शेर
न समझ मुझे महफिल के टूटे हुए पैमानों में है साख बहुत इस दीवाने की, अभी दीवानों में है ख्याल धुआं हवा के साथ रुख बदल देगा अभी वक्त लगेगा तुम्हें, मुझे भूलने भूलाने में...
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मोहिन्दर कुमार
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[18 Jun 2010 03:46 AM]



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