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लालची नेता ही हैं जिम्मेदार

जहां तक मुझे याद है, भोपाल गैस त्रासदी की घटना के समय जो हो-हल्ला हुआ था, उसके बाद यदि कुछ हो रहा है; तो वो अब हो रहा है। क्या अखबार और क्या टीवी चैनल, सभी के बीच आगे बढ़कर खबर देने की होड़ मची है। कुछ दिन तो खबरों का केंद्र वारेन एंडरसन ही था। हालांकि
 
अनिल पाण्डेय
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BAKBAK

अभी हाल में मैंने महिला पत्रकारों के क्लब में एक मीडिया वोर्कशोप का आयोजन किया यहाँ मीडिया के विद्यार्थियो को जमीनी पत्रकारिता से दो- चार करवाने की कोशिश की . इस काम में मेरा साथ वरिष्ठ पत्रकार प्रीति बजाज ने दिया. यहाँ वरिष्ठ पुलिस डॉ आदित्य आर्य ने
 
imnindian
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का तुगलकी फ़रमान

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पत्राचार के मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MMC) के इम्तिहान 22 जून से लेकर 13 जुलाई तक चलेंगे। लेकिन परीक्षा का केंद्ग सिर्फ शिमला रखा गया है। दिल्ली और आसपास रहने वाले जिन लोगों ने अपनी पहली प्राथमिकता में दिल्ली और नोएडा
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यहां मामला संवेदना शून्य हो जाने का है (झाड़ग्राम)

जब झाड़ग्राम में हादसे की खबर मिली, तो साफ तौर पर दंतेवाड़ा के बाद लोग ऐसी खबर के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो गये होंगे। सवाल ये नहीं है कि अब इन खबरों को लेकर कितनी कवरेज की गयी या हम समस्या को लेकर कितने गंभीर हैं। यहां मामला संवेदना शून्य हो जाने का
 
prabhat gopal
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संवेदनाशून्य होती हिंदी पत्रकारिता

आज भी पत्रकारिता ’मिशनरी पत्रकारिता’ या ’लोककल्याणी’ पत्रकारिता' तो शायद नहीं रही है। गलाकाट प्रतिस्पद्र्धा, व्यवसायीकरण, अखबारों पर उद्योगपतियों का कब्जा, पत्रकारिता के पीछे के छिपे निहित स्वार्थ, अखबारों व पत्रिकाओं को रोब गालिब करने, फायदा उठाने,
 
NEWS SOURCE
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"नयी चुनौतियां और वैकल्‍पिक मीडिया" विषयक परिसंवाद

उदयपुर । 23 अप्रैलआवारा पूंजी की मीडिया पर पकड़ मजबूत हुई है और इस पकड़ ने खबर को मनोरंजन में बदल दिया है। राहुल महाजन, मल्‍लिका शेरावत या राखी सावंत जैसे चरित्रों का मीडिया सुर्खियों में होने के कारण भी यही है। मनोरंजन की प्रवृत्ति स्‍थिर नहीं है। अतः
 
नियंत्रक । Admin
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न दर्शकों की डिमांड, न मीडिया की सप्लाई

आईपी कॉलेज में 20 दिसम्बर 2008 को 10th Meet The Media, वार्षिक समारोह के अवसर पर "लाइट, कैमरा, एक्शन- सेंस और सेंसेशन " विषय पर आयोजित सेमिनार में विनोद दुआ (टीवी पत्रकार , NDTVइंडिया), कविता चौधरी (निर्माता-निर्देशक )लिलेट दूबे (फिल्म अभिनेत्री), वि
 
भावना
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मीडिया की भाषा आँख खोलने वाली होनी चाहिएः व्यास

