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इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी

इस्‍लाम का उदृदेश्य आतंक और सेक्स है यह मेरा कहना नही है किन्‍तु जब इस्‍लाम से सम्‍बन्धित ग्रंथो का आध्‍ययन किया जाये तो प्रत्‍यक्ष रूप ये यह बात सामने आ ही जाती है। कि घूम फिर कर अल्‍लाह को खुश करने के लिये जगह पर आंतक फैलाने और उनके अनुयायियों खुश
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हिन्दुत्ववादी ब्लॉगरों से परहेज, नामवर सिंह का आतंक और सैर-सपाटा यानी इलाहाबाद ब्लॉगर सम्मेलन…

ज़रा सोचिये, आप किसी बड़े शहर के सबसे पुराने और काफ़ी ख्यात ब्लॉगर हैं, उसी शहर में कोई ब्लॉगर सम्मेलन होता है जिसे तथाकथित रूप से "राष्ट्रीय संगोष्ठी" का नाम दिया जाता है, लेकिन फ़िर भी न तो आपको उस सम्मेलन हेतु कोई निमंत्रण पत्र भेजा जाता है, उलटे
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अल्‍लाह की शक्ति का अतिक्रमण करता भारतीय संविधान, कठमुल्‍लों फतवा जारी करो

मुस्लिमो द्वारा वन्‍देमातम् को लेकर जो गंदा खेल खेला जा रहा है, उसके पीछे देश के एकीकृत ढाचे को तोड़ने की मंशा दिखाई देती है। वन्‍दे मातरम् कोई गीत मात्र नही है बल्कि देश की आजादी के समय स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियो में जोश भर देने वाला मंत्र था, जिस
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एक ब्लोगवाणी पसंद का सवाल है बाबा ... जो दे उसका भी भला जो न दे उसका भी भला

कल हमने भेजे याने कि खोपड़ी पर लिखने के लिये खूब खोपड़ी खपाया, उसे लिखने के लिये दो घंटे की मशक्कत के बदले सिर्फ छः ब्लोगवाणी पसंद ही पाया, इतनी कम पसंद? क्या हम इतने गये गुजरे हैं? ये सब सोच कर हमारा भेजा भन्नाया अरे! ये तो कविता बनती जा रही है। नहीं
 
जी.के. अवधिया
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माँ को इज्जत देनें मे अगर शर्म आती है तो कहीं डुब मरो

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने। अगर ऐसा वाकया आपको देखने को मिले जहाँ कोई अपनी माँ को माँ कहने में शर्म महसुस करता हो और पुछने पर कहता हो ये बताने के लिए कि ये माँ है,माँ कहना जरुरी नहीं है। जरा सोचिए कितनी शर्मसार करने वाली घटना है। मेरा ये कहना उनके
 
Mithilesh dubey
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ईसाई संगठन का यह न्यूज़लेटर साम्प्रदायिक है या मनगढ़न्त? KCBC Newsletter Kerala Love Jihad

केरल में कोचीन स्थित केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (KCBC) के तहत काम करने वाले संगठन कमीशन फ़ॉर सोशल हारमोनी एण्ड विजिलेंस द्वारा जारी ताज़ा न्यूज़लेटर में केरल में चल रहे "लव जेहाद" और इसके धार्मिक दुष्प्रभावों के बारे में ईसाई समाज को जानकारी दी गई है।
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फ़ाइव स्टार होटल की नौकरी छोड़कर, मदुरै की सड़कों पर मनोरोगियों, पागलों और विक्षिप्तों को भोजन कराता एक महात्मा… A Social Worker Madurai

हम सभी ने अपने-अपने शहरों में सड़कों, गलियों और बस-स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशनों आदि कई जगह अनाथ, लेकिन पागल और अर्धविक्षिप्त लोगों को हमेशा देखा है। कभी-कभार दया दिखाये हुए हम उनको कुछ खाने को दे देते हैं, लेकिन मनुष्य के शरीर को भूख तो जीवन भर ही लगती है
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यदि कांग्रेस खत्म हो जाये, तो हिन्दू-मुस्लिम दंगे नहीं होंगे…- सन्दर्भ मिरज़ के दंगे Miraj Riots & Communal Politics by Congress

