दाल, भात और भाटे पालक की भाजी!!!
”अम्मा, खाना लगा दे” ”क्या हुआ, आज जल्दी जायेगा क्या स्कूल?” ”हाँ अम्मा, वो क्लास के पहिले सुदेश की गणित किताब से कुछ प्रश्न उतारने है. उसके पास अंग्रेजी स्कूल की किताब भी है न.” अम्मा जल्दी जल्दी भाप छोड़ते भात, अधपकी छितरी राहर की दाल और लगभग पक गई भाटे
May 27 2010 06:33 AM



दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकरण कर दिया जाता है. जैसे:- पप्पू, बिल्लू, पिंकी, चिंटू, बाबू.. आदि और भी बहुत से नाम. नाम तो पैदा होने के कुछ दिनों पर रखा जाता है,
माफ़ी चाहती हूँ लिखना ही पड़ा...अब झेल नहीं पा रही हूँ ये तमाशा...कई दिनों से ये तमाशा देख रही हूँ...बदतमीज़ी की सारी हदें पार कर रहे हैं लोग ... हमारी एक बहन ने अपनी बात अपनी डायरी में क्या कही और लोगो के पेट में मरोड़ होने लगा... अब उसके नाम
.मेरे 'नापसंदगी को नापसंद करने वाले' मित्रों,आज बहुत गर्मागर्म बहसें हो रही हैं ब्लॉगवाणी द्वारा दिये गये नापसंदगी के चटके के उपयोग के बारे में...तभी नजर पढ़ी आज इस समय ५.४५ सांय की कुछ सबसे ज्यादा पढ़ी गई पोस्टों पर...पहली पोस्ट तुम भी कभी जवान हुआ करती
आखिरकार जिस बात का डर था वही हुआ । सानिया मिर्ज़ा ने लगातार चल रही चकचक से तंग आकर अब अचानक मना कर ही दिया कि वो शोएब से शादी वादी नहीं करने जा रही है । हां हां आप कहेंगे कि क्या अनाप शनाप फ़ेंक रहे हैं झाजी ..जब इंडिया टीवी वालों को इसकी खबर नहीं हुई
कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है-
कुछ असामाजिक तत्व, (इस्लाम के ठेकेदार ब्लोगर) जो ब्लॉगवाणी के सदस्य भी हैं... बेहद बेहूदा कमेन्ट कर रहे हैं...ब्लॉगवाणी से हमारा अनुरोध है कि ऐसे तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाए...साथ ही अपने भाइयों और बहनों से अनुरोध है कि वो भी वो इन ग़द्दार
प्रिय ब्लॉग मित्रों....महिला ब्लोग्गर्स की एकता का सन्देश पहुँच ही रहा है ब्लॉग लोक तक...और हर्ष की बात यह है कि हमारी भावनाओं का पूरा सम्मान पुरुष साथी ब्लोग्गर्स ने किया है....मेरे इस पोस्ट के लिखने का मकसद था ...बाकी महिला ब्लोगर साथियों की मंशा जानना
क्या आप जानते हैं कि एक हिन्दी फिल्म की कहानी कुल सौ संवादों के आसपास ही घूमती है। आज मैं जिन संवादों का जिक्र करने जा रहा हूं उन संवादों को आपने सैकड़ो बार सुना होगा। हालांकि अब वैसी फिल्में नहीं बन रही लेकिन कोई ऐसी फिल्म नहीं है जो रामायण और महाभारत
सबसे पहले समस्त ब्लॉग जगत को इतना अपनापन और स्नेह देने के लिए धन्यवाद. (खुशदीप भैया के लिए सिर्फ एक बात कहना चाहूँगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ. मुझे गर्व है आप पर.) मैं बिन माँ-बाप का होकर भी अकेला नहीं हूँ, यह मुझे समस्त ब्लॉग जगत ने बता दिया.
