मेरा धर्म बड़ा है , तुम्हारा धर्म छोटा, अल्लाह बड़ा है, भगवान् छोटा......
आये दिन सुनती रहती हूँ , मेरा धर्म बड़ा है , तुम्हारा छोटा, अल्लाह बड़ा है, भगवान् छोटा...और सोचती हूँ क्या ईश्वर को परिभाषित करना इतना आसन है ? क्या ईश्वर का विश्लेषण इतना सरल है ? क्या जो लोग ईश्वर या अल्लाह के बारे में इतनी बातें बताते हैं, सचमुच इसके
Mar 21 2010 04:52 AM



(1 ) पोस्ट छपने के बाद से लेकर पहली टिप्पणी आने तक ही लेखक को यह सुविधा मिलनी चाहिए कि वह पोस्ट में परिवर्तन कर सके। उसके बाद नहीं। आदर्श स्थिति तो यह हो कि छपने के बाद से ही यह सुविधा बन्द कर देनी चाहिए, आखिर ऐसे भी पाठक हैं जो पढ़ते तो हैं लेकिन
ठंड रखिए, धीरज धरिए. आपको अभी बताते हैं. पर, क्या आप पचा पाएंगे? जब टॉप / शीर्ष के अच्छे ब्लॉगों के बारे में बताया जाता है तो तब इतना भयंकर जूतम पैजार, हो हल्ला मचता है हिन्दी ब्लॉग जगत में, ऐसे में हिन्दी के टॉप #10 सड़ियल ब्लॉगों की सूची यदि हम
आज, 21 मार्च को ललित वाणी, ललितडॉटकॉम, चर्चा पान की दुकान पर, शिल्पकार के मुख से, चिट्ठाकार-चर्चा आदि वाले ललित शर्मा का जनमदिन है। इनका ईमेल पता shilpkarr@gmail.com है तथा मोबाईल नम्बर (0)9425514570 है।बधाई व शुभकामनाएँआने वाले जनमदिन आदि की जानकारी,
कल मैनपुरी से ब्लॉगर भाई शिवम मिश्रा का फोन आया...उन्होंने बड़ी फ़िक्र जताई कि न तो ये स्टार ब्लॉगर महोदय फोन उठा रहे हैं, न ही इनका कोई अता-पता चल रहा है...मैंने भी कहा, भैया मुझसे आखिरी बार पांच छह दिन पहले जनाब ने बात की थी...आखिरी बार ये मिस्टर
जब वर्ष 2008 में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे पहले स्विस बैंकों और अन्य टैक्स हेवन्स में भारतीय धन के गुप्त रुप से जमा होने के मुद्दे को उठाया तो कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं ने इसका मजाक उड़ाया। वे सवाल करते थे कि जब एनडीए ६ वर्ष के लिए सत्ता में थी,तब इस
लव,सेक्स और धोखा। पूरी फिल्म में कैमरा वैसे ही देखता है जैसे हमारे समाज में मर्दों की नज़र मौका देखकर लड़कियों को देखती है। इस नज़र को बनाने में कई तरह की परिस्थितियां सहायक होती हैं। कैमरा अलग-अलग एंगल से अपनी नायिकाओं को तंग नज़रों की ऐसी गहराई में
प्रकाश के व्युत्क्रम से जब..मन घबरा जाता है,सोना-जागना/ खाना-पीना.. जीवन का क्रम बन जाता है..सर-दर्द तो मुझकोयाद है रहताअपनी स्वयं की देह का,आसपास की.. मौतों को परजब मन बिसरा जाता है...आगे बढ़ने को आतुर हो जबएड लगाता हूँ खुद को,कोई मुझसे बेहतर हो ना
मदमस्त मिलन इक ऐसा हो जाये , शुक्राणु कोष आजीवन मिल जाए , चाह न मिलने की कोई रह जाए .....न न यह कोई कविता नहीं बल्कि एक हकीकत है कितनी ही चीटियों, मधुमक्खियों ,ततैयों और दीमकों का सेक्स जीवन ऐसा ही होता है .इन कीट परिवारों की मादाएं बस
मैं खुद अपने आप को हिन्दू कहता मानता और लिखता हूं । सीता जी को माता और श्री रामचन्द्र जी को मर्यादा पुरूषोत्तम मानता हूं । मैं तो इस बात की भी परवाह नहीं करता कि लोग उन्हें काल्पनिक और मिथकीय पात्र मानते हैं ।श्रीमान डॉ अनवर जमाल मतलब ये की श्रीमान अनवर
भाई कभी कभी पहेली पुछने का हमारा दिल भी करता है, तो पुछ ही लेते है.... जबाब तो आप ने ही देना है, देखे किस का जबाब सही आता है माडरेशन चालू है जी, ओर २३, या २४ तारीख को विजेता घोषित किया जायेगा.... बस ध्यान से इस चित्र को देखे ओर फ़िर बताये कि यह किस देश मै
