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दाल, भात और भाटे पालक की भाजी!!!

”अम्मा, खाना लगा दे” ”क्या हुआ, आज जल्दी जायेगा क्या स्कूल?” ”हाँ अम्मा, वो क्लास के पहिले सुदेश की गणित किताब से कुछ प्रश्न उतारने है. उसके पास अंग्रेजी स्कूल की किताब भी है न.” अम्मा जल्दी जल्दी भाप छोड़ते भात, अधपकी छितरी राहर की दाल और लगभग पक गई भाटे
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इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी

इस्‍लाम का उदृदेश्य आतंक और सेक्स है यह मेरा कहना नही है किन्‍तु जब इस्‍लाम से सम्‍बन्धित ग्रंथो का आध्‍ययन किया जाये तो प्रत्‍यक्ष रूप ये यह बात सामने आ ही जाती है। कि घूम फिर कर अल्‍लाह को खुश करने के लिये जगह पर आंतक फैलाने और उनके अनुयायियों खुश
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शेक्सपियर ग़लत था.... नाम में बहुत कुछ रखा है.... : महफूज़

दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकरण कर दिया जाता है. जैसे:- पप्पू, बिल्लू, पिंकी, चिंटू, बाबू.. आदि और भी बहुत से नाम. नाम तो पैदा होने के कुछ दिनों पर रखा जाता है,
 
महफूज़ अली
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माफ़ी चाहती हूँ लिखना ही पड़ा... अब झेल नहीं पा रही हूँ ये तमाशा...

माफ़ी चाहती हूँ लिखना ही पड़ा...अब झेल नहीं पा रही हूँ ये तमाशा...कई दिनों से ये तमाशा देख रही हूँ...बदतमीज़ी  की सारी हदें पार कर रहे हैं लोग ... हमारी एक बहन ने अपनी बात अपनी डायरी  में क्या कही और लोगो के पेट में मरोड़ होने लगा... अब उसके नाम
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इसीलिये रतन टाटा वन्दनीय और "सरकारी व्यवस्था" निन्दनीय हैं… Ratan Tata, 26/11 Terrorist Attack, Taj Hotel

कोई भी कर्मचारी अपनी जान पर खेलकर अपने मालिक के लिये वफ़ादारी और समर्पण से काम क्यों करता है? इसका जवाब है कि उसे यह विश्वास होता है कि उसका मालिक उसके हर सुख-दुख में काम आयेगा तथा उसके परिवार का पूरा ख्याल रखेगा, और संकट की घड़ी में यदि कम्पनी या फ़ैक्
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मैं तो चला भई .............अब आप चाटो ( बाय - बाय ब्लोगिंग )-------मिथिलेश दुबे

मैंने आज ब्लागिंग को अलविदा कहने का मन बना लिया है , मैनें हमेशा वही लिखा और कहा जो मुझे सार्थक लगा । किसी को भी नीचा दिखाना मेरे समझ से परे रहा है और रहेगा । मेरे लेखन से अगर किसी को दुख हुआ है तो इसके लिए खुद को दोषी समझता हूँ । मुझे किसी भी मुद्दे (
 
Mithilesh dubey
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हिन्दुत्ववादी ब्लॉगरों से परहेज, नामवर सिंह का आतंक और सैर-सपाटा यानी इलाहाबाद ब्लॉगर सम्मेलन…

ज़रा सोचिये, आप किसी बड़े शहर के सबसे पुराने और काफ़ी ख्यात ब्लॉगर हैं, उसी शहर में कोई ब्लॉगर सम्मेलन होता है जिसे तथाकथित रूप से "राष्ट्रीय संगोष्ठी" का नाम दिया जाता है, लेकिन फ़िर भी न तो आपको उस सम्मेलन हेतु कोई निमंत्रण पत्र भेजा जाता है, उलटे
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तुलसी और दुर्वासा इतने भौंडे तो नहीं थे

ब्लॉग पर कविता लिखना कितना आसान है उसका एक उदाहरण देखिये. स्वनामधन्य महाकवि श्री अलबेला खत्री ने एक कविता लिखी है. कविता का शीर्षक है; "लोग माथा पीट रहे हैं और तुम लिंग पकड़ कर बैठी हो."शीर्षक पढ़ लिया? अब कविता का कंटेंट पढ़िए;कहीं स्वाइन फ्लू जैसा रोग है
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शुक्रिया अदा करें नापसंदगी के चटकों को... और कितना गिरेंगे हमलोग ?

