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बदन से सरकते कपड़े--------------------[मिथिलेश दुबे]
बदन से सरकते कपड़े , जी हाँ आजके वर्तमान परिवेश में आपको आसानी से दिख जायेगा । अब ये आपको हर गली नुक्कड़ , बाजार हो या शोपिग माल छोटे कपड़ो मे लड़कियां आपको आसानी से दिख जायेंगी । कल तक छोटे कपड़े रैंप पर कैटवाक करती मॉडल्स अपने डिजाइनर्स के कलेक्शन को
Mar 09 2010 04:24 PM



अब वे टिप्पणियाँ कैसे लौटेंगी जो उन डीलीटेड पोस्ट्स के साथ दफ़न हो गईं ? मैंने और आप सब ने भी अगर ये दुनिया है तो कैसी दुनिया है-काव्य मंजूषा और स्प्लिट सेक्स चिकेन -स्वप्न दर्शी पर कल टिप्पणियाँ की थीं मगर आज ये दोनों पोस्ट ब्लॉग मालिकों
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर दिया ! हमारे मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से इस हिन्दी जगत में न सिर्फ नफरत का आतंक फैला
अभी उसी दिन मुझे बताया गया कि मैं बहस मुबाहिसों के दौरान अधिकतर अपशब्दों /अब्यूजिव मतलब गाली गलौज की भाषा का प्रयोग करता हूँ और वह भी खास तौर पर नारियों के लिए .यह मेरे लिए असहज हो उठने की स्थिति थी मगर उससे कहीं बढ़कर आत्मान्वेषण का एक सुनहरा मौका भी सहज
हमें भी अब ऐसा लगने लगा है कि शायद ब्लाग जगत में मठाधीशों का राज है जो किसी नए ब्लागर को तेजी से आगे बढ़ता देखना पसंद नहीं करते हैं। यह बात हमने एक बार नहीं कई बार महसूस की है। हमने जब इसके पहले दो बार चिट्ठा जगत पर सवालिया निशाना लगाया तो हमें मित्रों
मातृभूमि की सेवा करने वाले सैनिक क्या अलग मिट्टी के बने होते हैं...क्या वो आपके-हमारी तरह इंसान नहीं होते...सरहद पर दुश्मन से मोर्चा लेते हुए शहीद होने वाले रणबांकुरों की रगों में क्या कुछ अलग तरह का लहू दौड़ता है...आज एक पिता की नज़र से बताता हूं आपको
अपने नए कलेवर में ब्लोगवाणी रूप रंग और सौन्दर्य की इन्द्रधनुषी छटा बिखेर रही है. कई नए आकर्षण इससे आ जुड़े हैं .इन्ही में एक पसंद नापसंद का भी विकल्प है -मतलब आपको फ्रीडम है कि किसी भी पोस्ट को उसके आपत्तिजनक कंटेंट के कारण आप उसके
लीजिए बहनो और भाइयो, यदि आप किसी भ्रम में जी रहे थे तो तुरन्त उससे बाहर निकल आइए। यदि आप भारतीय नारी को महान मानने वालों का लिखा पढ़ते यह सोच रहे थे कि शायद आपका ही घर परिवार एक अपवाद है अन्यथा शेष भारत में तो जो वह कहे वही होता है, उसकी आज्ञा सबको
ख़ुशी है कि यहाँ की असलियत आपको जल्दी समझ आ गयी. यहाँ गुटबाजी ही चलती है. इस समय यहाँ कई गुट बने हुए हैं. कमाल तो ये है कि वही गुटबाजी का विरोध भी करते हैं. अदा एंड खुशदीप ड्रामा कंपनी ताऊ एंड समीर मदारी पार्टी फुरसतिया खड़ूस मंच तस्लीम तमाशा
गूगल ने कल ब्लॉग को मनचाहा रूप और आकार देने की प्रकृया को और आसान बनाने के लिए इंटरफेस टेम्पलेट डिजाइनर की सुविधा प्रदान की है. गूगल की घोषणा के अनुसार वह अपने ब्लॉगर उपयोगकर्ताओं को अपने ब्लॉग को सरलतम तरीके से अधिक विशिष्ट बनाने के लिए, एक अतिरिक्त
