स माज का संचालन करनेवाली, नेतृत्व प्रदान करनेवाली शक्ति आमतौर पर ऐसी व्यवस्था से बनती है जिसमें दो या दो से अधिक लोग होते हैं। इस व्यवस्था को परिषद, सभा, पंचायत कुछ भी कहा जा सकता है। समाज के विभिन्न तबकों के मान्य लोगों के इस समूह में विभिन्न मुद्दों पर
फासिज्म चाहे आज सर्वमान्य राजनीतिक सिद्धांत न हो मगर इसका प्रेत अभी भी विभिन्न अतिवादी, चरमपंथी और उग्र विचारधाराओं में नज़र आता है। राजनीतिक शब्द के रूप में इसे स्थापित करने का श्रेय इटली के तानाशाह बैनिटो मुसोलिनी को जाता है। फा सिज्म शब्द
संबंधित पोस्ट- 1.भांडाफोड़, भड़ैती और भिनभिनाना 2.कोठी में समाएगा कुटुम्ब 3.अंडरवर्ल्ड की धर्मशाला बनी चाल 4.बस्ती थी, बाज़ार हो गई 5.बंदरगाह से बंदर की रिश्तेदारी !6.लंगर में लंगूर की छलांग गो दाम, संसद या डिपो में क्या समानता है? चकराइये नहीं, ये सभी
कल केंद्र सरकार के माननीय वित्तमंत्री, प्रणवदादा, ने अपने ‘महान्’ देश का बजट संसद से पास करा लिया । तब से संचार माध्यमों के माध्यम से उस पर तमाम प्रतिक्रियाएं सुनने को मिल रही हैं । प्रतिक्रियाओं का सिलसिला दो-एक दिन और चलेगा । फिर उसके बाद सब सामान्य हो
संबंधित कड़ियां-1.अल्लाह की हिक्मत और हुक्मरान2. फसल के फ़ैसले का फ़ासला.3मोहर की मुखमुद्रा अ धिकार या स्वत्व के अर्थ में इस्तेमाल होने वाला शब्द है हक़ haq जिसका बोलचाल की हिन्दी में खूब इस्तेमाल होता है। सेमिटिक मूल के हक़ शब्द की अर्थवत्ता व्यापक है
…पशु ही आदिम मानव की सम्पत्ति थे। इसीलिए भारतीय संस्कृति में इन्हें पशुधन कहा गया है। ये अलग बात है कि मालदार होने के बाद इन्सान धनपशु भी बनता है... समाज के विकास के साथ ही भाषा का भी विकास जुड़ा हुआ है। प्राचीनकाल में मानव समुदायों के क्रियाकलापों ने
हि न्दी के सबसे ज्यादा इस्तेमालशुदा शब्दों में अफ़रातफ़री का भी शुमार है जिसका मतलब है अस्तव्यस्त होना, हंगामा होना, बदहवासी फैलना आदि। इस शब्द के और भी कई प्रयोग होते हैं जैसे गड़बड़ी फैलना, घोटाला होना, गोलमाल करना आदि जिनमें मूलतः अनियमितता और
पिछली कड़ी-माई नेमिज खान बहादुर पठान [1] मध्यकाल में बहादुर शब्द की महिमा खान शब्द की तरह ही बढ़ती रही। शौर्यसूचक इस शब्द की व्याप्ति सिर्फ शासक वर्ग तक सीमित न रहकर आम लोगों में भी हुई। ब हादुर शब्द भी खान की तरह तुर्क-मंगोल संस्कृति से उपजा है
ज़रूर देखे-फ़सल के फ़ैसले का फ़ासला सं बंध या रिश्ता जैसे शब्दों की अर्थवत्ता बहुत व्यापक है। यूं देखें तो अपने मूल स्वरूप से बोलचाल में प्रचलित अर्थों तक में शब्दों का इतिहास बहुत दिलचस्प होता है। संबंध जहां भारोपीय मूल का शब्द है वहीं रिश्ता इंडो-ईरानी
