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मुस्लिम बुद्धिजीवियों से सिर्फ एक सवाल !

नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर दिया ! हमारे मुस्लिम समाज के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों ने पिछले कुछ समय से इस हिन्दी जगत में न सिर्फ नफरत का आतंक फैला
 
पी.सी.गोदियाल
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गाली गलौज की भाषा और ब्लागजगत

अभी उसी दिन मुझे बताया गया कि मैं बहस मुबाहिसों के दौरान अधिकतर अपशब्दों /अब्यूजिव मतलब गाली गलौज की भाषा का प्रयोग करता हूँ और वह भी खास तौर पर नारियों के लिए .यह मेरे लिए असहज हो उठने की स्थिति थी मगर उससे कहीं बढ़कर आत्मान्वेषण का एक सुनहरा मौका भी सहज
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क्या ब्लाग जगत में भी मठाधीशों का राज है

हमें भी अब ऐसा लगने लगा है कि शायद ब्लाग जगत में मठाधीशों का राज है जो किसी नए ब्लागर को तेजी से आगे बढ़ता देखना पसंद नहीं करते हैं। यह बात हमने एक बार नहीं कई बार महसूस की है। हमने जब इसके पहले दो बार चिट्ठा जगत पर सवालिया निशाना लगाया तो हमें मित्रों
 
राजकुमार ग्वालानी
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इसे पढ़ कर आपका ख़ून भी खौलने लगेगा...खुशदीप

मातृभूमि की सेवा करने वाले सैनिक क्या अलग मिट्टी के बने होते हैं...क्या वो आपके-हमारी तरह इंसान नहीं होते...सरहद पर दुश्मन से मोर्चा लेते हुए शहीद होने वाले रणबांकुरों की रगों में क्या कुछ अलग तरह का लहू दौड़ता है...आज एक पिता की नज़र से बताता हूं आपको
 
खुशदीप सहगल
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आओ ब्लागवाणी पर पसंद- नापसंद खेलें!

अपने नए कलेवर में ब्लोगवाणी रूप रंग और सौन्दर्य की इन्द्रधनुषी छटा बिखेर रही है. कई नए आकर्षण इससे आ जुड़े हैं .इन्ही में एक पसंद नापसंद  का भी विकल्प है -मतलब आपको  फ्रीडम  है कि किसी भी पोस्ट को उसके आपत्तिजनक कंटेंट के कारण  आप उसके
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टॉप ब्लौगर बन भी जाओगे तो क्या उखाड़ लोगे? - टेस्ट पोस्ट

ख़ुशी है कि यहाँ की असलियत आपको जल्दी समझ आ गयी. यहाँ गुटबाजी ही चलती है. इस समय यहाँ कई गुट बने हुए हैं. कमाल तो ये है कि वही गुटबाजी का विरोध भी करते हैं. अदा एंड खुशदीप ड्रामा कंपनी ताऊ एंड समीर मदारी पार्टी फुरसतिया खड़ूस मंच तस्लीम तमाशा
 
संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
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सो कॉल्ड एलीट ग्रुप

सो कॉल्ड एलीट ग्रुप- तथाकथित अभिजात्य वर्ग. आम लोगों की पहुँच से बाहर. आम जन के मानस पर हर वक्त यह छाया रहता है कि जाने कैसी दुनिया होगी उनकी. एलीट वर्ग में कोई यूँ ही तो नहीं आ जाता-जरुर व्यस्त रहते होंगे. आम जन के बीच बैठ समय बिताने लगें तो फिर काहे के
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क्योंकि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं होता

1. हिन्दू शब्द कितना पुराना है? इसकी जवाब जरूरी नहीं क्योंकि हिन्दू शब्द दूसरों द्वारा दिया गया है. हिन्दूओं को क्योंकि बदलाव से परहेज नहीं, इसलिये अब वह उनकी पहचान है. वैसे तो अल्लाह शब्द भी दूसरों का दिया हुआ है. मुहम्मद ने मूर्तिपूजक अरबों के कई
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दूसरे का तो ये बुर्के पर बनाया कार्टून भी नहीं बर्दाश्त कर पाते और ...

किसी और के धर्म पर कीचड उछालने, अश्लील बाते लिखने, छद्म नामो से लिखने और टिपण्णी करने में इन्हें ज़रा भी परहेज नहीं । यहाँ देखे , यही नहीं कि इनका एक बुद्धिजीवी ही कीचड उछाल रहा हो, यहाँ हिन्दी ब्लॉगजगत में मौजूद इनके अधिकाँश बुद्धिजीवियों के यही हाल है ।
 
पी.सी.गोदियाल
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देखिये , क्या कर रहे हैं अरब के ‘ोख साहब भारतीय महिला के साथ ?

