पसंद करें
0
नापसंद करें

सामानांतर सिनेमा और दर्शकों की बेरुखी

सामानांतर सिनेमा को प्रारंभिक दौर में काफी दर्शक मिले. मगर बाद में धीरे-धीरे इस तरह की फिल्मों के दर्शक कम होते चले गए. अस्सी और नब्बे के दशक के आखिर में सार्थक सिनेमा का आंदोलन धीमा पड़ गया. प्रकाश झा और सई परांजपे जैसे फिल्मकार व्यावसायिक सिनेमा की तरफ
टैग: cinema
पसंद करें
3
नापसंद करें

Apartment (2010): रोमांचरहित थ्रिलर

अपार्टमेंट एक ऐसी थ्रिलर है जिसे देखते हुये दर्शक रोमांचित नहीं हो पाता। फिल्म का एक पात्र (रोहित रॉय) अपने अधीनस्तों से कहता है कि शाहरुख खान भी नहीं बल्कि सिर्फ सैक्स बिकता है। पर अपार्ट्मेंट के सम्बन्ध में कहा जा सकता है कि दो नायिकाओं द्वारा कराया
 
cinemanthan
टैग: cinema review
पसंद करें
0
नापसंद करें

सिनेमा में ध्वनि का आगमन

मूक सिनेमा के दौर में भी फिल्मों की आशातीत सफलता से उत्साहित होकर कुछ कल्पनाशील लोग सिनेमा को आवाज़ देने के प्रयासों में जुट गए थे. 1930 के आसपास सिनेमा में ध्वनि जोड़ने के प्रयास होने लगे हालाँकि तब यह एक अत्यंत महंगा सौदा था. मुंबई में
टैग: cinema
पसंद करें
0
नापसंद करें

मूक फिल्में और सेंसरशिप

सन 1917 तक सेंसरशिप जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी. कौन सी फिल्म प्रदर्शनयोग्य है, कौन सी नहीं, यह तय करने का अधिकार पुलिस अफसरों को होता था. आम तौर पर वे फ़िल्में आसानी से प्रदर्शन कि इजाजत दे देते थे, जब तक कि राजनीतिक लिहाज़ से कोई आपत्तिजनक  बात किसी
टैग: cinema
पसंद करें
0
नापसंद करें

मूक सिनेमा का दौर

दादा साहब फालके की फिल्में की सफलता को देखकर कुछ अन्य रचनात्मक कलाकारों में भी हलचल मचने लगी थी। 1913 से 1918 तक फिल्म निर्माण सम्बंधी गतिविधियां महाराष्ट्र तक ही सीमित थी। इसी दौरान कलकत्ता में हीरालाल सेन और जमशेद जी मदन भी फिल्म
टैग: cinema
पसंद करें
0
नापसंद करें

झेंडा

ही नोंद झेंडा चित्रपटामुळेच लिहित आहे मी, पण ही फक्त झेंडाबद्दलच नाही. कालच मी झेंडा सिनेमा पाहिला. पाहिल्यावर मनात संमिश्र भावना होत्या. मराठी मनाची चलबिचल टिपण्याचा एक प्रामाणिक प्रयत्न, असं झेंडाचं साधारण वर्णन होऊ शकतं. झेंडा काही मोठे आणि कळीचे
टैग: cinema
पसंद करें
2
नापसंद करें

राज कपूर – भारतीय सिनेमा के महान शो-मैन

रणबीर राज कपूर जो कि राज कपूर के नाम से जाने जाते हैं भारत में अपने समय के सबसे बड़े ‘शोमैन’ थे। सन् 1935 में, जब उनकी उम्र केवल 11 वर्ष थी, फिल्म इंकलाब में अभिनय किया था। वे बांबे टाकीज़ स्टुडिओ में सहायक (helper) का काम करते थे। बाद में वे
 
जी.के. अवधिया
पसंद करें
0
नापसंद करें

sobjaanta cinemawaala: 1

Cinema amra sobai dekhi. dekhte bhalobashi bole dekhi; abar onyo kichhu korar thakena boleo dekhi. jai hok cinema-r moto popular mass medium e deshe ar duti nei. sadhe ki bangla cinemar superstar Chiranjeet (amar naam proteek… proteek bejomma!)
 
