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*खूबी*

आज राकेश बहुत खुश था.पिछले कई दिनों से जब से उसे नौकरी के साक्षात्कार के लिए बुलावा पत्र मिला था,अपनी पढाई ख़त्म होने के बाद एकदम से गुमशुम सा रहने वाला राकेश अब फिर से अपने पढाई के दिनों की तरह ही चहकने लगा था|पूरे सप्ताह भर वो अपने शहर के लगभग सभी
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अकाल और खशबू

राजू-पप्पू के पापा, तुम्हारा कागज मिला। जी जाने कैसा-कैसा हो गया। पप्पू को माई की गोद में डालकर मैं तो सीधे चारे की कोठरी में भागी। किंवाड़ उड़का कर पढ़ा। सब हाल जाने। कमठाने की बजाय अब तुम ताकड़िया साहब के बंगले पर काम करते हो यह ठीक है, मगर मेम साहब की
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किसकी थी वो भूल :मानस खत्री

श्यामपुर के जंगल में कई जानवर रहते थे. इन्ही जानवरों में सेवु नाम का चील, कीकड़ नाम का बगुला और स्वेतु नाम का सर्प भी रहते थे. इन तीनों में बड़ी गहरी मित्रता थी. ये तीनों हर काम मिल-जुल कर करते थे. कीकड़ स्वेतु से बहुत इर्ष्या करता था, क्योंकि स्वेतु
 
Manas Khatri
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परछाईयों का शहर 4 (अंतिम भाग)

गतांक से आगे...."रामधारी ले चलो इन्हें पूछ ताछ के लिये.""येस सर."पुलिस के साथ उन तीनों की पूछताछ चल रही है. "ड्रग्स का तस्करी में पकड़ा गया है तुम लोगों को .... मालूम है ना कितना बड़ा जुर्म होता है ये?" तीनों गर्दन झुकाए अपनी आने वाली मुश्किल का ताना बना
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परछाईयों का शहर 3

5 महीने बादमनीष और उसके साथी शिपमेंट उतार रहे हैं, कुछ कस्टम ऑफिसर वहाँ पर चेकिंग के लिये आये हैं, मनीष के 3 साथी तत्काल भाग जाते हैं, मनीष और उसके दो साथियों से ऑफिसर जांच पड़ताल करते हैं."क्या हो रहा है यहाँ?""माल उतार रहे हैं साहब.""तुम्हारे साथी भाग
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बोलेरो क्लास

बोलेरो क्लास में जाना है, भईया! आप तो मैनेजमेंट पढ़कर कारपोरेट क्लास में चले गए। हमको बोलेरो क्लास में जाना है...बोलेरो क्लास? पिक्कू ने जब पहली बार कहा मैं सचमुच समझ नहीं पाया। एक बार अपने गाँव-कस्बे से बाहर रहने लगिए तो उसकी जुबान भी आपको पराई लगने लगती
 
प्रभात रंजन
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कहानी लदुना के पानी की

एक कहानी जिसे भेजा हैं सचिन कुमार जैन ने भोपाल से.पूरे देश-प्रदेश की भांति मंदसौर जिले ने भी पानी के गंभीर संकट को भोगा है, परन्तु इस ऐतिहासिक जिले के समाज ने जल संघर्ष की प्रक्रिया में नये-नये मुकाम हासिल करके अपनी विशेषता को सिद्ध कर दिया है। सूखे –
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Poojaki kahani!

माफी  चाहती  हूँ ,की , पिछली  कड़ी के बाद इतना लम्बा अंतराल हो गया...२/३ दिनों के भीतर अगली कड़ी लिख दूँगी! ख़राब तबियत के कारण नही पोस्ट कर पाई...
 
kshama
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lighter

लाइटरउस दिन के बाद सब उसे बबलू लाइटर के नाम से बुलाने लगे। नाम तो उसका बबलू सिंह था। जबसे वह राधाकृष्ण गोयनका महाविद्यालय में पढ़ने आया था तबसे उसके इसी नाम की शोहरत फैली थी। इंटर में दाखिला लेते ही उसने अपने नाम का डंका बेलसंड प्रखंड ही नहीं, पूरे
 
प्रभात रंजन
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आसमानी रिश्ते भी टूट जाते हैं..