एक बार इस हिन्दी ब्लोगिंग में क्या घुस गये कि लत लग गई इसकी और इसने हमें "धोबी का गधा घर का ना घाट का" बना कर रख दिया। अंग्रेजी ब्लोगिंग करते थे तो जहाँ एडसेंस से चेक मिलता था वहीं क्लिक बैंक के प्रोडक्ट बिकने पर कमीशन की रकम सीधे हमारे बैंक खाते में जमा
किसी की ये अदा भी खूब रही कि अपने काव्य मंजूषा को गद्य मंजूषा बना दिया और उसमें भी अल्लाह को बड़ा और भगवान को छोटा कह दिया ।क्या वाक़ई भगवान छोटा और अल्लाह बड़ा है ?छोटाई और बड़ाई की तुलना के लिए दो वुजूद होना लाज़िमी है । इस सृष्टि के रचनाकार को अरबी भाषा
नमस्कार ,मै पंकज मिश्रा आप सबका स्वागत करता हु अपने इस चर्चा ब्लॉग पर ..चर्चा में समय कम दे पा रहा हु क्युकी नौकरी पर समय ज्यादे दे रहा हु . खैर कोई बात नहीं दोनों की जरुरत के हिसाब से समयानुकूल मैनेज किया जाएगा !चलिए चर्चा की तरफ चलते है .आज ललित शर्मा
मुझे इस फिल्म का इंतज़ार था . फ़िल्में एक से एक बढ़ कर बनती रहती हैं मगर दिबाकर बनर्जी की कोई भीफिल्म इन तमाम फिल्मों से एक मायने में मेरे लिए ख़ास होती है . दरअस्ल, दिल्ली के एक ख़ास कमीने तबके को पकड़ पाने की जो आँख दिबाकर के पास है वो दिल्ली-६ बनाने वाले
ओह बहुते अफ़सोस की बात है जी आजकल सब लोग टिप्पी करना कम कर दिए हैं जी ...और दूसरों का क्या कहें जब हम ही खुद बहुते एबसेंटी चल रहे हैं । जो रहे सहे बचे हुए हैं ..ऊ सब दे धनाधन ...इश्वर लडा रहे हैं ....सारा ताकत तो उसी में खर्च हुआ जा रहा है ....तो का होगा
आज रविवार को मै महेंद्र मिश्र आप सभी का सादर अभिवादन कर आपके लिए रविवार की चिट्ठी लेकर आ गया हूँ . आज सुबह सुबह अखबारों में यह समाचार पढ़ा की रेलवे के विज्ञापन में जो नक्शा दिया गया है देश की राजधानी दिल्ली को पकिस्तान में और और पश्चिम बंगाल की राजधानी को
आज सुबह दरवाजे की घंटी बजी। द्वार खोल कर देखा तो पांच से दस साल की चार-पांच बच्चियां लाल रंग के कपड़े पहने खड़ी थीं। छूटते ही उनमें सबसे बड़ी लड़की ने सपाट आवाज में सवाल दागा, 'अंकल, कन्या खिलाओगे'?मुझे कुछ सूझा नहीं, अप्रत्याशित सा था यह सब। अष्टमी के दिन
Life is a Game, …God likes the winner and loves the looser..But hates the viewer…So……Be the Player क्विज संचालन - अनंत आप सभी को नमस्कार !क्रियेटिव मंच आप सभी का स्वागत करता है!रविवार (Sunday) को सवेरे 10 बजे पूछी जाने वालीक्विज में एक बार हम फिर हाजिर
रवि्वारीय वार्ता प्रारंभ करते हैं और प्रस्तुत हैं कुछ बेहतरीन चिटठों के लिंक-आपको राजीव तनेजा का नमस्कार। आज ललित शर्मा जी का जन्म दिवस है--उनको ढेर सारी शुभकामनाएं-चलते हैं वार्ता पर--पलाश और सेमल के बीच एक और यात्रा ..... दिनेशराय द्विवेदी अनवरत परकल
यह हैरान और परेशान करने वाली बात है, लेकिन हकीकत है कि दिल्ली पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया है। यह कब्जा पाकिस्तान ने अपने दम पर नहीं बल्कि भारत के ही दम पर किया है। भारतीय रेलवे के एक विज्ञापन में यह शर्मनाक बात सामने आई है कि इस विज्ञापन में दिल्ली को
अपनी लोकप्रियता के शिखर दिनों में (यानि गुजरी शताब्दी के छठवें और सातवें दशक में) वेताल और मैण्ड्रेक की कथाएँ विश्व के एक सैकड़ा से भी अधिक देशों के हजारों समाचार पत्रों का नियमित हिस्सा हुआ करती थीं. ये या तो समाचार पत्र की दैनिक पट्टिका के रूप में या
बाटला हाऊस एनकाऊंटर मैं मारे गये दो आतंकवादियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से हमारा 6M मीडिया खूब चिल्ल पौं मचाये हुए हे कि और जिसका आधार उन्होने बनाया है कि पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मैं ये लिखा हुआ हे कि उन शबों पर ब्लंट औब्जैक्ट से चोट के निशान भी
