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कुछ और हिंदी वेब पते और उनके लिंक Hindi Sites and Links

हमने अपनी पिछली पोस्ट में कुछ हिंदी समाचार पत्रों और हिंदी पत्रिकाओं के लिंक दिये थे। आज कुछ और हिंदी के वेब पते और लिंक दे रहे हैं।
 
Jagdish Bhatia
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हिंदी वेब पते और उनके लिंक Hindi Sites and Links

आज पेश कर रहे हैं हिंदी के कुछ वेब पते और उनके लिंक। समाचार गूगल हिंदी समाचार बी बी सी हिंदी वेब दुनिया नवभारत टाइम्स जागरण याहू  प्रभासाक्षी भास्कर दैनिक हिंदुस्तान सिफी हिंदी राजस्थान पत्रिका नई दुनिया प्रभात खबर राष्ट्रीय  सहारा हरि भूमी अमर
 
Jagdish Bhatia
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बरह में हिंदी टाइपिंग कैसे करें How to type in Hindi with Baraha

बरह में हिंदी कैसे टाइप किया जाये इसे खोजते हुए बहुत से लोग आईना  पर आते हैं। खास कर यह पता नहीं चलता कि ’ज्ञ’ ’क्ष’ और ’ऋ’ कैसे टाइप किये जायें। आज आपको बताते हैं कि बरह में हिंदी टाइपिंग कैसे की जाती है। बरह भारतीय भाषाओं में टाइप करने का एक
 
Jagdish Bhatia
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लीक से हटकर 2

लीक से हटकर” स्तंभ के अंतर्गत हर पखवाड़े हम आपसे किसी विषय पर राय माँगते हैं और उसके आधार पर एक कलाईडोस्कोपिय रपट पॉडभारती में पेश करते हैं। “लीक से हटकर” का अगला सवाल है चिट्ठों यानि ब्लॉग्स के बारे में। चिट्ठे लोकप्रिय इसलिये हुये
 
podbharti@gmail.com (Debashish Chakrabarty and Sh
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प्रथम ब्लॉग!

कल जब मुझे पता चला कि ब्लॉगर में अब हम हिंदी में भी ब्लॉग कर सकते हैं तो मैंने फ़टाफ़ट अपने प्रतिदिन के ब्लॉग में हिंदी में एक ब्लॉग भी कर दिया। उसके बाद आज मैंने ये एक नया ब्लॉग पृष्ठ भी बना दिया। यह इतना सुविधाजनक है कि मैं तो बस आज इसी में लगा हुआ ह
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स्वार्थों के होते मेहमान-हिंदी शायरी

चेहरे पर है दिखावटी मुस्कान नहीं होता नीयत का भान बदन पर हैं जगमगाते वस्त्र धारण किए दिल में काली नियत लिए भरोसे के लिए निकल रहे हैं शब्द जुबान से निरंतर विश्वास और धोखे का मालुम नहीं अन्तर मन की आंखों से पढोगे जब उनको उनके शब्दों के अर्थों का अर्थ स
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न वित्तेन तर्पणीयो मनुष्य:

तब मुझे 1.8 लाख का पैकेज मिला था. आस पास के कई गाँवों में खबर फैली थी कि फलाने का बेटा साहब बन गया. एसी टू का किराया मिला था बैंगलोर जाने के लिए. और आज ये बिजनेस क्लास की सीट छोटी लग रही है ' करीब 10 साल पहले की बात याद करते हुए बगल की सीट पर बैठे मे
 
अभिषेक ओझा
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उन गलियों से गुजरना

पिछले दिनों ऑफिस के काम से एक यात्रा पर जाना हुआ. दिल्ली, कानपुर और बीच में लखनऊ. यूँ तो बहुत दिन नहीं हुए पर पता नहीं क्यों लगा कि एक अरसे बाद आना हुआ है इन गलियों में. थोड़ी भाग-दौड़ वाली यात्रा जरूर थी पर बड़ी रोचक और ज्ञानवर्धक रही . अब भाग-दौड़ क
 
अभिषेक ओझा
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गजलकार शायर जन्‍मे कवि रूप में

अभी दिलीप अंकल आए थे बहुत अच्‍छे गजलकार है मैंने उनसे कहा आप कविता लिखिए और दिलीप अंकल की आशु कविता, उन्‍होंने दा कविता मेरे लिए लिखी जिसका आप आनंद उठाएं। आज का दिन मेरे लिए अविस्‍मरणीय है क्‍यों आप इन कविताओं को पढ़ खुद समझ जाएंगे एक गजलकार एक उम्‍द
 
Aayush Blogger
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ओवरवैल्यूड शब्द