आज शाम से ही तेज आँधी चल रही थी. वह अपने कमरे की खिड़की से बैठा सामने लगे ऊँचे ऊँचे देवदार के पेड़ों को हवा के साथ बार बार झुकता और हवा कम हो जाने पर सीधा ख़ड़े होते देख रोमांचित हो रहा था. वह देख रहा था कि तेज अंधड़ न जाने कितने वृक्षों को जड़ से उखाड़ फै
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बेटियों की माँ---

बेटियों की माँ सुनार के सामने बैठी हूं । भारी मन से गहनों की पोटली पर्स मे से निकाल कर कुछ देर हाथ में पकड़े रखती हूं । मन में बहुत कुछ उमड़ घमुड़ कर बाहर आने को आतुर है । कितन प्यार था इन जेवरों से । जब कभी किसी शादी व्याह पर पहनती तो देखने वाले देखते
 
Nirmla Kapila
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kahani

क्यों दर्द होता है एक बार पूछा था तुम ने ------- रुद्र तुम्हारी आँखों मे दर्द क्यों रहता है------ क्यो  तुम्हारी आँखें बुझी बुझी सी  रहती हैं------ तुम्हारी आवाज़ जैसे कहीं गहरे कूयें से आ रही हो ------ एक बार मे इतने सवाल ------ मै हमेशा की
 
Nirmla Kapila
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रोशनी

रोशनीयह एक बेहद ठण्डी सुबह थी। रात भर बरसात की धीमी तेज बौछार चलती रही। रह रहकर हवा के तेज थपेड़े खिड़की के शीशों से टकरा टकराकर उन्हे झंकृत करते रहे। सर्दी में हुए इस मावठ और शीतलहर की ठण्डी हवा ने पूरे वातावरण में ठिठुरन भर दी। आकाश अभी साफतौर से खुल
 
Vimla Bhandari
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Veer Bahuti

दोहरे माप दंड ---कहानी [गताँक से आगे पिछली बार आपने पढा  कि रिचा और रिया दोनो स्कूल मे इकठी पढती थीं । दोनो सहेलियाँ थी। रिया शहर मे  और रिचा साथ लगते गाँव मे रहती थी। जिस दिन स्कूल मे छुटियाँ हुई उस दिन  जब रिचा  स्कूल से घर नहीं
 
Nirmla Kapila
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दोहरे माप्दंड कहानी गताँक से आगे

दोहरे माप दंड ---कहानी [गताँक से आगे पिछली बार आपने पढा  कि रिचा और रिया दोनो स्कूल मे इकठी पढती थीं । दोनो सहेलियाँ थी। रिया शहर मे  और रिचा साथ लगते गाँव मे रहती थी। जिस दिन स्कूल मे छुटियाँ हुई उस दिन  जब रिचा  स्कूल से घर नहीं
 
Nirmla Kapila
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Veer Bahuti

दोहरे माप दँड पिछली बार आपने पढा  कि रिचा और रिया दोनो स्कूल मे इकठी पढती थीं । दोनो सहेलियाँ थी। रिया शहर मे  और रिचा साथ लगते गाँव मे रहती थी। जिस दिन स्कूल मे छुटियाँ हुई उस दिन  जब रिचा  स्कूल से घर नहीं पहुँची तो उसके घर वालो
 
Nirmla Kapila
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दोहरे मापदंड--- कहानी--गताँक से आगे

दोहरे माप दँड---- पिछली बार आपने पढा  कि रिचा और रिया दोनो स्कूल मे इकठी पढती थीं । दोनो सहेलियाँ थी। रिया शहर मे  और रिचा साथ लगते गाँव मे रहती थी। जिस दिन स्कूल मे छुटियाँ हुई उस दिन  जब रिचा  स्कूल से घर नहीं पहुँची तो उसके घर
 