अतिथि देवो भवःयह भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों में से है बल्कि मेहमान का सत्कार तो हरेक संस्कृति में पाया जाता है । लेकिन मेहमान की भी एक मर्यादा होती है और मेज़बान की भी । दोनों को इसका पाबन्द रहना चाहिये ख़ास तौर से तब तो और भी ज़्यादा जबकि वे दोनों दो
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आखि़र एक हिन्दू भाई गाली दे तो क्या दे ? no way

माननीय डार्विन जी ने कभी फ़रमाया था कि मनुष्य के पूर्वज बन्दर थे । उनसे आज तक साइन्टिस्ट्स साहिबान सहमत न हो सके तो भला हम ही क्यों होते ? लेकिन कभी कभी ऐसा लगता है कि उनकी बात में पूरी सच्चाई तो चाहे न हो मगर वह पूरी तरह ग़लत भी नहीं है । वे एक पादरी थे ।
 
DR. ANWER JAMAL
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अगर जल्दी में हैं तो इसे न पढ़ें...खुशदीप

बर्थ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारे जन्म का...डेथ-सर्टिफिकेट सबूत है हमारी मौत का...फोटो सबूत हैं हमारे ज़िंदा रहने का...अब आप एक ठंडी सांस लीजिए...और पूरे सकून के साथ इसे धीरे-धीरे पढ़िए...मैं मानता हूं...कि दो लोग आपस में तर्क करते हैं, इसका ये मतलब नहीं कि
 
खुशदीप सहगल
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ब्लोगवाणी के द्वारा दुर्भाव का जहर उगलने वाले ब्लोग्स की सदस्यता बनाये रखने का क्या औचित्य है?

हिन्दी ब्लोग संकलकों में ब्लोगवाणी सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह प्रायः समस्त हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट्स को एक ही स्थान पर दिखाता है और अधिकांश हिन्दी ब्लोगर्स नये पोस्ट की जानकारी के लिये ब्लोगवाणी का ही सहारा लेते हैं। हिन्दी ब्लोग जगत के लिये ब्लोगवाणी का
 
जी.के. अवधिया
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आखि़र हिन्दू नारियों को पुत्र प्राप्ति की ख़ातिर सीमैन बैंको से वीर्य लेने पर कौन मजबूर करता है ? Balmiki Ramayna:Balkand

हक़ीक़त आगाह , मद्दाह ए ब्लॉग ए मोमिन जनाब वकील साहब , ओम् ‘शाति ।अपने दिल के समन्दर से मंथन के बाद निकले एक नायाब मोती को यह सोचकर आपको समर्पित किया था कि आप उसकी क़द्र करेंगे लेकिन आपने उसकी क़द्र करना तो दूर उस पर कोई टिप्पणी करना भी मुनासिब नहीं समझा ।
 
DR. ANWER JAMAL
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नित्यानन्द स्वामी के बहाने नरेन्द्र मोदी पर हमला :- NDTV की चालबाजियाँ और

दक्षिण भारत में फ़िलहाल एक हंगामा मचा हुआ है, नित्यानन्द स्वामी को चेन्नई पुलिस ने एक सीडी और शिकायत के आधार पर गिरफ़्तार किया है। ऐसा आरोप हैं कि नित्यानन्द स्वामी के कई महिलाओं से सम्बन्ध रहे हैं और एक तमिल अभिनेत्री के साथ उनकी अश्लील सीडी उन्हीं के
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बरेली दंगों का सच

होली के दिन उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में मुसलमानों के जुलूस के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। दंगों को लेकर देशभर में काफी आरोप प्रत्यारोप हुए। कई प्रकार की बातें कही गईं। लेकिन इन दंगों की सत्यता क्या थी, इस बारे में देशभर की मीडिया लगभग मौन सी ही रही है। इन
 
पवन कुमार अरविन्द
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हमारा पोस्ट ब्लोगवाणी में टॉप पर कैसे आता है?