मसिजीवी का कमेण्ट महत्वपूर्ण है - टिप्‍पणी इस अर्थव्‍यवस्‍था की एक ओवरवैल्‍यूड कोमोडिटी हो गई है... कुछ करेक्‍शन होना चाहिए! ..नही? मैं उससे टेक-ऑफ करना चाहूंगा। शब्द ब्लॉगिंग-व्यवस्था में ओवर वैल्यूड कमॉडिटी है । इसका करेक्शन ही नहीं, बबल-बर्स्ट होन
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सुनो कहानी: हरिशंकर परसाई का व्यंग्य "खेती

सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की कहानी " ह्त्या की राजनीति " का पॉडकास्ट उन्हीं की आवाज़ में सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं हरिशंकर परसाई का लघु व्यंग्य " खे
 
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग

श्रीश पाठक “प्रखर” का अभियोग है कि मेरी टिप्पणी लेकॉनिक (laconic) होती हैं। पर मैं बहुधा यह सोचता रहता हूं कि काश अपने शब्द कम कर पाता! बहुत बार लगता है कि मौन शब्दों से ज्यादा सक्षम है और सार्थक भी। अगर आप अपने शब्द खोलें तो विचारों (और शब्दों) की ग
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अल्लामा इकबाल : बच्चों के लिए (३) : हमदर्दी

टहनी पे किसी शजर* की तनहा बुलबुल था कोई उदास बैठा कहता था की रात सर पे आई उड़ने चुगने में दिन गुज़ारा पहुँचूँ किसी तरह आशियाँ* तक हर चीज़ पे छा गया अन्धेरा सुनकर बुलबुल की आहो ज़ारी* जुगनू कोई पास ही से बोला हाज़िर हूँ मदद को जानो-दिल से कीड़ा हूँ अगरचे
 
अफ़लातून
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छिपा हुआ सत्य – राहुल कात्यायन

दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय कर चुका हूँ. सही, सही तो उम्र का पता नहीं लेकिन वो बूढा जो मेरी छाया मैं टूटी खाट पर लेटा है, उससे करीब दस साल छोटा हूँ. आज मौसम ठीक नहीं है. बहुत [...]
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बंद भी खुला भी !

टोपोलोजी की बात शुरू होने के पहले बंद हो गयी. बात प्रस्तावना से आगे बढ़ी ही नहीं. 'शुरू होने से पहले ही बंद...? !' अब बात थी टोपोलोजी की तो ऐसा ही होना था. इससे याद आया एक उदहारण जो उस किताब में है जिसने हमारा और टोपोलोजी का पहला परिचय कराया. जेम्स मु
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बकबक सुनना, हुआ आसान

इस चिट्ठी में बताया गया है कि नये फायरफॉक्स में ऑग मानक की ऑडियो फाइलों के लिये समर्थन है और कैसे इन्हें सुना जा सकता है। is chitthi mein btaayaa gyaa hai ki nye firefox mein ogg manaak ke liye smrthan hai aur kis prakaar isme ogg manak kee filon ko
 
उन्मुक्त
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बकबक सुनना, हुआ आसान

इस चिट्ठी में बताया गया है कि नये फायरफॉक्स में ऑग मानक की ऑडियो फाइलों के लिये समर्थन है और कैसे इन्हें सुना जा सकता है। is chitthi mein btaayaa gyaa hai ki nye firefox mein ogg manaak ke liye smrthan hai aur kis prakaar isme ogg manak kee filon ko
 
उन्मुक्त
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अनवरत

आ ज की यह पोस्ट एक मित्र की जरूरत पर लिख रहा हूँ।  मेरे एक मित्र हैं जगदीश गुप्ता, उम्र है तिरेसठ वर्ष लेकिन अब भी बिलकुल जवान हैं। वे मेरे शहर के बेहतरीन हिन्दी टाइपिस्ट हैं और पिछले चालीस साल से अधिक से टाइप कर रहे हैं। अस्सी शब्द प्रति मिनट उ
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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फाइल में बम

संथानमजी कह रहे हैं कि हमारे परमाणु बम में दम नहीं है। सरकार कह रही है कि संथानमजी की बात में दम नहीं है। कुछ एक्सपर्ट कह रहे हैं कि संथानमजी भी सही हैं और सरकार भी। पब्लिक समझ नहीं पा रही है कि किसकी बात को दमदार माना जाये। [...]
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छिपा हुआ सत्य – राहुल कात्यायन

दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय कर चुका हूँ. सही, सही तो उम्र का पता नहीं लेकिन वो बूढा जो मेरी छाया मैं टूटी खाट पर लेटा है, उससे करीब दस साल छोटा हूँ. आज मौसम ठीक नहीं है. बहुत [...]
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चौथी का जोडा (खंड २): इस्मत चुगताई

आज उर्दू की क्रांतिकारी लेखिका इस्मत चुगताई की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी एक मार्मिक कहानी का लेख यहाँ प्रस्तुत है. यदि आप सुनना चाहें तो आवाज़ के सौजन्य से यह कहानी यहाँ सुनी जा सकती है: सुनो कहानीचौथी का जोडा: इस्मत चुगताई[अब तक की कहानी यहाँ है]और
 
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चौथी का जोडा: इस्मत चुगताई

आज उर्दू की क्रांतिकारी लेखिका इस्मत चुगताई की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी एक मार्मिक कहानी का लेख यहाँ प्रस्तुत है. यदि आप सुनना चाहें तो आवाज़ के सौजन्य से यह कहानी यहाँ सुनी जा सकती है: सुनो कहानी चौथी का जोडा: इस्मत चुगताई सहदरी के चौके पर आज फिर स
 
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लम्बी जुदाई

लम्बी जुदाई  
 
कविता वाचक्नवी Kavita Vachaknavee
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हिंदी के सर्च इंजिनों में अपने चिट्ठे शामिल करायें

अपने चिट्ठे या ब्लॉग पर ज्यादा पाठक कैसे लाये जायें इस पर अंग्रेजी में तो इंटरनेट पर ढेरों लेख मिल जायेंगे। हिंदी में इस बारे में बहुत ही कम लिखा गया है। और अगर लिखा गया है तो ज्यातार वही तरीके लिखे गये हैं जो अंग्रेजी में लिखे गये हैं। भारतीय जरूरतो
 
Jagdish Bhatia
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कुँवरनारायण को ज्ञानपीठ मिलने की खुशी में उनकी चार कवितायें

जल्दी में प्रियजन मैं बहुत जल्दी में लिख रहा हूं क्योंकि मैं बहुत जल्दी में हूं लिखने की जिसे आप भी अगर समझने की उतनी ही बड़ी जल्दी में नहीं हैं तो जल्दी समझ नहीं पायेंगे कि मैं क्यों जल्दी में हूं । जल्दी का जमाना है सब जल्दी में हैं कोई कहीं पहुंचने
 
अफ़लातून
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अपना घर खुद साफ करें; मोहल्ले की स्वच्छता मिल बैठ तय करें

दीवाली के पहले का सप्ताह आरंभ हो गया है। या तो लोग अपने-अपने घरों की सफाई कर चुके हैं या फिर यह काम जोरों पर है। आखिर दीवाली के पहले सब को अपने-अपने घर चमकाने हैं। देवी लक्ष्मी का स्वागत जो करना है। हमारे घर में यह वार्षिक स्वच्छता अभियान कोई बीस दिन
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
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वर्डप्रेस 2.7 हिन्दीकरण सम्पन्न

पिनाक ने आभासी संसार को हिन्दीमय करने के अपने प्रयास के तहत आज के इस पावन दिवस पर वर्डप्रेस 2.7 के लिए हिन्दी भाषा की फाइल सभी के लिए “डाउनलोड” हेतु जारी की है. जिनका ब्लॉग वर्डप्रेस पर है तथा निजी डोमेन पर हैं वे इसका उपयोग कर सकते है. वर्डप्रेस 2.7
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डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ महात्मा गाँधी

०२ अक्टूबर २०३०: सरकार ने आज एक विज्ञप्ति जारी की जिसके अनुसार 'इंडिया दैट इज भारत' की जगह 'डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ महात्मा गाँधी' कर दिया गया. इसके साथ ही सरकार का दो साल पहले का 'भारत' को देश का राष्ट्रीय नाम घोषित करने वाला फैसला रद्द हो जाएगा. क
 
अभिषेक ओझा
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सिविल सेवा परीक्षा

इस वर्ष की सिविल सेवा परीक्षा के प्रथम 100 चयनित अभ्यर्थियों में केवल एक के विषय गणित और भौतिकी हैं। मुझे यह तब पता लगा जब मैंने एक परिचित अभ्यर्थी से उसके विषयों के बारे में पूछा। आश्चर्य की बात यह थी कि वह एक इन्जीनियर हैं और विज्ञान के विषय न लेकर
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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होम वर्क की वर्कशाप

दिल्ली के स्कूलों का एक अघोषित उद्देश्य यह भी है कि पेरेंट्स को भी प्रोग्रेस, ज्ञान और विद्या के पथ पर अग्रसर करते रहे हैं। संस्कृत के एक श्लोक का आशय है कि विद्यार्थिनो को कुत सुख यानी विद्यार्थियों को सुख कहां। सो दिल्ली के स्कूल पेरेंट्स के सुख हर
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शायर, सिंह और समोसे