सो कॉल्ड एलीट ग्रुप- तथाकथित अभिजात्य वर्ग. आम लोगों की पहुँच से बाहर. आम जन के मानस पर हर वक्त यह छाया रहता है कि जाने कैसी दुनिया होगी उनकी. एलीट वर्ग में कोई यूँ ही तो नहीं आ जाता-जरुर व्यस्त रहते होंगे. आम जन के बीच बैठ समय बिताने लगें तो फिर काहे के
पिछ्ले कुछ दिनों बहुत से मुद्दों और तथाकथित विमर्शों पर जिस तरह की खींचतान , परोक्ष प्रत्यक्ष आरोप प्रत्यारोप , आक्रोश, खिन्नता , और भी जितने विशेषण होते होंगे सभी एक साथ देखने पढने को मिले । और जैसा कि अपेक्षित ही था कि एक बार फ़िर से धुरियां बनी या शायद
1. हिन्दू शब्द कितना पुराना है? इसकी जवाब जरूरी नहीं क्योंकि हिन्दू शब्द दूसरों द्वारा दिया गया है. हिन्दूओं को क्योंकि बदलाव से परहेज नहीं, इसलिये अब वह उनकी पहचान है. वैसे तो अल्लाह शब्द भी दूसरों का दिया हुआ है. मुहम्मद ने मूर्तिपूजक अरबों के कई
किसी और के धर्म पर कीचड उछालने, अश्लील बाते लिखने, छद्म नामो से लिखने और टिपण्णी करने में इन्हें ज़रा भी परहेज नहीं । यहाँ देखे , यही नहीं कि इनका एक बुद्धिजीवी ही कीचड उछाल रहा हो, यहाँ हिन्दी ब्लॉगजगत में मौजूद इनके अधिकाँश बुद्धिजीवियों के यही हाल है ।
अतिथि देवो भवःयह भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों में से है बल्कि मेहमान का सत्कार तो हरेक संस्कृति में पाया जाता है । लेकिन मेहमान की भी एक मर्यादा होती है और मेज़बान की भी । दोनों को इसका पाबन्द रहना चाहिये ख़ास तौर से तब तो और भी ज़्यादा जबकि वे दोनों दो
मिथिलेश ने उस लौ को और ज़्यादा प्रज्जवलित कर दिया है जिसे मैं पिछले एक साल से ब्लॉग जगत में रौशन करने की जद्दोजहद कर रहा हूँ, मिथिलेश और मुझे और ज़्यादा संबल मिला जो अरविन्द मिश्रा जी जैसे सम्मानित ब्लॉगर ने इसमें अपना अमूल्य समर्थन कर इस लौ को
माननीय डार्विन जी ने कभी फ़रमाया था कि मनुष्य के पूर्वज बन्दर थे । उनसे आज तक साइन्टिस्ट्स साहिबान सहमत न हो सके तो भला हम ही क्यों होते ? लेकिन कभी कभी ऐसा लगता है कि उनकी बात में पूरी सच्चाई तो चाहे न हो मगर वह पूरी तरह ग़लत भी नहीं है । वे एक पादरी थे ।
बर्थ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारे जन्म का...डेथ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारी मौत का...फोटो सबूत हैं हमारे ज़िंदा रहने का...अब आप एक ठंडी सांस लीजिए...और पूरे सकून के साथ इसे धीरे-धीरे पढ़िए...मैं मानता हूं...कि दो लोग आपस में तर्क करते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि
अभी भी वक्त है मुसलिम आतंकवादियों के कुकर्मों को छुपाने के लिए गाली गलौच की भाषा का प्रयोग न करो।धर्म से हमारा कोई बासता नहीं लेकिन उन हिन्दूओं का तो ख्याल रखो जो हर वक्त मुसलिम आतंकवादियों का बचाब करने के लिए आपके साथ कड़े होते हैं और बदले में