साठ साल मे अकल न आई, देश के भूखे-नंगो को ।चुन-चुन कर सदन भेज रहे, लुच्चे और लफ़ंगो को ॥चमन उजाडने वाला, बन बैठा बाग का माली है ।भ्रष्ठाचार के फूल खिले हैं, बगिया मे बदहाली है ॥प्रतिनिधित्व के नाम पर, ये सारा गडबड झाला है ।जन पैंसे को तरस रहे, इनके कंठ
18 फरवरी 2010 को सुबह सात बज कर दस मिनट पर माँ ने अंतिम साँस ली. कुछ दिन पहले ही मालूम हो गया था कि उनके जाने का समय आ रहा था. एक तरफ़ मन चाहता था कि वह हमेशा हमारे साथ रहें, दूसरी ओर सारे जीवन की उनकी शिक्षा थी कि तड़प तड़प कर जीना, कोई जीना नहीं और यह
कल आपसे वादा किया था कि माता का जसगीत आपको सुनाने का प्रयास करुंगा। मेरा प्रयास पुरा हुआ और मै उसे आपके लिए लाने में सफ़ल हुआ। छत्तीसगढ के भजन सम्राट दुकालु राम यादव के "राम लखन तोर जंवारा" से यह गाना लिया गया हैं। हम उन्हे धन्यवाद देते हैं कि छत्तीसगढ की
सुनो सुनो सुनो.....ब्लागवुड के सभी ख़ास-ओ-आम को इतल्ला दी जाती है....गर्ल फ्रेंड नंबर ३०१ मिल गई है....महफूज़ मियाँ को उनके साथ देखा गया है....हमारे खोजी कैमरे ने वो चेहरा भी कैद कर लिया है.....देख लीजिये आप भी...........थोड़ा और .....
क्या आत्महत्या ही सारी समस्याओं का हल है?ये सवाल मेरे अकेले का नही है और ये अचानक़ ही मेरे दिल-दिमाग में उथल-पुथल नही मचा रहा है।पिछले कुछ दिनों से इस सवाल ने मुझे बैचैन कर दिया है।आखिर आत्महत्या से सारी समस्यायें खत्म कैसे हो सकती है?मेरे हिसाब से तो
पिछले दिनों सहारा इंडिया की विभिन्न प्रकार के बचत स्कीमों के लिए काम कर रहे एक एजेंट के बारे में जानकारी मिली। रोजी रोटी की समस्या से निजात पाने के लिए वह इसका एजेंट तो बन गया , पर यहां भी राह आसान न थी। पांच दस रूपए व्यर्थ में बर्वाद करनेवाले और कभी
मैंने “ताजमहल या तेजो महालय” के संदर्भ में अपनी पहली पोस्ट लिखते वक्त यह गलती कर दी की मैंने आपको यह नही बताया की न मैं हिंदू धर्म का समर्थक हूँ और न ही मुस्लिम धर्म का, और इन पोस्ट का किसी भी धर्म से कोई सम्बन्ध नही है| कुछ लोगों का कहना है की इस पोस्ट
अगर कोई गलत खबर न्यूज चैनल पर चल जाए तो क्या हो सकता है? शायद आपका जवाब हो कि, गलत खबर चलने पर न्यूज चैनल पर मानहानि का केस किया जा सकता है। लेकिन कोई व्यक्ति गरीब हो, असहाय हो, और उसके बाद न्यूज चैनल पर गलत खबर चलने के बाद आसपास के लोग उसे ‘बलात्कारी और
तीस की उम्र में पचास की लगती हैं पहाड़ की औरतें उदास सी लगती हैं काली हथेलियाँ, पैर बिवाइयां पत्थर हाथ, पहाड़ जिम्मेदारियां चांदनी में अमावस की रात लगती हैं कड़ी मेहनत सूखी रोटियाँ किस माटी की हैं ये बहू, बेटियाँ नियति का किया मज़ाक लगती हैं दिन बोझिल, रात
जन्मदिन में केक काटना क्या जरूरी है? क्या हमारी यही प्रथा रही है?ये प्रश्न मेरे मन में इसलिये उठे क्योंकि आज मेरे प्रिय मित्र ललित शर्मा जी का जन्मदिन है। मोबाइल लगाकर बधाई देने के बाद मैंने उनसे कहा कि मैं आ रहा हूँ अभनपुर आपके जन्मदिन के जश्न में शामिल
प्रेरणा - उल्के, ओम आर्य डरो नहीं - प्रेम जीवित रहेगा। मृत्यु के बाद भी।बिछड़ने के बाद भी।तारे के उल्का हो जाने के बाद भी। चाँद तारों के पार प्रेम जीवित रहेगा -मैं मैं न रहूँगावह वह न रहेगी।..बहुत दिनों बाद जब याद करेंगेप्रेम फैलेगा मुलायम चाँदनी
Shuffle
