.मेरे 'नापसंदगी को नापसंद करने वाले' मित्रों,आज बहुत गर्मागर्म बहसें हो रही हैं ब्लॉगवाणी द्वारा दिये गये नापसंदगी के चटके के उपयोग के बारे में...तभी नजर पढ़ी आज इस समय ५.४५ सांय की कुछ सबसे ज्यादा पढ़ी गई पोस्टों पर...पहली पोस्ट तुम भी कभी जवान हुआ करती
 
प्रवीण शाह
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वर्ष बीतते बीतते मुझे मिली यौनिक और लैंगिक उत्पीडन करने की धमकियां! ओह!

मैं ब्लागजगत में असहमतियों के मुद्दों को यही सार्वजनिक मंच पर निपटा लिया जाना उचित समझता हूँ . मुझे धमकाया जा रहा है कि मैं अपने वकील /विधि परामर्शी से मिल कर एक मामले में मुतमईन हो लूं -सो मामला यहाँ  महा पंचायत में रख रहा हूँ- बजा कहे जिसे आलम
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आखिरकार सानिया ने मना कर ही दिया .....अब पडी न कलेजे में ठंडक ब्लोग्गर्स के

आखिरकार जिस बात का डर था वही हुआ । सानिया मिर्ज़ा ने लगातार चल रही चकचक से तंग आकर अब अचानक मना कर ही दिया कि वो शोएब से शादी वादी नहीं करने जा रही है । हां हां आप कहेंगे कि क्या अनाप शनाप फ़ेंक रहे हैं झाजी ..जब इंडिया टीवी वालों को इसकी खबर नहीं हुई
 
अजय कुमार झा
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अल्‍लाह की शक्ति का अतिक्रमण करता भारतीय संविधान, कठमुल्‍लों फतवा जारी करो

मुस्लिमो द्वारा वन्‍देमातम् को लेकर जो गंदा खेल खेला जा रहा है, उसके पीछे देश के एकीकृत ढाचे को तोड़ने की मंशा दिखाई देती है। वन्‍दे मातरम् कोई गीत मात्र नही है बल्कि देश की आजादी के समय स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानियो में जोश भर देने वाला मंत्र था, जिस
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रोक सको तो रोक लो: - महफूज़

अभी थोड़े दिन पहले कि ही बात है. मैं जिम से एक्सरसाइज़ कर के अपने दोस्त पंकज के साथ घर लौट रहा था. कडाके कि ठण्ड में भी मुझे बहुत गर्मी लग रही थी. उस दिन कार्डियो और बेंच प्रेस बहुत ज्यादा कर लिया था. मुझे बॉडी बिल्डिंग का बहुत शौक़ है, मैं आज भी दो
 
महफूज़ अली
टैग: अदा
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कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन ...???

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है-
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दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ की वसूली

दैनिक जागरण के नोएडा ब्यूरो चीफ अनिल निगम ने वह काम किया है जिससे पत्रकारिता पर भद्दा काला धब्बा लग गया है. बात सर्दियों की है लेकिन सामने अब आयी है. नोएडा के व्यापारियों से 30 हजार रूपये का घूस लेते हुए उनका वीडियो सामने आने से हड़कम्प मच गया है.
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इलाहबाद चिट्ठाकार संगोष्ठी: बधाईयां! शर्म तो बेच खाई, ये तो लफ़्फ़ाजियों का समय है!