मीडिया और भाषा पर परिसंवाद उदयपुर । मीडिया की भाषा आँख खोलने वाली होनी चाहिए जिसे हमारे मनीषियों ने पश्यन्ती कहा है। ऐसी भाषा जो जन सामान्य की अभिरुचि को सुसंस्कृत करे और उन्हें सजग बनाए। सुपरिचित कवि-आलोचक डॉ. सत्यनारायण व्यास ने ’मीडिया और भाषा’ वि
 
नियंत्रक । Admin
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इस टेलीविजन पत्रकार से सीखिए भाषा

यूँ तो कल से ही सभी चैनलों पर 26/11 के एक बरस पूरे होने पर खास शो चल रहे थे. लेकिन आजतक के शम्स ताहिर खान की स्टोरी अपने आप में सबसे जुदा थी. ऐसे मौके पर अपनी बातों को किस तरह से कोई एंकर रखे उसका एक शानदार नमूना था. वैसे शम्स का अपना एक अलग अंदाज़ ह
 
विनीत कुमार
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एक पत्रकार को जेल भेजा ,दो पत्रकार फरार

लखनऊ, नवंबर। लखीमपुर के पत्रकार बरकत अली अंसारी को आज जेल भेज दिया गया तो गोंडा में अमर उजाला के संवाददाता सरदार राजेन्द्र सिंह पिछले कई दिनों से फरार हैं। इटावा में नई दुनिया के संवाददाता नीरज मेहरे के खिलाफ शातिर बदमाशों पर लगाई जने वाली धारा सेवन
 
ambrish kumar
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बहन रचना से कहना एक पोस्ट जरुर लिखे

बहन रचना से कहना एक पोस्ट जरुर लिखे इन जैसों के जवाब मेंऔरत को खामोश करना हो तो उसके चरित्र पर हमला करो यह कबीलाई सोच अभी भी जारी है पर प्रतिरोध के स्वर भी उठने लगे है .सिद्धार्थ कलहंस तबसे जानते है जब लखनऊ विस्वविद्यालय छात्र संघ के पदाधिकारी के रूप
 
ambrish kumar
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डाइपरात्मक रोल

खबरें खराब हैं, उसके लिए जो रोज छापता हैं खबरें। एक विख्यात अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ने घोषणा कर दी है कि प्रिंट मीडियम के दिन अब गिने चुने हैं। अमेरिका में लगातार किसी ना किसी अखबार के बंद होने की खबर आ ही रही है। आनलाइन पाठकों की [...]
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परचे बाँटने वालों की तरह अब ’हिन्दुस्तान’ भी बैक-फ़ुट पर ?

मौजूदा आम चुनाव में पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख दैनिक ’हिन्दुस्तान’ तथा ’दैनिक जागरण’ द्वारा चुनाव रिपोर्टिंग के प्रेस परिषद द्वारा जारी दिशा निर्देशों की खुले आम धज्जियाँ उड़ाने के बारे में मैंने ४ अप्रैल , २००९ को लिखा था । प्रेस परिषद की शिकायत प
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ख़बर पैदा करने का सही तरीक़ा

यह लेख है बीबीसी उर्दू सेवा के पत्रकार वुसतुल्ला खान का। यह उन्होंने आज ही लिखा। उनका पोस्ट अविकल प्रस्तुत है। यह बीबीसी हिंदी से साभार लिया गया है। ख़बर पैदा करने का सही तरीक़ा (BBC) ------------------------------------------------------------------
 
राजकाज
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अंतरराष्ट्रीय श्रोता समाचार

साल और नॉटआउट, जय हो 25 साल से ज़्यादा हो गये होंगे। स्कूल में पढ़ता जब पहली बार एक अखबार देखा, अंतरराष्ट्रीय श्रोता समाचार। उस जमाने में इतनी साफ-सुथरी छपाई, वो तो अलग बात है। असली बात थी कंटेंट। उस ज़माने में कौन सोचता था मीडिया पर केंद्रित अखबार न
 
सूबेदार
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हमको माफ़ करो

पिछले महीने की यूनिकवयित्री और सितम्बर २००८ माह की यूनिपाठिका रचना श्रीवास्तव का हिन्द-युग्म से रिश्ता बहुत पुराना है। आगे से ये हिन्द-युग्म पर स्थाई तौर पर कविताएँ प्रकाशित करेंगी। खबरें बासी हों इस से पहले पढ़ लिया जाए ये सोच के खोला अख़बार पर शब्द
 
नियंत्रक । Admin
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मीडिया को आजादी क्यों चाहिए?