आदमी तिकड़मी न हो तो किस काम का? हम भी बहुत बड़े तिकड़मी हैं और अपने पोस्ट को ब्लोगवाणी में टॉप में लाकर छोड़ते हैं। हमारे लिये तो चुटकी बजाने जैसा है यह काम तो। अब आप पूछेंगे कि कैसे?वो ऐसे कि सबसे पहले तो हम अपने आकाओं के द्वारा तैयार किये गये मैटर को लेकर
 
जी.के. अवधिया
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लड़कियां मोबाईल का प्लान नही है टाटा सेठ जो चाहे रोज़ बदल लो!

टीवी पर आजकल एक विज्ञापन खूब दिखाया जा रहा है वो है एक मोबाईल कंपनी का।इस विज्ञापन में एक जोड़ा रेस्त्रां मे बैठा रहता है और अचानक़ लड़का प्रेम पर सवाल खड़ा करता है जिस पर लड़की भी सहमती जताती देती है और लड़का लड़की से कहता है कि आज से वे दोस्त हैं और लड़का ऊठ
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प्रिय ब्लॉगरों एवं पाठकों, इन शब्दों तथा खास व्यक्तियों के पूरे नामों का अधिकाधिक उपयोग करें… (एक माइक्रो-पोस्ट)

शब्द कोई सा भी हो, किसी भी भाषा का हो, यदि लगातार लेखन-पठन और बोलचाल में उपयोग किया जाये तो वह जल्दी लोकप्रिय हो जाता है और चलन में आ जाता है। प्रिय मित्रों और पाठकों, गत एक-दो वर्ष से लगातार ब्लॉग लेखन के दौरान मैंने कुछ शब्दों को बनाने और फ़िर उन्हें
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लंका दहन नायक पवनपुत्र महावीर हनुमान जी ने मन्दिर को टूटने से बचाना क्यों जरूरी न समझा ? plain truth about Hindu Rashtra .

मकड़जालग्रस्त और इतिहास बोध ‘शून्य कुछ लोग कह रहे हैं कि हिन्दू कभी किसी धर्म को बुरा नहीं कह सकता । मेरी पोस्ट पर मौजूद टिप्पणियां उनकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए काफ़ी हैं परन्तु फिर भी एक पूरी पोस्ट में वर्णवादी ग्रन्थों के प्रमाण देकर उनके दिलों को पूरी
 
DR. ANWER JAMAL
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गूगल की नई 'सुविधा' से परेशान हैं कई ब्लॉगर

ब्लॉगिंग के लिए ब्लॉगस्पॉट जैसा मुफ़्त मंच देने वाले गूगल ने अब धीरे धीरे पंख कतरने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में उसने एक सुविधा शुरू की है जिससे दावा है कि ब्लॉग ज़ल्दी खुलने लगेंगे। इसे नाम दिया गया है आटो पेजीनेशन (Auto Pagination)। यदि मैं गलत नहीं हूँ
 
बी एस पाबला
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हमें मजबुर मत करो इस्लाम का बुराई करने के लिये

इधर कई दिनों से कुछ मुस्लिम ब्लागर जो हिन्दु धर्म के बारे में ज्यादा जानते नही हैं अपने अधकचरे जानकारी के द्वारा हिन्दु धर्म को कोसते नजर आते हैं जिनका सिर्फ एक ही काम है हिन्दु धर्म को निचा दिखाना वे अपने अधकचरा जानकारी के द्वारा महान हिन्दु के अच्छाई
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उतर गया था बुखार सारा,पड़े जो जूते तेरी गली में-------(विनोद कुमार पांडेय)

आदरणीय पंकज सुबीर जी द्वारा होली के तरही मुशायरे के लिए दिए गये मिसरे पर आधारित एक मजेदार रचना.सुबह सवेरे जो घर से निकले, खुमारी होली थी सर पे छाई,हज़ार रंगों से रंग चेहरा, तुम्हारे घर को कदम बढ़ाई,यूँ झूमते हम निकल पड़े थे, इब्न-बतूता का गीत गाकर,नज़र न
 
विनोद कुमार पांडेय
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क्या मुस्लिम औरतों को इसी तरह बेइज्ज़त होते रहना होगा...?