इलाहबाद: २३/२४ नबंबर - एक अस्सी साल के कलमघुसेडू द्वारा हिन्दी चिट्ठाकारी की अस्मिता के साथ बलात्कार! कई हंसते-खिलखिलाते बरिष्ठ चिट्ठाकार इस कृत्य में सहयोग करते पाए गए!
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ब्लॉगवाणी से अनुरोध : असामाजिक तत्वों का बहिष्कार करे...

कुछ असामाजिक तत्व, (इस्लाम के ठेकेदार ब्लोगर) जो ब्लॉगवाणी  के सदस्य भी हैं... बेहद बेहूदा कमेन्ट कर रहे हैं...ब्लॉगवाणी से हमारा अनुरोध है कि ऐसे तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाए...साथ ही अपने भाइयों और बहनों से अनुरोध है कि वो भी वो इन ग़द्दार
 
फ़िरदौस ख़ान
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फर्जी नामी को चेतावनी....

प्रिय ब्लॉग मित्रों....महिला ब्लोग्गर्स की एकता का सन्देश पहुँच ही रहा है ब्लॉग लोक तक...और हर्ष की बात यह है कि हमारी भावनाओं का पूरा सम्मान पुरुष साथी ब्लोग्गर्स ने किया है....मेरे इस पोस्ट के लिखने का मकसद था ...बाकी महिला ब्लोगर साथियों की मंशा जानना
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मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं

क्या आप जानते हैं कि एक हिन्दी फिल्म की कहानी कुल सौ संवादों के आसपास ही घूमती है। आज मैं जिन संवादों का जिक्र करने जा रहा हूं उन संवादों को आपने सैकड़ो बार सुना होगा। हालांकि अब वैसी फिल्में नहीं बन रही लेकिन कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो रामायण और महाभारत
 
राजकुमार सोनी
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महफूज़ भाई के प्यार कि दास्ताँ... इंटरवल के बाद का शेष भाग.... दीपक 'मशाल'

जो कहानी महफूज भाई ने सुनाई वो तो आधी-अधूरी है जनाब, वो तो सिर्फ तब की चर्चा है जब प्यार नया नया था.. इंटरवल तक उनसे सुन लिया अब आगे की फीचर फिल्म मेरे पास है. हुआ यूं की सब कुछ ठीक ठाक चल रिया था लेकिन एक दिन
 
Dipak 'Mashal'
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एक अनोखी पुलिस व्यवस्था

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में पुलिस कार्यों का निर्वहन करने वाली राजस्व पुलिस एक अदभुत पुलिस व्यवस्था है. प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में मुख्य मोटर मार्गों पर स्थित नगरों व् कस्बों को छोड़कर शेष 60% इलाकों में राजस्व पुलिस ही कानून व्यवस्था
 
Himalayi Dharohar
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खुशियाँ बांटने से बढती है..नफरत का क्या काम? : महफूज़

सबसे पहले समस्त ब्लॉग जगत को इतना अपनापन और स्नेह देने के लिए धन्यवाद. (खुशदीप भैया के लिए सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. मुझे गर्व है आप पर.) मैं बिन माँ-बाप का होकर भी अकेला नहीं हूँ, यह मुझे समस्त ब्लॉग जगत ने बता दिया.
 
महफूज़ अली
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मेरा लेखन कचरा है!!

दो दिन हो गये सारा घटनाक्रम देखते. ढ़ेर प्रशंसक/ चहेते/मित्र सामने आये माननीय ज्ञानदत्त जी की पोस्ट  पर मेरे विषय में टिप्पणी देखकर. जान पाया सबका प्यार. अभिभूत हुआ, लोगों को इस पर नाराजगी भी हुई कि मैं क्यूँ असभ्यता से किये गये विरोध के बावजूद भी
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चिट्ठाचर्चा साइबर स्‍क्वैटिंग का शिकार : आइए पतन की कुछ और गहराइयॉं नापें

कुछ दिन हुए अनूपजी का फोन आया, चूँकि हम चर्चाकार हैं अत: वे हमसे राय जानना चाहते थे कि क्‍या चिट्ठाचर्चा को खुद के डोमेन पर ले जाना चाहिए। हम इस बात से कतई उत्‍साहित नहीं थे। एक सामूहिक ब्‍लॉग के डोमेन पर जाने की कुछ दिक्‍कतें होती हैं तथा ये उसकी
 