प्रायः सभी लोगों ने देखा होगा कि भारत में होने वाले प्रत्येक हिन्दू-मुस्लिम दंगे के लिये संघ-भाजपा को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जब भी कभी, कहीं भी दंगा हो, आप यह वक्तव्य अवश्य देखेंगे कि "यह साम्प्रदायिक ताकतों की एक चाल है… भाजपा-शिवसेना द्वारा रचा
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इस्लाम के "सच्चे" फ़ॉलोअर्स से आपका परिचय बहुत जरूरी है… Fanatic Followers of Islam

एक खबर अपने "महान सेकुलर" भारत देश से, तथा एक खबर धुर इस्लामिक देश सोमालिया से, जबकि कुछ अन्य खबरें यत्र-तत्र बिखरी पड़ी हुई… इन्हें एक ही पोस्ट में समेटकर लाया हूं, ताकि आप इस्लाम के सच्चे फ़ॉलोअर्स से परिचित हो लें (वे सेकुलर्स और वामपंथी भी परिचित ह
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वर्ष बीतते बीतते मुझे मिली यौनिक और लैंगिक उत्पीडन करने की धमकियां! ओह!

मैं ब्लागजगत में असहमतियों के मुद्दों को यही सार्वजनिक मंच पर निपटा लिया जाना उचित समझता हूँ . मुझे धमकाया जा रहा है कि मैं अपने वकील /विधि परामर्शी से मिल कर एक मामले में मुतमईन हो लूं -सो मामला यहाँ  महा पंचायत में रख रहा हूँ- बजा कहे जिसे आलम
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अपने घर में राम राज कब आयेगा ?

बड़ा शोर मचा था चुनाव के दिनों में । कोई कह रहा था .... समाजवाद आयेगा , कोई कह रहा था - राष्ट्रवाद आयेगा, कोई कह रहा था - राम राज आयेगा ....ये बात मेरी इकलौती पत्नी ने सुन ली । मज़ाक में बोली - क्यों रे ! अपने घर में राम राज कब आयेगा ? मैं बोला - कोई
 
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नामवर के होने का अर्थ

नामवर को जानो भाई जब 17 अक्टूबर की शाम में नामवर जी से फोन पर बात हुई थी तो यह तय हुआ था कि मैं और वे 23 अक्टूबर को इलाहाबाद में गले लग कर भेटेंगे । भेटने का प्रस्ताव मेरा था जिसे नामवर जी ने भावुकता भरे स्वर में स्वीकार कर लिया था। यह भेटना औपचारिक
 
बोधिसत्व
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महफूज़ भाई के प्यार कि दास्ताँ... इंटरवल के बाद का शेष भाग.... दीपक 'मशाल'

जो कहानी महफूज भाई ने सुनाई वो तो आधी-अधूरी है जनाब, वो तो सिर्फ तब की चर्चा है जब प्यार नया नया था.. इंटरवल तक उनसे सुन लिया अब आगे की फीचर फिल्म मेरे पास है. हुआ यूं की सब कुछ ठीक ठाक चल रिया था लेकिन एक दिन
 
Dipak 'Mashal'
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तहाँ तहाँ ते आ दाते हैं

तहाँ तहाँ ते आ दाते हैं तलते थेद उती थाली में दितमें में लथ थाना थाते हैं तहाँ तहाँ ते आ दाते हैं तलते बत अपनी मनमानी औलों ती बातें बेमानी बत ये ही तो बते हैं द्यानी अपनी बात तहे दाते हैं तहाँ तहाँ ते आ दाते हैं विनम्लता ते बैल पुलाना दो दी में आये त
 
विवेक सिंह
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भारत में ईसाई-मुस्लिम संघर्ष की शुरुआत केरल से होगी… Christian Muslim Ratio and Dominance in Kerala

केरल, भारत का प्राकृतिक रूप से सम्पन्न एक खूबसूरत प्रदेश, जहाँ समुद्र का “बैकवाटर” इसे भारत का वेनिस कहे जाने को मजबूर कर देता है, कुछ ही वर्षों में एक भयानक संघर्ष की भूमि बन जाने को अभिशप्त लगने लगा है। लगभग आज़ादी के बाद से ही यहाँ दो प्रमुख गठबन्ध
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इसीलिये रतन टाटा वन्दनीय और "सरकारी व्यवस्था" निन्दनीय हैं… Ratan Tata, 26/11 Terrorist Attack, Taj Hotel

कोई भी कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर अपने मालिक के लिये वफ़ादारी और समर्पण से काम क्यों करता है? इसका जवाब है कि उसे यह विश्वास होता है कि उसका मालिक उसके हर सुख-दुख में काम आयेगा तथा उसके परिवार का पूरा ख्याल रखेगा, और संकट की घड़ी में यदि कम्पनी या फ़ैक्
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जीत गये भाई जीत गये....जी के अवधिया जीत गये ...