आज देश के एक वरिष्ठ पत्रकार से बात हुई... बात दुआ सलाम के बाद महिला आरक्षण और फिर शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद के शर्मनाक बयान पर आकर रुक गई... वरिष्ठ पत्रकार महोदय ने हमारी प्रतिक्रिया जाननी चाही...हमने कहा- कौम के लिए इससे ज़्यादा डूब मरने की बात क्या
 
फ़िरदौस ख़ान
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बडे बडे फन्ने खाँ ब्लागर यहाँ एक कौडी में तीन के भाव बिक रहे हैं-- (आह्वान)

प्रभो! आओ, आओ.....हम इस समय तुम्हे बडे दीन होकर पुकार रहे हैं। तुम तो दीनों की बहुत सुनते थे। सुनते क्या थे, तुम तो दीनों के लिए थे ही। क्या हमारी न सुनोगे! देखो जरा इस ब्लागजगत को एक नजर देखो तो सही। पारस्परिक ईर्ष्या द्वेष नें यहाँ का सत्यानाश कर के रख
 
पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
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सिर्फ़ मर्दो के लिये... एक चुटकला??

इस चुटकले को सिर्फ़ हंसी ओर मजाक के तॊर पर ले, अगर किसी को पढने के बाद कॊई ऎतराज हो तो अपने लेपटाप पर, या अपने पीसी पर सारा गुस्सा उतारे, कृप्या मेरी टांग ना खींचे, ओर इसे पढ तो कोई भी सकता है, लेकिन इसे अशील करार मत दे, क्योकि यह अशील जो
 
राज भाटिय़ा
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कीड़े-मकोड़ों (भारत की जनता) को विदेशी परमाणु संयंत्र सप्लायरों के भरोसे छोड़ने की बेशर्म तैयारी… Nuclear Liability Bill, Atomic Energy Companies

जैसा कि सभी जानते हैं, भारत के नेताओं-अफ़सरों-उद्योगपतियों की “कुटिल त्रिमूर्ति” भारत की जनता को हमेशा से कीड़ा-मकोड़ा समझती आई है, आज़ादी के पहले से ही इन्होंने कभी भी आम जनता को रेंगने वाले गंदे प्राणियों से अधिक कुछ समझा नहीं है। अब एक बार फ़िर से भोपाल
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यहाँ थूकते जाइए

चित्र साभार : http://www.daylife.com/topic/Mayawati/photos यह माला फूलों से नहीं हजार हजार के करेंसी नोटों से बनाई गई है। जरा अनुमान लगाइए कितना रुपया ! थूकते भी जाइए। मुझे आपत्ति नहीं होगी।  
 
गिरिजेश राव
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कुछ ब्लोग्गर्स और ब्लोगस को आपस में बतियाते देखा गया

कल इस ब्लोगजगत में प्रेत की तरह विचरते हुए (जी हां अब तो ये हाल हो गया है कि ब्लोग्गिंग के आसपास न भी हों तो आत्मा ..प्रेतात्मा बनके यहीं मंडराती रहती हैं ) और ऐसे में ही घूमते घूमते बहुत से ब्लोग्गर्स मित्रों को देखा कि वे अपने ही ब्लोग से बतिया रहे थे
 
अजय कुमार झा
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हिंदी ब्लॉग जगत पर कल पढने को मिलीं कुछ सार्थक टिप्पणियाँ

कल रोज की तरह हिंदी ब्लॉग जगत में विचरण कर रहा था, तो एक बेहद बढ़िया एवं सार्थक पोस्ट पढ़ने को मिली | पोस्ट तो सार्थक थी ही साथ ही टिप्पणियाँ भी उतनी ही सार्थक | मैं यहाँ कुछ टिप्पणियाँ फिर यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ, अगर आप इससे छूट गए हो तो यहाँ पढ़ लें|
 
राहुल प्रताप सिंह राठौड़
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आज तो पोस्टों की चर्चा …हां चर्चा कर ही ली …(पोस्टों की चर्चा )

  ओईसे तो ब्लोग पटरी बिछाने का काम हमारा खूब जम जमा के चल रहा था पर सोचे कि बहुत लोग कह रहे हैं कि का जी ..ई आप लोग सब संगी साथी मिल के खाली लिंक पटक कर कहते रहिएगा कि चर्चा कर दिए हैं । अरे चर्च का मतलब तनिक चर्चियाईये भी …तो हम सोचे कि जब ई गूगल
 
अजय कुमार झा
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तुम्हारी बहन बहन दुसरों की बहन माल

सोच सकते हैं कितना घटिया मानसिकता है यैसे लोगों का कितने गिरे लोग हैं ये जो यैसा सोचते हैं कि सिर्फ उनके ही बहू-बेटीयों का इज्जत होता है दुसरों का नही कल मेंरे पास किसी मित्र का एक ई-मेल जिसमें एम.एफ.हूसैन को उसी के अन्दाज में तमाचा मारा गया था देख कर
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वेद आर्य नारी को बेवफ़ा क्यों बताते हैं ? The heart of an Aryan lady .