brahmagyani
पसंद करें
0
नापसंद करें

দ্বান্দ্বিকতার রূপরেখা : সত্যজিৎ রায়ের ‘ক্যালকাটা ট্রিলজি’ এবং সমকালীন নীতি ও মূল্যবোধ

‘প্রতিদ্বন্দ্বী’, ‘সীমাবদ্ধ’ এবং ‘জন অরণ্য’- সত্যজিৎ রায়ের ‘ক্যালকাটা ট্রিলজি’ সম্পর্কে লিখিত ও পঠিত বিশ্লেষণের সংখ্যা কোনোভাবেই কম নয়। পরিসরের স্বল্পতা এবং লেখকের জ্ঞানের সীমাবদ্ধতার কথা বিবেচনা করেই বর্তমান রচনার শিরোনামটি ভাবা হয়েছে। নৈতিকতা (ethics)
पसंद करें
0
नापसंद करें

বিমল চিত্র-কথা

“With his very first film Udayer Pathe (Hamrahi in Hindi), Bimal Roy was able to sweep aside the cobwebs of the old tradition and introduce a realism and subtlety that was wholly suited to the cinema. He was undoubtedly a pioneer. He reached his
पसंद करें
0
नापसंद करें

ইয়ে হ্যায় বম্বে মেরি জান

গীতা দত্ত । বম্বের জীবন ও সংগীত প্রথমে অনুরোধ এসেছিল কানু রায়’কে নিয়ে লেখার জন্য। অসাধারণ সুরকার (যদিও খুব বেশি কাজ করেননি) ছিলেন কিন্তু সচরাচর ওনাকে নিয়ে লেখা বা কথা বিশেষ হয় না। হঠাৎ এ অনুরোধ! ভাবতে না ভাবতে প্রশ্ন এল, কানু রায় সম্পর্কে গীতা দত্ত
पसंद करें
0
नापसंद करें

Waiting for DropD

For the last couple of years, I have been passing through a strange kind of phenomenon. It is a phenomenon because it has become recurrent in my life and it's strange because I don't possess any grammar of it and hence I have no methodology of
टैग: cinema
पसंद करें
0
नापसंद करें

Visiting ‘The Zoo’

Even before I attempt to start the review of ‘Chiriakhana’, let me give the following disclaimer: I am a big fan of Byomkesh Bakshi, Sharadindu Bandyopadhyay, Satyajit Ray and Uttam Kumar. And I think the only time these four Bengali
पसंद करें
0
नापसंद करें

उत्तरायण Uttarayan

उत्तरायण हा चित्रपट तुम्ही पाहिला नसेल तर सर्व प्रथम सीडी-डीविडी आणून तो पहा! अनेक जणांस माहित नसेल की बिपीन नाडकर्णी दिग्दर्शीत हा चित्रपट (भारताची अधिकृत ''एंट्री'' म्हणून) ऑस्करच्या शर्यतीत होता. पण आपली देशाची एकूणच सर्व system किती सदोष आहे ह्याचं
पसंद करें
0
नापसंद करें

Marathi music मराठी संगीताला चांगले दिवस

हिंदी गाण्यांच्या बारा महिने तेरा काळ दिवसाचे चोवीस तास सुरू असलेल्या भडिमारामुळे नव्या मराठी चित्रपटांतील गाणी आता मराठी रसिकांच्याच ओठावर रेंगाळत नाहीत. त्यामुळे त्यांचे संगीताचे हक्कही विकले जात नाहीत. मराठी चित्रपटसंगीताच्या दुर्दैवाचे असे दशावतार
पसंद करें
0
नापसंद करें

मराठी चित्र संगीत Marathi film music

श्वास नंतर मराठी चित्रपटांना चांगले दिवस आले. आचार्य अत्र्यांच्या ''श्यामची आई'' ह्या राष्ट्रपती पदक मिळवलेल्या पहिल्या चित्रपटानंतर कुठल्याही मराठी चित्राला हे पदक मिळाले नाही. पन्नास वर्षाच्या gap नंतर संदीप सावंत यांनी राष्ट्रपती पदक