इस से पहले वाली पोस्ट में मैंने एक सरल सा सवाल पूछा था अनिल पुसदकर के ढाबे की वाट लगाने का ज़िम्मेदार कौन ? जल्दी बताइये.......... जिसके जवाब हेतु चार घंटे का समय दिया था लेकिन बधाई के पात्र हैं श्री जी के अवधिया जी जिन्होंने चार मिनट में ही सही जवाब
 
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मुआवज़े में भेदभाव - देने वाला सेकुलर, विरोध करने वाला साम्प्रदायिक (एक माइक्रो पोस्ट)

अक्टूबर 2009 को कासरगौड़ जिले की ईरुथुंकादवु नदी में डुब जाने से चार बच्चों की मौत हो गई, जिनके नाम थे अजीत(12), अजीश(15), रतन कुमार(15) और अभिलाष(17), जो कि नीरचल के माहजन स्कूल के छात्र थे। 2) 3 नवम्बर 2009 को त्रिवेन्द्रम के अम्बूरी स्थित नेय्यर नद
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बाप रंगलाल बनाम बेटा नंगलाल

रंगलाल जी का पाँच वर्षीय पुत्र नंगलाल कुछ पढ़ रहा था । # कौन सी किताब पढ़ रहे हो बेटा ? - अपने बच्चों का लालन पालन कैसे करें # तुम्हारे किस काम की है ये ? तुम तो ख़ुद ही अभी बच्चे हो ... _ तभी तो देख रहा हूँ कि आप लोग मेरा लालन पालन ठीक ठाक कर रहे हो य
 
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स्लमडॉग मिलेनियर बनाम "मिलेनियर स्लमडॉग"

स्लम डॉग मिलेनियर की सफलता से प्रभावित हो कर उसका भाग - दो बनाने के लिए सोचा जा रहा है ...... सोचा क्या जा रहा है , अपने बालों को नोंचा जा रहा है क्यों कि फ़िल्म का हीरो होगा ( सत्यम फेम ) रामलिंगा राजू और फ़िल्म का टाईटल होगा --" मिलेनियर स्लम डॉग "
 
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गूगल, यूं हिंदुस्तानियों के साथ खिलवाड़ न करो

प्रिय गूगल, इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम हर इंटरनेट यूजर की ज़रूरत हो और इंटरनेट पर उसके सबसे अच्छे दोस्त हो। यह भी सही है कि तुमने इंटरनेट पर क्रांति का सूत्रपात किया है और इंटरनेट को नए तरीके से परिभाषित किया है। इसी वजह से आज तुम इंटरनेट पर सबसे बड
 
आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal)
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गाय काटने वालो का क्यों ना सर कलम कर दिया जाये

गाय " जिसे हमारे धर्म (हिन्दू) में माता का दर्जा प्राप्त है। अब माता क्यों कहा जाता है ये सबको पता है। भारत कि गौरवशाली परंपरा में गाय का स्थान सबसे ऊँचा और अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है। गाय माता की महिमा पर महाभारत में एक कथा आती है। यह कथा रघुकुल के र
 
Mithilesh dubey
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साईड मिरर-एक लघु कथा

उस दिन जब मंदिर से निकला तो तुम्हारी कार बिल्कुल मेरे कार के पीछे पीछे निकली. एक ही हाईवे भी लेना था. मेरी कार आगे आगे और तुम्हारी पीछे. मैं साईड मिरर से तुम्हें साफ साफ देख पा रहा था. साईड मिरर का मानो ऐसा एंगल सेट हो गया था कि बस तुम्हारी ड्राइविंग
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एक "महान राष्ट्रसन्त" : सेमुअल राजशेखर रेड्डी… YSR Memorial Land Grab in AP and Anti-Hindu Activities

