों ,ततैयों और दीमकों का सेक्स जीवन ऐसा ही होता है .इन कीट परिवारों की मादाएं बस
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प्रिय ब्लॉगरों एवं पाठकों, इन शब्दों तथा खास व्यक्तियों के पूरे नामों का अधिकाधिक उपयोग करें… (एक माइक्रो-पोस्ट)

शब्द कोई सा भी हो, किसी भी भाषा का हो, यदि लगातार लेखन-पठन और बोलचाल में उपयोग किया जाये तो वह जल्दी लोकप्रिय हो जाता है और चलन में आ जाता है। प्रिय मित्रों और पाठकों, गत एक-दो वर्ष से लगातार ब्लॉग लेखन के दौरान मैंने कुछ शब्दों को बनाने और फ़िर उन्हें
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आओ ब्लागवाणी पर पसंद- नापसंद खेलें!

अपने नए कलेवर में ब्लोगवाणी रूप रंग और सौन्दर्य की इन्द्रधनुषी छटा बिखेर रही है. कई नए आकर्षण इससे आ जुड़े हैं .इन्ही में एक पसंद नापसंद  का भी विकल्प है -मतलब आपको  फ्रीडम  है कि किसी भी पोस्ट को उसके आपत्तिजनक कंटेंट के कारण  आप उसके
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कल्पना के घोड़े पर सवार, पत्रकार

कल राजदीप सरदेसाई की ट्विट, फिर उस पर टिप्पणी और उसका जवाब, यह सब मिला कर एक बात बनी कि संपादक भले ही बीक गए हो, आम पत्रकार अभी भी ईमानदार है. मुझे लगता है कि यह ईमानदारी वाली बात भी एक भ्रम ही है. जब पत्रकार पैसे के लिए न भी बिके अगर वह पूर्वाग्रह [...]
 
संजय बेंगाणी