दो दिन हो गये सारा घटनाक्रम देखते. ढ़ेर प्रशंसक/ चहेते/मित्र सामने आये माननीय ज्ञानदत्त जी की पोस्ट पर मेरे विषय में टिप्पणी देखकर. जान पाया सबका प्यार. अभिभूत हुआ, लोगों को इस पर नाराजगी भी हुई कि मैं क्यूँ असभ्यता से किये गये विरोध के बावजूद भी
रोज ही ऑफिस आने पर ब्लॉग एक नज़र जरुर देख लेता हूँ ......समय कम होता है इसलिए भी ऐसा करना मज़बूरी है...........गुजरे साल में कई ब्लॉग पर कभी कभार लिख देता था ........पर इन कुछ महीनो में ऐसा करने में असमर्थ रहा ........अभी कुछ दिनों से अपने ब्लॉग पर
वैसे तो ऐसे मुद्दों पर मैं कभी नहीं लिखता और न ही मुझे इन विषयों में कोई दिलचस्पी है. मगर इधर काफी सारे आलेख पढ़े, हलचल देखी और जाना उन ब्लॉग्स के बारे में जो मजहब और संप्रदायिकता के नाम द्वेष फैला रहे हैं. मेरा कभी इन ब्लॉगस पर जाना नहीं होता, इसलिए
अभी कुछ दिन हुए इंटर नेशनल ब्लोगर सम्मलेन को हुए ...........एक अच्छी पहल है इस तरह का आयोजन ........लेकिन इससे पहले का दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ब्लोगर सम्मलेन हुआ था ....जिसको मैंने " खाने खिलाने " से ज्यादा कुछ भी नहीं समझा था ...ब्लोगर भाइयों को यह
अर्थी उठी तो काँधे कम थे, मिले न साथ निभाने लोग बनी मज़ार, भीड़ को देखा, आ गये फूल चढ़ाने लोग... दुनिया दिखावे की हो चली है. कोई भी कार्य जिसमें नाम न मिले, लोग न जाने- कोई करना ही नहीं चाहता. दिखावा न हो तो बस फिर मैं!! जिस भी कार्य में मेरा फायदा हो, वो
'मैं भी कहूँगा कि उनकी यह पोस्ट निहायत ही गैरज़रूरी थी' मैं नहीं कोई गुमनाम ब्लॉगर जिनके ब्लॉग का नाम ही हिन्दी ब्लॉगजगत है, ने ताजा ज्ञानदत्त जी के पोस्ट पर उठे हिन्दी ब्लॉग भूचाल के संदर्भ में कहा है। उन्होंनें आगे कहा है 'उनसे गलती हुई
अब वे टिप्पणियाँ कैसे लौटेंगी जो उन डीलीटेड पोस्ट्स के साथ दफ़न हो गईं ? मैंने और आप सब ने भी अगर ये दुनिया है तो कैसी दुनिया है-काव्य मंजूषा और स्प्लिट सेक्स चिकेन -स्वप्न दर्शी पर कल टिप्पणियाँ की थीं मगर आज ये दोनों पोस्ट ब्लॉग मालिकों
आज कल पूर्णिमा में बहुत बदलाव देख रही हूँ...पूर्णिमा एक खूबसूरत सी लड़की जो मेरी कलीग है, आज तक उसे अपने काम से काम रखते हुए, चुपचाप काम करते हुए और सच पूछा जाए तो कुछ उदास सा ही देखा था....उसके पति हैं और उसके दो बेटे हैं...हमारे ऑफिस में कई
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का यह एकमात्र फोटो है, जिसे कोलकाता में रहने वाले अंग्रेज फोटोग्राफर जॉनस्टोन एंड हॉटमैन द्वारा 1850 में ही खींचा गया था। यह फोटो अहमदाबाद निवासी चित्रकार अमित अंबालाल के संग्रह में मौजूद है। The only photo of Rani Laxmibai of
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर दिया ! हमारे मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से इस हिन्दी जगत में न सिर्फ नफरत का आतंक फैला
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