मसिजीवी
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अविनाश जी दें अब जवाब .(सम्मानित ब्लोगर हो क्या ?)...........आपके नुक्कड़ पर मैंने तो नहीं लगाया जाम ? (चापलूसी नहीं विरोध करता हूँ )

रोज ही ऑफिस आने पर ब्लॉग एक नज़र जरुर देख लेता हूँ ......समय कम होता है इसलिए भी ऐसा करना मज़बूरी है...........गुजरे साल में कई ब्लॉग पर कभी कभार लिख देता था ........पर इन कुछ महीनो में ऐसा करने में असमर्थ रहा ........अभी कुछ दिनों से अपने ब्लॉग पर
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अनूप शुक्ल, दम्भ और अभिमान और मौज की लक्ष्मण रेखा

१.क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे? -पंच परमेश्वर २.हम लोग सब विभाजित व्यक्तित्व (स्पिलिट पर्सनालिटी) के हैं। हम कहीं करुण होते हैं और कहीं क्रूर होते हैं। इस तथ्य को स्वीकारना चाहिये।- हरिशंकर परसाई दो दिन पहले  ज्ञानजी ने पोस्ट ठेली जिसमें
 
फ़ुरसतिया
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मजहबी विवाद, संप्रदायिकता और ब्लॉग जगत!!

वैसे तो ऐसे मुद्दों पर मैं कभी नहीं लिखता और न ही मुझे इन विषयों में कोई दिलचस्पी है. मगर इधर काफी सारे आलेख पढ़े, हलचल देखी और जाना उन ब्लॉग्स के बारे में जो मजहब और संप्रदायिकता के नाम द्वेष फैला रहे हैं. मेरा कभी इन ब्लॉगस पर जाना नहीं होता, इसलिए
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कौन बताएगा पहली लाईन का अर्थ .......समर शेष है!

 कौन बताएगा पहली लाईन का अर्थ .......समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याधजो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध कितनी अच्छी बात है दिनकर समग्र की चर्चा हो रही है दिनकर विशेषज्ञों द्वारा ब्लागजगत में ...मैंने तो  कहीं दिनकर की उक्त 
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राज्य की नैतिकता और तमाम उलझे सवाल

माओवादियों की नीति और हिंसा के खिलाफ़ लिखे मेरे पिछले लेख को कुछ पाठकों ने उसे आदिवासियों के अधिकारों के खिलाफ़ भी समझ लिया। और यह भी समझ लिया कि मैं राज्य की हर उलटी-सीधी हिंसा और अन्याय का समर्थक हूँ। शायद लेख के शीर्षक से ऐसा बोध हुआ है। ऐसा नहीं है
 
अभय तिवारी
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सम्मेलन या गुटबाजी बनाम बेनामी का खुलासा ?? (कुछ तो हुआ ...).......................एक विचार

अभी कुछ दिन हुए इंटर नेशनल ब्लोगर सम्मलेन को हुए ...........एक अच्छी पहल है इस तरह का आयोजन ........लेकिन इससे पहले का दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ब्लोगर सम्मलेन हुआ था ....जिसको मैंने " खाने खिलाने " से ज्यादा कुछ भी नहीं समझा था ...ब्लोगर भाइयों को यह
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दिखावे की दुनिया..