Nirmla Kapila
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दोहरे मापदंड--- कहानी

दोहरे मापदंड --कहानी *देख कैसी बेशर्म है? टुकर टुकर जवाब दिये जा रही है।भगवान का शुक्र नहीं करती कि किसी शरीफ आदमी ने इसे ब्याह लिया है। छ: महीने मे ही इसके पर निकल आये हैं। सास को जवाब देने लगी है।* दादी न जाने कब से बुडबुडाये जा रही थी। *ठीक है दाद
 
Nirmla Kapila
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हादसे की शिकार जाने बचाने की मुहिम

सड़क पर आये दिन जाने कितने ही हादसे होते रहते हैं जिन्हें देखते हुए आगे बढ़ जाना समाज की आदत हैं लेकिन शरीफ भाई इस रीति के खिलाफहैं. कहीं भी दुर्घटना होती है तो वो और उनकी क्रेन निकल पड़ते हैं लोगों की ज़िन्दगी बचाने के लिए.शरीफ भाई बदायूं में पुराना बस
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meri nazar se dekho---gataanak se aage

मेरी नज़र से देखो---गताँक से आगे----कहानी अनु-------- और वो अचानक अनुजी से अनु पर आ गया था------ मैं फिर असहज हो गयी----- मैं तुम्हरे दुख को समझ सकता हूँ----तुम्हारी भावनाओं की कद्र करता हूँ---महसूस कर सकता हूंम------मैं जानता हूँ कि मुझे देख कर तुम्ह
 
Nirmla Kapila
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meri nazar se dekho------gataaMMk se aage

मेरी नज़र से देखो------- कहानी------ गताँक से आगे मैं सुबह उठते ही पहले अखबार देखती थी----- एक दिन अखबार पढते 2 एक खबर पर नज़र अटक गयी------- तो आँखों के आगे अँधेरा छा गया सुमित सुमित कारगिल मे शहीद हो गये थे------- मेरी दुनिया लुट गयी थी माँ बाप के घर
 
Nirmla Kapila
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meri nazar se dekho

तुम ज़िन्दा हो------- कहानी जाने क्यों इस सुरमई शाम का अब भी मुझे इन्तज़ार रहता है--- जब सूर्य देवता दूसरी दुनिया को रोशन करने चल पडते हैं तो इस दुनिया को अलविदा कहती किरणों की विरह से आत्मसात होना एक सकून देता है-------- देखती रहती हूँ तब तक --- जब तक
 
Nirmla Kapila
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cingaree gatank se aage

चिंगारी---------- गताँक से आगे मैं समझ नहीं पा रही थी कि रजेश मेरी मुश्किलें क्यों नही समझते-------मै भी इन की तरह नैकरी कर रही हूँ------ और उससे भी अधिक घर का सारा काम---सब की देख भाल ----खुद तो आ कर टी वी के सामने बैठ कर हुक्म चलाने लगते हैं-------
 
Nirmla Kapila
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cchingaari--kahaani gataaMMk se aage

चिँगारी----गताँक से आगे मेरे अण्दर की चिँगारी फिर दहकी------- और मै घर पर ही बी ए की तैयारी करने लगी तीन साल मे फर्स्ट क्लास मे बी ए पास कर ली----- बडा भाई दो वर्ष कालेज मे लगा कर घर बैठ गया-------छोटा बी काम मे पाँच साल लगा कर पास हुआ---- और प्राईवे
 
Nirmla Kapila
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हिंदी चेतना---------कनाडा से प्रकाशित साहित्यिक त्रैमासिकी

पत्रिका -हिंदी चेतना, अंक-जनवरी-मार्च.09, स्वरूप-त्रैमासिक, प्रमुख संपादक-श्याम त्रिपाठी’, संपादक-डाॅ. सुधा ओम ढीगरा, डाॅ. निर्मला आदेश, पृष्ठ-62, संपर्क- 6 Larksmere Court, Markham, Ontario L3R 3R1 email hindichetna@yahoo.ca पत्रिका के समीक्षित अंक
 
अखिलेश शुक्ल
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