पंकज श्रीवास्तव नई दिल्ली, जनवरी. एक आधुनिक और सभ्य समाज में विचारों की आजादी से बड़ा दूसरा कोई मूल्य नहीं। ये लोकतंत्र की बुनियाद है। लेकिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में न्यूज चैनलों से इस आजादी को छीन लेने की कोशिश हुई तो लोगों को कोई खास फर्क न
 
ambrish kumar
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बिहार में प्रेस पर अघोषित सेंसर

फज़ल इमाम मल्लिकपटना , जनवरी। बिहार में सब कुछ ठीक है। क़ानून व्यस्था पटरी पर लौट आई है। विकास चप्पे-चप्पे पर बिखरा है और ख़ुशहाली से लोग बमबम हैं। यह मैं नहीं कह रहा हूं। बिहार के अख़बार और समाचार चैनलों से जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है उससे तो बस
 
ambrish kumar
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पत्रकार सड़क पर

सविता वर्मा नई दिल्ली, जनवरी. उदारीकरण के नए दौर में मीडिया संकट में है। पिछले दस वर्षो से धीरे-धीरे श्रमजीवी पत्रकारों को वेज बोर्ड से हटाकर ठेके कांट्रेक्ट पर रखने की जो परंपरा शुरू हुई, उसके दुष्परिणाम अब सामने आने लगे हैं। देश के प्रमुख अखबार समू
 
ambrish kumar
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टीवी पत्रकारिता सौतेली संतान तो है नहीं

प्रभाकर मणि तिवारी मुझे लगता है कि यह बहस कुछ अनाम-गुमनाम लोगों की टिप्पणियों के चलते असली मुद्दे से भटक रही है. यह सही है कि अच्छे-बुरे लोग प्रिंट मीडिया में भी हैं और इलेक्ट्रानिक में भी. लेकिन इस बहस का मकसद ऐसों को आईना दिखाना नहीं है.निजी खुन्नस
 
ambrish kumar
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पत्रकार बनाम पत्रकार

आज पत्रकार बनाम पत्रकार की बहस शुरू हो गई है पत्रकारिता को खेमो में बाँट कर विभाजित करने का प्रयास हो रहा है टीवी चॅनल के उत्साही पत्रकार इस खेल में सबसे आगे है अपना मायका भूल कर ससुराल के लिए प्रिंट मीडिया को गरिया रहे है नाम ले रहे है बरखा से लेकर
 
ambrish kumar
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थाने में मीडिया

थाने में मीडिया नई दिल्ली, जनवरी.मंदी की मार के चलते छोटे अखबार समूह तो अपने को बचा ले जा रहे है पर आजादी की लडाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला हिन्दुस्तान टाईम्स समूह छंटनी कर रहा है .यह समूह मीडिया में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाता है .प्रसार के बड़
 
ambrish kumar
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एनबीए के नियम बड़े या फिर न्यूज चैनलों की टीआरपी?

मुझे याद आता है हीथ्रो हवाई अड्डे पर हमला और ७ जुलाई जब कि लंदन के अंडरग्राउंड ट्रेनों को टारगेट बनाया गया था। लंदन में ७ जुलाई, २००५, पहले खबर ये आई कि ट्रेन का एक्सीडेंट हो गया है पर बाद में ये पता चला कि ये हादसा नहीं, आतंकवादी हमला है। क्या याद ह
 
Nitish Raj
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