अर्थी उठी तो काँधे कम थे, मिले न साथ निभाने लोग बनी मज़ार, भीड़ को देखा, आ गये फूल चढ़ाने लोग... दुनिया दिखावे की हो चली है. कोई भी कार्य जिसमें नाम न मिले, लोग न जाने- कोई करना ही नहीं चाहता. दिखावा न हो तो बस फिर मैं!! जिस भी कार्य में मेरा फायदा हो, वो
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वे नहीं जानते थे कि उनकी इस कदर मट्टी पलीद की जाएगी : हिन्‍दी ब्‍लॉग विवाद

'मैं भी कहूँगा कि उनकी यह पोस्ट निहायत ही गैरज़रूरी थी' मैं नहीं कोई गुमनाम ब्‍लॉगर जिनके ब्‍लॉग का नाम ही हिन्‍दी ब्‍लॉगजगत है, ने ताजा ज्ञानदत्‍त जी के पोस्‍ट पर उठे हिन्‍दी ब्‍लॉग भूचाल  के संदर्भ में कहा है। उन्‍होंनें आगे कहा है 'उनसे गलती हुई
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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वापस कीजिये प्लीज मेरी टिप्पणियाँ !

अब वे टिप्पणियाँ कैसे लौटेंगी जो उन डीलीटेड पोस्ट्स के साथ दफ़न हो गईं ? मैंने और आप सब ने भी  अगर ये दुनिया है तो कैसी दुनिया है-काव्य मंजूषा और स्प्लिट सेक्स चिकेन -स्वप्न दर्शी पर कल   टिप्पणियाँ की थीं मगर आज ये दोनों पोस्ट ब्लॉग मालिकों
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इस तरह के affairs ग़लत होते हुए भी जीवन में कितने रंग भर देते हैं...

आज कल पूर्णिमा में बहुत बदलाव देख रही हूँ...पूर्णिमा एक खूबसूरत सी लड़की जो मेरी कलीग है, आज तक उसे अपने काम से काम रखते हुए, चुपचाप काम करते हुए और सच पूछा जाए तो कुछ उदास सा ही देखा था....उसके पति  हैं और उसके दो बेटे हैं...हमारे ऑफिस में कई
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया और जंग द्वारा “अमन की आशा” क्या है? – धंधेबाजी, मूर्खता या शतुरमुर्गी रवैया?… Aman ki Asha, Times of India, Jung, India-Pakistan

अंग्रेजों के नववर्ष के दिन अर्थात 1 जनवरी 2010 से भारत के टाइम्स समूह तथा पाकिस्तान के अखबार “जंग” ने एक तथाकथित शांति मुहिम की शुरुआत के तहत “अमन की आशा” के नाम से एक अभियान छेड़ा है। इसके उद्देश्यों की फ़ेहरिस्त में, भारत और पाकिस्तान के बीच मैत्रीपूर्ण
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हिन्दू “नाबालिग” लड़की भगाना शरीयत के मुताबिक जायज़ है? तथा दीप प्रज्जवलित करना “गैर-इस्लामिक” है? : पढ़िये दो सेकुलर खबरें… Shariat, Islamic Personal

यदि कोई व्यक्ति किसी नाबालिग लड़की को भगाकर ले जाये और शादी कर ले तो उसे भारतीय कानून और संविधान के तहत सजा हो सकती है, ये सामान्य सी बात लगभग सभी जानते हैं, लेकिन अगर कोई मुसलमान, किसी नाबालिग हिन्दू लड़की को भगाकर “निकाह” कर ले तो यह जायज़ है… कोलकाता
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मैं झूठ नहीं बोलता: महफूज़

मैं झूठ नहीं बोलता,साहित्य-कला से क्या लेना?ढूंढ रहा खुद को मैं,खोज रहा प्याज़,छिलकों में.....
 
महफूज़ अली
टैग: अदा
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ये है झांसी की रानी (jhansi ki rani)का असली चित्र.

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो है, जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्रेज फोटोग्राफर जॉनस्टोन एंड हॉटमैन द्वारा 1850 में ही खींचा गया था। यह फोटो अहमदाबाद निवासी चित्रकार अमित अंबालाल के संग्रह में मौजूद है। The only photo of Rani Laxmibai of
 
नवीन त्यागी
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मुस्लिम बुद्धिजीवियों से सिर्फ एक सवाल !

नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर दिया ! हमारे मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से इस हिन्दी जगत में न सिर्फ नफरत का आतंक फैला
 
पी.सी.गोदियाल
टैग: tirchinazar