हाल ही में भारत ने अपने एक "राष्ट्र सन्त" को खोया है, जी हाँ, मैं बात कर रहा हूं वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी की… उनकी याद में, उनके गम में, उनकी जुदाई की वजह से आंध्रप्रदेश में 400 से भी अधिक गरीब किसानों ने टपाटप-टपाटप आत्महत्याएं की हैं (ऐसा तो MGR क
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भविष्य का स्वागत करती हूँ

घर में अकेली हूँ। बच्चे पापा के साथ घूमने गए हैं। मैं न गई। अधकपारी से सिऱ फटा जा रहा है। चाय चढ़ा कर भूल गई। जब जलने की महंक आई तो दौड़ कर किचेन में गई। सब कुछ जल चुका था। चूल्हा बुझा कर लौट आई। चाय पीने का मन है लेकिन बनाने का मन नहीं है। सोच रही ह
 
आभा
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हिप-हिप हुर्रे.. ब्लॉगवाणी इज बैक

थैंक्स ब्लॉगवाणी.. सभी चिट्ठाकार साथियों की अपील स्वीकार करने के लिए.. ब्लॉगवाणी संकलक फिलहाल अस्थायी तौर पर बहाल किया जा रहा है.. ब्लॉगवाणी की पाती पढ़ने के लिए यह पोस्ट पढ़ें उम्मीद है कि ब्लॉगवाणी जल्द ही और भी मज़बूत संकलक के रूप में हमारे सामने
 
आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal)
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साले........नमक हराम क्रिकेटर !

एक बार फिर भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम से हार गई है । बहुत लोगों को दुःख हुआ । उन्हें तो बहुत ही गहरा आघात लगा जिन्होंने भारत की जीत पर सट्टा लगा रखा था । दुःख मुझे भी हुआ । लेकिन मुझे क्रिकेट की हार से दुःख नहीं हुआ । मैं तो ये सोच
 
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रंगलाल के बेटे नंगलाल ने मनाया बाल दिवस

रंगलाल का बेटा नंग लाल आज सुबह सुबह अपने बालों में सफ़ेद रंग लगा कर उन्हें काले से सफ़ेद कर रहा था । बाप ने ये देखा तो पूछे बिना रहा न गया । रंग लाल : ये क्या हो रहा है ? नंगलाल : बाल दिवस मना रहा हूँ बाल सफ़ेद कर के ? रंगलाल : मगर बाल सफ़ेद कर क्यों रहा
 
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हेडलाइन टूडे के रिपोर्टर गौरव सावंत के नाम

अमूमन हफ़्ते में एक ही पोस्ट लगाता हूँ मैं, लेकिन आज इस पोस्ट को लगाने की एक खास वजह है। विगत तीन दिनों से मन की विचलित हालत सबकुछ अस्त-व्यस्त किये हुये थी। ...और मन की ये विचलित हालत थी इस एक रिपोर्ट की बिना पर। गौरव सावंत एक बहुत ही सम्मानित और भरोस
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तुलसी और दुर्वासा इतने भौंडे तो नहीं थे

ब्लॉग पर कविता लिखना कितना आसान है उसका एक उदाहरण देखिये. स्वनामधन्य महाकवि श्री अलबेला खत्री ने एक कविता लिखी है. कविता का शीर्षक है; "लोग माथा पीट रहे हैं और तुम लिंग पकड़ कर बैठी हो."शीर्षक पढ़ लिया? अब कविता का कंटेंट पढ़िए;कहीं स्वाइन फ्लू जैसा रोग है
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बबली की जिज्ञासा शान्त की सुधा ओम ढींगरा ने.....

बबली जी के मन में कई दिनों एक सवाल उठ रहा था । उन्होंने कई लोगों से पूछा लेकिन उसका सही सही जवाब नहीं मिला था । यहाँ तक कि ताऊ रामपुरिया जी और समीरलालजी ने भी ' hands up ' कर दिए , अन्ततः सुधा ओम ढींगरा जी ने उनकी जिज्ञासा शान्त की । आइये अनुमान लगाए
 
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चर्चित चर्चा के अलावा प्रभावी हो रही इन चर्चाओं को देखिये

चर्चित चर्चा के अलावा प्रभावी हो रही इन चर्चाओं को देखिये तेजी से इनके ग्राफ में उठाव आ रहा है. इब इनको कोई कब तक इग्नोर करेगा शायद आप भी नहीं. हिंदी ब्लागिंग के लिए ज़रूरी है कि जो करें   गंभीर हो कर करें चर्चा टिप्पणी,लेखन इसमें सब कुछ शा
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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पुस्तकों का मूल्य

जो लोग पन्ने गिन कर पुस्तकों का मूल्य देते हैं , उनका मन पुस्तक के नीचे दब कर ही कब्र में पहुँच जाता है - गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर
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तुम्हारी याद आती है, तो लाखों दीप जलते हैं............

