हारे भी तो बाज़ी हाथ नहीं [संगीतकार के स्वर में - 4]
ग़र बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है, जो चाहे लगा दो डर कैसागर जीत गये तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं संगीतकार खय्याम का नाम हिन्दी संगीत प्रेमियों के लिये नया नहीं है. उन्होने हर दौर में हिट् गीत दिये हैं. चाहे शगन का गीत "तुम अपना रंज़ो ग़म" हो चाहे उमराव जान
Jun 15 2010 07:24 AM



Shuffle


