समन्दर ए हक़ीक़त के ग़व्वास , जनाब ए मोहतरम द्विवेदी जी ! आपने मेरे लेख ‘‘वेदों में कहाँ आया है कि इन्द्र ने कृष्ण की गर्भवती स्त्रियों की हत्या की ?‘‘ के अनुवाद पर आपत्ति उठाई है । इंद्र ने ऋजिश्वा राजा के साथ मिलकर कृष्ण नाम के असुर की गर्भवती स्त्रियों
 
DR. ANWER JAMAL
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मिंया, अपनी तो ठीक से धुल नहीं पाते और ...

कल एक सवाल पूछा था मैंने एक ख़ास बुद्धिजीवी वर्ग से, समयाभाव के कारण आज उस पर एक यथोचित लेख न लिख सका, जिसके लिए क्षमा ! मैं उन सभी मित्रों का आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने अपने महत्वपूर्ण विचार उस लेख पर टिप्पणी के रूप में रखे ! और जो कुछ आज के
 
पी.सी.गोदियाल
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शब्दचित्र कलाकृति हैं..

कहते हैं शब्दचित्र कलाकृति हैं, हृदय में उठते भावों के रंग से कलम की कूचि से कागज पर चित्रित. कवि, शब्दों को चुनता है, सजाता है, संवारता है और उन्हें एक अनुशासन देता है कि शब्द अपने वही मायने संप्रषित करें जिनकी उनसे अपेक्षा है. हर शब्द नपा तुला, रचना को
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वेद कुरआन ब्लॉग के आदरणीय जमील साहब को मेरा सन्देश.

महोदय ,आपके कई लेख पड़े। आप प्रयास कर रहे हैं हिन्दू धर्म में विद्यमान बुराइयों को सामने लाने का।बहुत बढ़िया, बहुत अच्छा व नेक कार्य है।गन्दगी जहाँ भी हो हटानी ही चाहिए। मेरे हिसाब से पढ़े लिखे होने का यही मतलब है। और आप तो ज्यादा पढ़े लिखे है। मैं तो सिर्फ
 
VICHAAR SHOONYA
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आना लंगूर के हाथ में हूर का ... बाद में पछताना लंगूर का

आप जितने भी जोड़े देखते होंगे उनमें से पंचान्बे प्रतिशत बेमेल ही मिलेंगे। पता नहीं क्या जादू है कि हमेशा हूर लंगूर के हाथों ही आ फँसती है। हमारे हाथ में भी आखिरकार एक हूर लग ही गई थी आज से चौंतीस साल पहले।जब शादी नहीं हुई थी हमारी तो बड़े मजे में थे हम।
 
जी.के. अवधिया
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त्रिवेदी ने सैयद को मार दिया..सैयद कहता रहा आतंकवादी नहीं है

दि इंडियन एक्सप्रेस की पहली ख़बर ने परेशान कर दिया है। एक नौजवान इस्पेक्टर की हंसती हुई तस्वीर छपी है। अंदाज़ा नहीं था कि भीतर की ख़बर इतनी बदसूरत होगी। इंस्पेक्टर शब्बीर अली सैयद,गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वाड का सदस्य। वो चिल्लाता रहा कि सर मैं आतंकवादी
 
ravish kumar
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ओ रे बिस्मिल काश आते आज तुम हिन्दुस्तां, देखते ये मुल्क सारा ये टशन में थ्रिल में है

    प्रेम मेरे सबसे जिम्मेदार चोले मुझे नाचना सिखला दे चाह! मुझे छुपा सत्य बतला दे मैंने जो प्रेम बांटे हैं उसमें कितने कांटे हैं ? मैंने लिफाफों से कहा है; खत, खुलो मेरे पास जला कर राख करना है तुम्हें अभी अपनी विनम्रता की आग में
 
डॉ .अनुराग
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सावधान... आपके ब्लाग में भी आ सकते हैं भूत-पिशाच

कल रात की बात है हम पीठ में दर्द होने के कारण जल्दी सो गए। रात को मोबाइल बजता रहा, पर क्या करें दर्द के कारण हम उठा नहीं पाए। वैसे हमें इस बात का अंदाज जरूर था कि रात को जरूर हमारे ब्लाग में हंगामा होगा, लेकिन हमने सोचा नहीं था कि इतने ज्यादा नंगे
 
राजकुमार ग्वालानी