कहावतें चलती रहती हैं, हालात बदल जाते हैं। कहावत चल रही है, लीक छोड़कर तीन चलें, शायर, सिंह,सपूत। सिंह तो अब बचे नहीं, तमाम अभयारण्यों से खबरें आ रही हैं कि सिंह अब देखने को भी नहीं बचे हैं। लीक क्या छोड़ेंगे, सिंह तो दुनिया ही छोड़ गये। शायरों पर बह
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बुल बनाम आईसक्रीम

मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेनसेक्स नेताओं के ईमान से भी गया गुजरा हो लिया है, कितना गिरेगा, कुछ पता नहीं चल पा रहा है। जानकार बताते हैं कि सेनसेक्स की हालत यह तबसे हो गयी है, जब से मुंबई शेयर बाजार के बाहर एक सांड़ की मूर्ति की स्थापना की गयी है। स
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घंटाभंगुर बिजली

बिजली दर्शन से जुड़े कतिपय महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं- जीवन क्षणभंगुरम् च बिजली घंटा भंगुरम् ज्ञानी पुरुषस्य यह लक्षणम्,ना बिजली आने की खुशी, ना बिजली जाने का गम भावार्थ-जीवन क्षणभंगुर है और बिजली घंटाभंगुर है। अभी आयी है, अभी चली जायेगी। कहां से
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नेट पर फैला साइबरित्य

शहर बने। जब गांव शहर की ओर चले तो सबर्ब (Urban>Suburban) बने। अब लोग सबर्ब से साइबर्ब (Suburb>Cyburb) की ओर बढ़ रहे हैं। की-बोर्ड और माउस से सम्प्रेषण हो जा रहा है। नई विधा पुख्ता हो रही है। बन्धुवर, यह गांव/शहर या सबर्ब का युग नहीं, साइबर्ब (Cy
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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शोभा 'कमबख्त' डे

शोभा डे : मैंने पढ़ा है उन्हें, अच्छा लिखती हैं, विदुषी हैं और अंग्रेजी की अच्छी जानकार भी। लेकिन जब TIMES OF INDIA में उनका कॉलम POLITICALLY INCORRECT पढता हूँ तो सच कहूँ तो दिल करता है कि उन्हें MENTALLY IMPERFECT कहूँ। अब इसी रविवार को उन्होंने जि
 
नीरज कुमार
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प्यार के तार...

चांदनी ओढ़ के वो गुजर जाते हैं, होश में बाद तक हम नहीं आते हैं। जिंदगी दिल्लगी का हुआ सामां है, आज तारे सहर में निकल आते हैं। आशिकी रोग है बच सकें तो अच्छे, हाल-बेहाल यूँ बाद पछताते हैं। जुल्म करने लगे हैं अदा से ऐसे, घायलों को दुआ भी दिए जाते हैं। ख
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टूट गई गुल्लक...

सपनों को रखता रहा था दूसरो से छिपाकर, आ गई क़यामत जब टूट गई गुल्लक... जिंदगी बिखर गई।
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अमर सिंहजी के शेर पर

बजट कर प्रस्तावों पर डिस्कशन के कुछ अंश, जिन्हे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया था। मेरा सुझाव है कि हमें सीरियलों में चल रहे अफेयरों पर कर लगा देना चाहिए। सीरियल में अगर अफेयर नहीं होंगे, तो उन्हे कौन देखेगा। बगैर अफेयर की लाइफ तो सब झेल रहे हैं। मेरी
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आदमी का हाल...

जिंदगी की कर रहा हूँ बात मैं, चाहता हूँ इश्क की सौगात मैं। सोच लो ये शाम लौटे फ़िर नहीं कर सकूँ जब प्यार की बरसात मैं। हैं मुझे वो याद वादे आज भी ला सका हूँ इसलिए बारात मैं। आदमी का हाल है ऐसा हुआ, आज हूँ खाली इसी ही रात मैं।
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अनुशासनाचार्यों का रुदन!

उपेक्षाभाव से मैं यह भी लिख सकता था – डिसिपलिनाचार्यों का वीपन !  डिसिप्लिन (decipline) और वीप (weep) अंग्रेजी से और शब्दविन्यास हिन्दी से लेते हुये। पर शायद वह संप्रेषण में ज्यादा अटपटा हो जाता। लेकिन, मान्यवर, वह होता मूल भावना के ज्यादा करीब।
 
ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey
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