पवन जब गुनगुनाती है , तुम्हारी याद आती है घटा घनघोर छाती है , तुम्हारी याद आती है बर्क़ जब कड़कडाती हैं , तुम्हारी याद आती है कि जब बरसात आती है , तुम्हारी याद आती है तुम्हारी याद आती है , तो लाखों दीप जलते हैं मेरी चाहत के मधुबन में हज़ारों फूल खिलते
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हिन्दू मरने के बाद गद्दार बनते हैं और मुस्लिम देशभक्त

हिन्दू मरने के बाद गद्दार बनते हैं और मुस्लिम देशभक्त " आप लोग सोच रहे होंगे कि मै ये क्या बके जा रहा हूँ। सब्र करिये कुछ देर बाद सारी बात साफ हो जायेगी। मेरा ये लेख लिखने का कोई प्लान नहीं था और नहीं ऐसा लेख लिखने की इच्छा ही थी लेकिन बेअक्लो की वजह
 
Mithilesh dubey
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काश ! मैं भी दीया होता..आरती का नहीं तो अर्थी का सही..

दीया आरती का हो या अर्थी का दोनों अन्धेरा छाँटते हैं उजाला बाँटते हैं लेकिन विनम्रता देखिये दोनों की न तो कोई किसी पे हँसता है न ही कोई व्यंग्य कसता है न कोई वाद करते हैं , न ही विवाद करते हैं दीये बस रौशनी का जहाँ आबाद करते हैं इनमें शायद हीरो बनने
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कश्मीर के रजनीश मामले ने "सेकुलरों" को फ़िर बेनकाब किया… Kashmir's Rajneesh Sharma Case Irritating Secularism

भारत में अक्सर सेकुलर लोग तथाकथित "गंगा-जमनी संस्कृति" की बातें जी खोलकर करते रहते हैं। सेकुलरों का सबसे प्रिय शगल होता है भाजपा-संघ को कोसना, गरियाना और भाजपा अथवा हिन्दुत्ववादी संगठन जो भी कहें उसका उलटा बोलना। चाहे महंगाई ने गरीबों का जीना हराम कर
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"दक्षिण का मोदी" पीठ में छुरा खायेगा… Karnataka, Yeddiyurappa, Reddy Brothers Political Cricis

दक्षिण में पहली बार भाजपा-हिन्दुत्व का खिला हुआ कमल, दो भाईयों के लालच, और सत्ता की प्यास की वजह से खतरे में पड़ गया है। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में चल रही राजनैतिक उठापटक में "दक्षिण के मोदी" कहे जा रहे बीएस येद्दियुरप्पा की कुर्सी डांवाडोल हो रही है
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अब साधू होने का मन है

हमको नाहक ही बुलवाया इंतजाम यह रास न आया दोहरी सभी व्यवस्थाएं थीं पैसा जाने कहाँ बहाया उनको दूध-जलेबी हाज़िर हमें बेड-टी को तरसाया कैसी कैसी उम्मीदें थीं उन पर पानी खूब फिराया वे ठहरे एसी कमरों में हमें मच्छरों से कटवाया सीखे-पढ़े सभी मच्छर थे सारी रात
 
विवेक सिंह
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बन्द कर अब मेरा धीरज जा लिया

मेजर गौतम राजरिशी से प्रभावित होकर आज गज़ल में हाथ आज़माने का मन किया । बस लिख दिया यूँ ही कुछ निरर्थक । पर गज़ल बनी कि नहीं यह तो गज़लगो ही जानें । आप पढ़िए । तेरी खुराफातों से आजिज आ लिया । बन्द कर अब मेरा धीरज जा लिया ॥ कर रहा है धृष्टता पर धृष्टता । च
 
विवेक सिंह