हिन्दी ब्लोग संकलकों में ब्लोगवाणी सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह प्रायः समस्त हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट्स को एक ही स्थान पर दिखाता है और अधिकांश हिन्दी ब्लोगर्स नये पोस्ट की जानकारी के लिये ब्लोगवाणी का ही सहारा लेते हैं। हिन्दी ब्लोग जगत के लिये ब्लोगवाणी का
अगर ये कहा जाए कि विगत वर्षो में सबसे ज्यादा प्रगति विज्ञान क्षेत्र ने किया तो गलत ना होगा । पिछले पच्चीस वर्षों मे तो इलेक्ट्रानिक्स के क्षेत्र में हुए आविष्कार के कारण सूचनातंत्र का पूरा जंजाल घर-घर में पहुँच गया है । पूरे विश्व ने उन्नीसवीं शताब्दी
हक़ीक़त आगाह , मद्दाह ए ब्लॉग ए मोमिन जनाब वकील साहब , ओम् ‘शाति ।अपने दिल के समन्दर से मंथन के बाद निकले एक नायाब मोती को यह सोचकर आपको समर्पित किया था कि आप उसकी क़द्र करेंगे लेकिन आपने उसकी क़द्र करना तो दूर उस पर कोई टिप्पणी करना भी मुनासिब नहीं समझा ।
'हिन्दू' शब्द मानवता का मर्म सँजोया है। अनगिनत मानवीय भावनाएँ इसमे पिरोयी है। सदियों तक उदारता एवं सहिष्णुता का पर्याय बने रहे इस शब्द को कतिपय अविचारी लोगों नें विवादित कर रखा है। इस शब्द की अभिव्यक्ति 'आर्य' शब्द से होती है। आर्य यानि कि मानवीय
होली के दिन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मुसलमानों के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दंगों को लेकर देशभर में काफी आरोप प्रत्यारोप हुए। कई प्रकार की बातें कही गईं। लेकिन इन दंगों की सत्यता क्या थी, इस बारे में देशभर की मीडिया लगभग मौन सी ही रही है। इन
टीवी पर आजकल एक विज्ञापन खूब दिखाया जा रहा है वो है एक मोबाईल कंपनी का।इस विज्ञापन में एक जोड़ा रेस्त्रां मे बैठा रहता है और अचानक़ लड़का प्रेम पर सवाल खड़ा करता है जिस पर लड़की भी सहमती जताती देती है और लड़का लड़की से कहता है कि आज से वे दोस्त हैं और लड़का ऊठ
आदमी तिकड़मी न हो तो किस काम का? हम भी बहुत बड़े तिकड़मी हैं और अपने पोस्ट को ब्लोगवाणी में टॉप में लाकर छोड़ते हैं। हमारे लिये तो चुटकी बजाने जैसा है यह काम तो। अब आप पूछेंगे कि कैसे?वो ऐसे कि सबसे पहले तो हम अपने आकाओं के द्वारा तैयार किये गये मैटर को लेकर
मकड़जालग्रस्त और इतिहास बोध ‘शून्य कुछ लोग कह रहे हैं कि हिन्दू कभी किसी धर्म को बुरा नहीं कह सकता । मेरी पोस्ट पर मौजूद टिप्पणियां उनकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए काफ़ी हैं परन्तु फिर भी एक पूरी पोस्ट में वर्णवादी ग्रन्थों के प्रमाण देकर उनके दिलों को पूरी
डॉ अरविन्द मिश्रा का एक चुभता हुआ कमेंट्स मेरा ध्यान उनकी ओर खींच ले गया है " चलिए आप उदासीन और तटस्थ रहकर इसी तरह बीच बीच में आकर अपनी घोर चिंता व्यक्त करते रहा करिए -ब्लागजगत का जो होना है वह तो हो ही जाएगा " और मुझे लगा कि जैसे