भारतीय इतिहास की बीती दो सदियां लुटेरे पिंडारी या ठगों की करतूतों से रंगी हुई हैं। ये ठग पीढ़ी दर पीढ़ी यात्रियों के काफिलों को लूटते रहे । यात्रियों को लूटना इनकी फितरत थी और उन्हें जीवित न छोड़ना उनका धर्म। पुराने ज़मानें में यात्राएं बेहद दुरूह होती
महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण ग्रंथ में एक प्रकरण है । महाराजा दशरथ कैकेयी को दिये गये वचनों से बंधे होने के कारण न चाहते हुए भी श्रीराम को वनवास पर भेज देते हैं । तत्पश्चात् वे उनके असह्य वियोग में स्वयं प्राण त्याग देते हैं । यह सब घटित होता है
"पंच् का समष्टिमूलक अर्थ पंच-परमेश्वर में भी सिद्ध होता है। समूची सृष्टि में ईश्वर को ही सर्वोच्च माना गया है। इस मंडली को पंच-परमेश्वर की संज्ञा देने का तात्पर्य ही पंच शब्द की महत्ता और उसमे निहित गुरुता को सामने लाना है।" पिछली कड़ी-पंगत,
क तरनी के अर्थ में कैंची शब्द की व्याप्ति हिन्दी की कई शैलियों में है। कैंची की व्युत्पत्ति तुर्की भाषा से मानी जाती है मगर इस शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर भाषाविज्ञानी मौन हैं और संदर्भ भी कम हैं। अनुमान है कि इसका रिश्ता अरबी शब्द कस्र से है, जिसका
जागीरदारियां तो खत्म हो गईं, पर लोकतंत्र में ये अभी कायम है। बस, जागीरों की परिभाषा बदल गई है." स्था न के विकल्प रूप में जगह शब्द का इस्तेमाल सर्वाधिक होता रहा है। यह मूलतः फारसी का शब्द है और उर्दू, हिन्दी के अलावा भारत की ज्यादातर क्षेत्रीय भा
भा रतीय राजनीति में भी क्षेत्र शब्द की व्याप्ति जबर्दस्त है। क्षेत्रवाद जैसे शब्द का प्रयोग अक्सर राजनीतिक संदर्भों में ही ज्यादा पढ़ने-सुनने को मिलता है। क्षत्रप भी एक ऐसा ही शब्द है जिसका इस्तेमाल राजनीति के मंजे हुए ऐसे खिलाड़ियों के लिए किया जाता
हि न्दी में इलाज करनेवाले के तौर पर डॉक्टर, चिकित्सक, वैद्य जैसे शब्द प्रचलित हैं। इसके अलावा हकीम और चारागर जैसे शब्द भी सुनने को मिलते हैं। इन सभी शब्दों के मूल में इलाज करनेवाले की महिमा झलक रही है। समाज ने हर किस्म की समस्या, रोग, बीमारी से छुटका
आचार्य चाणक्य के नाम से प्रायः हर भारतवासी परिचित होगा । उन्हें अवसर के अनुरूप हर प्रकार की नीति अपना सकने वाले एक अतिसफल राजनीतिज्ञ के तौर पर जाना जाता है । उनका काल चौथी सदी ईसवी पूर्व बताया जाता है । वे तत्कालीन यूनानी शासक, सिकंदर महान, के समकालीन
काफी जद्दोजेहद के बाद अंततः केंद्र की सरकार गठित हो ही गयी । पिछली बार की तरह इस बार भी कांग्रेस पार्टी ही सरकार का नेतृत्व कर रही है । इस बार उसे अन्य दलों को गठबंधन में शामिल करने में वैसा प्रयास नहीं करना पड़ा जैसा पिछली बार करना पड़ा । इस दफे घटकों