क्या गायत्री नाम की सचमुच कोई देवी है ? क्या वेद नाम का कोई बच्चा सचमुच उससे कभी पैदा हुआ था ? वेद माता कहलाने का गौरव इस अकेले मन्त्र को ही क्यों मिला ? वेद न केवल भारत के बल्कि विश्व के प्राचीनतम ग्रन्थों में से एक हैं ।उनमें हज़ारों मन्त्र हैं । उनमें
ब्लॉगिंग के लिए ब्लॉगस्पॉट जैसा मुफ़्त मंच देने वाले गूगल ने अब धीरे धीरे पंख कतरने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में उसने एक सुविधा शुरू की है जिससे दावा है कि ब्लॉग ज़ल्दी खुलने लगेंगे। इसे नाम दिया गया है आटो पेजीनेशन (Auto Pagination)। यदि मैं गलत नहीं हूँ
इधर कई दिनों से कुछ मुस्लिम ब्लागर जो हिन्दु धर्म के बारे में ज्यादा जानते नही हैं अपने अधकचरे जानकारी के द्वारा हिन्दु धर्म को कोसते नजर आते हैं जिनका सिर्फ एक ही काम है हिन्दु धर्म को निचा दिखाना वे अपने अधकचरा जानकारी के द्वारा महान हिन्दु के अच्छाई
...मेरे सज्जन मित्रों,सबसे पहले तो डिस्क्लेमर:-जो कुछ भी यहाँ लिख रहा हूँ उसमें मेरा मौलिक कुछ नहीं है, पहले भी बड़े-बड़े कह चुके हैं यही सब, मैं तो एक बार फिर से दोहरा रहा हूँ, बस!हाँ तो यह तर्क कुछ इस तरह से है...मान लीजिये आप वास्तविक तौर से...भीतर और
हाल ही में नेट पर देखा की कुछ विशिष्ट जन को भगवान राम और माँ सीता के विवाह के सन्दर्भ में कुछ भ्रान्ति है. कुछ तर्क वाल्मीकि रामायण से लेकर ये निष्कर्ष निकला जा रहा है की विवाह के वक़्त माँ सीता की उम्र महज छ साल की थी, जो कतई सही नहीं है.जैसा की हम सब
आदरणीय पंकज सुबीर जी द्वारा होली के तरही मुशायरे के लिए दिए गये मिसरे पर आधारित एक मजेदार रचना.सुबह सवेरे जो घर से निकले, खुमारी होली थी सर पे छाई,हज़ार रंगों से रंग चेहरा, तुम्हारे घर को कदम बढ़ाई,यूँ झूमते हम निकल पड़े थे, इब्न-बतूता का गीत गाकर,नज़र न
आये दिन सुनती रहती हूँ , मेरा धर्म बड़ा है , तुम्हारा छोटा, अल्लाह बड़ा है, भगवान् छोटा...और सोचती हूँ क्या ईश्वर को परिभाषित करना इतना आसन है ? क्या ईश्वर का विश्लेषण इतना सरल है ? क्या जो लोग ईश्वर या अल्लाह के बारे में इतनी बातें बताते हैं, सचमुच इसके
इस चुटकले को सिर्फ़ हंसी ओर मजाक के तॊर पर ले, अगर किसी को पढने के बाद कॊई ऎतराज हो तो अपने लेपटाप पर, या अपने पीसी पर सारा गुस्सा उतारे, कृप्या मेरी टांग ना खींचे, ओर इसे पढ तो कोई भी सकता है, लेकिन इसे अशील करार मत दे, क्योकि यह अशील जो
आज देश के एक वरिष्ठ पत्रकार से बात हुई... बात दुआ सलाम के बाद महिला आरक्षण और फिर शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद के शर्मनाक बयान पर आकर रुक गई... वरिष्ठ पत्रकार महोदय ने हमारी प्रतिक्रिया जाननी चाही...हमने कहा- कौम के लिए इससे ज़्यादा डूब मरने की बात क्या
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